किसी व्यक्ति का वकील बन जाना ही अदालत में वकालत करने के लिए पर्याप्त नहीं है। इसके लिए जरूरी परीक्षा पास करना भी आवश्यक है।
कर्नाटक हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण मामले में कहा है कि अगर कोई वकील ऑल इंडिया बार एग्जामिनेशन (AIBE) पास किए बिना लंबे समय तक अदालतों में वकालत करता है, तो उसके खिलाफ आपराधिक कार्रवाई भी की जा सकती है।
कोर्ट ने यह भी साफ किया कि ऐसे मामलों में कार्रवाई करने का अधिकार सिर्फ बार काउंसिल के पास नहीं है। अगर किसी व्यक्ति ने कानून तोड़ा है, तो पुलिस और आपराधिक अदालत भी मामले की जांच और सुनवाई कर सकती हैं।
क्या है पूरा मामला?
यह मामला कर्नाटक के एक वकील से जुड़ा है, जिसने वर्ष 2011 में कर्नाटक स्टेट बार काउंसिल में अपना पंजीकरण कराया था।
शिकायत के अनुसार, इस वकील ने AIBE परीक्षा पास किए बिना करीब 10 साल तक अदालतों में वकालत की।
नियमों के मुताबिक, वकील के रूप में पंजीकरण कराने के बाद निर्धारित दो साल के भीतर AIBE परीक्षा पास करना जरूरी था।
लेकिन संबंधित वकील ने लगभग 10 साल तक यह परीक्षा नहीं दी। बाद में उसने वर्ष 2021 में AIBE परीक्षा पास की।
एक अन्य वकील ने इस मामले में शिकायत दर्ज कराई। उनका आरोप था कि परीक्षा पास किए बिना वकालत करना नियमों का उल्लंघन है और इस तरह अदालतों, मुवक्किलों तथा अन्य वकीलों को गुमराह किया गया।
शिकायत पुलिस तक पहुंची, फिर कोर्ट में क्या हुआ?
शिकायतकर्ता ने सबसे पहले पुलिस में शिकायत की, लेकिन पुलिस ने मामले में कोई बड़ी कार्रवाई नहीं की।
इसके बाद शिकायतकर्ता ने मजिस्ट्रेट के पास जाकर निजी शिकायत दर्ज कराई।
मजिस्ट्रेट ने मामले को जांच के लिए पुलिस के पास भेज दिया।
इसके बाद संबंधित वकील ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर अपने खिलाफ चल रही कार्रवाई को रद्द करने की मांग की।
उसका पक्ष था कि इस तरह के मामलों में कार्रवाई करने का अधिकार बार काउंसिल को है, इसलिए आपराधिक शिकायत नहीं चलनी चाहिए।
हाईकोर्ट ने क्या कहा?
हाईकोर्ट ने वकील की दलील स्वीकार नहीं की और कहा कि बार काउंसिल की कार्रवाई और आपराधिक कार्रवाई दोनों अलग-अलग हैं।
इसे आसान भाषा में समझें:
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अगर कोई वकील अपने पेशे से जुड़े नियमों का उल्लंघन करता है, तो बार काउंसिल उसके खिलाफ कार्रवाई कर सकती है।
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अगर उसका काम किसी आपराधिक अपराध के दायरे में आता है, तो पुलिस भी जांच कर सकती है।
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बार काउंसिल में शिकायत किए बिना भी कोई व्यक्ति आपराधिक शिकायत दर्ज करा सकता है।
कोर्ट ने यह भी कहा कि संबंधित वकील ने करीब 10 साल तक परीक्षा पास नहीं की और फिर भी वकालत जारी रखी। यह एक गंभीर विषय है, जिसकी जांच जरूरी है।
AIBE पास नहीं करने पर क्या होता है?
AIBE का पूरा नाम All India Bar Examination है। इसका आयोजन बार काउंसिल ऑफ इंडिया करती है।
इस परीक्षा का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि वकालत करने वाले व्यक्ति के पास जरूरी कानूनी जानकारी और योग्यता हो।
बार काउंसिल के नियमों के अनुसार, निर्धारित समय में AIBE पास नहीं करने पर वकालत करने का अधिकार निलंबित हो जाता है।
इस दौरान संबंधित व्यक्ति:
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अदालत में वकील के रूप में पैरवी नहीं कर सकता।
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मुवक्किल की ओर से वकालतनामा दाखिल नहीं कर सकता।
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वकील के रूप में कानूनी काम नहीं कर सकता।
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खुद को वकालत करने का अधिकार रखने वाला व्यक्ति बताकर काम नहीं कर सकता।
परीक्षा पास करने के बाद भी निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार प्रैक्टिस सर्टिफिकेट प्राप्त करना जरूरी होता है।
कोर्ट ने बार काउंसिल को भी दिए जरूरी निर्देश
हाईकोर्ट ने पाया कि बार काउंसिल को ऐसे मामलों पर नजर रखने के लिए बेहतर व्यवस्था बनानी चाहिए।
इसलिए कर्नाटक स्टेट बार काउंसिल को निम्नलिखित निर्देश दिए गए:
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सभी वकीलों के पंजीकरण की तारीख का डिजिटल रिकॉर्ड रखा जाए।
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यह रिकॉर्ड रखा जाए कि किस वकील के दो साल कब पूरे हो रहे हैं।
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AIBE पास नहीं करने वाले वकीलों की पहचान की जाए।
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जिनका वकालत करने का अधिकार निलंबित है, उनकी अलग सूची बनाई जाए।
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बार काउंसिल ऑफ इंडिया से परीक्षा के परिणामों का मिलान किया जाए।
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नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ उचित कार्रवाई की जाए।
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कार्रवाई से पहले संबंधित वकील को अपनी बात रखने का मौका दिया जाए।
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इन सभी व्यवस्थाओं की रिपोर्ट 45 दिनों के भीतर हाईकोर्ट में पेश की जाए।
आखिर में कोर्ट ने क्या फैसला सुनाया?
कर्नाटक हाईकोर्ट ने संबंधित वकील की याचिका खारिज कर दी। इसका मतलब है कि उसके खिलाफ चल रही कार्रवाई को रोकने से कोर्ट ने इनकार कर दिया।
पुलिस को मामले की जांच जारी रखने और अपनी रिपोर्ट निचली अदालत में पेश करने की अनुमति दी गई।
हालांकि, कोर्ट ने अभी संबंधित वकील को दोषी घोषित नहीं किया है। यह तय होना बाकी है कि उसके खिलाफ लगाए गए आपराधिक आरोप जांच में साबित होते हैं या नहीं।
प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| प्रश्न | उत्तर |
|---|---|
| AIBE का पूरा नाम क्या है? | All India Bar Examination |
| AIBE का आयोजन कौन करता है? | बार काउंसिल ऑफ इंडिया |
| अधिवक्ता अधिनियम किस वर्ष बना? | 1961 |
| अधिवक्ता अधिनियम की धारा 45 किससे संबंधित है? | बिना अधिकार वकालत करने पर दंड |
| अधिवक्ताओं के पेशेवर कदाचार पर कार्रवाई किस धारा में होती है? | धारा 35 |
| इस मामले का संबंध किस हाईकोर्ट से है? | कर्नाटक हाईकोर्ट |
| निर्णय देने वाले न्यायाधीश कौन थे? | न्यायमूर्ति एच.पी. संदीश |
| फैसला कब आया? | 17 अक्टूबर 2026 |
मामले का नाम: M. Prasanna Kumar बनाम State of Karnataka
केस नंबर: Criminal Petition No. 633 of 2020

