केर सांगरी को भौगोलिक संकेत (GI) टैग प्राप्त

  1. केर सांगरी को भौगोलिक संकेत (GI) टैग प्राप्त (Ker Sangri receives Geographical Indication (GI) Tag)

केर सांगरी, राजस्थान का एक लोकप्रिय पारंपरिक व्यंजन है, जिसे हाल ही में भौगोलिक संकेत (GI) टैग मिला है।

केर सांगरी के बारे में (About Ker Sangri)

  • केर सांगरी दो देशी रेगिस्तानी पौधों से तैयार किया जाता है:
    • केर: एक छोटा जंगली बेरी (berry)।
    • सांगरी: खेजड़ी (Prosopis cineraria) पेड़ की फलियां, जो शुष्क क्षेत्रों में प्राकृतिक रूप से उगती हैं।
  • सांस्कृतिक महत्व: समय के साथ केर सांगरी न केवल एक प्रिय व्यंजन बना, बल्कि राजस्थान की सांस्कृतिक पहचान का भी प्रतीक बन गया।
  • खेजड़ी वृक्ष, जिससे सांगरी फलियां मिलती हैं, का गहरा सांस्कृतिक और पारिस्थितिक महत्व है।
  • बिश्नोई समुदाय इस वृक्ष को पवित्र मानता है।

केर सांगरी के लिए GI टैग का महत्व (Importance of GI Tag for Ker Sangri)

  • प्रामाणिकता की रक्षा: नकली या घटिया उत्पादों से इसके मूल्य और गुणवत्ता की रक्षा करेगा।
  • किसानों और कारीगरों का समर्थन:
    • स्थानीय किसानों को उचित मान्यता और आर्थिक लाभ मिलेगा।
    • पारंपरिक ज्ञान और विधियों का संरक्षण होगा।

राजस्थान के अन्य GI-टैग प्राप्त उत्पाद (Other GI-Tagged Products of Rajasthan)

राजस्थान की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और शिल्प कौशल को कई GI टैग उत्पादों के माध्यम से पहचान मिली है, जैसे: सोजत मेहंदी, बीकानेरी भुजिया, कोटा डोरिया, जयपुर की ब्लू पॉटरी, मोलेला क्ले वर्क, राजस्थान की कठपुतली, सांगानेरी और बगरू हैंड ब्लॉक प्रिंटिंग, थेवा आर्ट वर्क, पोकरण पॉटरी, नाथद्वारा पिछवाई पेंटिंग, उदयपुर कोफ्तगारी मेटल क्राफ्ट, बीकानेर काशीदाकारी क्राफ्ट, जोधपुर बंधेज क्राफ्ट, बीकानेर उस्ता कला क्राफ्ट, मकराना मार्बल।

भौगोलिक संकेत (GI) टैग के बारे में (About Geographical Indication (GI) Tag)

  • GI टैग एक नाम या चिह्न है, जिसका उपयोग उन उत्पादों पर किया जाता है जो किसी विशिष्ट भौगोलिक क्षेत्र से उत्पन्न होते हैं और जिनकी विशेष गुणवत्ता, प्रतिष्ठा या विशेषता उस स्थान से जुड़ी होती है।
  • GI टैग यह सुनिश्चित करता है कि केवल अधिकृत उपयोगकर्ता या भौगोलिक क्षेत्र में रहने वाले उत्पादक ही उस नाम का उपयोग कर सकते हैं।
  • GI टैग 10 वर्षों के लिए वैध होता है, जिसे बाद में नवीनीकृत किया जा सकता है।
  • भारत में GI पंजीकरण की देखरेख वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (DPIIT) द्वारा की जाती है।