UP Super TET Notes: आरंभिक पठन कौशल (Early Reading Skills) अध्याय 13 – बाल मनोविज्ञान नोट्स PDF Download

UP Super TET Notes: आरंभिक पठन कौशल (Early Reading Skills) अध्याय 13 – बाल मनोविज्ञान नोट्स PDF Download

UP SUPER TET 2026 • भाग 1 • अध्याय 13

आरंभिक पठन कौशल (Early Reading Skills) – चैप्टर-वार नोट्स

बाल मनोविज्ञान, शिक्षण कौशल एवं जीवन कौशल • सहायक अध्यापक (प्राथमिक स्तर, कक्षा 1–5) • उ.प्र. शिक्षा सेवा चयन आयोग

पठन का अर्थ , पूर्व-पठन तैयारी , ध्वनि-जागरूकता , पठन के प्रकार , शिक्षण विधियाँ , बोध , त्रुटियाँ , निपुण भारत – सब एक जगह।

विषय-सूची

क्र. अनुभाग
1 पठन : अर्थ, परिभाषाएँ एवं महत्व
2 भाषा कौशल एवं पठन का स्थान
3 पूर्व-पठन तैयारी एवं उदीयमान साक्षरता
4 पठन के पाँच आधार स्तंभ
5 पठन विकास की अवस्थाएँ
6 पठन के प्रकार
7 आरम्भिक पठन शिक्षण की विधियाँ
8 पठन बोध — स्तर एवं रणनीतियाँ
9 पठन संबंधी त्रुटियाँ, कारण एवं निवारण
10 कक्षा गतिविधियाँ, निपुण भारत एवं शिक्षक की भूमिका
11 परीक्षा उपयोगी तथ्य एवं अभ्यास प्रश्न
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पठन : अर्थ, परिभाषाएँ एवं महत्व

पठन (Reading) केवल अक्षरों को पहचानकर बोलना नहीं है — यह
लिखित प्रतीकों को पहचानकर उनका अर्थ ग्रहण करने की प्रक्रिया है।
“अर्थ के बिना पढ़ना, पढ़ना नहीं है” — पठन का अंतिम लक्ष्य
बोध (समझ) है।

विद्वान / स्रोत परिभाषा / विचार
केनेथ गुडमैन (1967) “पठन एक मनोभाषिक अनुमान का खेल (Psycholinguistic
guessing game) है” — पाठक संदर्भ, पूर्व ज्ञान और भाषा के आधार पर अनुमान
लगाते हुए
अर्थ बनाता है।
फ्रैंक स्मिथ पढ़ना अर्थ की खोज है; बच्चे पढ़कर ही पढ़ना सीखते
हैं
।
गफ़ एवं टनमर (1986) — पठन का सरल दृष्टिकोण पठन बोध = विसंकेतन (Decoding) × भाषा बोध (Language
Comprehension)
— किसी एक के शून्य होने पर बोध शून्य।
NCF 2005 / NCERT पढ़ना अर्थ निर्माण की सक्रिय प्रक्रिया है; बच्चे अपने
अनुभव और पूर्व ज्ञान से पाठ को जोड़कर अर्थ बनाते हैं।
सामान्य परिभाषा “लिखित भाषा के प्रतीकों को देखकर, उनकी ध्वनि पहचानकर, उनका अर्थ
ग्रहण करना
पठन है।”
लिखित प्रतीक देखना ➜ ध्वनि पहचानना (विसंकेतन) ➜ शब्द पहचानना ➜ अर्थ ग्रहण (बोध)
सूत्र: पठन = विसंकेतन (Decoding) + बोध (Comprehension)।
“पढ़ना सीखना” (Learning to read) — कक्षा 1–3;
“सीखने के लिए पढ़ना” (Reading to learn) — कक्षा 3/4 के
बाद।

◆ पठन का महत्व

  • सभी विषयों के अधिगम का आधार — गणित, विज्ञान,
    सामाजिक विज्ञान सब पढ़कर ही सीखे जाते हैं।

  • शब्द भंडार, भाषा और चिंतन का विकास।

  • कल्पनाशीलता और सृजनात्मकता — कहानियाँ,
    कविताएँ।

  • आत्मनिर्भर अधिगम और आजीवन सीखने की
    आदत।

  • आत्मविश्वास और सामाजिक
    सहभागिता
    ।

  • प्रारंभिक कक्षाओं में पठन की कमी आगे चलकर “मैथ्यू प्रभाव”
    (अच्छे पाठक और आगे, कमज़ोर और पीछे) पैदा करती है — कीथ स्टानोविच
    (1986)
    ।

2

भाषा कौशल एवं पठन का स्थान

सुनना (Listening) ➜ बोलना (Speaking) ➜ पढ़ना (Reading) ➜ लिखना (Writing)
कौशल प्रकृति माध्यम क्रम
सुनना ग्रहणात्मक (Receptive) मौखिक 1
बोलना अभिव्यक्तात्मक (Expressive / Productive) मौखिक 2
पढ़ना ग्रहणात्मक (Receptive) लिखित 3
लिखना अभिव्यक्तात्मक (Expressive / Productive) लिखित 4
ट्रिक — LSRW: Listening → Speaking
→ Reading → Writing;
ग्रहणात्मक = सुनना व पढ़ना (अर्थ ग्रहण करना);
अभिव्यक्तात्मक = बोलना व लिखना (अर्थ व्यक्त करना)।
  • मौखिक भाषा (सुनना-बोलना) पठन की
    नींव है — जिस शब्द को बच्चा बोल-समझ नहीं सकता, उसे पढ़कर समझना
    कठिन है।

  • बच्चा विद्यालय आने से पहले ही घर की भाषा में समृद्ध होता
    है — इसलिए मातृभाषा में आरंभिक पठन सबसे प्रभावी (NEP
    2020)।

  • NCF 2005 के अनुसार चारों कौशल एक साथ, एकीकृत रूप में
    विकसित होते हैं — कठोर क्रम आवश्यक नहीं।

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पूर्व-पठन तैयारी एवं उदीयमान साक्षरता

उदीयमान साक्षरता (Emergent Literacy) — यह शब्द
मैरी क्ले (1966, न्यूज़ीलैंड) ने दिया। इसका अर्थ है कि बच्चा
औपचारिक पठन से पहले ही — घर, परिवेश, चित्र, कहानियों, संकेतों से
— पढ़ने-लिखने की ओर बढ़ने लगता है। पठन तत्परता
(Reading Readiness)
वह अवस्था है जब बच्चा औपचारिक पठन के लिए तैयार
होता है।

पूर्व-पठन कौशल अर्थ गतिविधि
मौखिक भाषा विकास बोलना, सुनना, शब्द भंडार, वाक्य बनाना बातचीत, कविता, कहानी सुनाना
मुद्रण जागरूकता (Print Awareness) लिखित भाषा का अर्थ होता है; पुस्तक कैसे पकड़ें; बाएँ से दाएँ, ऊपर से
नीचे
पढ़ना; शब्दों के बीच दूरी
बड़ी पुस्तक, उँगली से पढ़कर दिखाना
ध्वनि-जागरूकता (Phonological Awareness) बोली गई भाषा की ध्वनियों को पहचानना तुकबंदी, ताली बजाकर शब्दांश गिनना
वर्ण ज्ञान (Alphabet Knowledge) अक्षरों के नाम, आकार और ध्वनि अक्षर कार्ड, अक्षर खेल
दृश्य विभेदीकरण आकृतियों व अक्षरों में अंतर पहचानना (ब-व, म-भ) मिलान खेल, अंतर पहचानो
श्रवण विभेदीकरण मिलती-जुलती ध्वनियों में अंतर (क-ख, द-ध) ध्वनि पहचानो खेल
कथा कौशल (Narrative skills) घटनाओं को क्रम से सुनाना चित्र देखकर कहानी
पढ़ने में रुचि (Print Motivation) पुस्तकों के प्रति लगाव पठन कोना, पढ़कर सुनाना
गामक व नेत्र-हस्त समन्वय आँखों का बाएँ से दाएँ चलना रेखाएँ खींचना, पैटर्न
मुद्रण-समृद्ध वातावरण (Print-rich Environment): कक्षा में
चार्ट, लेबल, नाम पट्टियाँ, शब्द-दीवार, कविता पोस्टर, पठन कोना, बाल
पुस्तकें, समाचार पत्र
— ताकि बच्चा हर समय लिखित भाषा के संपर्क में
रहे।
4

पठन के पाँच आधार स्तंभ

अमेरिका के राष्ट्रीय पठन पैनल (National Reading Panel,
2000)
ने प्रभावी आरंभिक पठन शिक्षण के पाँच आवश्यक घटक
बताए, जिन्हें “पठन के पाँच स्तंभ” कहते हैं।

ध्वनिम जागरूकता ➜ ध्वनि-वर्ण संबंध (फ़ोनिक्स) ➜ प्रवाह ➜ शब्द भंडार ➜ बोध
स्तंभ अर्थ उदाहरण / गतिविधि
1. ध्वनिम जागरूकता (Phonemic Awareness) शब्द की सबसे छोटी ध्वनियों (ध्वनिम) को सुनना, पहचानना और
बदलना — केवल मौखिक, लिखित नहीं
“कमल” में कितनी ध्वनियाँ? “कमल” से “क” हटाओ तो?
2. ध्वनि-वर्ण संबंध / फ़ोनिक्स (Phonics) अक्षर (वर्ण) और उसकी ध्वनि का संबंध; ध्वनियों को जोड़कर शब्द
पढ़ना
क + म + ल = कमल; मात्रा चार्ट
3. प्रवाह (Fluency) उचित गति, शुद्धता और भाव (आरोह-अवरोह) के साथ पढ़ना बार-बार पढ़ना, साथी पठन, पढ़कर सुनाना
4. शब्द भंडार (Vocabulary) शब्दों के अर्थ जानना — मौखिक व पठित चित्र-शब्द, संदर्भ से अर्थ, शब्द-दीवार
5. बोध (Comprehension) पढ़े हुए का अर्थ समझना — पठन का अंतिम लक्ष्य प्रश्न, सारांश, पूर्वानुमान

◆ ध्वनि-जागरूकता का क्रम (सरल से जटिल)

5. ध्वनिम परिवर्तन (जोड़ना, हटाना, बदलना) — सबसे
जटिल
4. ध्वनिम पहचान / विभाजन (क-म-ल)
3. आरंभिक व अंतिम ध्वनि पहचान
2. तुक पहचानना (Rhyme) — मोर / चोर
1. शब्द व शब्दांश जागरूकता (ताली से) — सबसे सरल

ध्वनि-जागरूकता — नीचे सरल, ऊपर जटिल

भेद याद रखें: ध्वनि-जागरूकता (Phonological awareness) =
बड़ा क्षेत्र (शब्द, शब्दांश, तुक, ध्वनिम) — सुनकर; ध्वनिम
जागरूकता (Phonemic awareness)
= केवल सबसे छोटी ध्वनियाँ;
फ़ोनिक्स = ध्वनि + लिखित अक्षर का
संबंध।
प्रवाह के तीन घटक: शुद्धता (Accuracy), गति
(Rate — शब्द प्रति मिनट)
, भावपूर्ण पठन (Prosody —
आरोह-अवरोह, विराम)
। प्रवाह को मौखिक पठन प्रवाह (ORF —
Oral Reading Fluency)
— सही शब्द प्रति मिनट — से
मापा जाता है।
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पठन विकास की अवस्थाएँ — जीन शैल (1983)

अवस्था आयु / कक्षा (लगभग) विशेषता
0. पूर्व-पठन (Pre-reading) जन्म – 6 वर्ष चित्र-पठन, कहानी सुनना, मुद्रण जागरूकता, अक्षर पहचान की शुरुआत
1. आरंभिक पठन / विसंकेतन (Initial Reading /
Decoding)
कक्षा 1 – 2 (6–7 वर्ष) अक्षर-ध्वनि संबंध; ध्वनियाँ जोड़कर शब्द पढ़ना
2. पुष्टि एवं प्रवाह (Confirmation & Fluency) कक्षा 2 – 3 (7–8 वर्ष) परिचित पाठ प्रवाह से पढ़ना; स्वचालित शब्द पहचान
3. सीखने के लिए पढ़ना (Reading to Learn) कक्षा 4 – 8 (9–14 वर्ष) नई जानकारी, ज्ञान प्राप्त करने के लिए पढ़ना
4. बहु-दृष्टिकोण (Multiple Viewpoints) माध्यमिक (14–18 वर्ष) विभिन्न दृष्टिकोणों का विश्लेषण
5. निर्माण एवं पुनर्निर्माण (Construction) 18 वर्ष से आगे आलोचनात्मक, सृजनात्मक पठन; अपना मत बनाना
पूर्व-पठन ➜ विसंकेतन ➜ प्रवाह ➜ सीखने के लिए पढ़ना ➜ बहु-दृष्टिकोण ➜ निर्माण
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पठन के प्रकार

◆ (क) सस्वर पठन बनाम मौन पठन

आधार सस्वर पठन (Loud / Oral Reading) मौन पठन (Silent Reading)
अर्थ ज़ोर से बोलकर पढ़ना बिना आवाज़ के, मन में पढ़ना
उपयुक्त स्तर प्रारंभिक कक्षाएँ (1–3) उच्च कक्षाएँ; धीरे-धीरे कक्षा 3 से
उद्देश्य शुद्ध उच्चारण, प्रवाह, आरोह-अवरोह, विराम शीघ्र बोध, अर्थ ग्रहण, एकाग्रता
गति धीमा तीव्र
इन्द्रियाँ आँख + वाणी + कान मुख्यतः आँख
लाभ उच्चारण दोष का पता; आत्मविश्वास; श्रोताओं का आनंद समय की बचत; गहरी समझ; स्वाध्याय; दैनिक जीवन में सर्वाधिक प्रयोग
दोष थकान; बोध पर कम ध्यान उच्चारण की जाँच नहीं; प्रारंभिक स्तर पर कठिन
सस्वर पठन के गुण: शुद्ध उच्चारण, उचित
गति
, उचित विराम (विराम चिह्नों का पालन),
आरोह-अवरोह, भावानुकूलता, स्पष्टता
व उचित ध्वनि-स्तर
, उचित मुद्रा (पुस्तक आँखों से लगभग 30
सेमी / 1 फुट दूर)।

◆ (ख) सस्वर पठन के प्रकार

प्रकार अर्थ
आदर्श पठन (Model Reading) शिक्षक द्वारा शुद्ध, भावपूर्ण पठन — बच्चे सुनकर सीखें
अनुकरण पठन (Imitative Reading) बच्चे शिक्षक के आदर्श पठन का अनुकरण करते हैं
सामूहिक पठन (Choral Reading) पूरी कक्षा एक साथ — संकोची बच्चों के लिए उपयोगी, विशेषकर कविता
व्यक्तिगत पठन हर बच्चा अलग-अलग — उच्चारण दोषों की पहचान
साथी / जोड़ी पठन (Paired Reading) दो बच्चे बारी-बारी से पढ़ें
क्रम: आदर्श पठन → अनुकरण पठन → सामूहिक पठन → व्यक्तिगत पठन → मौन
पठन

◆ (ग) उद्देश्य के आधार पर पठन के प्रकार

प्रकार अर्थ उदाहरण
गहन पठन (Intensive) बारीकी से, हर शब्द समझते हुए — भाषा व बोध पाठ्यपुस्तक का अध्याय
विस्तृत पठन (Extensive) आनंद और सामान्य ज्ञान के लिए अधिक सामग्री कहानी की पुस्तकें, समाचार पत्र
सरसरी पठन (Skimming) मुख्य विचार / सार जानने के लिए तेज़ी से शीर्षक, पहला अनुच्छेद देखना
खोजपूर्ण / विशिष्ट पठन (Scanning) विशेष जानकारी खोजने के लिए समय-सारणी में ट्रेन का समय, शब्दकोश में शब्द
आलोचनात्मक पठन मूल्यांकन और तर्क के साथ संपादकीय, विज्ञापन का विश्लेषण
भेद: Skimming = सार (Gist) जानना;
Scanning = विशिष्ट जानकारी खोजना।
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आरम्भिक पठन शिक्षण की विधियाँ

संश्लेषणात्मक — अंश से पूर्ण (वर्ण → शब्द → वाक्य) ➜ विश्लेषणात्मक — पूर्ण से अंश (वाक्य → शब्द → वर्ण)
आधार संश्लेषणात्मक विधियाँ (Synthetic) विश्लेषणात्मक विधियाँ (Analytic)
क्रम अंश से पूर्ण — वर्ण / ध्वनि से शब्द, शब्द से वाक्य पूर्ण से अंश — वाक्य / शब्द से वर्ण
उदाहरण वर्णबोध विधि, ध्वनि साम्य विधि, अक्षर विधि देखो और कहो, शब्द विधि, वाक्य विधि, कहानी विधि
आधार तार्किक मनोवैज्ञानिक — गेस्टाल्ट (पूर्ण का प्रत्यक्षीकरण)
अर्थ पर बल कम (प्रारंभ में) अधिक — शुरू से अर्थपूर्ण
रुचि नीरस हो सकती है अधिक रुचिकर

◆ प्रमुख विधियाँ

विधि प्रक्रिया गुण दोष
वर्णबोध / अक्षर विधि (Alphabetic) पहले सभी वर्णों के नाम और आकार, फिर मात्राएँ, फिर शब्द (“अ
से अनार”)
सबसे प्राचीन; वर्णों का पूर्ण ज्ञान अमनोवैज्ञानिक, नीरस; वर्ण नाम और ध्वनि में भ्रम; अर्थ से
दूर
ध्वनि साम्य / ध्वनि विधि (Phonic) वर्णों की ध्वनियाँ सिखाकर उन्हें जोड़ना; समान ध्वनि
वाले
शब्दों का समूह (कल, जल, फल)
हिंदी जैसी ध्वन्यात्मक लिपि के लिए उपयुक्त; स्वतंत्र पठन अर्थ पर कम ध्यान; अकेली ध्वनियाँ नीरस
अनुध्वनि / अनुकरण विधि शिक्षक बोलता है, बच्चे दोहराते हैं उच्चारण सुधार रटने की प्रवृत्ति
देखो और कहो विधि (Look and Say) चित्र के साथ पूरा शब्द दिखाना; शब्द को एक इकाई के रूप में
पहचानना
मनोवैज्ञानिक, रुचिकर; अर्थ सहित नए शब्द स्वतंत्र रूप से पढ़ने में कठिनाई
शब्द विधि (Word Method) पहले परिचित शब्द, फिर उनके वर्णों का विश्लेषण अर्थपूर्ण; परिचित से अपरिचित वर्ण ज्ञान देर से
वाक्य विधि (Sentence Method) पहले छोटे अर्थपूर्ण वाक्य, फिर शब्द, फिर वर्ण गेस्टाल्ट आधारित; पूर्ण विचार; प्रवाह शिक्षक पर अधिक निर्भर; समय अधिक
कहानी विधि (Story Method) छोटी कहानी से वाक्य, शब्द, वर्ण सर्वाधिक रुचिकर सामग्री तैयार करना कठिन
लय / गीत विधि कविता व गीत द्वारा आनंददायक; स्मरण सहायक —
साहचर्य विधि (मॉण्टेसरी) बालू / रेगमाल के उभरे अक्षरों को छूकर पढ़ना-लिखना —
बहु-संवेदी
इन्द्रिय प्रशिक्षण; स्थायी अधिगम सामग्री की आवश्यकता
अनुभव कथन विधि (Language Experience) बच्चे के अपने अनुभव को शिक्षक लिखता है, बच्चा वही पढ़ता
है
व्यक्तिगत, अर्थपूर्ण —
संतुलित साक्षरता (Balanced Literacy): आधुनिक दृष्टि —
फ़ोनिक्स (ध्वनि-वर्ण) और संपूर्ण भाषा (Whole Language
— अर्थ, कहानी, वास्तविक पुस्तकें)
दोनों का संतुलित प्रयोग। NCERT की
“बरखा” पुस्तकमाला — छोटी, चित्रमय, परिचित भाषा वाली
कहानियाँ — आरंभिक पठन के लिए।
हिंदी के लिए: देवनागरी ध्वन्यात्मक
(Phonetic)
लिपि है — जैसा लिखा जाता है, वैसा ही पढ़ा जाता
है
— इसलिए ध्वनि विधि और अक्षर-ध्वनि
संबंध
हिंदी पठन में विशेष प्रभावी।
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पठन बोध — स्तर एवं रणनीतियाँ

◆ (क) पठन बोध के स्तर (बैरेट का वर्गीकरण)

4. सृजनात्मक (Creative) — “कहानी का नया अंत लिखो”
3. आलोचनात्मक / मूल्यांकनात्मक — “क्या राजा ने सही
किया?”
2. अनुमानात्मक (Inferential) — “राजा उदास क्यों
था?”
1. शाब्दिक (Literal) — “राजा का नाम क्या था?”

पठन बोध के स्तर — नीचे शाब्दिक, ऊपर सृजनात्मक

स्तर अर्थ प्रश्न का प्रकार
शाब्दिक (Literal) पाठ में सीधे दी गई जानकारी समझना कौन, क्या, कब, कहाँ — उत्तर पाठ में
अनुमानात्मक (Inferential) “पंक्तियों के बीच” पढ़ना — अप्रत्यक्ष अर्थ, कारण-परिणाम क्यों, कैसे, क्या होगा
आलोचनात्मक (Critical / Evaluative) पाठ का मूल्यांकन, तथ्य-राय में अंतर, सहमति-असहमति क्या यह उचित है? तुम्हारा क्या विचार है?
सृजनात्मक (Creative) पाठ से आगे जाकर नया सृजन नया अंत, पात्र के रूप में लिखो

◆ (ख) पठन बोध की रणनीतियाँ

रणनीति प्रवर्तक विवरण
KWL चार्ट डोना ओगल (1986) K — मैं क्या जानता हूँ (Know), W — क्या
जानना चाहता हूँ (Want), L — क्या सीखा (Learned)
SQ3R फ्रांसिस पी. रॉबिन्सन (1946) Survey (सर्वेक्षण), Question (प्रश्न),
Read (पढ़ना), Recite (दोहराना),
Review (पुनरावलोकन)
पारस्परिक शिक्षण (Reciprocal Teaching) पैलिंक्सर एवं ब्राउन (1984) पूर्वानुमान, प्रश्न पूछना, स्पष्टीकरण, सारांश — बच्चे
बारी-बारी से “शिक्षक” बनते हैं
पूर्वानुमान (Prediction) — शीर्षक / चित्र देखकर अनुमान — “आगे क्या होगा?”
पूर्व ज्ञान सक्रिय करना — पाठ को बच्चे के अनुभव से जोड़ना (स्कीमा)
दृश्यांकन (Visualization) — पढ़ते समय मन में चित्र बनाना
सारांश लेखन — मुख्य विचार अपने शब्दों में
ग्राफ़िक ऑर्गनाइज़र — कहानी मानचित्र, वेन आरेख, घटना क्रम
प्रश्न पूछना — पढ़ने से पहले, दौरान और बाद में
ट्रिक: SQ3R = Survey,
Question, Read,
Recite, Review (3 R);
KWL = जानता हूँ → जानना चाहता हूँ → सीखा; पारस्परिक
शिक्षण
= “पू-प्र-स्प-सा“।

◆ (ग) पठन की तीन अवस्थाओं में गतिविधियाँ

पठन से पहले (Pre-reading) पठन के दौरान (While-reading) पठन के बाद (Post-reading)
शीर्षक व चित्र पर चर्चा रुककर प्रश्न पूछना प्रश्नोत्तर (सभी स्तरों के)
पूर्वानुमान पूर्वानुमान की जाँच कहानी का पुनर्कथन
पूर्व ज्ञान से जोड़ना कठिन शब्दों का संदर्भ से अर्थ नाटक / भूमिका अभिनय
नए शब्दों का परिचय दृश्यांकन चित्र बनाना, नया अंत लिखना
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पठन संबंधी त्रुटियाँ, कारण एवं निवारण

त्रुटि / दोष उदाहरण
अशुद्ध उच्चारण “स्कूल” को “इस्कूल”, “श” को “स”
अटक-अटक कर पढ़ना शब्द-दर-शब्द रुककर पढ़ना
शब्द / पंक्ति छोड़ना बीच की पंक्ति छूट जाना
शब्द जोड़ना या बदलना पाठ में न होने वाला शब्द बोलना
दोहराना एक ही शब्द बार-बार पढ़ना
वर्ण उलटना ब-व, म-भ, प-ष में भ्रम; शब्द उल्टे पढ़ना
उँगली रखकर पढ़ना (उच्च कक्षाओं में) —
मौन पठन में होंठ हिलाना / बुदबुदाना —
विराम चिह्नों की उपेक्षा भावहीन, एक-सुर में पढ़ना
अत्यधिक धीमा या तेज़ पठन —
पढ़ा हुआ न समझ पाना विसंकेतन ठीक, पर बोध नहीं
पुस्तक बहुत पास / दूर रखना; सिर हिलाना —
कारण निवारण
शारीरिक — दृष्टि दोष, श्रवण दोष, वाक् दोष नेत्र / कान की जाँच; उचित प्रकाश; चिकित्सक से परामर्श
मनोवैज्ञानिक — भय, संकोच, आत्मविश्वास की कमी, रुचि का
अभाव
भयमुक्त वातावरण; प्रशंसा; रोचक सामग्री; गलती पर उपहास नहीं
भाषायी — घर की भाषा / बोली का प्रभाव, कम शब्द
भंडार
मातृभाषा को सेतु बनाना; मौखिक भाषा विकास; शब्द खेल
शैक्षिक — दोषपूर्ण शिक्षण विधि, आदर्श पठन का अभाव, अभ्यास
की कमी
उपयुक्त विधि; शिक्षक का आदर्श पठन; नियमित अभ्यास
अधिगम अक्षमता — डिस्लेक्सिया बहु-संवेदी शिक्षण, ध्वनि-आधारित अभ्यास (विस्तार — अध्याय 8)
वातावरणीय — घर पर पुस्तकों / पढ़ने के वातावरण का
अभाव
विद्यालय में पठन कोना, पुस्तकालय, अभिभावक जागरूकता
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कक्षा गतिविधियाँ, निपुण भारत एवं शिक्षक की भूमिका

◆ आरम्भिक पठन हेतु कक्षा गतिविधियाँ

गतिविधि विवरण
पढ़कर सुनाना (Read Aloud) शिक्षक द्वारा भावपूर्ण कहानी वाचन — रुचि व शब्द भंडार
साझा पठन (Shared Reading) बड़ी पुस्तक (Big Book) से शिक्षक व बच्चे साथ पढ़ें; शिक्षक
उँगली से शब्द दिखाए
निर्देशित पठन (Guided Reading) छोटे समूह में स्तर के अनुसार पुस्तक; शिक्षक मार्गदर्शन
स्वतंत्र पठन बच्चे अपनी रुचि की पुस्तक स्वयं पढ़ें — पठन कोना
चित्र पठन चित्र देखकर कहानी बनाना — पूर्व-पठन
कविता व तुकबंदी ध्वनि-जागरूकता; लय
फ़्लैश कार्ड, शब्द कार्ड शब्द पहचान
शब्द-दीवार (Word Wall) नए व बार-बार आने वाले शब्द दीवार पर
अक्षर-शब्द खेल शब्द सीढ़ी, शब्द जाल, अक्षर से शब्द बनाओ, अंताक्षरी
कठपुतली, नाटक, भूमिका अभिनय मौखिक भाषा व बोध
पुस्तकालय घंटा / पठन मेला पढ़ने की आदत

◆ निपुण भारत मिशन (2021) — पठन से संबंधित

  • NIPUN — National Initiative for Proficiency in Reading
    with Understanding and Numeracy
    — 5 जुलाई 2021
    को प्रारंभ; NEP 2020 की अनुशंसा पर।

  • लक्ष्य — कक्षा 3 के अंत तक (2026–27 तक) हर बच्चा
    समझ के साथ पढ़ना-लिखना और बुनियादी गणित सीखे —
    आधारभूत साक्षरता एवं संख्या ज्ञान (FLN)।

  • मौखिक पठन प्रवाह (ORF) — कक्षा 3 के अंत तक लगभग
    60 शब्द प्रति मिनट समझ के साथ पढ़ने का लक्ष्य (कक्षावार लक्ष्य
    निर्धारित)।

  • उत्तर प्रदेश में “निपुण उत्तर प्रदेश” और “मिशन
    प्रेरणा”
    के अंतर्गत FLN पर कार्य।

  • NEP 2020: “आधारभूत साक्षरता और संख्या ज्ञान सर्वोच्च
    प्राथमिकता”
    ; मातृभाषा / स्थानीय भाषा में शिक्षा — कम
    से कम कक्षा 5 तक, अधिमानतः कक्षा 8 तक।

◆ शिक्षक की भूमिका

शिक्षक को क्या करना चाहिए
मौखिक भाषा से शुरुआत — बच्चे की घर की भाषा को
सेतु बनाना
मुद्रण-समृद्ध कक्षा; पठन कोना; रोचक,
चित्रमय, स्तरानुसार पुस्तकें
स्वयं आदर्श पाठक बनना — भावपूर्ण पठन
अर्थ पर बल — केवल अक्षर पहचान नहीं, बोध
ध्वनि-जागरूकता और फ़ोनिक्स का व्यवस्थित अभ्यास
सभी बोध-स्तरों के प्रश्न — शाब्दिक से सृजनात्मक तक
त्रुटियों पर उपहास नहीं — सहज सुधार; धैर्य
पठन स्तर का नियमित आकलन (ORF, बोध प्रश्न) और
उपचारात्मक सहायता
अभिभावकों को घर पर कहानी सुनाने व पुस्तकें उपलब्ध कराने के
लिए प्रेरित करना
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परीक्षा उपयोगी तथ्य एवं अभ्यास प्रश्न

◆ (क) एक पंक्ति में महत्वपूर्ण तथ्य

प्रश्न उत्तर
पठन का अंतिम लक्ष्य बोध (अर्थ ग्रहण)
“पठन एक मनोभाषिक अनुमान का खेल” केनेथ गुडमैन (1967)
पठन बोध = विसंकेतन × भाषा बोध गफ़ एवं टनमर (1986)
भाषा कौशलों का क्रम सुनना, बोलना, पढ़ना, लिखना (LSRW)
ग्रहणात्मक कौशल सुनना और पढ़ना
उदीयमान साक्षरता मैरी क्ले (1966)
पठन के 5 स्तंभ राष्ट्रीय पठन पैनल (2000)
पठन विकास की अवस्थाएँ जीन शैल (1983)
मैथ्यू प्रभाव कीथ स्टानोविच (1986)
प्रारंभिक कक्षाओं के लिए उपयुक्त पठन सस्वर पठन
शीघ्र बोध हेतु मौन पठन
सार जानने हेतु तेज़ पठन Skimming
विशिष्ट जानकारी खोजना Scanning
अंश से पूर्ण की विधियाँ संश्लेषणात्मक (वर्णबोध, ध्वनि)
पूर्ण से अंश की विधियाँ विश्लेषणात्मक (देखो-कहो, वाक्य, कहानी)
सबसे प्राचीन पठन विधि वर्णबोध / अक्षर विधि
गेस्टाल्ट पर आधारित विधि वाक्य विधि
KWL चार्ट डोना ओगल (1986)
SQ3R फ्रांसिस रॉबिन्सन (1946)
पारस्परिक शिक्षण पैलिंक्सर एवं ब्राउन (1984)
“पंक्तियों के बीच” पढ़ना अनुमानात्मक बोध
निपुण भारत का प्रारंभ 5 जुलाई 2021

◆ (ख) भ्रम से बचें

  • ध्वनि-जागरूकता मौखिक है (सुनकर),
    फ़ोनिक्स में लिखित अक्षर शामिल हैं।

  • वर्णबोध विधि वर्णों के नाम सिखाती
    है, ध्वनि विधि वर्णों की ध्वनि।

  • Skimming = सार, Scanning = विशिष्ट
    जानकारी
    ।

  • प्रारंभिक कक्षाओं में सस्वर, उच्च कक्षाओं में
    मौन पठन अधिक उपयुक्त।

  • पढ़ना सीखना (कक्षा 1–3) बनाम सीखने के लिए
    पढ़ना
    (कक्षा 4+)।

◆ (ग) अभ्यास प्रश्न (MCQ)

प्रश्न 1. पठन का मुख्य उद्देश्य है —

(A) तेज़ बोलना (B) अक्षर पहचानना (C) अर्थ ग्रहण करना (D) सुलेख

प्रश्न 2. निम्न में से ग्रहणात्मक भाषा कौशल हैं —

(A) बोलना व लिखना (B) सुनना व पढ़ना (C) पढ़ना व लिखना (D) सुनना व
बोलना

प्रश्न 3. “कमल” शब्द में से “क” ध्वनि हटाने को कहना किसका
अभ्यास है?

(A) फ़ोनिक्स (B) ध्वनिम जागरूकता (C) प्रवाह (D) शब्द भंडार

प्रश्न 4. प्रारंभिक कक्षाओं में शुद्ध उच्चारण के लिए उपयुक्त पठन है
—

(A) मौन पठन (B) सस्वर पठन (C) सरसरी पठन (D) विस्तृत पठन

प्रश्न 5. रेलवे समय-सारणी में किसी विशेष ट्रेन का समय खोजना
कहलाता है —

(A) Skimming (B) Scanning (C) गहन पठन (D) आलोचनात्मक पठन

प्रश्न 6. “पूर्ण से अंश की ओर” पर आधारित पठन विधि है —

(A) वर्णबोध विधि (B) ध्वनि विधि (C) वाक्य विधि (D) अक्षर विधि

प्रश्न 7. “राजा उदास क्यों था?” — यदि उत्तर पाठ में सीधा
नहीं दिया है, तो यह बोध का कौन-सा स्तर है?

(A) शाब्दिक (B) अनुमानात्मक (C) सृजनात्मक (D) कोई नहीं

प्रश्न 8. SQ3R में “S” का अर्थ है —

(A) Summary (B) Survey (C) Speak (D) Spell

प्रश्न 9. “उदीयमान साक्षरता” शब्द किसने दिया?

(A) गुडमैन (B) मैरी क्ले (C) जीन शैल (D) स्टानोविच

प्रश्न 10. प्रवाहपूर्ण पठन के घटक हैं —

(A) शुद्धता, गति, भाव (B) केवल गति (C) केवल ज़ोर से पढ़ना (D) केवल वर्तनी

प्रश्न 11. “बड़ी पुस्तक” (Big Book) का प्रयोग मुख्यतः किस
गतिविधि में होता है?

(A) मौन पठन (B) साझा पठन (C) परीक्षा (D) श्रुतलेख

प्रश्न 12. निपुण भारत मिशन का लक्ष्य है कि कक्षा ___ के अंत
तक हर बच्चा समझ के साथ पढ़ सके —

(A) 1 (B) 3 (C) 5 (D) 8

उत्तर कुंजी: 1-C, 2-B, 3-B, 4-B, 5-B, 6-C, 7-B, 8-B,
9-B, 10-A, 11-B, 12-B

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