भारत के मगरमच्छ संरक्षण कार्यक्रम का स्वर्णिम जयंती वर्ष (1975-2025)

  1. भारत के मगरमच्छ संरक्षण कार्यक्रम का स्वर्णिम जयंती वर्ष (1975-2025) (Golden Jubilee Year of India’s Crocodile Conservation Program (1975-2025))

भारत सरकार के मगरमच्छ संरक्षण कार्यक्रम ने 50 वर्ष पूरे कर लिए हैं। यह विश्व के सबसे सफल प्रजाति पुनर्प्राप्ति कार्यक्रमों में से एक माना जाता है, जिसने तीन देशी मगरमच्छ प्रजातियों – घड़ियाल, खारे पानी के मगरमच्छ और मगर को विलुप्ति के कगार से बचाया है।

मुख्य उपलब्धियाँ: (Key Achievements)

  • जनसंख्या में वृद्धि:
    • घड़ियाल की संख्या 1975 में लगभग 250 थी, अब बढ़कर लगभग 3,000 हो गई है, जो विश्व की 80% आबादी है।
    • खारे पानी के मगरमच्छ की आबादी लगभग 2,500 है, मुख्य रूप से भितरकनिका, सुंदरबन और अंडमान में।
    • मगर मगरमच्छ की संख्या 8,000-10,000 के बीच है, जो ऐतिहासिक आवासों पर पुनः फैल चुका है।
  • ओडिशा की भूमिका:
    • ओडिशा देश का पहला राज्य है जहाँ तीनों प्रजातियों के लिए संरक्षण केंद्र स्थापित किए गए: टिकरपाड़ा (घड़ियाल), डांगमाल (खारे पानी के मगरमच्छ), और रामतीर्थ (मगर)।
    • बंदी प्रजनन और जंगल में पुनर्स्थापना की शुरुआत भी यहीं हुई।
    • भितरकनिका और सतकोसिया को राष्ट्रीय उद्यान घोषित करने में ओडिशा अग्रणी रहा।
  • वैश्विक सहयोग:
    • फ्रैंकफर्ट जूलॉजिकल सोसाइटी से घड़ियालों का आयात।
    • मद्रास क्रोकोडाइल बैंक और देश के 20 से अधिक चिड़ियाघर प्रजनन समर्थन देते हैं।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमिः (Historical Background)

  • 1974 में डॉ. एच. आर. बस्टर्ड के सर्वेक्षण ने मगरमच्छों की विलुप्ति की चेतावनी दी।
  • 1 अप्रैल 1975 को भारत सरकार ने यूएनएफएओ के सहयोग से संरक्षण परियोजना शुरू की।
  • जून 1975 में ओडिशा के टिकरपाड़ा और डांगमाल केंद्रों से पहली बार बच्चे निकले।

भविष्य की योजनाएँ: (Future Plans)                                                   

  • मार्च 2025 में प्रधानमंत्री मोदी ने घड़ियालों के लिए नई संरक्षण योजना की घोषणा की, जिसमें गंगा, ब्रह्मपुत्र और सिंधु नदियों में पुनर्स्थापना शामिल है।
  • 17 जून 2025 को ओडिशा में विश्व मगरमच्छ दिवस बड़े पैमाने पर मनाया जाएगा।