श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर

  1. श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर (Sri Padmanabhaswamy Temple)

हाल ही में तिरुवनंतपुरम के प्रसिद्ध श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर में 270 वर्षों के बाद ‘महाकुंभाभिषेक’ किया गया।

श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर के बारे में (About Sri Padmanabhaswamy Temple)

  • वास्तुकला (Architecture):
    • यह मंदिर भगवान विष्णु को समर्पित है और केरल के तिरुवनंतपुरम (त्रिवेंद्रम) में स्थित है।
    • मलयालम में तिरुवनंतपुरम का अर्थ है “भगवान अनंत का शहर”, जो इस मंदिर के देवता पद्मनाभस्वामी का संकेत है।
    • मंदिर का पहला उल्लेख 8वीं या 9वीं शताब्दी ईस्वी का मिलता है, लेकिन संभवतः यह इससे भी पुराना है।
    • इसे कई बार पुनर्निर्मित किया गया, जिसमें सबसे प्रमुख पुनर्निर्माण त्रावणकोर के राजा मार्तण्ड वर्मा ने 1750 में कराया, जिन्होंने राज्य को इस देवता को समर्पित किया।
    • मंदिर केरल और द्रविड़ वास्तुकला का सुंदर मिश्रण है।
    • यहाँ भगवान विष्णु की मूर्ति अनंत शयन मुद्रा में है, जिसमें वे अपने सर्प आदिशेषन पर आराम करते दिखाए गए हैं।
    • मंदिर में सात-स्तरीय ऊँचा गोपुरम (प्रवेश द्वार) है, जो नाजुक नक्काशी और डिजाइनों से सुसज्जित है।
    • मंदिर का ध्वज स्तंभ लगभग 80 फीट ऊँचा है और सोने की परत चढ़ी तांबे की चादरों से ढका हुआ है।
  • सांस्कृतिक एवं ऐतिहासिक महत्व (Cultural and Historical Significance):
    • मंदिर में लगभग 30 लाख ताड़पत्र पांडुलिपियाँ हैं, जो 14वीं शताब्दी की हैं।
    • ‘मथिलाकम अभिलेख’ नामक अभिलेख में मंदिर नगरी और त्रावणकोर साम्राज्य का छह शताब्दियों से अधिक समय तक फैला प्रशासनिक और वित्तीय विवरण दर्ज है।
    • 2011 में मंदिर के तहखानों में विशाल मात्रा में रत्न, बहुमूल्य धातुएं और अन्य खजाने खोजे गए, जिसके बाद यह मंदिर विश्व के सबसे धनी मंदिरों में गिना गया।