UP Super TET Notes: वर्तमान भारतीय समाज एवं प्रारम्भिक शिक्षा अध्याय 14 – बाल मनोविज्ञान नोट्स PDF Download

UP Super TET Notes: वर्तमान भारतीय समाज एवं प्रारम्भिक शिक्षा अध्याय 14 – बाल मनोविज्ञान नोट्स PDF Download

UP SUPER TET 2026 • भाग 1 • अध्याय 14

वर्तमान भारतीय समाज एवं प्रारम्भिक शिक्षा – चैप्टर-वार नोट्स

बाल मनोविज्ञान, शिक्षण कौशल एवं जीवन कौशल • सहायक अध्यापक (प्राथमिक स्तर, कक्षा 1–5) • उ.प्र. शिक्षा सेवा चयन आयोग

भारतीय समाज , सामाजिक परिवर्तन , समाजीकरण , संवैधानिक प्रावधान , आयोग व नीतियाँ , RTE 2009 , NEP 2020 , चुनौतियाँ – सब एक जगह।

विषय-सूची

क्र. अनुभाग
1 वर्तमान भारतीय समाज की विशेषताएँ
2 सामाजिक परिवर्तन की प्रक्रियाएँ
3 समाज एवं शिक्षा का संबंध तथा समाजीकरण
4 प्रारम्भिक शिक्षा : अर्थ, उद्देश्य एवं सार्वभौमिकरण
5 प्रारम्भिक शिक्षा के संवैधानिक प्रावधान
6 शिक्षा आयोग, समितियाँ एवं नीतियाँ
7 निःशुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009
8 राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 एवं प्रमुख योजनाएँ
9 प्रारम्भिक शिक्षा की चुनौतियाँ एवं समसामयिक मुद्दे
10 समाज में विद्यालय एवं शिक्षक की भूमिका
11 परीक्षा उपयोगी तथ्य एवं अभ्यास प्रश्न
1

वर्तमान भारतीय समाज की विशेषताएँ

भारतीय समाज विश्व के सबसे विविधतापूर्ण समाजों में से एक है —
यहाँ अनेक धर्म, भाषाएँ, जातियाँ, संस्कृतियाँ और क्षेत्रीय पहचानें
साथ-साथ रहती हैं। वर्तमान भारतीय समाज परंपरा और आधुनिकता के
संक्रमण
के दौर से गुज़र रहा है, और शिक्षा इस परिवर्तन का सबसे बड़ा
साधन
है।

विशेषता व्याख्या
विविधता में एकता धर्म, भाषा, जाति, वेशभूषा, खान-पान की विविधता के बावजूद राष्ट्रीय एकता
बहुभाषी समाज संविधान की आठवीं अनुसूची में 22 भाषाएँ; सैकड़ों बोलियाँ
बहुधार्मिक एवं धर्मनिरपेक्ष सभी धर्मों को समान सम्मान — 42वाँ संशोधन (1976) से
“पंथनिरपेक्ष” शब्द प्रस्तावना में
जाति व्यवस्था परंपरागत सामाजिक स्तरीकरण; संविधान द्वारा अस्पृश्यता का उन्मूलन
(अनुच्छेद 17)
ग्राम-प्रधान अधिकांश जनसंख्या गाँवों में; कृषि प्रधान अर्थव्यवस्था
परिवार व्यवस्था संयुक्त परिवार से एकल परिवार की ओर परिवर्तन
लोकतांत्रिक समानता, स्वतंत्रता, न्याय और बंधुत्व के मूल्य
पितृसत्तात्मक प्रवृत्ति लैंगिक असमानता की चुनौती; तेज़ी से बदलाव
आर्थिक असमानता अमीर-गरीब, ग्रामीण-शहरी अंतर
युवा जनसंख्या विश्व की सबसे बड़ी युवा जनसंख्या — “जनसांख्यिकीय लाभांश”
संक्रमणशील समाज आधुनिकीकरण, नगरीकरण, वैश्वीकरण, तकनीकी परिवर्तन
2

सामाजिक परिवर्तन की प्रक्रियाएँ

प्रक्रिया अर्थ संबंधित विद्वान / उदाहरण
संस्कृतीकरण (Sanskritization) निम्न जातियों द्वारा उच्च जातियों के रीति-रिवाज़, खान-पान,
जीवन-शैली
अपनाकर सामाजिक स्थिति ऊँची करना
एम. एन. श्रीनिवास (1952, “Religion and Society among
the Coorgs”)
पश्चिमीकरण (Westernization) पश्चिमी देशों (विशेषकर ब्रिटिश) की जीवन-शैली, वेशभूषा, विचार,
तकनीक
अपनाना
एम. एन. श्रीनिवास
आधुनिकीकरण (Modernization) तार्किकता, वैज्ञानिक दृष्टिकोण, लोकतंत्र, औद्योगीकरण की ओर
परिवर्तन
योगेंद्र सिंह (Modernization of Indian Tradition)
नगरीकरण (Urbanization) गाँवों से शहरों की ओर प्रवास; शहरों का विस्तार झुग्गी-बस्तियाँ, एकल परिवार
औद्योगीकरण (Industrialization) कृषि से उद्योग-आधारित अर्थव्यवस्था रोज़गार के नए अवसर
वैश्वीकरण (Globalization) विश्व का आर्थिक, सांस्कृतिक और तकनीकी रूप से एकीकरण भारत में 1991 के आर्थिक सुधार (LPG)
धर्मनिरपेक्षीकरण (Secularization) सामाजिक जीवन पर धर्म के प्रभाव में कमी; तर्क का महत्व —
डिजिटलीकरण तकनीक और इंटरनेट का प्रसार डिजिटल इंडिया (2015), ऑनलाइन शिक्षा
ट्रिक: संस्कृतीकरण = “ऊपर की जाति” की नकल;
पश्चिमीकरण = “पश्चिम” की नकल — दोनों एम. एन.
श्रीनिवास
; आधुनिकीकरण = तर्क व विज्ञान की ओर।
3

समाज एवं शिक्षा का संबंध तथा समाजीकरण

शिक्षा और समाज परस्पर पूरक हैं — समाज अपनी संस्कृति,
मूल्य और ज्ञान
शिक्षा द्वारा अगली पीढ़ी को देता है, और शिक्षा
समाज को बदलने और सुधारने का साधन है।

विद्वान कथन
जॉन ड्यूई “विद्यालय समाज का लघु रूप (Miniature society) है।” / “शिक्षा सामाजिक
प्रगति और सुधार का मूल साधन है।”
एमिल दुर्खीम “शिक्षा युवा पीढ़ी का व्यवस्थित समाजीकरण है।”
कोठारी आयोग “भारत का भविष्य उसकी कक्षाओं में आकार ले रहा है।“
महात्मा गांधी “शिक्षा से मेरा तात्पर्य बालक और मनुष्य के शरीर, मन और आत्मा के सर्वांगीण विकास
से है।”
शिक्षा के सामाजिक कार्य
संस्कृति का संरक्षण व हस्तांतरण — एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी
तक
समाजीकरण — सामाजिक नियम, मूल्य, भूमिकाएँ सिखाना
सामाजिक परिवर्तन और आधुनिकीकरण का
साधन
सामाजिक गतिशीलता — शिक्षा से सामाजिक-आर्थिक स्थिति में
सुधार
सामाजिक न्याय व समानता — वंचित वर्गों का सशक्तिकरण
राष्ट्रीय एकता और लोकतांत्रिक नागरिकता
का विकास
आर्थिक विकास — कुशल मानव संसाधन

◆ समाजीकरण (Socialization)

समाजीकरण वह प्रक्रिया है जिसके द्वारा बच्चा समाज के
नियम, मूल्य, भाषा, व्यवहार और भूमिकाएँ
सीखकर सामाजिक
प्राणी
बनता है।

प्रकार अभिकरण
प्राथमिक समाजीकरण परिवार — सबसे पहला और सबसे महत्वपूर्ण अभिकरण
द्वितीयक समाजीकरण विद्यालय, साथी समूह, समुदाय, धार्मिक संस्थाएँ, जनसंचार माध्यम, कार्यस्थल
शिक्षा के अभिकरण उदाहरण विशेषता
औपचारिक (Formal) विद्यालय, महाविद्यालय निश्चित पाठ्यक्रम, समय, प्रमाणपत्र, प्रशिक्षित शिक्षक
अनौपचारिक (Informal) परिवार, समुदाय, साथी, मीडिया, खेल स्वाभाविक, असंगठित, जीवनभर
निरौपचारिक (Non-formal) मुक्त विद्यालय (NIOS), प्रौढ़ शिक्षा, दूरस्थ शिक्षा लचीला समय व स्थान, विशेष समूहों के लिए
सक्रिय एवं निष्क्रिय अभिकरण: सक्रिय — जहाँ शिक्षक और छात्र
दोनों सक्रिय (परिवार, विद्यालय); निष्क्रिय — जहाँ प्रभाव
एकतरफ़ा (रेडियो, टेलीविज़न, समाचार पत्र)।
4

प्रारम्भिक शिक्षा : अर्थ, उद्देश्य एवं सार्वभौमिकरण

प्रारम्भिक शिक्षा (Elementary Education) से तात्पर्य
कक्षा 1 से 8 तक की शिक्षा (6–14 वर्ष) से है
— प्राथमिक (कक्षा 1–5) और उच्च प्राथमिक (कक्षा
6–8)
। यह सम्पूर्ण शिक्षा व्यवस्था की नींव है।

स्तर कक्षाएँ आयु (लगभग)
पूर्व-प्राथमिक / ECCE आंगनवाड़ी, बालवाटिका 3 – 6 वर्ष
प्राथमिक (Primary) 1 – 5 6 – 11 वर्ष
उच्च प्राथमिक (Upper Primary) 6 – 8 11 – 14 वर्ष
प्रारम्भिक (Elementary) = प्राथमिक + उच्च प्राथमिक 1 – 8 6 – 14 वर्ष
प्रारम्भिक शिक्षा के उद्देश्य
आधारभूत साक्षरता और संख्या ज्ञान — पढ़ना, लिखना,
गणना
सर्वांगीण विकास — शारीरिक, मानसिक, सामाजिक, संवेगात्मक,
नैतिक
अच्छी आदतें, स्वास्थ्य और स्वच्छता
जिज्ञासा, सृजनात्मकता और वैज्ञानिक दृष्टिकोण
जीवन कौशल और नैतिक मूल्य
लोकतांत्रिक नागरिकता और पर्यावरण
चेतना
मातृभाषा और संस्कृति से जुड़ाव

◆ प्रारम्भिक शिक्षा का सार्वभौमिकरण (UEE)

सार्वभौमिक पहुँच (Access) ➜ सार्वभौमिक नामांकन (Enrolment) ➜ सार्वभौमिक ठहराव (Retention) ➜ गुणवत्ता / उपलब्धि (Quality)
घटक अर्थ उपाय
पहुँच हर बच्चे के पास विद्यालय पड़ोस में विद्यालय — प्राथमिक 1 किमी, उच्च प्राथमिक 3 किमी
(RTE नियम)
नामांकन 6–14 वर्ष के सभी बच्चे विद्यालय में स्कूल चलो अभियान, नामांकन अभियान
ठहराव बच्चे बीच में पढ़ाई न छोड़ें मध्याह्न भोजन, निःशुल्क पुस्तकें-गणवेश, रोचक शिक्षण
गुणवत्ता बच्चे वास्तव में सीखें प्रशिक्षित शिक्षक, अधिगम परिणाम, FLN, CCE
सकल नामांकन अनुपात (GER): किसी स्तर पर कुल
नामांकित छात्र ÷ उस आयु-वर्ग की कुल जनसंख्या × 100
; शुद्ध नामांकन
अनुपात (NER)
में केवल उचित आयु-वर्ग के नामांकित छात्र
गिने जाते हैं।
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प्रारम्भिक शिक्षा के संवैधानिक प्रावधान

अनुच्छेद प्रावधान
अनुच्छेद 21A 6–14 वर्ष के सभी बच्चों को निःशुल्क और अनिवार्य
शिक्षा
का मौलिक अधिकार — 86वाँ संविधान
संशोधन (2002)
अनुच्छेद 45 (नीति निदेशक तत्व) मूल रूप से 14 वर्ष तक निःशुल्क व अनिवार्य शिक्षा; 86वें संशोधन के बाद —
6 वर्ष तक के बच्चों की प्रारंभिक बाल्यावस्था देखरेख और शिक्षा
(ECCE)
अनुच्छेद 51A(k) (मौलिक कर्तव्य) माता-पिता / संरक्षक का कर्तव्य — 6–14 वर्ष के बच्चे को
शिक्षा के अवसर देना (86वें संशोधन से जोड़ा गया — 11वाँ मौलिक
कर्तव्य
)
अनुच्छेद 46 अनुसूचित जाति, जनजाति और कमज़ोर वर्गों के शैक्षिक व आर्थिक
हितों की अभिवृद्धि
अनुच्छेद 29 अल्पसंख्यकों की भाषा, लिपि, संस्कृति का संरक्षण; सरकारी
संस्थाओं में प्रवेश में भेदभाव निषेध
अनुच्छेद 30 अल्पसंख्यकों को अपनी शिक्षण संस्थाएँ स्थापित और संचालित करने
का अधिकार
अनुच्छेद 28 सरकारी संस्थाओं में धार्मिक शिक्षा का निषेध
अनुच्छेद 350A भाषायी अल्पसंख्यकों के बच्चों को प्राथमिक स्तर पर मातृभाषा में
शिक्षा
की सुविधा
अनुच्छेद 350B भाषायी अल्पसंख्यकों के लिए विशेष अधिकारी
अनुच्छेद 15(3), 15(4), 15(5) महिलाओं-बच्चों व पिछड़े वर्गों के लिए विशेष प्रावधान; शिक्षण संस्थानों में आरक्षण
(15(5) — 93वाँ संशोधन 2005)
अनुच्छेद 24 14 वर्ष से कम आयु के बच्चों को कारख़ानों, खानों व ख़तरनाक
कार्यों में लगाने का निषेध
अनुच्छेद 39(e), 39(f) बच्चों का शोषण न हो; स्वस्थ विकास के अवसर
42वाँ संशोधन (1976) शिक्षा को राज्य सूची से समवर्ती सूची में स्थानांतरित
किया
ट्रिक: 86वाँ संशोधन (2002) → तीन परिवर्तन: 21A
जोड़ा
(मौलिक अधिकार), 45 बदला (ECCE, 6 वर्ष तक),
51A(k) जोड़ा (माता-पिता का कर्तव्य)। 42वाँ संशोधन
(1976)
→ शिक्षा समवर्ती सूची में।
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शिक्षा आयोग, समितियाँ एवं नीतियाँ

वर्ष आयोग / नीति प्रारम्भिक शिक्षा से संबंधित मुख्य बिंदु
1854 वुड का घोषणा पत्र (Wood’s Despatch) “भारतीय शिक्षा का मैग्नाकार्टा“; जन शिक्षा, प्राथमिक
शिक्षा में मातृभाषा, अनुदान प्रणाली
1882 हंटर आयोग (भारतीय शिक्षा आयोग) प्राथमिक शिक्षा पर विशेष बल; स्थानीय निकायों को
उत्तरदायित्व
1910–11 गोपाल कृष्ण गोखले का विधेयक निःशुल्क व अनिवार्य प्राथमिक शिक्षा की माँग (अस्वीकृत)
1937 वर्धा योजना / बुनियादी शिक्षा (गांधी जी) 7–14 वर्ष निःशुल्क अनिवार्य शिक्षा; हस्तकला-केंद्रित;
मातृभाषा; अध्यक्ष — डॉ. ज़ाकिर हुसैन
1944 सार्जेंट योजना 6–14 वर्ष निःशुल्क अनिवार्य शिक्षा; 40 वर्षों में लक्ष्य
1964–66 कोठारी आयोग (राष्ट्रीय शिक्षा आयोग) 10+2+3 संरचना; सामान्य विद्यालय
प्रणाली
; पड़ोस विद्यालय; शिक्षा पर GDP का
6%
; त्रिभाषा सूत्र की पुष्टि
1968 प्रथम राष्ट्रीय शिक्षा नीति कोठारी आयोग पर आधारित; त्रिभाषा सूत्र; 14 वर्ष तक
निःशुल्क शिक्षा
1986 राष्ट्रीय शिक्षा नीति 1986 “समानता के लिए शिक्षा“; बाल-केंद्रित दृष्टिकोण;
ऑपरेशन ब्लैकबोर्ड (1987); नवोदय विद्यालय;
DIET; न्यूनतम अधिगम स्तर (MLL)
1990 आचार्य राममूर्ति समिति NPE 1986 की समीक्षा
1992 संशोधित NPE व कार्य योजना (POA) NPE 1986 में संशोधन
1993 यशपाल समिति “शिक्षा बिना बोझ के (Learning without Burden)” — बस्ते
का बोझ कम करना
1994 DPEP ज़िला प्राथमिक शिक्षा कार्यक्रम
1995 मध्याह्न भोजन योजना 15 अगस्त 1995; 2021 से प्रधानमंत्री पोषण (PM
POSHAN)
2001 सर्व शिक्षा अभियान (SSA) 6–14 वर्ष के लिए प्रारम्भिक शिक्षा का सार्वभौमिकरण
2005 राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा (NCF 2005) अध्यक्ष प्रो. यशपाल; ज्ञान को बाहरी जीवन से
जोड़ना
; रटंत से मुक्ति; रचनावाद;
परीक्षा प्रणाली में सुधार
2009 RTE अधिनियम 1 अप्रैल 2010 से लागू
2018 समग्र शिक्षा अभियान SSA + RMSA + शिक्षक शिक्षा का एकीकरण
2020 राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 अध्यक्ष डॉ. के. कस्तूरीरंगन; 29 जुलाई
2020
को स्वीकृत; 5+3+3+4
2022–23 NCF-FS (2022) और NCF-SE
(2023)
आधारभूत चरण और विद्यालयी शिक्षा के लिए नई पाठ्यचर्या रूपरेखा
NCF 2005 के 5 मार्गदर्शी सिद्धांत: (1) ज्ञान को
विद्यालय के बाहर के जीवन से जोड़ना
, (2) रटंत प्रणाली से
मुक्ति
, (3) पाठ्यचर्या का पाठ्यपुस्तक-केंद्रित न होना,
(4) परीक्षा को लचीला बनाना और कक्षा-कक्ष गतिविधियों से
जोड़ना, (5) लोकतांत्रिक राष्ट्र के प्रति आस्थावान अस्मिता का
विकास।
7

निःशुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009

  • संसद द्वारा पारित — अगस्त 2009; 1 अप्रैल
    2010
    से लागू।

  • अनुच्छेद 21A को प्रभावी बनाने वाला कानून; 7
    अध्याय, 38 धाराएँ, 1 अनुसूची
    ।

  • 6–14 वर्ष के सभी बच्चों को निःशुल्क और अनिवार्य
    प्रारम्भिक शिक्षा (कक्षा 1–8)
    ।

  • 2012 संशोधन — दिव्यांग बच्चों को “वंचित समूह” में शामिल
    किया।

  • 2019 संशोधन — कक्षा 5 और 8 में परीक्षा व रोकने
    (Detention) का विकल्प राज्यों को।

धारा प्रावधान
धारा 2 परिभाषाएँ — “बालक” (6–14 वर्ष), “वंचित समूह”, “दुर्बल वर्ग” आदि
धारा 3 6–14 वर्ष के प्रत्येक बच्चे को पड़ोस के विद्यालय में निःशुल्क व
अनिवार्य शिक्षा
धारा 4 विद्यालय न जाने वाले / बीच में छोड़ने वाले बच्चों का आयु-उपयुक्त
कक्षा
में प्रवेश व विशेष प्रशिक्षण
धारा 5 विद्यालय बदलने का अधिकार — स्थानांतरण प्रमाणपत्र तुरंत
धारा 6 सरकार द्वारा 3 वर्ष के भीतर पड़ोस में विद्यालय स्थापना
धारा 8 व 9 सरकार व स्थानीय प्राधिकारी के कर्तव्य
धारा 10 माता-पिता / संरक्षक का कर्तव्य — बच्चे को विद्यालय में प्रवेश दिलाना
धारा 11 3 वर्ष से अधिक आयु के बच्चों के लिए पूर्व-प्राथमिक शिक्षा की
व्यवस्था (सरकार कर सकती है)
धारा 12(1)(c) निजी गैर-सहायता प्राप्त विद्यालयों में 25% सीटें दुर्बल वर्ग व
वंचित समूह के बच्चों के लिए (प्रवेश कक्षा में)
धारा 13 प्रवेश में कैपिटेशन शुल्क और स्क्रीनिंग
प्रक्रिया
निषेध
धारा 14 आयु प्रमाणपत्र के अभाव में प्रवेश से इनकार नहीं
धारा 15 शैक्षिक सत्र की शुरुआत या निर्धारित अवधि के बाद भी प्रवेश से इनकार नहीं
धारा 16 किसी बच्चे को कक्षा में रोका नहीं जाएगा (2019 संशोधन से
परिवर्तित) और निष्कासित नहीं किया जाएगा
धारा 17 शारीरिक दंड और मानसिक उत्पीड़न का निषेध
धारा 18 मान्यता के बिना कोई विद्यालय नहीं चलेगा
धारा 19 विद्यालयों के मानक (अनुसूची) — भवन, शिक्षक, सुविधाएँ
धारा 21 विद्यालय प्रबंधन समिति (SMC) — कम से कम
तीन-चौथाई (75%) सदस्य माता-पिता / संरक्षक
; 50%
महिलाएँ
धारा 22 SMC द्वारा विद्यालय विकास योजना
धारा 23 शिक्षकों की न्यूनतम योग्यता — NCTE द्वारा निर्धारित
(TET)
धारा 24 शिक्षकों के कर्तव्य — नियमित उपस्थिति, समय पर पाठ्यक्रम पूरा करना, अभिभावक
बैठक
धारा 25 छात्र-शिक्षक अनुपात (PTR) — प्राथमिक
30:1, उच्च प्राथमिक 35:1
धारा 27 शिक्षकों को गैर-शैक्षणिक कार्य में न लगाना — केवल
जनगणना, आपदा राहत और चुनाव
छोड़कर
धारा 28 शिक्षकों द्वारा निजी ट्यूशन पर प्रतिबंध
धारा 29 पाठ्यक्रम व मूल्यांकन — बाल-केंद्रित, भयमुक्त, CCE, मातृभाषा में
शिक्षा (यथासंभव)
धारा 30 प्रारम्भिक शिक्षा पूरी होने तक कोई बोर्ड परीक्षा नहीं; पूरी
होने पर प्रमाणपत्र
धारा 31 व 32 बाल अधिकारों की निगरानी — NCPCR / SCPCR; शिकायत
निवारण
RTE अनुसूची — प्रमुख मानक: शिक्षक कार्य-दिवस — प्राथमिक
200 दिन / 800 घंटे, उच्च प्राथमिक 220 दिन / 1000
घंटे
(प्रति शैक्षिक वर्ष); शिक्षक के लिए प्रति सप्ताह 45
घंटे
(तैयारी सहित); हर मौसम के अनुकूल भवन,
बालक-बालिकाओं के अलग शौचालय, पेयजल, खेल का
मैदान
, पुस्तकालय, बाधा-मुक्त पहुँच।
ट्रिक: 12 = 25%; 13 = कैपिटेशन व स्क्रीनिंग
नहीं
; 16 = रोकना / निकालना नहीं; 17 = दंड
नहीं
; 21 = SMC (75% अभिभावक); 25 = PTR
30:1 / 35:1
; 27 = गैर-शैक्षणिक कार्य नहीं (जनगणना, आपदा,
चुनाव छोड़कर)
; 28 = ट्यूशन नहीं; 29 =
CCE
; 30 = बोर्ड परीक्षा नहीं।
8

राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 एवं प्रमुख योजनाएँ

◆ NEP 2020 — प्रारम्भिक शिक्षा से संबंधित प्रमुख बिंदु

चरण आयु कक्षाएँ विशेषता
आधारभूत (Foundational) — 5 वर्ष 3 – 8 वर्ष 3 वर्ष आंगनवाड़ी / बालवाटिका + कक्षा 1–2 खेल-आधारित, गतिविधि-आधारित अधिगम; ECCE
प्रारम्भिक / निर्माण (Preparatory) — 3 वर्ष 8 – 11 वर्ष कक्षा 3 – 5 खोज, गतिविधि, हल्की पाठ्यपुस्तकें
मध्य (Middle) — 3 वर्ष 11 – 14 वर्ष कक्षा 6 – 8 विषय-आधारित; व्यावसायिक शिक्षा (कक्षा 6 से, बस्ता-रहित
दिवस)
माध्यमिक (Secondary) — 4 वर्ष 14 – 18 वर्ष कक्षा 9 – 12 बहुविषयक; विषय चयन में लचीलापन
NEP 2020 के अन्य प्रमुख प्रावधान
10+2 के स्थान पर 5+3+3+4 संरचना
आधारभूत साक्षरता एवं संख्या ज्ञान (FLN) — सर्वोच्च
प्राथमिकता; निपुण भारत (2021)
मातृभाषा / स्थानीय भाषा में शिक्षा — कम से कम
कक्षा 5 तक, अधिमानतः कक्षा 8 तक;
त्रिभाषा सूत्र लचीला
6–18 वर्ष तक शिक्षा का सार्वभौमिकरण; 2030 तक
100% GER
(पूर्व-प्राथमिक से माध्यमिक)
360° समग्र प्रगति कार्ड; PARAKH; कक्षा
3, 5, 8 में परीक्षाएँ
विद्यालय परिसर / क्लस्टर — संसाधनों का साझा उपयोग
शिक्षक शिक्षा — 4 वर्षीय एकीकृत B.Ed.
(2030 तक न्यूनतम योग्यता)
शिक्षा पर सार्वजनिक व्यय GDP का 6% का लक्ष्य
SEDGs, लिंग समावेशन निधि,
विशेष शिक्षा क्षेत्र
बस्ते का बोझ कम; 10 बस्ता-रहित दिवस
(कक्षा 6–8)

◆ प्रारम्भिक शिक्षा की प्रमुख योजनाएँ

योजना वर्ष उद्देश्य
ऑपरेशन ब्लैकबोर्ड 1987 प्राथमिक विद्यालयों में न्यूनतम सुविधाएँ — भवन, शिक्षक, सामग्री
प्रधानमंत्री पोषण (पूर्व में मध्याह्न भोजन) 1995 / 2021 पोषण, नामांकन व ठहराव में वृद्धि
सर्व शिक्षा अभियान 2001 प्रारम्भिक शिक्षा का सार्वभौमिकरण
कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय (KGBV) 2004 वंचित वर्गों की बालिकाओं के लिए आवासीय विद्यालय (कक्षा 6–8, अब 12 तक
विस्तार)
पढ़े भारत बढ़े भारत 2014 कक्षा 1–2 में पठन-लेखन व गणित
बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ 2015 बालिका शिक्षा व लिंगानुपात
समग्र शिक्षा 2018 पूर्व-प्राथमिक से कक्षा 12 तक एकीकृत योजना
दीक्षा (DIKSHA) 2017 शिक्षकों व छात्रों के लिए डिजिटल मंच — “एक राष्ट्र, एक डिजिटल मंच”
निष्ठा (NISHTHA) 2019 शिक्षकों का एकीकृत प्रशिक्षण कार्यक्रम
निपुण भारत 2021 कक्षा 3 तक FLN
PM श्री विद्यालय 2022 NEP 2020 के आदर्श विद्यालय

◆ उत्तर प्रदेश की प्रमुख पहलें

पहल उद्देश्य
ऑपरेशन कायाकल्प (2018) परिषदीय विद्यालयों में आधारभूत सुविधाओं का विकास — शौचालय,
पेयजल, फ़र्श, बिजली, रंगाई
मिशन प्रेरणा (2019) परिषदीय विद्यालयों में आधारभूत अधिगम में सुधार
निपुण उत्तर प्रदेश निपुण भारत के अंतर्गत FLN लक्ष्य
DBT (प्रत्यक्ष लाभ अंतरण) गणवेश, जूते-मोज़े, स्वेटर, बैग, स्टेशनरी के लिए राशि सीधे अभिभावकों के खाते में
स्कूल चलो अभियान नामांकन वृद्धि
शारदा कार्यक्रम विद्यालय से बाहर के बच्चों का आयु-अनुरूप प्रवेश व विशेष प्रशिक्षण
नोट: राज्य योजनाओं के नाम, राशि और प्रावधान समय-समय पर
बदलते रहते हैं — परीक्षा से पहले बेसिक शिक्षा परिषद, उत्तर प्रदेश
की नवीनतम जानकारी देखें।
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प्रारम्भिक शिक्षा की चुनौतियाँ एवं समसामयिक मुद्दे

चुनौती विवरण समाधान की दिशा
अपव्यय एवं अवरोधन (Wastage & Stagnation) अपव्यय — पढ़ाई बीच में छोड़ना (ड्रॉप-आउट);
अवरोधन — एक ही कक्षा में बार-बार रुकना (हर्टॉग
समिति, 1929
ने ये शब्द दिए)
रोचक शिक्षण, मध्याह्न भोजन, उपचारात्मक शिक्षण
अधिगम संकट / गुणवत्ता नामांकन के बावजूद बच्चे कक्षा-स्तर के अनुसार नहीं सीखते (ASER,
NAS रिपोर्ट)
FLN, अधिगम परिणाम, प्रशिक्षित शिक्षक
लैंगिक असमानता बालिकाओं का कम नामांकन / ड्रॉप-आउट KGBV, बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ, अलग शौचालय
बाल श्रम एवं गरीबी परिवार की आय के लिए काम RTE, बाल श्रम कानून, छात्रवृत्ति, DBT
सामाजिक भेदभाव जाति, धर्म, वर्ग आधारित भेदभाव समावेशी कक्षा, संवेदनशील शिक्षक
भाषायी विविधता घर और विद्यालय की भाषा में अंतर मातृभाषा आधारित बहुभाषी शिक्षा
शिक्षकों की कमी व अनुपस्थिति एकल-शिक्षक विद्यालय, गैर-शैक्षणिक कार्य भर्ती, RTE धारा 27, जवाबदेही
आधारभूत संरचना का अभाव भवन, शौचालय, पेयजल, बिजली ऑपरेशन कायाकल्प, समग्र शिक्षा
प्रवास एवं शहरी गरीबी मौसमी प्रवास, झुग्गी-बस्ती मौसमी छात्रावास, ब्रिज कोर्स
कुपोषण एवं स्वास्थ्य सीखने की क्षमता पर प्रभाव PM पोषण, स्वास्थ्य जाँच (RBSK)
डिजिटल विभाजन (Digital Divide) ग्रामीण-गरीब बच्चों के पास उपकरण / इंटरनेट का अभाव — कोविड-19 में स्पष्ट दीक्षा, PM ई-विद्या, सामुदायिक पहुँच

◆ समसामयिक सामाजिक मुद्दे एवं शिक्षा

मुद्दा शिक्षा की भूमिका
लैंगिक समानता लैंगिक रूढ़ियों से मुक्त पाठ्यपुस्तकें; समान अवसर; लैंगिक संवेदनशीलता
पर्यावरण संरक्षण पर्यावरण शिक्षा (सर्वोच्च न्यायालय, एम. सी. मेहता मामला,
1991
— सभी स्तरों पर अनिवार्य); जलवायु परिवर्तन जागरूकता
जनसंख्या शिक्षा छोटा परिवार, स्वास्थ्य, संसाधनों का संतुलन
मूल्य एवं नैतिक शिक्षा ईमानदारी, सहिष्णुता, करुणा, संवैधानिक मूल्य
मानवाधिकार एवं बाल अधिकार अधिकारों व कर्तव्यों की जागरूकता
शांति शिक्षा संघर्ष समाधान, अहिंसा, सहिष्णुता (NCF 2005 में विशेष बल)
स्वास्थ्य एवं स्वच्छता स्वच्छ भारत — स्वच्छ विद्यालय अभियान (2014)
राष्ट्रीय एकता विविधता का सम्मान; एक भारत श्रेष्ठ भारत
नशा व साइबर सुरक्षा जीवन कौशल, डिजिटल नागरिकता
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समाज में विद्यालय एवं शिक्षक की भूमिका

विद्यालय की भूमिका शिक्षक की भूमिका
समाज का लघु रूप — लोकतांत्रिक मूल्यों का अभ्यास सामाजिक परिवर्तन का अग्रदूत
समुदाय से जुड़ाव — SMC, अभिभावक बैठक, सामुदायिक
कार्यक्रम
समुदाय व विद्यालय के बीच सेतु
सामाजिक समरसता — सभी वर्गों के बच्चे साथ भेदभाव-मुक्त, समतामूलक व्यवहार
स्थानीय संस्कृति, कला, ज्ञान का सम्मान स्थानीय संदर्भ से पाठ्यवस्तु को जोड़ना
जागरूकता केंद्र — स्वास्थ्य, स्वच्छता, पर्यावरण आदर्श नागरिक और रोल मॉडल
सामाजिक कुरीतियों (बाल विवाह, दहेज, अंधविश्वास) के विरुद्ध
चेतना
वैज्ञानिक दृष्टिकोण और तर्कशीलता का विकास
सभी बच्चों का नामांकन और ठहराव सुनिश्चित करना अभिभावकों को प्रेरित करना; ड्रॉप-आउट बच्चों को वापस
लाना
मुख्य संदेश: शिक्षक केवल पाठ पढ़ाने वाला नहीं, “समाज
का निर्माता”
है — कोठारी आयोग: “शिक्षा की गुणवत्ता
और राष्ट्रीय विकास में उसके योगदान को प्रभावित करने वाले कारकों में शिक्षक
सबसे महत्वपूर्ण
है।”
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परीक्षा उपयोगी तथ्य एवं अभ्यास प्रश्न

◆ (क) एक पंक्ति में महत्वपूर्ण तथ्य

प्रश्न उत्तर
संस्कृतीकरण और पश्चिमीकरण एम. एन. श्रीनिवास
“विद्यालय समाज का लघु रूप है” जॉन ड्यूई
समाजीकरण का प्रथम अभिकरण परिवार
“भारत का भविष्य उसकी कक्षाओं में आकार ले रहा है” कोठारी आयोग
भारतीय शिक्षा का मैग्नाकार्टा वुड का घोषणा पत्र (1854)
प्राथमिक शिक्षा पर बल देने वाला पहला आयोग हंटर आयोग (1882)
बुनियादी शिक्षा / वर्धा योजना महात्मा गांधी (1937)
10+2+3 संरचना कोठारी आयोग (1964–66)
ऑपरेशन ब्लैकबोर्ड 1987 (NPE 1986)
“शिक्षा बिना बोझ के” यशपाल समिति (1993)
NCF 2005 के अध्यक्ष प्रो. यशपाल
NEP 2020 के अध्यक्ष डॉ. के. कस्तूरीरंगन
शिक्षा का मौलिक अधिकार अनुच्छेद 21A (86वाँ संशोधन, 2002)
माता-पिता का शिक्षा संबंधी मौलिक कर्तव्य अनुच्छेद 51A(k)
शिक्षा समवर्ती सूची में 42वाँ संशोधन (1976)
मातृभाषा में प्राथमिक शिक्षा अनुच्छेद 350A
RTE लागू 1 अप्रैल 2010
निजी विद्यालयों में 25% सीटें धारा 12(1)(c)
SMC में अभिभावक कम से कम 75%
PTR — प्राथमिक / उच्च प्राथमिक 30:1 / 35:1
NEP 2020 की संरचना 5+3+3+4
अपव्यय और अवरोधन शब्द हर्टॉग समिति (1929)

◆ (ख) भ्रम से बचें

  • अनुच्छेद 21A = मौलिक अधिकार; अनुच्छेद
    45
    = नीति निदेशक तत्व (अब ECCE); 51A(k) = मौलिक
    कर्तव्य।

  • 86वाँ संशोधन = शिक्षा का अधिकार (2002);
    42वाँ संशोधन = समवर्ती सूची (1976)।

  • NCF 2005 — प्रो. यशपाल; यशपाल समिति
    (1993)
    — “शिक्षा बिना बोझ के” — दोनों अलग।

  • अपव्यय = पढ़ाई छोड़ना; अवरोधन = एक
    कक्षा में रुकना।

  • RTE में शिक्षक को जनगणना, आपदा राहत और चुनाव के अलावा
    गैर-शैक्षणिक कार्य में नहीं लगाया जा सकता।

◆ (ग) अभ्यास प्रश्न (MCQ)

प्रश्न 1. “संस्कृतीकरण” की अवधारणा किसने दी?

(A) योगेंद्र सिंह (B) एम. एन. श्रीनिवास (C) दुर्खीम (D) ड्यूई

प्रश्न 2. शिक्षा को मौलिक अधिकार बनाने वाला संविधान संशोधन
है —

(A) 42वाँ (B) 73वाँ (C) 86वाँ (D) 93वाँ

प्रश्न 3. “भारतीय शिक्षा का मैग्नाकार्टा” कहा जाता है —

(A) हंटर आयोग (B) वुड का घोषणा पत्र (C) सार्जेंट योजना (D) कोठारी आयोग

प्रश्न 4. RTE अधिनियम 2009 के अनुसार प्राथमिक स्तर पर
छात्र-शिक्षक अनुपात है —

(A) 25:1 (B) 30:1 (C) 35:1 (D) 40:1

प्रश्न 5. RTE की किस धारा के अनुसार विद्यालय प्रबंधन समिति
का गठन होता है?

(A) 12 (B) 17 (C) 21 (D) 29

प्रश्न 6. शिक्षा को राज्य सूची से समवर्ती सूची में किस संशोधन
द्वारा लाया गया?

(A) 42वाँ (B) 44वाँ (C) 86वाँ (D) 73वाँ

प्रश्न 7. “शिक्षा बिना बोझ के” रिपोर्ट किससे संबंधित है?

(A) कोठारी आयोग (B) यशपाल समिति (C) राममूर्ति समिति (D) कस्तूरीरंगन
समिति

प्रश्न 8. NEP 2020 के अनुसार आधारभूत चरण की आयु है —

(A) 3–6 वर्ष (B) 3–8 वर्ष (C) 6–8 वर्ष (D) 6–11 वर्ष

प्रश्न 9. समाजीकरण का सबसे पहला और महत्वपूर्ण अभिकरण है
—

(A) विद्यालय (B) मित्र मंडली (C) परिवार (D) मीडिया

प्रश्न 10. RTE के अनुसार शिक्षक को किस गैर-शैक्षणिक कार्य में
लगाया जा सकता है?

(A) सर्वेक्षण (B) पल्स पोलियो (C) चुनाव (D) राशन वितरण

प्रश्न 11. “10+2+3” शिक्षा संरचना की सिफ़ारिश किसने
की?

(A) हंटर आयोग (B) कोठारी आयोग (C) NPE 1986 (D) NEP 2020

प्रश्न 12. अनुच्छेद 350A किससे संबंधित है?

(A) अल्पसंख्यक संस्थाएँ (B) धार्मिक शिक्षा (C) प्राथमिक स्तर पर मातृभाषा में शिक्षा
(D) बाल श्रम

उत्तर कुंजी: 1-B, 2-C, 3-B, 4-B, 5-C, 6-A, 7-B, 8-B,
9-C, 10-C, 11-B, 12-C

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