IPI vs TAPI Pipeline: India’s Energy Security and Strategic Implications
IPI vs TAPI Pipeline: India’s Energy Security and Strategic Implications

IPI और TAPI पाइपलाइन: भारत की ऊर्जा सुरक्षा, महत्व और वर्तमान स्थिति

ऊर्जा सुरक्षा और क्षेत्रीय कूटनीति: IPI व TAPI पाइपलाइन परियोजनाओं का पुनर्मूल्यांकन

पश्चिम एशिया में जारी संकट ने वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को प्रभावित किया है, जिससे भारत की आयातित गैस पर निर्भरता स्पष्ट हुई है। इसी परिप्रेक्ष्य में दो महत्वपूर्ण पाइपलाइन परियोजनाएँ — Iran–Pakistan–India Pipeline (IPI) और Turkmenistan–Afghanistan–Pakistan–India Pipeline (TAPI) — फिर चर्चा में हैं। ये परियोजनाएँ भारत की ऊर्जा सुरक्षा, क्षेत्रीय सहयोग और भू-राजनीतिक रणनीति से सीधे जुड़ी हैं।


Iran–Pakistan–India (IPI) Pipeline

पृष्ठभूमि

IPI पाइपलाइन का विचार 1990 के दशक में सामने आया। इसका उद्देश्य ईरान के विशाल गैस भंडार को दक्षिण एशियाई देशों तक पहुँचाना था। इसे “Peace Pipeline” कहा गया क्योंकि यह आर्थिक सहयोग के माध्यम से क्षेत्रीय स्थिरता को बढ़ावा देने वाली परियोजना मानी गई।

स्रोत

यह पाइपलाइन South Pars gas field से गैस लाने के लिए प्रस्तावित थी, जो दुनिया के सबसे बड़े गैस क्षेत्रों में से एक है।

उद्देश्य

  • भारत और पाकिस्तान को सस्ती गैस उपलब्ध कराना
  • LNG आयात पर निर्भरता कम करना
  • क्षेत्रीय आर्थिक सहयोग बढ़ाना
  • ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करना

प्रमुख विशेषताएँ

  • कुल लंबाई: लगभग 2,775 किमी
  • क्षमता: भारत और पाकिस्तान को 60 mmscmd
  • मार्ग: ईरान → पाकिस्तान → भारत
  • लागत: समुद्री LNG से कम
  • रणनीतिक उद्देश्य: आर्थिक परस्पर निर्भरता

चुनौतियाँ

  • सुरक्षा जोखिम (विशेषकर Balochistan क्षेत्र)
  • गैस मूल्य निर्धारण विवाद
  • अमेरिका के प्रतिबंधों का दबाव जैसे Countering America’s Adversaries Through Sanctions Act
  • भारत-पाकिस्तान संबंधों में तनाव

वर्तमान स्थिति

भारत ने 2007 में वार्ता से दूरी बना ली और परियोजना Dormant हो गई।


Turkmenistan–Afghanistan–Pakistan–India (TAPI) Pipeline

पृष्ठभूमि

IPI के ठप होने के बाद भारत ने TAPI परियोजना पर ध्यान केंद्रित किया। इसे अंतरराष्ट्रीय संस्थागत समर्थन मिला और इसे मध्य एशिया से दक्षिण एशिया तक ऊर्जा संपर्क का माध्यम माना गया।

स्रोत

यह पाइपलाइन Galkynysh gas field से गैस लाने के लिए प्रस्तावित है, जो दुनिया के बड़े गैस भंडारों में शामिल है।

उद्देश्य

  • ऊर्जा स्रोतों का विविधीकरण
  • पश्चिम एशिया पर निर्भरता कम करना
  • क्षेत्रीय संपर्क और व्यापार बढ़ाना
  • अफगानिस्तान को ट्रांजिट शुल्क के माध्यम से आर्थिक लाभ देना

प्रमुख विशेषताएँ

  • लंबाई: 1,814 किमी
  • क्षमता: 33 bcm प्रति वर्ष
  • मार्ग: तुर्कमेनिस्तान → अफगानिस्तान → पाकिस्तान → भारत
  • समर्थन: Asian Development Bank
  • रणनीतिक समर्थन: अमेरिका की “New Silk Road” रणनीति

चुनौतियाँ

  • अफगानिस्तान में राजनीतिक अस्थिरता
  • सुरक्षा जोखिम
  • वित्तीय निवेश में देरी
  • भारत-पाकिस्तान संबंध

वर्तमान स्थिति

  • तुर्कमेनिस्तान–अफगानिस्तान खंड (Serhetabat–Herat) 2025 में शुरू
  • पाकिस्तान और भारत तक विस्तार अभी भी लंबित

IPI बनाम TAPI – तुलनात्मक विश्लेषण

पहलू IPI TAPI
स्रोत ईरान तुर्कमेनिस्तान
लंबाई ~2,775 किमी ~1,814 किमी
क्षमता 60 mmscmd 33 bcm/वर्ष
समर्थन क्षेत्रीय अंतरराष्ट्रीय (ADB)
स्थिति ठप आंशिक प्रगति
जोखिम प्रतिबंध, सुरक्षा अफगानिस्तान अस्थिरता

 भारत के लिए रणनीतिक महत्व

⚡ ऊर्जा सुरक्षा

इन परियोजनाओं से भारत को सस्ती और स्थिर गैस आपूर्ति मिल सकती है।

🌍 भू-राजनीतिक लाभ

क्षेत्रीय सहयोग बढ़ेगा और भारत की मध्य एशिया तक पहुँच मजबूत होगी।

💰 आर्थिक लाभ

  • LNG आयात लागत में कमी
  • औद्योगिक विकास
  • बिजली उत्पादन में वृद्धि

🔗 क्षेत्रीय कनेक्टिविटी

इन पाइपलाइन परियोजनाओं से दक्षिण और मध्य एशिया के बीच आर्थिक संबंध मजबूत हो सकते हैं।


आगे की राह

  • ऊर्जा स्रोतों का विविधीकरण
  • LNG + पाइपलाइन + नवीकरणीय ऊर्जा का मिश्रण
  • क्षेत्रीय कूटनीति को मजबूत करना
  • सुरक्षा और वित्तीय ढाँचे में सुधार

निष्कर्ष

IPI और TAPI परियोजनाएँ केवल ऊर्जा परियोजनाएँ नहीं बल्कि भू-राजनीतिक रणनीति के महत्वपूर्ण उपकरण हैं। वर्तमान ऊर्जा संकट ने इनकी प्रासंगिकता को फिर से उजागर किया है। यदि सुरक्षा और राजनीतिक चुनौतियों का समाधान होता है, तो ये परियोजनाएँ भारत की दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।