- बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली (BESS) – राजस्थान (Battery Energy Storage System (BESS) – Rajasthan)
केंद्र सरकार ने राजस्थान को वायबिलिटी गैप फंडिंग (VGF) के तहत 4,000 मेगावाट-ऑवर (MWh) की बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली (BESS) आवंटित की है। इससे राज्य के हरित ऊर्जा क्षेत्र को बड़ा बढ़ावा मिलेगा और ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित होगी।
प्रमुख बिंदुः (Key Points)
- वित्तीय सहायता और लाभ (Financial Assistance and Benefits):
- राजस्थान को 720 करोड़ रुपये की केंद्रीय सहायता मिलेगी, जो 18 लाख रुपये प्रति MWh की दर से दी जाएगी।
- यह फंडिंग BESS प्रोजेक्ट्स की व्यवहार्यता बढ़ाएगी, जिससे निजी निवेशकों को भी प्रोत्साहन मिलेगा।
- हरित ऊर्जा को बढ़ावा (Promotion to Green Energy):
- BESS से सौर और पवन ऊर्जा जैसी अंतरायिक (intermittent) अक्षय ऊर्जा का बेहतर भंडारण हो सकेगा।
- पीक आवर्स (सुबह-शाम की ऊर्जा मांग) में बिजली की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित होगी।
- ग्रिड स्थिरता में सुधार होगा, जिससे बिजली कटौती कम होगी।
- राजस्थान का लक्ष्यः ग्रीन एनर्जी हब बनना (Rajasthan’s Goal: To Become a Green Energy Hub):
- मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने इसे राज्य के हरित ऊर्जा केंद्र बनने की दिशा में एक मील का पत्थर बताया।
- राज्य सरकार ने समयबद्ध तरीके से प्रस्ताव तैयार कर केंद्र को सौंपे थे और नीति आयोग की बैठक में इसे प्राथमिकता दी थी।
- राष्ट्रीय BESS लक्ष्य (National BESS Target):
- भारत सरकार ने 2030-32 तक 30 गीगावाट-ऑवर (GWh) BESS क्षमता विकसित करने का लक्ष्य रखा है।
- 25 GWh – 15 राज्यों को आवंटित
- 5 GWh – NTPC (राष्ट्रीय ताप विद्युत निगम) को दिया गया
- राजस्थान को 4,000 MWh (4 GWh) का आवंटन हुआ, जो राष्ट्रीय लक्ष्य का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।