1st March 2025 Kredoz IAS Daily Interactive News (DIN) For All Competitive Exam
- इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल: अवसर और पर्यावरणीय चिंताएँ
- RBI द्वारा NBFC एवं MFI ऋण पर जोखिम भार में कमी: क्या बदलेगा?
- आधार सुशासन पोर्टल: डिजिटल गवर्नेंस में एक नया कदम
- नासा का लूनर ट्रेलब्लेज़र मिशन: चंद्रमा पर जल की खोज में नई उपलब्धि
- वक्फ (संशोधन) विधेयक, 2024: एक व्यापक दृष्टि
- मध्य प्रदेश में घड़ियाल संरक्षण की पहल
- तमिलनाडु ने त्रि-भाषा नीति का विरोध किया
- भारत की समुद्री अवसंरचना के आधुनिकीकरण की पहल
- ओलिव रिडले कछुए: संरक्षण और चुनौतियाँ
- हेग सर्विस कन्वेंशन: अंतरराष्ट्रीय कानूनी दस्तावेजों की प्रदायगी संधि 🌍⚖️
- अमेज़न की क्वांटम कंप्यूटिंग चिप – ‘ओसेलॉट’
1. इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल: अवसर और पर्यावरणीय चिंताएँ
🚨 चर्चा में क्यों?
आंध्र प्रदेश में इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (EBP) कार्यक्रम का विरोध किया जा रहा है। पर्यावरणविद् और किसान इथेनॉल कारखानों से होने वाले प्रदूषण और अत्यधिक जल खपत को लेकर चिंतित हैं।
💡 इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (EBP) कार्यक्रम क्या है?
✅ शुरुआत: 2001 में पायलट परियोजना, 2003 में 5% इथेनॉल मिश्रण के साथ लॉन्च।
✅ लक्ष्य: 2025-26 तक पेट्रोल में 20% इथेनॉल मिश्रण।
✅ उद्देश्य:
- कार्बन उत्सर्जन और ईंधन आयात में कमी।
- किसानों की आय बढ़ाना।
- ऊर्जा विविधीकरण और भारत की नेट-ज़ीरो 2070 प्रतिबद्धता को समर्थन।
✅ उपलब्धियाँ:
- 1,600 करोड़ लीटर की इथेनॉल उत्पादन क्षमता।
- ₹1,06,072 करोड़ विदेशी मुद्रा की बचत।
- 544 लाख मीट्रिक टन CO2 उत्सर्जन में कमी।
🌍 पर्यावरणीय चिंताएँ
💧 अत्यधिक जल उपयोग:
- 1 लीटर इथेनॉल बनाने में 8-12 लीटर पानी लगता है।
- गन्ने और अनाज से बने इथेनॉल के कारण जल संसाधनों पर दबाव बढ़ता है।
🛑 प्रदूषण और जैव विविधता को खतरा:
- इथेनॉल डिस्टिलरीज़ “लाल श्रेणी” (अत्यधिक प्रदूषणकारी) उद्योगों में आती हैं।
- विनेसे नामक खतरनाक अपशिष्ट जल जलाशयों को दूषित कर सकता है।
- कृष्णा जैसी नदियों के पास स्थित कारखानों से जल संकट और खेती पर प्रभाव।
🛑 वायु प्रदूषण:
- इथेनॉल उत्पादन में एसीटैल्डिहाइड, फॉर्मेल्डिहाइड और एक्रोलीन जैसे हानिकारक रसायन निकलते हैं।
- इससे श्वसन बीमारियों और कैंसर का खतरा बढ़ता है।
⚠️ अनुचित स्वीकृतियाँ:
- कई संयंत्रों को बिना उचित पर्यावरण मूल्यांकन के मंजूरी मिल रही है।
- ये कारखाने अक्सर मानव बस्तियों के पास स्थित होते हैं।
🚀 आगे की राह
🌱 3G इथेनॉल (शैवाल आधारित) को बढ़ावा देना – अपशिष्ट जल और समुद्री शैवाल से उत्पादन कर खाद्य और जल संसाधनों पर दबाव कम करना।
♻️ पर्यावरणीय विनियमन –
🔹 अपशिष्ट उपचार संयंत्र लगाना अनिवार्य हो।
🔹 भूजल की जगह पुनर्नवीनीकृत जल का उपयोग किया जाए।
🔹 सार्वजनिक सुनवाई फिर से शुरू हो।
⚡ हरित तकनीकों को अपनाना –
🔹 WAYU (वायु शोधन इकाई) जैसी टेक्नोलॉजी को सब्सिडी देना।
🔹 निम्न उत्सर्जन वाले इथेनॉल उत्पादन पर अनुसंधान को बढ़ावा देना।
🔍 निष्कर्ष
इथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम ऊर्जा सुरक्षा और कार्बन उत्सर्जन में कटौती के लिए फायदेमंद हो सकता है, लेकिन इसके लिए सतत और पर्यावरण-संवेदनशील नीति अपनाना जरूरी है। संतुलन बनाकर हम पर्यावरण को सुरक्षित रखते हुए हरित ऊर्जा की ओर बढ़ सकते हैं। 🌿⚡
2. RBI द्वारा NBFC एवं MFI ऋण पर जोखिम भार में कमी: क्या बदलेगा?
📢 चर्चा में क्यों?
भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने NBFC और MFI को दिए जाने वाले बैंक ऋणों का जोखिम भार घटा दिया है। इसका मकसद ऋण प्रवाह को बढ़ावा देना और खुदरा क्षेत्र में कर्ज़ की उपलब्धता को आसान बनाना है।
💰 जोखिम भार (Risk Weight) क्या होता है?
🔹 परिभाषा:
जोखिम भार वह प्रतिशत कारक होता है, जिसे बैंकों की परिसंपत्तियों (जैसे ऋण) पर लागू किया जाता है। इससे यह तय होता है कि संभावित घाटे को कवर करने के लिए बैंक को कितनी पूंजी रखनी होगी।
🔹 कैसे काम करता है?
✅ उच्च जोखिम भार → अधिक पूंजी की ज़रूरत → महंगा कर्ज़
✅ कम जोखिम भार → कम पूंजी की ज़रूरत → सस्ता और अधिक कर्ज़
🔹 किस पर निर्भर करता है?
✔️ उधारकर्ता की क्रेडिट रेटिंग
✔️ ऋण की प्रकृति
✔️ RBI और अन्य नियामक संस्थाओं के दिशानिर्देश
📉 कम जोखिम भार से क्या असर पड़ेगा?
✅ NBFC को बैंक ऋण सस्ता और आसान मिलेगा → अधिक कर्ज़ लेने की सुविधा
✅ खुदरा क्षेत्र, MSME और हाउसिंग सेक्टर को फायदा → लोन की उपलब्धता बढ़ेगी
✅ बैंकिंग लिक्विडिटी में सुधार → NBFC को कर्ज़ देने की क्षमता बढ़ेगी
✅ वित्तीय स्थिरता में सुधार → रोज़गार और आय में बढ़ोतरी
🏦 पूंजी पर्याप्तता अनुपात (CAR) क्या है?
🔹 परिभाषा:
CAR वह अनुपात है, जो बैंक की उपलब्ध पूंजी को उसके जोखिम-भारित ऋणों के अनुपात में दर्शाता है।
🔹 इसके घटक:
1️⃣ टियर-1 पूंजी:
- बैंक की मुख्य पूंजी (इक्विटी, शेयर पूंजी, रिटेंड अर्निंग)
- घाटे को सहने और संचालन जारी रखने में मदद करता है
2️⃣ टियर-2 पूंजी:
- द्वितीयक पूंजी (अनऑडिटेड रिज़र्व, अधीनस्थ ऋण)
- बैंक के विफल होने पर उपयोग होता है
🔹 विनियामक मानदंड:
✔️ बेसल III मानक → न्यूनतम 8% CAR अनिवार्य
✔️ RBI नियम → भारतीय बैंकों के लिए 9% CAR आवश्यक
🔹 महत्व:
📌 उच्च CAR → बैंक अधिक स्थिर और संकट प्रबंधन में सक्षम
📌 कम CAR → बैंक के लिए आर्थिक संकट झेलना मुश्किल
🔍 निष्कर्ष
🔸 RBI का यह कदम NBFC और MFI को अधिक कर्ज़ लेने में मदद करेगा, जिससे अर्थव्यवस्था में नकदी प्रवाह बढ़ेगा।
🔸 हाउसिंग, MSME और खुदरा क्षेत्र को इससे सस्ते लोन मिल सकते हैं।
🔸 बैंकिंग प्रणाली अधिक लचीली और ऋण देने के लिए सक्षम होगी।
🔸 पर्याप्त पूंजी भंडार बनाए रखने की चुनौती बनी रहेगी ताकि बैंक वित्तीय जोखिमों से बच सकें।
📢 RBI का यह फैसला भारत के लोन सिस्टम को सरल और अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है! 🚀
3. आधार सुशासन पोर्टल: डिजिटल गवर्नेंस में एक नया कदम
📢 चर्चा में क्यों?
इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने आधार गुड गवर्नेंस पोर्टल लॉन्च किया है, जिसका उद्देश्य डिजिटल शासन को मजबूत बनाना और नागरिकों के लिए सार्वजनिक सेवाओं की पहुंच को आसान बनाना है।
✅ मुख्य उद्देश्य:
🔹 आधार प्रमाणीकरण प्रक्रिया को सरल और पारदर्शी बनाना
🔹 सरकारी और निजी सेवाओं तक नागरिकों की निर्बाध पहुंच सुनिश्चित करना
🔹 डिजिटल आईडी के रूप में आधार को और अधिक प्रभावी बनाना
🚀 आधार गुड गवर्नेंस पोर्टल का शुभारंभ
लॉन्च: MeitY सचिव श्री एस. कृष्णन द्वारा किया गया
🔹 उपस्थिति में:
✔️ श्री भुवनेश कुमार (CEO, UIDAI)
✔️ श्री इंदर पाल सिंह सेठी (महानिदेशक, NIC)
✔️ अन्य वरिष्ठ अधिकारी (MeitY, UIDAI, NIC)
📌 पोर्टल का लिंक: swik.meity.gov.in
🔹 कानूनी आधार:
यह पोर्टल आधार प्रमाणीकरण (गुड गवर्नेंस, सामाजिक कल्याण, नवाचार, ज्ञान) संशोधन नियम, 2025 के तहत लॉन्च किया गया है, जिससे पारदर्शिता और दक्षता बढ़ाने में मदद मिलेगी।
📊 डिजिटल शासन में आधार की भूमिका
➡️ पिछले 10 वर्षों में आधार भारत में सबसे विश्वसनीय डिजिटल आईडी के रूप में उभरा है।
➡️ इसे 100+ अरब बार प्रमाणीकरण के लिए उपयोग किया जा चुका है।
➡️ नया संशोधन सेवाओं की निर्बाध पहुंच को और मजबूत करेगा।
🔑 किन सेवाओं में होगा आधार प्रमाणीकरण का उपयोग?
🔹 सरकारी और निजी संस्थानों को आधार प्रमाणीकरण की अनुमति
🔹 लाभार्थी:
✔️ पर्यटन और आतिथ्य – होटल में शीघ्र और सुरक्षित चेक-इन
✔️ स्वास्थ्य सेवा – मरीजों का आसान प्रमाणीकरण और मेडिकल रिकॉर्ड प्रबंधन
✔️ क्रेडिट रेटिंग ब्यूरो – वित्तीय रिकॉर्ड की सटीकता बढ़ाने में मदद
✔️ ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म – ग्राहक पहचान सत्यापन
✔️ शैक्षणिक संस्थान – छात्र नामांकन और परीक्षा पंजीकरण
✔️ एग्रीगेटर सेवाएं – तेजी से ग्राहक ऑनबोर्डिंग
📌 अन्य लाभ:
✔️ ई-केवाईसी प्रक्रिया में सुधार
✔️ सुरक्षित डिजिटल लेनदेन
✔️ कर्मचारियों की उपस्थिति प्रबंधन में उपयोग
🖥️ आधार गुड गवर्नेंस पोर्टल की विशेषताएं
✅ स्टेप-बाय-स्टेप प्रमाणीकरण गाइड
✅ यूजर-फ्रेंडली इंटरफेस → आवेदन जमा करना और अनुमोदन ट्रैक करना आसान
✅ सूचना भंडार (रिसोर्स रिपॉजिटरी) → दिशानिर्देश, FAQs, अनुपालन सहायता
✅ फेस ऑथेंटिकेशन एकीकरण → कहीं भी, कभी भी प्रमाणीकरण संभव
📢 नीति निर्माण और जनभागीदारी
🔹 अप्रैल-मई 2023 में सार्वजनिक परामर्श के लिए संशोधन प्रस्ताव रखे गए
🔹 नागरिकों की सुझाव प्रक्रिया में भागीदारी सुनिश्चित की गई
🔹 नीति निर्माण को अधिक समावेशी और नागरिक-केंद्रित बनाया गया
🔍 निष्कर्ष
✅ यह पोर्टल आधार को एक शक्तिशाली डिजिटल गवर्नेंस टूल बनाएगा।
✅ सार्वजनिक सेवाओं की दक्षता और पारदर्शिता में सुधार होगा।
✅ नागरिकों को डिजिटल सेवाओं तक निर्बाध पहुंच मिलेगी।
📢 आधार अब सिर्फ पहचान नहीं, बल्कि डिजिटल सशक्तिकरण का आधार बन गया है! 🚀
4. नासा का लूनर ट्रेलब्लेज़र मिशन: चंद्रमा पर जल की खोज में नई उपलब्धि
🚀 मिशन क्यों चर्चा में है?
नासा ने स्पेसएक्स फाल्कन 9 रॉकेट की मदद से लूनर ट्रेलब्लेज़र ऑर्बिटर लॉन्च किया।
🔹 यह IM-2 मिशन का सेकेंडरी पेलोड था, जिसका उद्देश्य चंद्रमा पर जल की खोज करना है।
🔭 लूनर ट्रेलब्लेज़र मिशन: उद्देश्य और कार्यप्रणाली
🌍 कक्षा: चंद्रमा की सतह से 100 किमी. ऊपर परिक्रमा करेगा।
📸 हाई-रिज़ॉल्यूशन इमेजिंग: लक्षित क्षेत्रों की तस्वीरें लेकर जल के स्वरूप और वितरण का अध्ययन करेगा।
💧 जल चक्र की समझ: यह मिशन चंद्रमा के जल चक्र को समझने में मदद करेगा।
🛰️ भविष्य के मिशनों को सहायता: यह मिशन मानव अभियानों के लिए जल संसाधनों की उपलब्धता का मार्गदर्शन करेगा।
🛠️ लूनर ट्रेलब्लेज़र के प्रमुख उपकरण
🔹 लूनर थर्मल मैपर (LTM):
✅ चंद्र सतह के तापमान का मानचित्रण और मापन करेगा।
🔹 हाई-रिज़ॉल्यूशन बोलेटाइल्स और मिनरल्स मून मैपर (HVM3):
✅ यह चंद्रमा पर जल के प्रकाशीय संकेतों का पता लगाएगा।
💧 चंद्रमा पर जल की खोज का महत्त्व
🔹 पीने योग्य जल → स्थानीय संसाधनों का उपयोग करके पानी प्राप्त किया जा सकता है।
🔹 ऑक्सीजन उत्पादन → जल के अणुओं से सांस लेने योग्य ऑक्सीजन निकाली जा सकती है।
🔹 रॉकेट ईंधन उत्पादन → हाइड्रोजन को रॉकेट फ्यूल में बदला जा सकता है।
🔹 अंतरिक्ष अन्वेषण को बढ़ावा → चंद्रमा पर जल की उपलब्धता मंगल और अन्य ग्रहों की खोज के लिए सहायक हो सकती है।
🚀 चंद्रमा पर जल की खोज से जुड़े प्रमुख मिशन
📌 2009 – चंद्रयान-1 (इसरो):
✅ मून मिनरलॉजी मैपर (M3) से हाइड्रेटेड खनिजों (OH/H2O) की खोज।
📌 2009 – कैसिनी और डीप इम्पैक्ट (नासा):
✅ चंद्रयान-1 के निष्कर्षों की पुष्टि।
📌 2009-2018 – LRO (नासा):
✅ चंद्र ध्रुवों के स्थायी छायादार क्षेत्रों में जल-बर्फ के प्रमाण।
📌 2018 – चंद्रयान-1 डेटा पुनः विश्लेषण:
✅ चंद्रमा के ध्रुवीय क्षेत्रों में जल-बर्फ की पुष्टि।
📌 2020 – SOFIA (नासा):
✅ क्लेवियस क्रेटर में जल-अणुओं (H2O) की खोज।
📌 2023 – विस्तृत जल मानचित्र:
✅ चंद्र दक्षिणी ध्रुव पर जल वितरण का पहला विस्तृत मानचित्र जारी।
📌 2023 – चंद्रयान-3 (इसरो):
✅ चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के पास संभावित जल-बर्फ क्षेत्र का अध्ययन।
🔍 निष्कर्ष
🚀 लूनर ट्रेलब्लेज़र चंद्रमा पर जल संसाधनों की समझ को नई ऊंचाइयों तक ले जाएगा।
💧 इससे भविष्य में चंद्रमा पर मानव उपस्थिति संभव हो सकती है।
🌕 चंद्रयान-3 और नासा के नए मिशन मिलकर सौरमंडल की खोज को और आगे बढ़ाएंगे! 🌍
5. वक्फ (संशोधन) विधेयक, 2024: एक व्यापक दृष्टि
🔹 हाल ही में क्या हुआ?
✅ केंद्रीय मंत्रिमंडल ने संशोधित वक्फ (संशोधन) विधेयक, 2024 को मंजूरी दी।
✅ संयुक्त संसदीय समिति (JPC) के सुझावों को शामिल किया गया।
✅ वक्फ अधिनियम, 1995 में संशोधन का उद्देश्य वक्फ संपत्तियों का बेहतर प्रबंधन सुनिश्चित करना है।
📜 वक्फ (संशोधन) विधेयक, 2024 के प्रमुख प्रावधान
1️⃣ वक्फ प्रबंधन को समावेशी बनाना
🔹 मुस्लिम महिलाओं और मुस्लिम OBCs को केंद्रीय वक्फ परिषद एवं राज्य वक्फ बोर्ड में शामिल करने का प्रस्ताव।
🔹 इससे वक्फ प्रशासन में पारदर्शिता और भागीदारी बढ़ेगी।
2️⃣ वक्फ ट्रिब्यूनल के आदेशों के खिलाफ अपील
🔹 अब वक्फ ट्रिब्यूनल के फैसले के खिलाफ 90 दिनों के भीतर उच्च न्यायालय में अपील की जा सकेगी।
🔹 पहले वक्फ ट्रिब्यूनल के निर्णयों की न्यायिक समीक्षा का प्रावधान नहीं था।
3️⃣ प्रौद्योगिकी का उपयोग बढ़ाना
🔹 वक्फ संपत्तियों के पंजीकरण में डिजिटल तकनीक का उपयोग बढ़ाने का प्रस्ताव।
🔹 संपत्तियों के सर्वेक्षण को सटीक और पारदर्शी बनाया जाएगा।
4️⃣ विशिष्ट समुदायों के लिए अलग वक्फ बोर्ड
🔹 आधाखानी और बोहरा समुदायों के लिए अलग-अलग वक्फ बोर्ड बनाने का प्रस्ताव।
🏛️ वक्फ प्रबंधन में मुख्य संस्थाएं
📌 केंद्रीय वक्फ परिषद (CWC)
✅ स्थापना: 1964 (वैधानिक संस्था)
✅ कार्य: राज्य वक्फ बोर्डों की निगरानी और परामर्श देना।
✅ यह वक्फ संपत्तियों पर प्रत्यक्ष नियंत्रण नहीं रखता।
📌 राज्य वक्फ बोर्ड
✅ प्रत्येक राज्य में वक्फ संपत्तियों के रखरखाव और प्रशासन की जिम्मेदारी।
✅ संपत्तियों की देखरेख और प्रबंधन का कार्य करता है।
🕌 वक्फ क्या होता है?
🔹 वक्फ इस्लामी कानून के तहत धर्मार्थ उद्देश्यों के लिए समर्पित संपत्ति होती है।
🔹 वक्फ संपत्तियां अल्लाह को समर्पित मानी जाती हैं और इनकी बिक्री या अन्य उपयोग प्रतिबंधित होता है।
🔹 इनका प्रबंधन एक मुतवल्ली (प्रबंधक) द्वारा किया जाता है।
📊 भारत में वक्फ संपत्तियां
📌 वर्तमान में 8.7 लाख वक्फ संपत्तियां मौजूद हैं।
📌 कुल 9.4 लाख एकड़ भूमि वक्फ के अंतर्गत आती है।
📌 भारत में विश्व की सबसे अधिक वक्फ संपत्तियां हैं।
🤔 वक्फ कानून में संशोधन की आवश्यकता क्यों?
🔴 संपत्ति विवाद:
➡️ एक बार वक्फ घोषित संपत्ति हमेशा वक्फ ही रहती है, जिससे विवाद और कानूनी दावे उत्पन्न होते हैं।
🔴 न्यायिक समीक्षा का अभाव:
➡️ पहले वक्फ अधिकरण के निर्णयों को अदालत में चुनौती नहीं दी जा सकती थी।
🔴 अप्रभावी सर्वेक्षण:
➡️ सर्वेक्षण आयुक्त द्वारा वक्फ संपत्तियों का सही ढंग से सर्वेक्षण नहीं किया जाता।
🔍 निष्कर्ष
✅ विधेयक पारित होने से वक्फ संपत्तियों का अधिक प्रभावी और पारदर्शी प्रबंधन संभव होगा।
✅ महिला एवं OBC मुस्लिम समुदायों की भागीदारी से प्रशासन अधिक समावेशी बनेगा।
✅ डिजिटलीकरण से संपत्तियों के दावे और विवादों में कमी आएगी।
✅ न्यायिक अपील की अनुमति से न्यायिक प्रक्रिया को मजबूती मिलेगी।
📌 क्या यह विधेयक वक्फ संपत्तियों से जुड़े विवादों को सुलझाने में सफल होगा? यह देखना महत्वपूर्ण होगा!
6. मध्य प्रदेश में घड़ियाल संरक्षण की पहल
✅ मुख्यमंत्री द्वारा चंबल नदी में 10 घड़ियाल छोड़े गए।
✅ मध्य प्रदेश भारत में घड़ियाल संरक्षण में अग्रणी है, जहां देश के 80% से अधिक घड़ियाल पाए जाते हैं।
📌 घड़ियाल (Gavialis gangeticus) के बारे में
🔹 घड़ियाल भारतीय उपमहाद्वीप की स्थानिक प्रजाति है।
🔹 इनकी लंबी और पतली थूथन होती है।
🔹 “घड़ियाल” नाम ‘घड़ा’ शब्द से लिया गया है, क्योंकि नर घड़ियाल की थूथन के सिरे पर घड़े जैसा उभार होता है।
🌍 संरक्षण स्थिति
📌 IUCN सूची: क्रिटिकली एंडेंजर्ड (गंभीर रूप से संकटग्रस्त)
📌 वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972: अनुसूची-I
📌 CITES: परिशिष्ट-1 में सूचीबद्ध
🏞️ पर्यावास (Habitat)
✅ रेतीले किनारों वाली ताजे पानी की नदियां
✅ ऐतिहासिक रूप से भारत, नेपाल, भूटान, बांग्लादेश और पाकिस्तान में फैले हुए थे
✅ वर्तमान में भारत में चंबल, गिरवा, केन, यमुना, ब्रह्मपुत्र, घाघरा और भागीरथी-हुगली नदियों में पाए जाते हैं।
⚠️ घड़ियालों के लिए प्रमुख खतरे
❌ पर्यावास का विनाश: कृषि, औद्योगीकरण और प्लास्टिक प्रदूषण के कारण
❌ मछली पकड़ने के जाल में फंसकर मरना
❌ अंडों का परभक्षियों द्वारा शिकार
❌ त्वचा, मांस और अंगों के लिए अवैध शिकार
🐊 भारत में अन्य मगरमच्छ प्रजातियां
| प्रजाति | IUCN स्थिति | पर्यावास |
| खारे पानी का मगरमच्छ (Crocodylus porosus) | लिस्ट कंसर्न | सुंदरबन, भितरकनिका (ओडिशा), अंडमान-निकोबार |
| मगर (Crocodylus palustris) | वल्नरेबल | मध्य गंगा, चंबल नदी, गुजरात और अन्य राज्यों में |
🔍 भारत में घड़ियाल संरक्षण प्रयास
📢 1️⃣ कैप्टिव ब्रीडिंग और पुनर्वास
✅ देवरी घड़ियाल प्रजनन केंद्र (मध्य प्रदेश)
✅ कुकरैल पुनर्वास केंद्र (लखनऊ)
✅ बिहार में गंडक नदी एक सफल प्रजनन स्थल
📢 2️⃣ राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य
✅ घड़ियालों का सबसे बड़ा प्राकृतिक आवास
📢 3️⃣ प्रोजेक्ट क्रोकोडाइल (1975)
✅ मगरमच्छ और घड़ियालों के संरक्षण के लिए राष्ट्रीय स्तर पर शुरू किया गया कार्यक्रम।
📝 निष्कर्ष
✅ मध्य प्रदेश सरकार की यह पहल घड़ियाल संरक्षण के लिए एक सकारात्मक कदम है।
✅ सरकारी प्रयासों के बावजूद, इनका पर्यावास तेजी से नष्ट हो रहा है, जिसे रोकना आवश्यक है।
✅ स्थानीय समुदायों को भी संरक्षण प्रयासों में शामिल किया जाना चाहिए।
📌 क्या इस पहल से घड़ियालों की आबादी में सुधार होगा? यह देखने वाली बात होगी!
7. तमिलनाडु ने त्रि-भाषा नीति का विरोध किया
✅ तमिलनाडु ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP), 2020 के तहत त्रि-भाषा नीति लागू करने से इनकार कर दिया।
✅ केंद्र सरकार ने इस फैसले के चलते समग्र शिक्षा योजना के तहत राज्य को मिलने वाली धनराशि रोक दी है।
✅ वर्तमान में तमिलनाडु 2-भाषा नीति (तमिल और अंग्रेजी) का पालन कर रहा है।
📌 त्रि-भाषा नीति क्या है?
🔹 NEP, 2020 के तहत प्रत्येक छात्र को तीन भाषाएं सीखनी होंगी।
🔹 इनमें से दो भाषाएं भारत की होनी चाहिए।
🔹 भाषा चुनने का अधिकार राज्यों और छात्रों को दिया गया है।
📜 त्रि-भाषा नीति का विकास
| नीति / आयोग | वर्ष | सुझाव |
| विश्वविद्यालय शिक्षा आयोग | 1948-49 | डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन की अध्यक्षता में त्रि-भाषा फार्मूला सुझाया। |
| कोठारी आयोग | 1964-66 | औपचारिक रूप से त्रि-भाषा नीति प्रस्तावित की। |
| राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) | 1968 | इसे औपचारिक रूप से लागू किया गया। |
| NEP, 1986 और 1992 | – | त्रि-भाषा नीति बरकरार रखी गई। |
| NEP, 2020 | – | हिंदी का स्पष्ट उल्लेख नहीं किया, केवल “दो भारतीय भाषाओं” का उल्लेख किया गया। |
⚠️ त्रि-भाषा नीति से जुड़ी चिंताएं
❌ हिंदी थोपने की आशंका – दक्षिण भारतीय राज्यों को लगता है कि यह हिंदी अनिवार्यता को बढ़ावा देगा।
❌ शिक्षा का बोझ बढ़ेगा – छात्रों पर अतिरिक्त भाषा सीखने का दबाव बढ़ सकता है।
❌ राज्यों की स्वायत्तता प्रभावित होगी – कई राज्यों की अपनी भाषा नीतियां हैं, जिनसे टकराव हो सकता है।
❌ वित्तीय बाधाएं – राज्यों को नई भाषा के शिक्षकों और संसाधनों के लिए अतिरिक्त बजट की जरूरत होगी।
🚨 तमिलनाडु का विरोध क्यों?
🔹 राज्य 2-भाषा नीति (तमिल और अंग्रेजी) का पालन करता है।
🔹 हिंदी थोपे जाने का विरोध ऐतिहासिक रूप से करता रहा है (Anti-Hindi Agitation, 1965)।
🔹 राज्य सरकार का मानना है कि यह उनकी सांस्कृतिक और भाषाई पहचान के खिलाफ है।
📝 निष्कर्ष
✅ तमिलनाडु और केंद्र सरकार के बीच शिक्षा नीति को लेकर विवाद जारी है।
✅ राज्य भाषा नीति पर अपने अधिकार को बनाए रखना चाहता है।
✅ भविष्य में शिक्षा नीति में अधिक लचीलापन और राज्यों की भागीदारी की जरूरत होगी।
📌 क्या भाषा नीति को राज्यों के अनुसार अधिक लचीला बनाया जाना चाहिए? आपकी क्या राय है?
8.🚢भारत की समुद्री अवसंरचना के आधुनिकीकरण की पहल 🚢
📌 केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय ने भारत के बंदरगाहों को आधुनिक बनाने और लॉजिस्टिक्स को सुगम बनाने के लिए कई पहलें शुरू की हैं।
🔹 प्रमुख पहलें
1️⃣ वन नेशन-वन पोर्ट प्रोसेस (ONOP)
✅ सभी प्रमुख बंदरगाहों में परिचालन को मानकीकृत और सुव्यवस्थित करेगा।
✅ तेजी से माल ढुलाई और पारदर्शिता सुनिश्चित करेगा।
2️⃣ सागर आंकलन (Sagar Ankalan)
✅ लॉजिस्टिक्स पोर्ट परफॉर्मेंस इंडेक्स (LPPI) के तहत प्रमुख और अन्य बंदरगाहों का मूल्यांकन।
✅ मूल्यांकन के प्रमुख संकेतक:
- माल की हैंडलिंग क्षमता
- टर्नअराउंड टाइम (जहाजों के आगमन से प्रस्थान तक का समय)
- बर्थ आइडल टाइम (जहाज के बेकार खड़े रहने का समय)
- कंटेनर ड्वेल टाइम
- शिप बर्थ-डे आउटपुट
✅ राष्ट्रीय लॉजिस्टिक्स नीति, 2022 और पीएम गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के अनुरूप।
3️⃣ भारत ग्लोबल पोर्ट्स कंसोर्टियम
✅ लॉजिस्टिक्स प्रबंधन को मजबूत करेगा और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को बेहतर बनाएगा।
✅ निर्यात को बढ़ावा देने के लिए ‘मेक इन इंडिया’ पहल का समर्थन।
✅ प्रमुख हितधारक:
- इंडिया पोर्ट्स ग्लोबल प्राइवेट लिमिटेड (IPGPL)
- सागरमाला डेवलपमेंट कंपनी लिमिटेड (SDC)
4️⃣ मैली / MAITRI (Master Application for International Trade and Regulatory Interface)
✅ व्यापार प्रक्रियाओं को डिजिटल बनाकर नौकरशाही बाधाओं को कम करेगा।
✅ व्यापार मंजूरी प्रक्रिया को तेज और आसान बनाएगा।
✅ ‘भारत-संयुक्त अरब अमीरात वर्चुअल ट्रेड कॉरिडोर (VTC)’ के कार्यान्वयन में महत्वपूर्ण भूमिका।
✅ भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारा (IMEEC), बिम्सटेक और आसियान देशों तक विस्तार।
✅ AI और ब्लॉकचेन तकनीक का उपयोग कर व्यापार की दक्षता और सुरक्षा में सुधार।
🌍 भारत की वैश्विक लॉजिस्टिक्स स्थिति में सुधार
✅ बंदरगाहों की आधुनिकता से भारत की लॉजिस्टिक्स क्षमता बढ़ेगी।
✅ वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में भारत की भागीदारी को मजबूती मिलेगी।
✅ ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ में सुधार होगा।
📌 भारत की लॉजिस्टिक्स सुधारों पर आपकी क्या राय है? 🚢
9.🐢 ओलिव रिडले कछुए: संरक्षण और चुनौतियाँ 🌊
एक हालिया अध्ययन में पाया गया कि ओलिव रिडले कछुओं की संख्या में वृद्धि हो रही है, लेकिन बढ़ते तापमान के कारण लिंगानुपात असंतुलित हो रहा है।
🔹 ओलिव रिडले कछुओं के बारे में
✅ सबसे छोटी और सबसे प्रचुर मात्रा में पाई जाने वाली समुद्री कछुआ प्रजाति।
✅ अरिबादा परिघटना:
- यह ओलिव रिडले कछुओं की अनोखी विशेषता है।
- इसमें हजारों कछुए एक साथ समुद्र तट पर आते हैं और सामूहिक रूप से अंडे देते हैं।
📍 पर्यावास (Habitat)
✅ मुख्य रूप से प्रशांत, हिंद और अटलांटिक महासागरों के गर्म जल में पाए जाते हैं।
✅ भारत में प्रमुख नेस्टिंग साइट्स:
- गहिरमाथा समुद्री अभयारण्य (ओडिशा) 🌿
- रुशिकुल्या नदी तट (ओडिशा)
- देवी नदी तट (ओडिशा)
📜 संरक्षण स्थिति
✅ IUCN: वर्ल्डवाइड स्थिति “वल्नरेबल” (Vulnerable)
✅ CITES: परिशिष्ट-1 में सूचीबद्ध
✅ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972: अनुसूची-1 में सूचीबद्ध (अत्यधिक संरक्षण प्राप्त)
⚠️ चुनौतियाँ
🚨 तापमान वृद्धि:
- गर्म रेत में अधिक अंडे से मादा कछुए निकलते हैं, जिससे लिंगानुपात असंतुलित हो रहा है।
🚨 मानवजनित खतरे: - मत्स्य उद्योग में जाल में फंसकर कछुओं की मृत्यु।
- तटीय क्षेत्रों में प्रदूषण और प्लास्टिक कचरा।
🚨 पर्यावास का विनाश: - अंधाधुंध तटीय विकास और समुद्र तटों का क्षरण।
🔹 संरक्षण प्रयास
✅ टर्टल एक्सक्लूडर डिवाइस (TEDs):
- भारतीय तटरक्षक बल मछली पकड़ने के जाल में फंसने से बचाने के लिए इस डिवाइस का उपयोग करने को बढ़ावा देता है।
✅ ऑपरेशन ओलिविया: - भारतीय तटरक्षक बल द्वारा ओलिव रिडले कछुओं की सुरक्षा के लिए वार्षिक अभियान।
✅ गहिरमाथा समुद्री अभयारण्य: - ओलिव रिडले कछुओं के लिए भारत का सबसे महत्वपूर्ण सुरक्षित क्षेत्र।
🌍 आगे की राह
✅ समुद्र तट संरक्षण और तापमान नियंत्रण तकनीकों का उपयोग।
✅ स्थानीय समुदायों और मछुआरों को जागरूक करना।
✅ वैज्ञानिक अनुसंधान और कछुओं की निगरानी में वृद्धि।
📌 क्या आपको लगता है कि समुद्री कछुओं के संरक्षण के लिए और सख्त कदम उठाए जाने चाहिए? 🤔
10. हेग सर्विस कन्वेंशन: अंतरराष्ट्रीय कानूनी दस्तावेजों की प्रदायगी संधि 🌍⚖️
🔹 हाल की घटना:
✅ अमेरिकी Securities and Exchange Commission (SEC) ने भारत सरकार से हेग सर्विस कन्वेंशन के तहत सहायता मांगी है।
✅ यह सहायता सेक्युरिटीज़ एंड वायर फ्रॉड केस में सम्मन जारी करने के लिए मांगी गई है।
✅ सेक्युरिटीज़ एंड वायर फ्रॉड का अर्थ:
- निवेश धोखाधड़ी और
- इलेक्ट्रॉनिक संचार के माध्यम से किया गया वित्तीय घोटाला।
📜 हेग सर्विस कन्वेंशन क्या है?
✅ स्थापना: 1965 में प्रभावी हुआ।
✅ प्रकृति:
- एक अंतर्राष्ट्रीय संधि, जो सीमाओं के पार कानूनी दस्तावेजों की सेवा (Summons & Notices) को सुव्यवस्थित करती है।
✅ हस्ताक्षरकर्ता देश: 84 देश।
✅ भारत की भागीदारी: - भारत 2006 में कुछ शर्तों के साथ इस संधि में शामिल हुआ।
- भारत का केंद्रीय प्राधिकरण: विधि और न्याय मंत्रालय।
🔹 प्रमुख प्रावधान
1️⃣ सीमाओं के पार कानूनी दस्तावेज भेजने की प्रक्रिया को सरल और तेज़ बनाना।
2️⃣ राजनयिक या वाणिज्य दूतावास (Consular) चैनलों से प्रत्यक्ष रूप से दस्तावेज भेजने पर रोक, सिवाय इसके कि प्राप्तकर्ता व्यक्ति उसी देश का नागरिक हो।
3️⃣ हर देश को एक “केंद्रीय प्राधिकरण” नामित करना अनिवार्य है, जो अन्य देशों के अनुरोधों को संभालता है।
4️⃣ किसी देश को कानूनी दस्तावेजों की सेवा से इनकार करने का अधिकार, यदि वह उनकी संप्रभुता या सुरक्षा के खिलाफ हो।
⚖️ भारत पर प्रभाव
✅ न्यायिक सहयोग में सुधार:
- सीमाओं के पार कानूनी प्रक्रियाओं को तेजी से पूरा करने में मदद मिलती है।
✅ SEC का अनुरोध: - यदि भारत सहमति देता है, तो संबंधित व्यक्तियों या कंपनियों को अमेरिकी कानूनों के तहत सम्मन जारी किए जा सकते हैं।
✅ भारत की चुनौतियाँ: - कुछ मामलों में भारत राष्ट्रीय संप्रभुता और गोपनीयता का हवाला देकर अनुरोधों को अस्वीकार कर सकता है।
🌍 निष्कर्ष
हेग सर्विस कन्वेंशन अंतरराष्ट्रीय न्यायिक सहयोग को मजबूत करता है, लेकिन इसमें देशों की संप्रभुता और गोपनीयता का भी ध्यान रखना जरूरी है। भारत को SEC के अनुरोध पर विचार करते हुए राष्ट्रीय हितों की रक्षा करनी होगी।
📌 क्या आपको लगता है कि भारत को इस तरह के अनुरोधों को हमेशा स्वीकार करना चाहिए या हर मामले का अलग से विश्लेषण करना चाहिए? 🤔
11.🔹अमेज़न की क्वांटम कंप्यूटिंग चिप – ‘ओसेलॉट’ 🖥️⚛️
🆕 हाल ही में:
✅ अमेज़न ने ‘ओसेलॉट’ नामक क्वांटम कंप्यूटिंग चिप लॉन्च की।
✅ यह एक प्रोटोटाइप चिप है, जो भविष्य में उपयोगी क्वांटम कंप्यूटर विकसित करने की दिशा में एक कदम है।
📌 ओसेलॉट की प्रमुख विशेषताएं
1️⃣ संरचना:
- इसमें दो एकीकृत सिलिकॉन माइक्रोचिप्स हैं।
- इसके उच्च गुणवत्ता वाले ऑसिलेटर्स टैंटलम (Tantalum) नामक अतिचालक पदार्थ की पतली फिल्म से बने हैं।
2️⃣ कैट क्यूबिट्स का उपयोग 🐱💻
- यह ‘श्रॉडिंगर्स कैट’ थॉट एक्सपेरिमेंट पर आधारित है।
- इस प्रयोग में एक बिल्ली सुपरपोज़िशन में होती है – यानी जब तक उसे कोई नहीं देखता, वह जीवित और मृत दोनों स्थितियों में हो सकती है।
- इसी सिद्धांत पर कैट क्यूबिट्स बनाए गए हैं, जो सुपरपोज़िशन का बेहतर उपयोग कर सकते हैं।
3️⃣ मुख्य लाभ:
- क्वांटम एरर करेक्शन (त्रुटि सुधार) की लागत को 90% तक कम कर सकता है।
- तेजी से जटिल गणनाएं कर सकता है, जो पारंपरिक कंप्यूटरों के लिए असंभव होती हैं।
🛠️ क्वांटम कंप्यूटिंग में ओसेलॉट का महत्व
✅ भविष्य में सुपरफास्ट क्वांटम कंप्यूटर बनाने में मदद करेगा।
✅ कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), साइबर सुरक्षा, दवा अनुसंधान और वित्तीय मॉडलिंग में क्रांति ला सकता है।
✅ अमेज़न, गूगल, आईबीएम जैसी कंपनियों के बीच क्वांटम कंप्यूटिंग की दौड़ तेज होगी।
📌 क्या आप मानते हैं कि क्वांटम कंप्यूटिंग आने वाले दशक में आम हो जाएगी? 🤔