समस्याग्रस्त बालक एवं बाल अपराधी – पहचान एवं निदानात्मक पक्ष – चैप्टर-वार नोट्स
बाल मनोविज्ञान, शिक्षण कौशल एवं जीवन कौशल • सहायक अध्यापक (प्राथमिक स्तर, कक्षा 1–5) • उ.प्र. शिक्षा सेवा चयन आयोग
समस्यात्मक व्यवहार , कारण , बाल अपराध , किशोर न्याय अधिनियम 2015 , निदान , उपचार , अभ्यास प्रश्न – सब एक जगह।
विषय-सूची
| क्र. | अनुभाग |
|---|---|
| 1 | समस्यात्मक बालक : अर्थ एवं परिभाषाएँ |
| 2 | समस्यात्मक व्यवहार के प्रकार |
| 3 | प्रमुख समस्यात्मक व्यवहार — कारण एवं उपचार |
| 4 | समस्यात्मक व्यवहार के कारण |
| 5 | बाल अपराध : अर्थ, परिभाषाएँ एवं प्रकार |
| 6 | बाल अपराध के कारण एवं सिद्धांत |
| 7 | किशोर न्याय अधिनियम 2015 एवं संबंधित प्रावधान |
| 8 | पहचान एवं निदान की विधियाँ |
| 9 | उपचार एवं रोकथाम के उपाय |
| 10 | शिक्षक की भूमिका |
| 11 | परीक्षा उपयोगी तथ्य एवं अभ्यास प्रश्न |
समस्यात्मक बालक : अर्थ एवं परिभाषाएँ
समस्यात्मक बालक (Problem Child) वह है जिसका
व्यवहार या व्यक्तित्व सामान्य से इतना भिन्न होता है कि वह
स्वयं, परिवार, विद्यालय या समाज के लिए
समस्या बन जाता है और समायोजन
(Adjustment) में कठिनाई अनुभव करता है। ऐसा बच्चा “बुरा” नहीं,
बल्कि “परेशान” होता है — उसका व्यवहार किसी अतृप्त आवश्यकता या
कष्ट का संकेत है।
| विद्वान | परिभाषा |
|---|---|
| वेलेंटाइन | “समस्यात्मक बालक शब्द का प्रयोग साधारणतः उन बालकों के लिए किया जाता है जिनका व्यवहार या व्यक्तित्व किसी बात में गंभीर रूप से असामान्य होता है।” |
| हैडफ़ील्ड | “समस्यात्मक बालक वे हैं जिनका व्यवहार सामान्य बालकों से भिन्न होता है और जो समाज के लिए समस्या उत्पन्न करते हैं।” |
| स्किनर (संदर्भ) | समस्यात्मक व्यवहार कुसमायोजन (Maladjustment) का परिणाम है — बच्चा अपनी आवश्यकताओं और परिवेश के बीच संतुलन नहीं बना पाता। |
है।” — शिक्षक को व्यवहार के पीछे छिपे कारण को खोजना
चाहिए, केवल व्यवहार को दबाना नहीं।
◆ विकमैन का अध्ययन (1928)
| शिक्षकों ने अधिक गंभीर माना | मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने अधिक गंभीर माना |
|---|---|
| बहिर्मुखी / व्यवधानकारी व्यवहार — अनुशासनहीनता, झगड़ा, चोरी, अशिष्टता |
अंतर्मुखी / आत्म-केंद्रित व्यवहार — एकांतप्रियता, शर्मीलापन, उदासी, भय, दिवास्वप्न |
वाले बच्चों की समस्याओं को अनदेखा कर देते हैं, जबकि ये
मानसिक स्वास्थ्य के लिए अधिक गंभीर हो सकती हैं।
समस्यात्मक व्यवहार के प्रकार
| बहिर्मुखी (Externalizing) — दूसरों पर | ➜ | अंतर्मुखी (Internalizing) — स्वयं पर |
| आधार | बहिर्मुखी समस्याएँ | अंतर्मुखी समस्याएँ |
|---|---|---|
| दिशा | व्यवहार बाहर / दूसरों की ओर | व्यवहार भीतर / स्वयं की ओर |
| उदाहरण | आक्रामकता, झगड़ा, चोरी, झूठ, तोड़-फोड़, बदमाशी (Bullying), कक्षा से भागना, अवज्ञा |
भय, चिंता, शर्मीलापन, एकांतप्रियता, उदासी, दिवास्वप्न, हीन भावना |
| पहचान | आसानी से दिखता है | अक्सर अनदेखा रह जाता है |
| प्रभाव | दूसरों के लिए कष्ट | स्वयं के लिए कष्ट |
◆ समस्यात्मक व्यवहार का विस्तृत वर्गीकरण
| वर्ग | व्यवहार |
|---|---|
| आचरण संबंधी | चोरी, झूठ बोलना, धोखा देना, तोड़-फोड़, आग लगाना |
| आक्रामक | मारपीट, झगड़ा, गाली देना, दूसरों को धमकाना (Bullying), क्रूरता |
| विद्यालय संबंधी | विद्यालय से भागना / अनुपस्थिति (Truancy), गृहकार्य न करना, कक्षा में व्यवधान, नकल |
| संवेगात्मक | अत्यधिक भय, चिंता, क्रोध के दौरे (Temper tantrums), ईर्ष्या, उदासी, चिड़चिड़ापन |
| सामाजिक | एकांतप्रियता, अत्यधिक शर्मीलापन, मित्र न बना पाना |
| आदत संबंधी (तंत्रिका-आदतें) | नाखून चबाना, अंगूठा चूसना, बिस्तर गीला करना (Enuresis), बाल नोचना, हकलाना |
| व्यसन संबंधी | धूम्रपान, नशा, मोबाइल / गेमिंग की लत |
| गंभीर | आत्म-क्षति, आत्महत्या के विचार, घर से भागना |
प्रमुख समस्यात्मक व्यवहार — कारण एवं उपचार
| व्यवहार | संभावित कारण | उपचार / शिक्षक क्या करे |
|---|---|---|
| चोरी करना | अभाव / गरीबी; ध्यान आकर्षित करना; प्रेम का अभाव; साथियों का दबाव; वस्तु के स्वामित्व की समझ न होना (छोटे बच्चे); बदला |
कारण जानें; सबके सामने अपमानित न करें; आवश्यकता पूरी करें; ईमानदारी की प्रशंसा; उत्तरदायित्व दें; अकेले में समझाएँ |
| झूठ बोलना | दंड का भय; कल्पना व वास्तविकता में अंतर न समझना (छोटे बच्चे); प्रशंसा पाने की इच्छा; बड़ों का अनुकरण; दूसरों को बचाना |
भय मुक्त वातावरण; सच बोलने पर दंड न देकर प्रशंसा; बड़े स्वयं आदर्श बनें; कहानियों द्वारा मूल्य |
| कक्षा / विद्यालय से भागना (पलायन) | अरुचिकर पाठ्यक्रम; कठोर शिक्षक व दंड; बार-बार असफलता; कुसंगति; घर की समस्याएँ |
रोचक शिक्षण; शिक्षक-छात्र मधुर संबंध; अभिभावक संपर्क; सहगामी क्रियाएँ; उपचारात्मक शिक्षण |
| आक्रामकता / झगड़ालूपन | कुंठा (Frustration); घर में हिंसा देखना; अनुकरण (बंडूरा); हीन भावना; ध्यान आकर्षण; मीडिया में हिंसा |
ऊर्जा को खेल व रचनात्मक कार्यों में लगाना; शांत रहकर समझाना; सकारात्मक पुनर्बलन; क्रोध प्रबंधन कौशल |
| बदमाशी / धमकाना (Bullying) | शक्ति का प्रदर्शन; स्वयं पीड़ित रहना; सहानुभूति की कमी | स्पष्ट विद्यालय नीति; पीड़ित को सुरक्षा; दोनों पक्षों को परामर्श; सहानुभूति विकास |
| अत्यधिक शर्मीलापन / एकांतप्रियता | आत्मविश्वास की कमी; अति-संरक्षण या उपेक्षा; शारीरिक दोष; बार-बार आलोचना |
छोटे-छोटे उत्तरदायित्व; सामूहिक कार्य; प्रशंसा; धीरे-धीरे मंच पर लाना; दबाव न डालना |
| भय एवं चिंता | डराना-धमकाना; परीक्षा का दबाव; पिछला कष्टदायक अनुभव | भय का कारण जानें; सुरक्षा का भाव; क्रमिक असंवेदीकरण; परामर्श |
| क्रोध के दौरे (Temper Tantrums) | इच्छा पूरी न होना; ध्यान आकर्षण; थकान; अनुचित लाड़-प्यार | शांत रहें; दौरे के समय इच्छा पूरी न करें; शांत होने पर बात करें; ध्यान अच्छे व्यवहार पर |
| दिवास्वप्न (Day-dreaming) | अरुचिकर कार्य; अतृप्त इच्छाएँ; असफलता से पलायन | रोचक, सक्रिय शिक्षण; सफलता के अवसर; कल्पना को रचनात्मक लेखन में लगाना |
| नाखून चबाना / अंगूठा चूसना | चिंता, तनाव, असुरक्षा, ऊब | डाँटें नहीं; तनाव का कारण दूर करें; हाथों को गतिविधियों में व्यस्त रखें |
| बिस्तर गीला करना (Enuresis) | संवेगात्मक तनाव, असुरक्षा, नया भाई-बहन, कभी चिकित्सीय कारण | मज़ाक न उड़ाएँ; सहानुभूति; चिकित्सक से परामर्श |
| ईर्ष्या | भाई-बहन या सहपाठी से तुलना; पक्षपात | तुलना न करें; सबको समान प्रेम व अवसर |
कारण खोजें, (2) दंड नहीं, समझ, (3) सबके सामने अपमानित न करें, (4) अच्छे व्यवहार को
पुनर्बलित करें, (5) अभिभावकों को साथ लें।
समस्यात्मक व्यवहार के कारण
| व्यक्तिगत | ➜ | पारिवारिक | ➜ | विद्यालयी | ➜ | सामाजिक | ➜ | मनोवैज्ञानिक |
| कारण-समूह | प्रमुख कारण |
|---|---|
| व्यक्तिगत / शारीरिक | शारीरिक दोष या बीमारी; अंतःस्रावी ग्रंथियों का असंतुलन; बहुत अधिक या बहुत कम बुद्धि; अधिगम अक्षमता; संवेगात्मक अस्थिरता |
| पारिवारिक (सबसे प्रमुख) | टूटा परिवार (तलाक, मृत्यु, अलगाव); माता-पिता में कलह; अति-संरक्षण या उपेक्षा / तिरस्कार; अत्यधिक कठोर या अत्यधिक ढीला अनुशासन; भाई-बहनों में पक्षपात व तुलना; गरीबी; माता-पिता का नशा / अपराध; कामकाजी माता-पिता के पास समय का अभाव; सौतेला व्यवहार |
| विद्यालयी | कठोर, पक्षपाती शिक्षक; शारीरिक दंड व अपमान; अरुचिकर पाठ्यक्रम व नीरस शिक्षण; बार-बार असफलता; परीक्षा का दबाव; व्यक्तिगत भिन्नता की उपेक्षा; सहगामी क्रियाओं का अभाव; भीड़भाड़ वाली कक्षा |
| सामाजिक | कुसंगति / गलत मित्र मंडली; झुग्गी-बस्ती व अपराधप्रवण पड़ोस; मीडिया व इंटरनेट पर हिंसा; बेरोज़गारी; नशे की सुलभता; सामाजिक भेदभाव |
| मनोवैज्ञानिक | मूल आवश्यकताओं का अतृप्त रहना (प्रेम, सुरक्षा, स्वीकृति, सम्मान — मास्लो); हीन भावना (एडलर); कुंठा और संघर्ष; असुरक्षा; ध्यान आकर्षित करने की इच्छा |
कुंठा (Frustration) से आक्रामकता उत्पन्न होती है; जब लक्ष्य
प्राप्ति में बाधा आती है तो बच्चा आक्रामक व्यवहार कर सकता है।
फ्रायड द्वारा बताई गई रक्षा युक्तियों (Defence
mechanisms) के रूप में दिखता है — दमन, प्रक्षेपण (अपना
दोष दूसरों पर), युक्तिकरण (बहाना बनाना),
प्रतिगमन (छोटे बच्चे जैसा व्यवहार), विस्थापन
(गुस्सा किसी और पर), शोधन / उदात्तीकरण (ऊर्जा को अच्छे कार्य में
लगाना)।
बाल अपराध : अर्थ, परिभाषाएँ एवं प्रकार
बाल अपराध (Juvenile Delinquency) वह
समाज-विरोधी या कानून-विरोधी व्यवहार है जो 18 वर्ष से
कम आयु का बालक करता है। कानूनी भाषा में ऐसे बालक को “विधि का
उल्लंघन करने वाला बालक” (Child in Conflict with Law) कहा जाता
है।
| विद्वान | परिभाषा |
|---|---|
| सिरिल बर्ट | “किसी बालक को वास्तविक रूप में तब अपराधी माना जाना चाहिए जब उसकी समाज-विरोधी प्रवृत्तियाँ इतनी गंभीर हो जाएँ कि उसके विरुद्ध शासन को कोई कार्यवाही करनी पड़े या करना आवश्यक हो जाए।” |
| विलियम हीली | “वह बालक जो समाज द्वारा स्वीकृत व्यवहार के मानदंडों का पालन नहीं करता, बाल अपराधी कहलाता है।” |
| गुड (Good) | “कोई भी बालक जो समाज-विरोधी व्यवहार करता है और जिसके लिए कानूनी कार्यवाही की जा सकती है, बाल अपराधी है।” |
| हेडफ़ील्ड | “बाल अपराध में असामाजिक व्यवहार होता है।” |
(1925); बर्ट ने बाल अपराध के 170 से अधिक कारक बताए
और कहा कि यह अनेक कारणों का परिणाम है। हीली व
ब्रोनर ने भी बाल अपराध पर प्रसिद्ध अध्ययन किए।
◆ समस्यात्मक बालक बनाम बाल अपराधी
| आधार | समस्यात्मक बालक | बाल अपराधी |
|---|---|---|
| व्यवहार | असामान्य, कुसमायोजित | समाज-विरोधी व कानून-विरोधी |
| गंभीरता | कम | अधिक |
| कानूनी कार्यवाही | नहीं | हाँ — किशोर न्याय बोर्ड द्वारा |
| उदाहरण | झूठ, शर्मीलापन, कक्षा से भागना | चोरी, मारपीट से गंभीर चोट, तोड़-फोड़, नशा बेचना |
| संबंध | समय पर उपचार न होने पर बाल अपराधी बन सकता है | प्रायः समस्यात्मक व्यवहार से शुरुआत |
| उपचार | परिवार, विद्यालय, परामर्श | सुधार गृह, परिवीक्षा, पुनर्वास |
◆ बाल अपराध के प्रकार
| प्रकार | उदाहरण |
|---|---|
| संपत्ति संबंधी | चोरी, जेब काटना, सेंधमारी, तोड़-फोड़ |
| व्यक्ति संबंधी | मारपीट, गंभीर चोट पहुँचाना, छेड़छाड़ |
| नशा संबंधी | नशीले पदार्थों का सेवन व बिक्री |
| सामाजिक-नैतिक | जुआ, आवारागर्दी, घर से भागना |
| साइबर अपराध | ऑनलाइन धोखाधड़ी, साइबर बदमाशी, हैकिंग |
| स्थिति अपराध (Status offences) | ऐसे कार्य जो केवल नाबालिग होने के कारण वर्जित हैं — विद्यालय से भागना, धूम्रपान |
बाल अपराध के कारण एवं सिद्धांत
| सिद्धांत | प्रवर्तक | मुख्य विचार |
|---|---|---|
| जैविक / जन्मजात अपराधी सिद्धांत | सीज़र लोम्ब्रोसो (“अपराधशास्त्र के जनक”) | अपराधी जन्मजात होते हैं; शारीरिक लक्षणों से पहचान (अब अमान्य) |
| शारीरिक गठन सिद्धांत | शेल्डन | आयताकृति (Mesomorph) शरीर वालों में अपराध प्रवृत्ति अधिक |
| मनोविश्लेषणात्मक सिद्धांत | सिगमंड फ्रायड | इदम् (Id) की प्रबलता और पराहम् (Superego) की दुर्बलता; बाल्यकाल के दमित अनुभव |
| विभेदक साहचर्य सिद्धांत (Differential Association) | एडविन सदरलैंड | अपराध सीखा जाता है — अपराधी साथियों के साथ अंतःक्रिया से |
| अनोमी / तनाव सिद्धांत | रॉबर्ट मर्टन | समाज के लक्ष्य और उन्हें पाने के वैध साधनों में अंतर से अपराध |
| सामाजिक अधिगम सिद्धांत | अल्बर्ट बंडूरा | दूसरों (परिवार, मीडिया) के आक्रामक व्यवहार का अनुकरण |
| लेबलिंग सिद्धांत | हावर्ड बेकर | बच्चे पर “अपराधी” का ठप्पा लगाने से वह वैसा ही बन जाता है |
| बहु-कारक सिद्धांत | सिरिल बर्ट, हीली | बाल अपराध अनेक कारणों का संयुक्त परिणाम |
Delinquency” (1950) — 500 अपराधी और 500 गैर-अपराधी लड़कों की तुलना;
पारिवारिक कारक (अनुशासन, स्नेह, पर्यवेक्षण) सबसे महत्वपूर्ण पाए
गए।
| बाल अपराध के प्रमुख कारण (सारांश) |
|---|
| पारिवारिक — टूटा परिवार, कलह, उपेक्षा, अत्यधिक कठोरता, माता-पिता का अपराधी / नशेड़ी होना, पर्यवेक्षण का अभाव |
| आर्थिक — गरीबी, बाल श्रम, बेरोज़गारी, अभाव |
| सामाजिक — कुसंगति, गिरोह, झुग्गी-बस्ती, नशे की उपलब्धता, मीडिया में हिंसा |
| विद्यालयी — असफलता, विद्यालय छोड़ना, कठोर दंड, अरुचि |
| व्यक्तिगत / मनोवैज्ञानिक — संवेगात्मक अस्थिरता, हीन भावना, कुंठा, बौद्धिक कमी, आवेगशीलता |
किशोर न्याय अधिनियम 2015 एवं संबंधित प्रावधान
किशोर न्याय (बालकों की देखरेख और संरक्षण) अधिनियम, 2015
बाल अपराधियों और ज़रूरतमंद बच्चों के लिए सुधार और पुनर्वास-केंद्रित
व्यवस्था देता है। यह 15 जनवरी 2016 से लागू हुआ और
किशोर न्याय अधिनियम 2000 का स्थान लिया।
-
“बालक” = 18 वर्ष से कम आयु का व्यक्ति।
-
दो श्रेणियाँ: (1) विधि का उल्लंघन करने वाला बालक,
(2) देखरेख और संरक्षण की आवश्यकता वाला बालक। -
16–18 वर्ष के बालक द्वारा जघन्य अपराध
(Heinous offence) — जिसकी न्यूनतम सज़ा 7 वर्ष या
अधिक हो — की स्थिति में किशोर न्याय बोर्ड प्रारंभिक
मूल्यांकन कर सकता है और मामला बाल न्यायालय को भेजकर
वयस्क की तरह सुनवाई हो सकती है। -
बालक को मृत्युदंड या आजीवन कारावास (बिना रिहाई की
संभावना) नहीं दिया जा सकता। -
अधिनियम का मूल सिद्धांत — “दंड नहीं, सुधार और पुनर्वास”;
बच्चे के सर्वोत्तम हित को प्राथमिकता।
◆ प्रमुख संस्थाएँ
| संस्था | संरचना / कार्य | किसके लिए |
|---|---|---|
| किशोर न्याय बोर्ड (JJB) | 1 महानगर / न्यायिक मजिस्ट्रेट + 2 सामाजिक कार्यकर्ता (कम से कम 1 महिला); मामलों की सुनवाई |
विधि का उल्लंघन करने वाले बालक |
| बाल कल्याण समिति (CWC) | 1 अध्यक्ष + 4 सदस्य (कम से कम 1 महिला); देखरेख, संरक्षण, पुनर्वास के निर्णय |
देखरेख व संरक्षण की आवश्यकता वाले बालक |
| अवलोकन गृह (Observation Home) | जाँच के दौरान अस्थायी रूप से रखना | विधि का उल्लंघन करने वाले बालक |
| विशेष गृह (Special Home) | दोषी पाए जाने पर सुधार हेतु (अधिकतम 3 वर्ष) | विधि का उल्लंघन करने वाले बालक |
| सुरक्षित स्थान (Place of Safety) | 16–18 वर्ष के जघन्य अपराध वाले / 18 वर्ष से अधिक आयु होने पर | गंभीर मामले |
| बाल गृह (Children’s Home) | देखरेख, शिक्षा, पुनर्वास | अनाथ, परित्यक्त, ज़रूरतमंद बालक |
| खुला आश्रय (Open Shelter) | अल्पकालिक आश्रय | सड़क पर रहने वाले, भागे हुए बालक |
◆ पुनर्वास एवं सामाजिक पुनः एकीकरण के उपाय
| उपाय | अर्थ |
|---|---|
| परिवीक्षा (Probation) | बालक को परिवीक्षा अधिकारी की निगरानी में घर पर रहने देना |
| सामुदायिक सेवा | समाज के हित में कार्य करवाना |
| परामर्श एवं चेतावनी | समझाकर और अभिभावकों को सलाह देकर छोड़ना |
| पालन-पोषण देखरेख (Foster Care) | बालक को अस्थायी रूप से किसी अन्य परिवार में रखना |
| प्रायोजन (Sponsorship) | शिक्षा व स्वास्थ्य हेतु आर्थिक सहायता |
| दत्तक ग्रहण (Adoption) | CARA (केंद्रीय दत्तक ग्रहण संसाधन प्राधिकरण) के माध्यम से |
| पश्चात देखरेख (After Care) | 18 वर्ष के बाद भी सहायता (21 वर्ष तक) |
◆ अन्य संबंधित कानून एवं संस्थाएँ
| कानून / संस्था | वर्ष | मुख्य बिंदु |
|---|---|---|
| किशोर न्याय अधिनियम | 1986 | पहला राष्ट्रीय कानून — लड़के 16, लड़कियाँ 18 वर्ष से कम |
| किशोर न्याय अधिनियम | 2000 | दोनों के लिए आयु 18 वर्ष से कम |
| किशोर न्याय अधिनियम | 2015 | 16–18 वर्ष के जघन्य अपराध हेतु विशेष प्रावधान (2021 में संशोधन — ज़िलाधिकारी की भूमिका बढ़ी) |
| बाल अधिकार संरक्षण आयोग अधिनियम | 2005 | NCPCR (राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग) का गठन — 2007 में |
| RTE अधिनियम — धारा 17 | 2009 | बच्चों को शारीरिक दंड और मानसिक उत्पीड़न का निषेध |
| POCSO अधिनियम | 2012 | बच्चों का यौन अपराधों से संरक्षण |
| बाल श्रम (निषेध एवं विनियमन) संशोधन अधिनियम | 2016 | 14 वर्ष से कम आयु के बच्चों से किसी भी व्यवसाय में काम पर रोक |
| चाइल्डलाइन | — | संकट में बच्चों के लिए निःशुल्क हेल्पलाइन 1098 |
= 1 + 4 (देखरेख के मामले); जघन्य = 7 वर्ष+;
हेल्पलाइन = 1098; शारीरिक दंड निषेध = RTE धारा
17।
पहचान एवं निदान की विधियाँ
निदान (Diagnosis) का अर्थ है समस्यात्मक व्यवहार के
वास्तविक कारणों का वैज्ञानिक पता लगाना। बिना सही निदान के
उपचार सफल नहीं होता।
| समस्या की पहचान | ➜ | सूचनाओं का संकलन | ➜ | कारणों का विश्लेषण |
| निदान (निष्कर्ष) | ➜ | उपचार योजना | ➜ | उपचार | ➜ | अनुवर्ती कार्य (Follow-up) |
| विधि | उपयोग |
|---|---|
| निरीक्षण (Observation) | कक्षा, खेल के मैदान, समूह में स्वाभाविक व्यवहार देखना — सबसे पहला कदम |
| व्यक्ति अध्ययन (Case Study) | बालक के जीवन-इतिहास, परिवार, स्वास्थ्य, विद्यालय, सामाजिक संबंधों का गहन अध्ययन — समस्यात्मक बालक के निदान की सबसे उपयुक्त विधि |
| साक्षात्कार (Interview) | बालक, अभिभावक, शिक्षक, मित्रों से बातचीत |
| गृह भ्रमण (Home Visit) | पारिवारिक वातावरण का प्रत्यक्ष अध्ययन |
| संचयी अभिलेख | वर्षों का व्यवहार व प्रगति |
| उपाख्यान अभिलेख | किसी विशेष घटना का तथ्यात्मक विवरण |
| समाजमिति (मोरेनो) | समूह में बालक की स्थिति — एकाकी (Isolate), अस्वीकृत, लोकप्रिय |
| प्रक्षेपी परीक्षण | रोर्शा, TAT, CAT, वाक्य पूर्ति — दमित भावनाओं व संघर्षों का पता |
| व्यक्तित्व परीक्षण एवं प्रश्नावली | समायोजन सूची, व्यक्तित्व प्रश्नावली |
| बुद्धि एवं उपलब्धि परीक्षण | बौद्धिक स्तर व शैक्षिक कठिनाई |
| चिकित्सीय परीक्षण | शारीरिक दोष, ग्रंथियों का असंतुलन |
| आत्मकथा / डायरी / चित्र | बालक की भावनाएँ व चिंताएँ |
लिए व्यक्ति अध्ययन (Case Study) विधि सर्वाधिक उपयुक्त मानी
जाती है, क्योंकि इसमें सभी स्रोतों से सम्पूर्ण जानकारी एकत्र होती
है।
उपचार एवं रोकथाम के उपाय
◆ (क) मनोवैज्ञानिक उपचार
| विधि | प्रवर्तक / विवरण |
|---|---|
| परामर्श (Counselling) | व्यक्तिगत व समूह परामर्श; निर्देशात्मक (विलियमसन) व अनिर्देशात्मक / सेवार्थी-केंद्रित (कार्ल रोजर्स) |
| खेल चिकित्सा (Play Therapy) | खेल के माध्यम से बच्चा अपनी भावनाएँ व्यक्त करता है — एना फ्रायड, मेलानी क्लाइन, वर्जीनिया एक्सलाइन |
| मनोनाटक (Psychodrama) | जे. एल. मोरेनो — भूमिका-अभिनय द्वारा समस्याओं की अभिव्यक्ति |
| व्यवहार संशोधन (Behaviour Modification) | स्किनर के सिद्धांत — सकारात्मक पुनर्बलन, टोकन व्यवस्था, टाइम-आउट, अनुबंध |
| कला चिकित्सा / संगीत चिकित्सा | चित्र, संगीत द्वारा भावनात्मक अभिव्यक्ति |
| समूह चिकित्सा | समान समस्या वाले बच्चों का समूह |
| परिवार चिकित्सा | पूरे परिवार के साथ परामर्श |
| संज्ञानात्मक-व्यवहार चिकित्सा (CBT) | गलत विचारों को पहचानकर बदलना |
◆ (ख) परिवार, विद्यालय एवं समाज के स्तर पर
| स्तर | उपाय |
|---|---|
| परिवार | स्नेह, सुरक्षा और स्वीकृति; संतुलित अनुशासन (न अति-कठोर, न अति-ढीला); तुलना व पक्षपात से बचना; बच्चे के लिए समय; माता-पिता स्वयं आदर्श बनें; अभिभावक शिक्षा |
| विद्यालय | रोचक, बाल-केंद्रित शिक्षण; शारीरिक दंड का निषेध; सहगामी क्रियाएँ (खेल, NCC, स्काउट, कला); निर्देशन एवं परामर्श केंद्र; उपचारात्मक शिक्षण; उत्तरदायित्व देना; जीवन कौशल एवं मूल्य शिक्षा; अभिभावक-शिक्षक संघ (PTA) |
| समाज | स्वस्थ मनोरंजन के साधन — खेल के मैदान, पुस्तकालय, बाल क्लब; नशे पर नियंत्रण; मीडिया में हिंसा पर नियंत्रण; गरीबी उन्मूलन; सामुदायिक कार्यक्रम; बाल अधिकार जागरूकता |
| सरकार / कानून | किशोर न्याय अधिनियम का प्रभावी क्रियान्वयन; सुधार गृहों में शिक्षा व व्यावसायिक प्रशिक्षण; चाइल्डलाइन 1098; ICPS (एकीकृत बाल संरक्षण योजना) / मिशन वात्सल्य |
अतिरिक्त ऊर्जा को खेल, कला, नाटक, समाज सेवा जैसे रचनात्मक कार्यों में
लगाना — समस्यात्मक व्यवहार के उपचार का प्रभावी उपाय।
शिक्षक की भूमिका
| शिक्षक को क्या करना चाहिए | शिक्षक को क्या नहीं करना चाहिए |
|---|---|
| व्यवहार के पीछे कारण खोजें — निरीक्षण व व्यक्ति अध्ययन | बच्चे पर “चोर”, “बदमाश”, “झूठा” जैसे लेबल न लगाएँ |
| सहानुभूतिपूर्ण और धैर्यपूर्ण व्यवहार | शारीरिक दंड और सबके सामने अपमान (RTE धारा 17 — निषिद्ध) |
| अच्छे व्यवहार की तुरंत प्रशंसा (सकारात्मक पुनर्बलन) | अन्य बच्चों से तुलना |
| अभिभावकों से नियमित संपर्क और गृह भ्रमण | समस्या को अनदेखा करना, विशेषकर शांत / अंतर्मुखी बच्चों की |
| उत्तरदायित्व और नेतृत्व के अवसर देना | बच्चे की गोपनीय जानकारी सार्वजनिक करना |
| गंभीर मामलों में परामर्शदाता, मनोवैज्ञानिक, CWC को संदर्भित करना |
केवल दंड देकर व्यवहार दबाना |
| जीवन कौशल — क्रोध प्रबंधन, निर्णय लेना, “ना” कहना सिखाना |
पक्षपात और भेदभाव |
परीक्षा उपयोगी तथ्य एवं अभ्यास प्रश्न
◆ (क) एक पंक्ति में महत्वपूर्ण तथ्य
| प्रश्न | उत्तर |
|---|---|
| समस्यात्मक व्यवहार का मूल कारण | कुसमायोजन व अतृप्त आवश्यकताएँ |
| समस्यात्मक व्यवहार का सबसे प्रमुख स्रोत | परिवार |
| शिक्षक बनाम विशेषज्ञ की धारणा का अध्ययन | विकमैन (1928) |
| कुंठा-आक्रामकता परिकल्पना | डॉलार्ड व मिलर (1939) |
| “The Young Delinquent” (1925) | सिरिल बर्ट |
| अपराधशास्त्र के जनक; जन्मजात अपराधी | सीज़र लोम्ब्रोसो |
| विभेदक साहचर्य सिद्धांत | एडविन सदरलैंड |
| “Unraveling Juvenile Delinquency” | शेल्डन व एलेनॉर ग्लूक (1950) |
| कानून के अनुसार “बालक” | 18 वर्ष से कम |
| वर्तमान किशोर न्याय अधिनियम | 2015 (लागू 15 जनवरी 2016) |
| जघन्य अपराध | न्यूनतम सज़ा 7 वर्ष या अधिक |
| किशोर न्याय बोर्ड की संरचना | 1 मजिस्ट्रेट + 2 सामाजिक कार्यकर्ता |
| बाल कल्याण समिति की संरचना | 1 अध्यक्ष + 4 सदस्य |
| शारीरिक दंड का निषेध | RTE 2009, धारा 17 |
| बाल हेल्पलाइन | 1098 |
| NCPCR का गठन | 2007 |
| समस्यात्मक बालक के निदान की सर्वोत्तम विधि | व्यक्ति अध्ययन (Case Study) |
| मनोनाटक (Psychodrama) | जे. एल. मोरेनो |
| अनिर्देशात्मक परामर्श | कार्ल रोजर्स |
| ऊर्जा को रचनात्मक कार्य में लगाना | उदात्तीकरण / शोधन |
◆ (ख) भ्रम से बचें
-
हर समस्यात्मक बालक बाल अपराधी नहीं होता, पर उपचार न
होने पर बन सकता है। -
JJB अपराध के मामलों के लिए है, CWC
देखरेख व संरक्षण के लिए — उल्टा न करें। -
शिक्षक आक्रामक बच्चों को गंभीर मानते हैं, पर विशेषज्ञ
एकांतप्रिय / अंतर्मुखी व्यवहार को अधिक गंभीर मानते हैं। -
किशोर न्याय अधिनियम 2015 का मूल भाव “दंड” नहीं, “सुधार व
पुनर्वास” है।
◆ (ग) अभ्यास प्रश्न (MCQ)
प्रश्न 1. समस्यात्मक व्यवहार का सबसे प्रमुख कारण माना जाता है
—
(A) अधिक बुद्धि (B) पारिवारिक वातावरण (C) अधिक खेल (D) विद्यालय की
इमारत
प्रश्न 2. “The Young Delinquent” पुस्तक के लेखक हैं —
(A) हीली (B) सिरिल बर्ट (C) लोम्ब्रोसो (D) सदरलैंड
प्रश्न 3. किशोर न्याय अधिनियम 2015 के अनुसार “बालक” वह है
जिसकी आयु है —
(A) 14 वर्ष से कम (B) 16 वर्ष से कम (C) 18 वर्ष से कम (D) 21 वर्ष से कम
प्रश्न 4. समस्यात्मक बालक के निदान की सर्वाधिक उपयुक्त विधि
है —
(A) केवल बुद्धि परीक्षण (B) व्यक्ति अध्ययन (C) वार्षिक परीक्षा (D)
प्रश्नोत्तर
प्रश्न 5. “अपराध सीखा जाता है” — यह किस सिद्धांत का मत
है?
(A) जन्मजात अपराधी (B) विभेदक साहचर्य (C) मनोविश्लेषण (D) शारीरिक गठन
प्रश्न 6. RTE अधिनियम 2009 की किस धारा में शारीरिक दंड व
मानसिक उत्पीड़न निषिद्ध है?
(A) धारा 12 (B) धारा 16 (C) धारा 17 (D) धारा 29
प्रश्न 7. एक बच्चा दंड के डर से बार-बार झूठ बोलता है; शिक्षक
को चाहिए —
(A) और कठोर दंड देना (B) भयमुक्त वातावरण बनाना और सच बोलने पर प्रशंसा करना
(C) सबके सामने अपमानित करना (D) अनदेखा करना
प्रश्न 8. विकमैन के अध्ययन के अनुसार मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ
किस व्यवहार को अधिक गंभीर मानते हैं?
(A) झगड़ा (B) अनुशासनहीनता (C) एकांतप्रियता व उदासी (D) शोर मचाना
प्रश्न 9. किशोर न्याय बोर्ड में मजिस्ट्रेट के अतिरिक्त कितने
सामाजिक कार्यकर्ता होते हैं?
(A) 1 (B) 2 (C) 3 (D) 4
प्रश्न 10. कुंठा से आक्रामकता उत्पन्न होती है — यह परिकल्पना
किसकी है?
(A) फ्रायड (B) डॉलार्ड व मिलर (C) बंडूरा (D) मास्लो
प्रश्न 11. बच्चों के लिए निःशुल्क आपातकालीन हेल्पलाइन नंबर है
—
(A) 100 (B) 108 (C) 1098 (D) 112
प्रश्न 12. आक्रामक बच्चे की ऊर्जा को खेल व कला में लगाना
कहलाता है —
(A) दमन (B) प्रक्षेपण (C) उदात्तीकरण (D) प्रतिगमन
9-B, 10-B, 11-C, 12-C
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