UP Super TET Notes: शिक्षण कौशल (Teaching Skills) अध्याय 12 – बाल मनोविज्ञान नोट्स PDF Download

UP Super TET Notes: शिक्षण कौशल (Teaching Skills) अध्याय 12 – बाल मनोविज्ञान नोट्स PDF Download

UP SUPER TET 2026 • भाग 1 • अध्याय 12

शिक्षण कौशल (Teaching Skills) – चैप्टर-वार नोट्स

बाल मनोविज्ञान, शिक्षण कौशल एवं जीवन कौशल • सहायक अध्यापक (प्राथमिक स्तर, कक्षा 1–5) • उ.प्र. शिक्षा सेवा चयन आयोग

शिक्षण की अवस्थाएँ व स्तर , शिक्षण सूत्र , सूक्ष्म शिक्षण , शिक्षण विधियाँ , पाठ योजना , एडगर डेल शंकु , फ्लैंडर्स – सब एक जगह।

विषय-सूची

क्र. अनुभाग
1 शिक्षण : अर्थ, परिभाषाएँ एवं प्रकृति
2 शिक्षण की अवस्थाएँ एवं स्तर
3 शिक्षण के सिद्धांत एवं शिक्षण सूत्र
4 सूक्ष्म शिक्षण (Micro Teaching)
5 प्रमुख शिक्षण कौशल एवं उनके घटक
6 शिक्षण विधियाँ
7 पाठ योजना
8 शिक्षण सहायक सामग्री एवं एडगर डेल का अनुभव शंकु
9 कक्षा-कक्ष अंतःक्रिया एवं प्रबंधन
10 अच्छे शिक्षक के गुण एवं चिंतनशील शिक्षण
11 परीक्षा उपयोगी तथ्य एवं अभ्यास प्रश्न
1

शिक्षण : अर्थ, परिभाषाएँ एवं प्रकृति

शिक्षण (Teaching) एक उद्देश्यपूर्ण, अंतःक्रियात्मक
प्रक्रिया
है जिसमें शिक्षक अधिगम के लिए अनुकूल
परिस्थितियाँ
उत्पन्न करता है, ताकि बच्चे के व्यवहार में वांछित
परिवर्तन
हो। आधुनिक दृष्टि में शिक्षक ज्ञान देने वाला नहीं, सीखने
का सुविधादाता (Facilitator)
है।

विद्वान परिभाषा मुख्य शब्द
रायबर्न “शिक्षण एक संबंध है जो बालक को उसकी सभी शक्तियों के विकास में सहायता देता
है।”
संबंध, शक्तियों का विकास
क्लार्क “शिक्षण वह क्रिया है जिसकी रचना और संचालन छात्र के व्यवहार में परिवर्तन लाने के
लिए किया जाता है।”
व्यवहार में परिवर्तन
मॉरिसन “शिक्षण एक अधिक परिपक्व व्यक्तित्व का कम परिपक्व व्यक्तित्व के साथ घनिष्ठ संपर्क
है, जिससे कम परिपक्व व्यक्ति की शिक्षा आगे बढ़ती है।”
परिपक्व-अपरिपक्व संपर्क
एन. एल. गेज “शिक्षण किसी व्यक्ति के व्यवहार की क्षमताओं में परिवर्तन लाने के लिए पारस्परिक
प्रभाव का एक रूप है।”
पारस्परिक प्रभाव
बी. ओ. स्मिथ “शिक्षण क्रियाओं की एक व्यवस्था है जिसका उद्देश्य अधिगम उत्पन्न करना है।” क्रियाओं की व्यवस्था
बर्टन “शिक्षण अधिगम के लिए प्रेरणा, पथ-प्रदर्शन, निर्देशन और प्रोत्साहन है।” प्रेरणा, निर्देशन
एडमंड एमिडोन “शिक्षण एक अंतःक्रियात्मक प्रक्रिया है जिसमें कक्षा में शिक्षक और छात्र के बीच
बातचीत होती है।”
अंतःक्रियात्मक प्रक्रिया
शिक्षण की प्रकृति / विशेषताएँ
कला और विज्ञान दोनों — कला क्योंकि इसमें सृजनात्मकता व
व्यक्तित्व है; विज्ञान क्योंकि इसके सिद्धांत, नियम और मापन हैं।
त्रिध्रुवीय प्रक्रिया — शिक्षक, छात्र और
पाठ्यवस्तु
(जॉन ड्यूई के अनुसार: शिक्षक, छात्र, सामाजिक वातावरण)।
उद्देश्यपूर्ण — निश्चित शैक्षिक उद्देश्यों की प्राप्ति।
अंतःक्रियात्मक — शिक्षक-छात्र के बीच दोतरफ़ा संवाद।
विकासात्मक — छात्र का सर्वांगीण विकास।
मापनीय — अधिगम परिणामों का मूल्यांकन संभव।
औपचारिक और अनौपचारिक दोनों रूपों में।
द्विध्रुवीय बनाम त्रिध्रुवीय: जॉन एडम्स — शिक्षण
द्विध्रुवीय (शिक्षक + छात्र); जॉन ड्यूई —
शिक्षण त्रिध्रुवीय (शिक्षक + छात्र + सामाजिक वातावरण /
पाठ्यक्रम)।
2

शिक्षण की अवस्थाएँ एवं स्तर

◆ (क) शिक्षण की अवस्थाएँ — फिलिप जैक्सन (1968)

पूर्व-क्रिया (Pre-active) ➜ अंतःक्रिया (Interactive) ➜ उत्तर-क्रिया (Post-active)
अवस्था कब शिक्षक के कार्य
पूर्व-क्रिया / नियोजन अवस्था कक्षा में जाने से पहले उद्देश्य निर्धारण, विषयवस्तु चयन, विधि व सहायक सामग्री चुनना, पाठ
योजना
बनाना
अंतःक्रिया अवस्था कक्षा में शिक्षण के दौरान प्रस्तावना, प्रश्न, व्याख्या, पुनर्बलन, निदान — शिक्षक-छात्र
संवाद
उत्तर-क्रिया / मूल्यांकन अवस्था शिक्षण के बाद मूल्यांकन, प्रतिपुष्टि, गृहकार्य, अपने शिक्षण पर
चिंतन और सुधार

◆ (ख) शिक्षण के स्तर

3. चिंतन स्तर (Reflective) — हंट
2. बोध स्तर (Understanding) — मॉरिसन
1. स्मृति स्तर (Memory) — हरबार्ट

शिक्षण के स्तर — नीचे से ऊपर (स्मृति → बोध → चिंतन)

स्तर प्रवर्तक उद्देश्य विशेषता
स्मृति स्तर (Memory Level) हरबार्ट तथ्यों को याद करना, रटना सबसे निम्न स्तर; शिक्षक-केंद्रित; विचारहीन शिक्षण
बोध स्तर (Understanding Level) मॉरिसन तथ्यों के अर्थ और संबंध समझना “विचारपूर्ण” शिक्षण; शिक्षक व छात्र दोनों सक्रिय; मॉरिसन का 5
चरण
— अन्वेषण, प्रस्तुतीकरण, आत्मीकरण, संगठन, अभिव्यक्ति
चिंतन स्तर (Reflective Level) हंट (Hunt), बिग्गे समस्या समाधान, आलोचनात्मक व सृजनात्मक चिंतन सबसे उच्च स्तर; छात्र-केंद्रित; स्मृति व बोध स्तर इसके
आधार
ट्रिक: “हर मोर हंसता” = हरबार्ट
(स्मृति) → मॉरिसन (बोध) → हंट
(चिंतन)।
3

शिक्षण के सिद्धांत एवं शिक्षण सूत्र

◆ (क) शिक्षण के सिद्धांत

मनोवैज्ञानिक सिद्धांत सामान्य सिद्धांत
अभिप्रेरणा का सिद्धांत — रुचि जगाना निश्चित उद्देश्य का सिद्धांत
क्रियाशीलता / करके सीखना का सिद्धांत जीवन से संबंध का सिद्धांत
पुनर्बलन का सिद्धांत नियोजन का सिद्धांत
व्यक्तिगत भिन्नता का सिद्धांत चयन का सिद्धांत — उपयुक्त विषयवस्तु
अभ्यास व पुनरावृत्ति का सिद्धांत विभाजन का सिद्धांत — छोटी इकाइयाँ
मनोरंजन / खेल का सिद्धांत लोकतांत्रिक व्यवहार का सिद्धांत
सृजनात्मकता का सिद्धांत लचीलेपन का सिद्धांत

◆ (ख) शिक्षण सूत्र (Maxims of Teaching)

शिक्षण सूत्र वे व्यावहारिक नियम हैं जो
शिक्षक को बताते हैं कि विषयवस्तु किस क्रम में प्रस्तुत करें। इन्हें
मुख्यतः हरबर्ट स्पेंसर और कमेनियस से जोड़ा जाता
है।

क्र. शिक्षण सूत्र अर्थ उदाहरण
1 ज्ञात से अज्ञात की ओर पहले से ज्ञात ज्ञान को आधार बनाकर नया ज्ञान घर के बारे में बताकर गाँव, फिर ज़िला
2 सरल से जटिल की ओर पहले आसान, फिर कठिन पहले जोड़, फिर गुणा
3 मूर्त से अमूर्त की ओर पहले ठोस वस्तुएँ, फिर अमूर्त विचार गोलियों से गिनती, फिर संख्याएँ
4 विशिष्ट से सामान्य की ओर पहले उदाहरण, फिर नियम — आगमन विधि कई वाक्यों से संज्ञा का नियम
5 पूर्ण से अंश की ओर पहले पूरी वस्तु, फिर भाग — गेस्टाल्ट पहले पूरी कविता, फिर पंक्तियाँ
6 अनिश्चित से निश्चित की ओर धुंधले विचारों को स्पष्ट करना —
7 विश्लेषण से संश्लेषण की ओर पहले तोड़ना, फिर जोड़ना समस्या को भागों में बाँटकर हल
8 आगमन से निगमन की ओर पहले उदाहरण से नियम, फिर नियम का प्रयोग —
9 अनुभव से तर्क की ओर (अनुभवजन्य से तर्कसंगत) प्रत्यक्ष अनुभव के बाद तर्क पौधा उगाकर फिर प्रकाश संश्लेषण
10 मनोवैज्ञानिक से तार्किक क्रम की ओर बच्चे की रुचि व क्षमता के क्रम से, फिर विषय के तार्किक क्रम से —
11 वास्तविक से प्रतिनिधि की ओर पहले वास्तविक वस्तु, फिर चित्र / मॉडल असली फूल, फिर उसका चित्र
12 निकट से दूर की ओर पहले आसपास का वातावरण स्थानीय भूगोल, फिर विश्व भूगोल
13 वर्तमान से भूत की ओर वर्तमान के संदर्भ से इतिहास आज के लोकतंत्र से प्राचीन गणराज्य
14 प्रकृति का अनुसरण बच्चे के स्वाभाविक विकास के अनुसार — रूसो —
आगमन बनाम निगमन: आगमन (Inductive) = उदाहरण
→ नियम
(विशिष्ट से सामान्य) — छोटी कक्षाओं के लिए उपयुक्त, अधिक
मनोवैज्ञानिक
; निगमन (Deductive) = नियम →
उदाहरण
(सामान्य से विशिष्ट) — शीघ्र, बड़ी कक्षाओं के लिए।
4

सूक्ष्म शिक्षण (Micro Teaching)

सूक्ष्म शिक्षण शिक्षक-प्रशिक्षण की वह तकनीक है जिसमें
एक समय में एक शिक्षण कौशल का अभ्यास छोटे समूह (5–10
छात्र)
के साथ कम समय (5–10 मिनट) में किया जाता है
और तत्काल प्रतिपुष्टि दी जाती है। यह “वास्तविक शिक्षण
का छोटा (लघु) रूप”
है।

  • प्रवर्तक: ड्वाइट एलन (Dwight W. Allen) और सहयोगी,
    स्टैनफ़र्ड विश्वविद्यालय, अमेरिका (1963)।

  • “सूक्ष्म शिक्षण” शब्द 1963 में प्रयुक्त; एलन व
    रयान
    ने इस पर प्रसिद्ध पुस्तक लिखी।

  • भारत में डी. डी. तिवारी (1967) ने पहला प्रयोग किया;
    NCERT और बी. के. पासी ने भारतीय प्रतिमान
    विकसित किया।

  • यह व्यवहारवाद (स्किनर — पुनर्बलन) और
    प्रतिपुष्टि के सिद्धांत पर आधारित है।

◆ सूक्ष्म शिक्षण चक्र

योजना (Plan) ➜ शिक्षण (Teach) ➜ प्रतिपुष्टि (Feedback)
पुनर्योजना (Re-plan) ➜ पुनर्शिक्षण (Re-teach) ➜ पुनर्प्रतिपुष्टि (Re-feedback)
चरण भारतीय प्रतिमान (मिनट)
शिक्षण (Teach) 6
प्रतिपुष्टि (Feedback) 6
पुनर्योजना (Re-plan) 12
पुनर्शिक्षण (Re-teach) 6
पुनर्प्रतिपुष्टि (Re-feedback) 6
कुल एक चक्र 36 मिनट
आधार सूक्ष्म शिक्षण सामान्य (स्थूल) शिक्षण
छात्र संख्या 5 – 10 30 – 40 या अधिक
समय 5 – 10 मिनट 35 – 45 मिनट
कौशल एक समय में एक अनेक एक साथ
प्रतिपुष्टि तत्काल प्रायः नहीं
विषयवस्तु छोटी इकाई पूरा पाठ
वातावरण नियंत्रित, प्रयोगशाला जैसा वास्तविक कक्षा
सेतु / अंतर्वर्ती शिक्षण (Link Practice): सूक्ष्म शिक्षण में
सीखे गए अलग-अलग कौशलों को जोड़कर वास्तविक कक्षा में प्रयोग करने
से पहले का अभ्यास — सूक्ष्म और स्थूल शिक्षण के बीच का सेतु।
5

प्रमुख शिक्षण कौशल एवं उनके घटक

शिक्षण कौशल शिक्षक के वे विशिष्ट, अवलोकनीय
व्यवहार
हैं जो अधिगम को सुगम बनाते हैं। एलन व रयान ने
14 शिक्षण कौशल बताए; भारत में विभिन्न विद्वानों ने 13
से 21
कौशलों की सूची दी है।

कौशल उद्देश्य प्रमुख घटक (वांछनीय) अवांछनीय व्यवहार
प्रस्तावना कौशल (Introducing) छात्रों को पाठ के लिए मानसिक रूप से तैयार करना, रुचि
जगाना
पूर्व ज्ञान का उपयोग; उपयुक्त उपकरण (कहानी, प्रश्न, चित्र, प्रदर्शन);
क्रमबद्धता; उद्देश्य कथन
अप्रासंगिक कथन; पूर्व ज्ञान से संबंध न होना
प्रश्न कौशल — प्रवाहपूर्ण प्रश्न (Fluency in
Questioning)
कक्षा में अधिक से अधिक सहभागिता प्रश्नों की संरचना, स्पष्टता,
सुसंगतता, गति; विराम;
वितरण (पूरी कक्षा में)
एक ही छात्र से पूछना; अस्पष्ट प्रश्न; प्रश्न दोहराना
खोजपूर्ण / अन्वेषणात्मक प्रश्न (Probing Questioning) छात्र के उत्तर को गहराई और पूर्णता तक ले जाना प्रेरणा (Prompting), अतिरिक्त सूचना
माँगना
, पुनर्केंद्रण (Refocusing), पुनर्निर्देशन
(Redirection)
, आलोचनात्मक जागरूकता बढ़ाना
उत्तर स्वयं देना; अधूरे उत्तर स्वीकार करना
व्याख्या कौशल (Explaining) अवधारणा को स्पष्ट रूप से समझाना संबंध स्थापित करने वाले शब्द (इसलिए, क्योंकि, अतः); आरंभ व समापन कथन;
बोध की जाँच
अप्रासंगिक कथन, अस्पष्ट शब्द, प्रवाह की कमी, अनुपयुक्त शब्दावली
उदाहरण / दृष्टांत कौशल (Illustrating with
Examples)
अमूर्त विचार को मूर्त और स्पष्ट बनाना सरल, प्रासंगिक, रोचक उदाहरण; आगमन-निगमन दोनों; उपयुक्त
माध्यम (मौखिक, चित्र, मॉडल)
अप्रासंगिक या जटिल उदाहरण
पुनर्बलन कौशल (Reinforcement) सही उत्तर व वांछित व्यवहार को दोहराने हेतु प्रोत्साहन सकारात्मक मौखिक (शाबाश, बहुत अच्छा); सकारात्मक
अमौखिक
(मुस्कान, सिर हिलाना); उत्तर को बोर्ड पर लिखना
नकारात्मक — व्यंग्य, डाँट; अनुचित पुनर्बलन
उद्दीपन परिवर्तन कौशल (Stimulus Variation) छात्रों का ध्यान बनाए रखना शिक्षक की गति (Movement), हाव-भाव
(Gestures)
, वाणी में उतार-चढ़ाव, केंद्रीकरण
(Focusing)
, अंतःक्रिया शैली बदलना, विराम
(Pause)
, इन्द्रिय माध्यम बदलना (सुनना → देखना)
एक ही स्थान पर खड़े रहना; नीरस स्वर
श्यामपट्ट लेखन कौशल (Blackboard Writing) बोर्ड का प्रभावी और स्पष्ट प्रयोग स्पष्ट, सुपाठ्य, सीधी पंक्तियाँ; उचित आकार; मुख्य बिंदु; व्यवस्थित
प्रयोग
; रंगीन चॉक; बोर्ड के पास सही स्थिति
बोर्ड की ओर मुँह करके बोलना; अव्यवस्थित लेखन
प्रदर्शन कौशल (Demonstration) प्रयोग / प्रक्रिया करके दिखाना सभी को दिखना; क्रमबद्धता; व्याख्या के साथ; छात्र सहभागिता —
कक्षा प्रबंधन कौशल (Classroom Management) अनुशासन व अनुकूल अधिगम वातावरण ध्यान आकर्षण, नियम, नेत्र संपर्क, उचित व्यवहार की सराहना अनावश्यक टोका-टाकी
समापन कौशल (Closure) पाठ का सारांश और मुख्य बिंदुओं की पुनरावृत्ति पुनरावृत्ति प्रश्न, सारांश, भावी पाठ से जोड़ना, गृहकार्य अचानक पाठ समाप्त करना
गृहकार्य देने का कौशल (Assignment) अधिगम का सुदृढ़ीकरण स्पष्ट, उद्देश्यपूर्ण, स्तर के अनुसार अधिक या असंबंधित गृहकार्य
खोजपूर्ण प्रश्न के घटक याद रखें: “प्रे-अ-पु-पु-आ” =
प्रेरणा, अतिरिक्त सूचना,
पुनर्केंद्रण, पुनर्निर्देशन,
आलोचनात्मक जागरूकता।

◆ प्रश्नों के प्रकार

प्रकार अर्थ / उदाहरण
स्मरण / तथ्यात्मक (निम्न-स्तरीय) “भारत की राजधानी क्या है?”
बोधात्मक “प्रकाश संश्लेषण अपने शब्दों में समझाइए।”
अनुप्रयोग / विश्लेषण / मूल्यांकन (उच्च-स्तरीय) “यदि पेड़ न हों तो क्या होगा?”
अभिसारी (बंद) एक सही उत्तर वाले प्रश्न
अपसारी (खुले) अनेक उत्तर वाले प्रश्न — सृजनात्मकता
विचारोत्तेजक चिंतन को प्रेरित करने वाले
अवांछनीय प्रश्न हाँ / ना वाले, संकेतक (Leading) प्रश्न
(“क्या यह ठीक नहीं है?”), प्रतिध्वनि प्रश्न (शिक्षक द्वारा कही
बात दोहरवाना), अस्पष्ट व दोहरे प्रश्न
6

शिक्षण विधियाँ

विधि प्रवर्तक / संबंध मुख्य विशेषता उपयुक्तता
व्याख्यान विधि (Lecture) — शिक्षक बोलता, छात्र सुनते; शिक्षक-केंद्रित; कम समय में अधिक
विषयवस्तु
बड़ी कक्षाएँ; उच्च कक्षाएँ; प्राथमिक स्तर पर कम उपयुक्त
प्रदर्शन विधि (Demonstration) — शिक्षक करके दिखाता है; व्याख्यान + प्रदर्शन विज्ञान, प्रायोगिक विषय
चर्चा / वाद-विवाद विधि (Discussion) — छात्र विचार व्यक्त करते हैं; लोकतांत्रिक सामाजिक विज्ञान, भाषा
प्रोजेक्ट / योजना विधि (Project) डब्ल्यू. एच. किलपैट्रिक (1918); जॉन ड्यूई के प्रयोजनवाद पर
आधारित
वास्तविक जीवन की समस्या पर उद्देश्यपूर्ण कार्य; चरण —
परिस्थिति निर्माण, चयन, योजना, क्रियान्वयन, मूल्यांकन, अभिलेखन
सभी विषय; करके सीखना
समस्या समाधान विधि जॉन ड्यूई समस्या पहचान → परिकल्पना → परीक्षण → निष्कर्ष विज्ञान, गणित, सामाजिक विज्ञान
अन्वेषण / ह्यूरिस्टिक विधि (Heuristic) एच. ई. आर्मस्ट्रांग “Heurisko = मैं खोजता हूँ”; छात्र स्वयं
खोजकर
सीखता है; शिक्षक केवल मार्गदर्शक
विज्ञान
खोज / अन्वेषण विधि (Discovery) जेरोम ब्रूनर छात्र स्वयं सिद्धांत खोजें विज्ञान, गणित
खेल विधि (Play-way) फ्रोबेल (किंडरगार्टन), कॉल्डवेल कुक (Play
Way पुस्तक)
खेल-खेल में सीखना; उपहार (Gifts) व क्रियाएँ पूर्व-प्राथमिक व प्राथमिक
मॉण्टेसरी विधि मारिया मॉण्टेसरी (इटली) इन्द्रिय प्रशिक्षण; स्व-शिक्षण; डिडैक्टिक
उपकरण
; “बच्चों का घर” (Casa dei Bambini, 1907)
3–7 वर्ष
डाल्टन योजना हेलेन पार्कहर्स्ट (1920) व्यक्तिगत कार्य-अनुबंध (Assignment); प्रयोगशालाएँ व्यक्तिगत अधिगम
कहानी कथन विधि — कहानियों द्वारा — रुचिकर, नैतिक शिक्षा प्राथमिक कक्षाएँ, इतिहास, भाषा
आगमन विधि — उदाहरण → नियम; मनोवैज्ञानिक व्याकरण, गणित, विज्ञान
निगमन विधि — नियम → उदाहरण; शीघ्र उच्च कक्षाएँ
भूमिका निर्वाह (Role Play) — अभिनय द्वारा सीखना भाषा, सामाजिक विज्ञान, मूल्य शिक्षा
क्रिया / गतिविधि आधारित — करके सीखना; NCF 2005, NEP 2020 सभी स्तर
अनुभवात्मक अधिगम डेविड कोल्ब अनुभव → चिंतन → संप्रत्यय → प्रयोग NEP 2020
पलटी कक्षा (Flipped Classroom) बर्गमैन व सैम्स घर पर वीडियो / सामग्री, कक्षा में चर्चा व गतिविधि ICT-आधारित शिक्षण
बुनियादी शिक्षा (बेसिक) महात्मा गांधी (वर्धा, 1937) हस्तकला-केंद्रित; सहसंबंध; मातृभाषा प्राथमिक
ट्रिक: प्रोजेक्ट = किलपैट्रिक; ह्यूरिस्टिक =
आर्मस्ट्रांग
; खेल / किंडरगार्टन = फ्रोबेल;
मॉण्टेसरी = इन्द्रिय प्रशिक्षण; डाल्टन =
पार्कहर्स्ट
; खोज = ब्रूनर; समस्या समाधान =
ड्यूई
।
प्राथमिक स्तर के लिए सर्वोत्तम: खेल विधि, कहानी विधि,
गतिविधि-आधारित, करके सीखना, आगमन विधि
— बाल-केंद्रित और मूर्त अनुभव
वाली विधियाँ।
7

पाठ योजना (Lesson Plan)

पाठ योजना शिक्षक द्वारा कक्षा में जाने से
पहले
बनाई गई लिखित रूपरेखा है, जिसमें उद्देश्य,
विषयवस्तु, विधि, सहायक सामग्री, क्रियाएँ और मूल्यांकन
निश्चित किए जाते हैं।
यह पूर्व-क्रिया अवस्था का कार्य है।

◆ हरबार्ट की पंचपदी प्रणाली

जे. एफ. हरबार्ट (जर्मनी) ने 4 पद दिए —
स्पष्टता, संबंध, व्यवस्था, विधि। उनके शिष्यों ज़िलर और राइन ने इन्हें
5 पदों में व्यवस्थित किया; बाद में पुनरावृत्ति
जोड़कर इसे व्यावहारिक रूप दिया गया।

1. प्रस्तावना / तैयारी ➜ 2. प्रस्तुतीकरण ➜ 3. तुलना / संबंध
4. सामान्यीकरण / नियमीकरण ➜ 5. प्रयोग / अनुप्रयोग ➜ (6. पुनरावृत्ति / मूल्यांकन)
पद शिक्षक क्या करता है
1. प्रस्तावना (Preparation) पूर्व ज्ञान जाँचना, रुचि जगाना, उद्देश्य कथन
2. प्रस्तुतीकरण (Presentation) नई विषयवस्तु को उदाहरण, सहायक सामग्री, प्रश्नों से प्रस्तुत करना
3. तुलना / संबंध (Association / Comparison) नए ज्ञान का पुराने ज्ञान से संबंध
4. सामान्यीकरण (Generalization) उदाहरणों से नियम / सिद्धांत निकालना
5. प्रयोग (Application) नियम का नई परिस्थितियों में प्रयोग
6. पुनरावृत्ति / मूल्यांकन (Recapitulation) प्रश्नों द्वारा बोध की जाँच; गृहकार्य

◆ पाठ योजना के अन्य उपागम

उपागम प्रवर्तक चरण / विशेषता
हरबार्टीय उपागम हरबार्ट (ज़िलर, राइन) ज्ञानात्मक; 5 पद — ऊपर दिए
मूल्यांकन उपागम बी. एस. ब्लूम उद्देश्य → अधिगम अनुभव → मूल्यांकन (मूल्यांकन त्रिभुज)
इकाई उपागम एच. सी. मॉरिसन अन्वेषण, प्रस्तुतीकरण, आत्मीकरण, संगठन, अभिव्यक्ति
RCEM उपागम क्षेत्रीय शिक्षा महाविद्यालय, मैसूर व्यवहारगत उद्देश्य; ज्ञान, अवबोध, अनुप्रयोग, सृजनात्मकता
5E प्रतिमान (रचनावादी) रॉजर बायबी (BSCS) संलग्न करना (Engage) → अन्वेषण (Explore) → व्याख्या (Explain) →
विस्तार (Elaborate) → मूल्यांकन (Evaluate)
ICON प्रतिमान — रचनावादी — व्याख्या, संदर्भ, सहयोग, संज्ञानात्मक प्रशिक्षुता
5E ट्रिक: E-E-E-E-E = Engage,
Explore, Explain,
Elaborate, Evaluate —
रचनावादी कक्षा का प्रतिमान।
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शिक्षण सहायक सामग्री एवं एडगर डेल का अनुभव शंकु

शिक्षण सहायक सामग्री (TLM — Teaching Learning
Material)
वे साधन हैं जो एक से अधिक इन्द्रियों को
सक्रिय करके अधिगम को रोचक, स्पष्ट और स्थायी बनाते हैं।

प्रकार उदाहरण
दृश्य (Visual) चित्र, चार्ट, मानचित्र, मॉडल, श्यामपट्ट, फ्लैश कार्ड, ग्लोब, बुलेटिन बोर्ड, फ्लैनल
बोर्ड
श्रव्य (Audio) रेडियो, टेप रिकॉर्डर, पॉडकास्ट, ग्रामोफ़ोन
दृश्य-श्रव्य (Audio-Visual) टेलीविज़न, चलचित्र (फिल्म), वीडियो, कंप्यूटर, स्मार्ट बोर्ड
प्रक्षेपित (Projected) प्रोजेक्टर, स्लाइड, ओवरहेड प्रोजेक्टर, LCD
अप्रक्षेपित (Non-projected) चार्ट, मॉडल, वास्तविक वस्तुएँ, श्यामपट्ट
क्रियात्मक प्रयोग, भ्रमण, नाटक, कठपुतली

◆ एडगर डेल का अनुभव शंकु (Cone of Experience, 1946)

11. मौखिक प्रतीक (Verbal symbols) — सबसे अमूर्त
10. दृश्य प्रतीक
9. रेडियो, रिकॉर्डिंग, स्थिर चित्र
8. चलचित्र (Motion pictures)
7. टेलीविज़न
6. प्रदर्शनी (Exhibits)
5. शैक्षिक भ्रमण (Field trips)
4. प्रदर्शन (Demonstrations)
3. नाटकीय अनुभव (Dramatized)
2. कृत्रिम अनुभव (Contrived — मॉडल)
1. प्रत्यक्ष उद्देश्यपूर्ण अनुभव — सबसे मूर्त

एडगर डेल का अनुभव शंकु — नीचे सबसे मूर्त, ऊपर सबसे अमूर्त

  • आधार (सबसे नीचे) — प्रत्यक्ष, उद्देश्यपूर्ण
    अनुभव
    — सबसे मूर्त और प्रभावी।

  • शीर्ष (सबसे ऊपर) — मौखिक प्रतीक
    (शब्द) — सबसे अमूर्त।

  • शंकु के तीन भाग — करके सीखना (Doing), देखकर
    सीखना (Observing)
    , प्रतीकों से सीखना
    (Symbolizing)
    — ब्रूनर के सक्रिय, प्रतिमा, सांकेतिक अवस्थाओं से
    मेल।

  • प्राथमिक कक्षाओं में शंकु के निचले भाग (प्रत्यक्ष व मूर्त
    अनुभव) पर अधिक बल।

ब्रूनर की प्रस्तुति की अवस्थाएँ: सक्रिय (Enactive) — करके;
प्रतिमा / दृश्य (Iconic) — चित्र से; सांकेतिक
(Symbolic)
— शब्द / प्रतीक से।
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कक्षा-कक्ष अंतःक्रिया एवं प्रबंधन

◆ फ्लैंडर्स की अंतःक्रिया विश्लेषण प्रणाली (FIACS)

नेड ए. फ्लैंडर्स (1960 के दशक) ने कक्षा में शिक्षक-छात्र
के मौखिक व्यवहार
को 10 श्रेणियों में बाँटा; प्रेक्षक हर
3 सेकंड में श्रेणी संख्या लिखता है और 10 × 10
मैट्रिक्स
बनाया जाता है।

वर्ग श्रेणी व्यवहार
शिक्षक कथन — अप्रत्यक्ष प्रभाव 1 भावनाओं को स्वीकार करना
2 प्रशंसा / प्रोत्साहन
3 छात्र के विचारों को स्वीकारना / प्रयोग करना
4 प्रश्न पूछना
शिक्षक कथन — प्रत्यक्ष प्रभाव 5 व्याख्यान देना
6 निर्देश देना
7 आलोचना / अधिकार का औचित्य बताना
छात्र कथन 8 छात्र प्रतिक्रिया (शिक्षक द्वारा प्रेरित)
9 छात्र पहल (स्वयं बोलना)
मौन / भ्रम 10 मौन या अव्यवस्था
ट्रिक: 1–4 = अप्रत्यक्ष (लोकतांत्रिक); 5–7 =
प्रत्यक्ष
(अधिकारपूर्ण); 8–9 = छात्र; 10 =
मौन
। अप्रत्यक्ष / प्रत्यक्ष (I/D) अनुपात अधिक = अधिक
लोकतांत्रिक कक्षा।

◆ कक्षा प्रबंधन

प्रभावी कक्षा प्रबंधन के उपाय
स्पष्ट नियम व दिनचर्या — छात्रों के साथ मिलकर बनाना
लोकतांत्रिक और स्नेहपूर्ण वातावरण; भयमुक्त कक्षा
नेत्र संपर्क, कक्षा में घूमना, नाम से पुकारना
रोचक और सक्रिय शिक्षण — ऊब से अनुशासनहीनता
सकारात्मक पुनर्बलन — अच्छे व्यवहार की प्रशंसा
कोनिन (Kounin, 1970) — “साथ-साथ ध्यान”
(With-it-ness)
, अतिव्यापन (Overlapping), सुचारु
गति
उचित बैठक व्यवस्था — U-आकार, समूह, गोलाकार
शारीरिक दंड नहीं (RTE धारा 17)
शिक्षक नेतृत्व की शैलियाँ (लेविन, लिपिट व व्हाइट) विशेषता प्रभाव
निरंकुश (Autocratic) शिक्षक सब निर्णय लेता है अनुशासन पर आक्रोश, निर्भरता
लोकतांत्रिक (Democratic) छात्रों की भागीदारी सर्वश्रेष्ठ — सहयोग, सृजनात्मकता, संतोष
अहस्तक्षेपी (Laissez-faire) शिक्षक हस्तक्षेप नहीं करता अव्यवस्था, कम उपलब्धि
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अच्छे शिक्षक के गुण एवं चिंतनशील शिक्षण

क्षेत्र गुण
व्यक्तिगत अच्छा स्वास्थ्य, संतुलित व्यक्तित्व, धैर्य, सहानुभूति, हास्य-बोध, ईमानदारी,
समयनिष्ठा
व्यावसायिक विषय पर अधिकार, शिक्षण विधियों व कौशलों का ज्ञान, बाल मनोविज्ञान की समझ,
निरंतर सीखने की इच्छा
सामाजिक निष्पक्षता, सहयोग, अभिभावकों व समुदाय से संबंध, नेतृत्व
संप्रेषण स्पष्ट, प्रभावी वाणी; सुनने की क्षमता; अमौखिक संकेत
नैतिक आदर्श आचरण, मूल्य, पेशे के प्रति निष्ठा

◆ चिंतनशील शिक्षण (Reflective Teaching)

  • जॉन ड्यूई (How We Think, 1933) — चिंतनशील विचार की
    अवधारणा।

  • डोनाल्ड शॉन (1983) — “The Reflective
    Practitioner”
    ; कार्य के दौरान चिंतन
    (Reflection-in-action)
    और कार्य पर चिंतन
    (Reflection-on-action)
    ।

  • चिंतनशील शिक्षक अपने शिक्षण का विश्लेषण, मूल्यांकन और
    सुधार
    स्वयं करता है — डायरी, सहकर्मी अवलोकन, छात्र प्रतिपुष्टि,
    क्रियात्मक अनुसंधान (Action Research)।

  • क्रियात्मक अनुसंधान — कक्षा की तात्कालिक
    समस्या
    का समाधान शिक्षक स्वयं करता है; प्रवर्तक स्टीफ़न एम. कोरे
    (1953)
    ; शब्द कर्ट लेविन।

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परीक्षा उपयोगी तथ्य एवं अभ्यास प्रश्न

◆ (क) एक पंक्ति में महत्वपूर्ण तथ्य

प्रश्न उत्तर
शिक्षण त्रिध्रुवीय प्रक्रिया जॉन ड्यूई
शिक्षण द्विध्रुवीय प्रक्रिया जॉन एडम्स
शिक्षण की तीन अवस्थाएँ फिलिप जैक्सन — पूर्व-क्रिया, अंतःक्रिया, उत्तर-क्रिया
पाठ योजना बनाना पूर्व-क्रिया अवस्था
स्मृति स्तर हरबार्ट
बोध स्तर मॉरिसन
चिंतन स्तर हंट
सूक्ष्म शिक्षण के जनक ड्वाइट एलन (स्टैनफ़र्ड, 1963)
भारतीय सूक्ष्म शिक्षण चक्र 36 मिनट
सूक्ष्म शिक्षण में एक समय में एक कौशल
उदाहरण → नियम आगमन विधि
प्रोजेक्ट विधि किलपैट्रिक
ह्यूरिस्टिक विधि आर्मस्ट्रांग
किंडरगार्टन / खेल विधि फ्रोबेल
इन्द्रिय प्रशिक्षण मारिया मॉण्टेसरी
पंचपदी पाठ योजना हरबार्ट (ज़िलर व राइन)
5E प्रतिमान रॉजर बायबी — रचनावादी
अनुभव शंकु एडगर डेल (1946)
शंकु का आधार / शीर्ष प्रत्यक्ष अनुभव / मौखिक प्रतीक
कक्षा अंतःक्रिया विश्लेषण (10 श्रेणियाँ) नेड फ्लैंडर्स
The Reflective Practitioner डोनाल्ड शॉन (1983)
क्रियात्मक अनुसंधान स्टीफ़न कोरे (1953)

◆ (ख) भ्रम से बचें

  • आगमन = उदाहरण से नियम; निगमन =
    नियम से उदाहरण।

  • ह्यूरिस्टिक (आर्मस्ट्रांग) और खोज विधि
    (ब्रूनर)
    दोनों खोज पर आधारित, पर प्रवर्तक अलग।

  • हरबार्ट ने 4 पद दिए; 5 पद उनके
    शिष्यों
    (ज़िलर व राइन) ने।

  • एडगर डेल शंकु में नीचे मूर्त, ऊपर
    अमूर्त — उल्टा न करें।

  • फ्लैंडर्स 1–4 = अप्रत्यक्ष, 5–7 =
    प्रत्यक्ष
    शिक्षक कथन।

◆ (ग) अभ्यास प्रश्न (MCQ)

प्रश्न 1. शिक्षण की “अंतःक्रिया अवस्था” में शिक्षक का प्रमुख
कार्य है —

(A) पाठ योजना बनाना (B) कक्षा में प्रश्नोत्तर व व्याख्या (C) केवल मूल्यांकन (D)
उद्देश्य निर्धारण

प्रश्न 2. शिक्षण का “बोध स्तर” किससे संबंधित है?

(A) हरबार्ट (B) मॉरिसन (C) हंट (D) ड्यूई

प्रश्न 3. सूक्ष्म शिक्षण की शुरुआत कहाँ हुई?

(A) हार्वर्ड (B) स्टैनफ़र्ड (C) ऑक्सफ़ोर्ड (D) कोलंबिया

प्रश्न 4. भारतीय प्रतिमान में सूक्ष्म शिक्षण चक्र की कुल अवधि है
—

(A) 30 मिनट (B) 36 मिनट (C) 40 मिनट (D) 45 मिनट

प्रश्न 5. “पुनर्केंद्रण” और “पुनर्निर्देशन” किस कौशल के घटक
हैं?

(A) प्रस्तावना (B) खोजपूर्ण प्रश्न (C) श्यामपट्ट लेखन (D) समापन

प्रश्न 6. “कई उदाहरण देकर बच्चों से नियम निकलवाना” किस
विधि का उदाहरण है?

(A) निगमन (B) आगमन (C) व्याख्यान (D) प्रदर्शन

प्रश्न 7. “Heurisko” (मैं खोजता हूँ) शब्द से किस विधि का नाम
बना है?

(A) प्रोजेक्ट (B) ह्यूरिस्टिक (C) डाल्टन (D) मॉण्टेसरी

प्रश्न 8. एडगर डेल के अनुभव शंकु के आधार पर है —

(A) मौखिक प्रतीक (B) चलचित्र (C) प्रत्यक्ष उद्देश्यपूर्ण अनुभव (D) प्रदर्शनी

प्रश्न 9. फ्लैंडर्स की प्रणाली में श्रेणी “4” है —

(A) व्याख्यान (B) प्रश्न पूछना (C) आलोचना (D) मौन

प्रश्न 10. “संलग्न करना, अन्वेषण, व्याख्या, विस्तार, मूल्यांकन”
— यह क्रम है —

(A) हरबार्टीय (B) 5E प्रतिमान (C) RCEM (D) इकाई उपागम

प्रश्न 11. प्राथमिक कक्षा में गणित पढ़ाने का सबसे उपयुक्त शिक्षण
सूत्र है —

(A) अमूर्त से मूर्त (B) मूर्त से अमूर्त (C) जटिल से सरल (D) अज्ञात से ज्ञात

प्रश्न 12. “उद्दीपन परिवर्तन कौशल” का मुख्य उद्देश्य है —

(A) गृहकार्य देना (B) छात्रों का ध्यान बनाए रखना (C) मूल्यांकन (D) पाठ समाप्त
करना

उत्तर कुंजी: 1-B, 2-B, 3-B, 4-B, 5-B, 6-B, 7-B, 8-C,
9-B, 10-B, 11-B, 12-B

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