UP Super TET Notes: शैक्षिक प्रबंधन एवं प्रशासन (Educational Management and Administration) अध्याय 15 – बाल मनोविज्ञान नोट्स PDF Download

UP Super TET Notes: शैक्षिक प्रबंधन एवं प्रशासन (Educational Management and Administration) अध्याय 15 – बाल मनोविज्ञान नोट्स PDF Download

UP SUPER TET 2026 • भाग 1 • अध्याय 15

शैक्षिक प्रबंधन एवं प्रशासन (Educational Management and Administration) – चैप्टर-वार नोट्स

बाल मनोविज्ञान, शिक्षण कौशल एवं जीवन कौशल • सहायक अध्यापक (प्राथमिक स्तर, कक्षा 1–5) • उ.प्र. शिक्षा सेवा चयन आयोग

प्रबंधन के सिद्धांत , POSDCORB , प्रशासनिक ढाँचा , विद्यालय प्रबंधन , अभिलेख , समय-सारणी , पर्यवेक्षण , नेतृत्व , गुणवत्ता – सब एक जगह।

विषय-सूची

क्र. अनुभाग
1 शैक्षिक प्रबंधन एवं प्रशासन : अर्थ एवं परिभाषाएँ
2 प्रबंधन के कार्य एवं सिद्धांत
3 प्रशासन के प्रकार — केंद्रीकरण एवं विकेंद्रीकरण
4 भारत में शैक्षिक प्रशासन का ढाँचा
5 उत्तर प्रदेश में प्रारम्भिक शिक्षा का प्रशासनिक ढाँचा
6 विद्यालय प्रबंधन एवं प्रधानाध्यापक की भूमिका
7 समय-सारणी एवं विद्यालय अभिलेख
8 पर्यवेक्षण एवं निरीक्षण
9 शैक्षिक नेतृत्व, नियोजन एवं वित्त
10 गुणवत्ता प्रबंधन एवं ई-प्रशासन
11 परीक्षा उपयोगी तथ्य एवं अभ्यास प्रश्न
1

शैक्षिक प्रबंधन एवं प्रशासन : अर्थ

शैक्षिक प्रबंधन (Educational Management) शिक्षा के
उद्देश्यों की प्राप्ति के लिए उपलब्ध मानवीय, भौतिक और
वित्तीय संसाधनों
का नियोजन, संगठन, निर्देशन, समन्वय और
नियंत्रण
है। शैक्षिक प्रशासन (Educational
Administration)
वह व्यवस्था है जो नीतियों को लागू
करती है और शिक्षा-तंत्र का संचालन करती है।

विद्वान परिभाषा
ग्राहम बाल्फ़ोर “शैक्षिक प्रशासन का कार्य सही छात्रों को, सही शिक्षकों द्वारा, सही
शिक्षा
— राज्य के उपलब्ध साधनों के भीतर — दिलाना है।”
हेनरी फ़ेयोल “प्रबंधन करने का अर्थ है — पूर्वानुमान एवं नियोजन, संगठन, आदेश, समन्वय
और नियंत्रण
करना।”
हेरोल्ड कूंट्ज़ “प्रबंधन दूसरों के द्वारा और उनके साथ मिलकर कार्य करवाने की
कला है।”
मॉर्ट “शैक्षिक प्रशासन शिक्षा के उद्देश्यों की प्राप्ति हेतु संसाधनों का
प्रभावी उपयोग है।”
केम्पबेल “शैक्षिक प्रशासन वह प्रक्रिया है जिससे शिक्षण-अधिगम को सुगम
बनाया जाता है।”
प्रबंधन के जनक: एफ. डब्ल्यू. टेलर — वैज्ञानिक प्रबंधन
के जनक
(Principles of Scientific Management, 1911); हेनरी
फ़ेयोल
— आधुनिक / प्रशासनिक प्रबंधन के जनक,
प्रबंधन के 14 सिद्धांत (1916)।

◆ प्रबंधन, प्रशासन, पर्यवेक्षण एवं निरीक्षण में अंतर

आधार प्रशासन प्रबंधन पर्यवेक्षण निरीक्षण
मुख्य कार्य नीति निर्धारण व लागू करना संसाधनों का उपयोग कर लक्ष्य प्राप्ति मार्गदर्शन व सुधार जाँच व मूल्यांकन
स्तर उच्च स्तर मध्य / संस्था स्तर शिक्षण-कक्षा स्तर प्रायः बाहरी
प्रकृति निर्णयात्मक क्रियान्वयनात्मक सहयोगात्मक, रचनात्मक दोष-खोजी, औपचारिक
दृष्टिकोण क्या करना है कैसे करना है कैसे बेहतर करें क्या सही-गलत है
2

प्रबंधन के कार्य एवं सिद्धांत

◆ (क) लूथर गुलिक का POSDCORB (1937)

P — नियोजन ➜ O — संगठन ➜ S — कर्मचारी व्यवस्था ➜ D — निर्देशन
CO — समन्वय ➜ R — प्रतिवेदन ➜ B — बजट
अक्षर कार्य विद्यालय में उदाहरण
P — Planning (नियोजन) भविष्य के कार्य की पहले से योजना वार्षिक योजना, विद्यालय विकास योजना
O — Organizing (संगठन) कार्यों व संसाधनों को व्यवस्थित करना कक्षाओं का विभाजन, समितियाँ
S — Staffing (कर्मचारी व्यवस्था) योग्य व्यक्तियों की नियुक्ति, प्रशिक्षण शिक्षकों को विषय / कक्षा देना
D — Directing (निर्देशन) मार्गदर्शन, आदेश, अभिप्रेरणा स्टाफ़ बैठक, निर्देश
CO — Co-ordinating (समन्वय) विभिन्न कार्यों व व्यक्तियों में तालमेल शिक्षकों, SMC, अभिभावकों में समन्वय
R — Reporting (प्रतिवेदन) कार्य की जानकारी देना मासिक प्रगति रिपोर्ट
B — Budgeting (बजट) वित्तीय योजना व नियंत्रण विद्यालय अनुदान का उपयोग
ट्रिक: POSDCORB — गुलिक व उर्विक (1937); फ़ेयोल
के 5 कार्य (POCCC)
= Planning,
Organizing, Commanding,
Co-ordinating, Controlling।

◆ (ख) हेनरी फ़ेयोल के प्रबंधन के 14 सिद्धांत

क्र. सिद्धांत क्र. सिद्धांत
1 कार्य विभाजन 8 केंद्रीकरण (संतुलित)
2 अधिकार एवं उत्तरदायित्व 9 सोपान शृंखला (Scalar chain)
3 अनुशासन 10 व्यवस्था (Order)
4 आदेश की एकता — एक ही अधिकारी से आदेश 11 समता (Equity)
5 निर्देश की एकता — एक उद्देश्य, एक योजना 12 कार्यकाल में स्थिरता
6 व्यक्तिगत हित से सामूहिक हित ऊपर 13 पहल (Initiative)
7 कर्मचारियों का पारिश्रमिक 14 सहयोग की भावना (Esprit de corps)

◆ (ग) शैक्षिक प्रबंधन के सिद्धांत

सिद्धांत अर्थ
लोकतांत्रिक सिद्धांत निर्णयों में शिक्षकों, छात्रों, अभिभावकों की भागीदारी
उद्देश्य-केंद्रितता सभी कार्य शैक्षिक उद्देश्यों की प्राप्ति हेतु
लचीलापन परिस्थिति के अनुसार परिवर्तन
सहयोग एवं समन्वय सबका मिलकर कार्य करना
समानता एवं न्याय सबके साथ निष्पक्ष व्यवहार
मितव्ययिता संसाधनों का उचित, किफ़ायती उपयोग
उत्तरदायित्व एवं जवाबदेही प्रत्येक व्यक्ति के स्पष्ट कार्य और उत्तरदायित्व
बाल-केंद्रितता सभी व्यवस्थाएँ बच्चे के हित में
3

प्रशासन के प्रकार — केंद्रीकरण एवं विकेंद्रीकरण

प्रकार विशेषता प्रभाव
निरंकुश / तानाशाही (Autocratic) सारे निर्णय एक व्यक्ति के; आदेश-पालन पर बल; भय शीघ्र निर्णय, पर असंतोष और सृजनात्मकता का अभाव
लोकतांत्रिक (Democratic) सबकी सहभागिता, विचार-विमर्श, सामूहिक निर्णय सर्वश्रेष्ठ — संतोष, सहयोग, उत्तरदायित्व
अहस्तक्षेपी / उदासीन (Laissez-faire) प्रशासक हस्तक्षेप नहीं करता; सबको पूरी छूट अव्यवस्था, लक्ष्यहीनता
नौकरशाही (Bureaucratic) नियमों व कागज़ी प्रक्रिया पर अत्यधिक बल — मैक्स वेबर निष्पक्षता, पर लालफ़ीताशाही व धीमापन
करिश्माई (Charismatic) नेता के व्यक्तित्व व आकर्षण पर आधारित प्रेरणा, पर व्यक्ति-निर्भरता
आधार केंद्रीकरण (Centralization) विकेंद्रीकरण (Decentralization)
अर्थ निर्णय लेने की शक्ति ऊपर (केंद्र) में निर्णय लेने की शक्ति निचले स्तरों तक बाँटी जाती है
लाभ एकरूपता, समान मानक, नियंत्रण स्थानीय आवश्यकताओं के अनुसार निर्णय, शीघ्रता, सहभागिता
दोष स्थानीय आवश्यकताओं की उपेक्षा, विलंब असमानता, समन्वय में कठिनाई
भारत में उदाहरण केंद्रीय नीतियाँ (NEP) पंचायती राज, SMC, ग्राम शिक्षा समिति,
DIET, BRC, CRC
73वाँ एवं 74वाँ संविधान संशोधन (1992): 73वाँ —
पंचायती राज; 11वीं अनुसूची (29 विषय) में
प्राथमिक व माध्यमिक शिक्षा (प्रविष्टि 17), प्रौढ़ व
अनौपचारिक शिक्षा (18)
, पुस्तकालय (19) — शिक्षा के
विकेंद्रीकरण का आधार। 74वाँ —
नगरीय निकाय; 12वीं अनुसूची।
4

भारत में शैक्षिक प्रशासन का ढाँचा

केंद्र — शिक्षा मंत्रालय, NCERT, NCTE, NIEPA, CBSE
राज्य — राज्य शिक्षा विभाग, SCERT, राज्य बोर्ड
ज़िला — DIET, ज़िला शिक्षा अधिकारी / BSA
विकास खंड — BEO, BRC
संकुल / न्याय पंचायत — CRC / NPRC
विद्यालय — प्रधानाध्यापक, शिक्षक, SMC

भारत में शैक्षिक प्रशासन का ढाँचा — केंद्र से विद्यालय तक

◆ केंद्रीय स्तर की प्रमुख संस्थाएँ

संस्था स्थापना मुख्यालय कार्य
शिक्षा मंत्रालय (MoE) 1947 (शिक्षा विभाग); 1985 में MHRD; 2020 में पुनः
शिक्षा मंत्रालय
नई दिल्ली राष्ट्रीय शिक्षा नीति, योजनाएँ
केंद्रीय शिक्षा सलाहकार बोर्ड (CABE) 1920 (पुनर्गठन 1935) नई दिल्ली शिक्षा पर सर्वोच्च सलाहकार निकाय; अध्यक्ष — शिक्षा
मंत्री
NCERT 1961 नई दिल्ली पाठ्यचर्या (NCF), पाठ्यपुस्तकें, शोध, प्रशिक्षण; RIE (क्षेत्रीय
शिक्षा संस्थान)
NCTE 1973 (सलाहकार), 1995 (वैधानिक —
NCTE अधिनियम 1993)
नई दिल्ली शिक्षक शिक्षा के मानक; TET का
दिशा-निर्देश; शिक्षक योग्यता
NIEPA 1962 (एशियाई संस्थान) → 1979 NIEPA → 2006 NUEPA →
2017 पुनः NIEPA
नई दिल्ली शैक्षिक नियोजन एवं प्रशासन — प्रशिक्षण व शोध;
UDISE, शाला सिद्धि
CBSE 1929 / 1962 (पुनर्गठन) नई दिल्ली माध्यमिक परीक्षाएँ, संबद्धता
NIOS 1989 (NOS 1979) नोएडा मुक्त विद्यालयी शिक्षा — निरौपचारिक
केंद्रीय विद्यालय संगठन (KVS) 1963 नई दिल्ली केंद्रीय कर्मचारियों के बच्चों के लिए विद्यालय
नवोदय विद्यालय समिति (NVS) 1986 नोएडा ग्रामीण प्रतिभाओं के लिए आवासीय विद्यालय
UGC 1953 / 1956 (अधिनियम) नई दिल्ली उच्च शिक्षा
NCPCR 2007 नई दिल्ली बाल अधिकार व RTE की निगरानी
RCI 1992 नई दिल्ली विशेष शिक्षा पेशेवरों का प्रशिक्षण

◆ राज्य एवं ज़िला स्तर

संस्था कार्य
SCERT (राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद) राज्य की पाठ्यचर्या, पाठ्यपुस्तकें, शिक्षक प्रशिक्षण, शोध — उत्तर प्रदेश में
लखनऊ
DIET (ज़िला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान) NPE 1986 की अनुशंसा पर (1987–88);
सेवापूर्व व सेवाकालीन शिक्षक प्रशिक्षण, D.El.Ed., शोध, शैक्षिक
सहायता
BRC (ब्लॉक संसाधन केंद्र) विकास खंड स्तर पर शिक्षकों को अकादमिक सहायता, प्रशिक्षण —
SSA के अंतर्गत
CRC / NPRC (संकुल / न्याय पंचायत संसाधन केंद्र) विद्यालयों के समूह के लिए मासिक बैठक, अकादमिक
सहायता व निगरानी
SMC (विद्यालय प्रबंधन समिति) विद्यालय स्तर पर सामुदायिक भागीदारी (RTE धारा 21)
5

उत्तर प्रदेश में प्रारम्भिक शिक्षा का प्रशासनिक ढाँचा

बेसिक शिक्षा विभाग (शासन) ➜ बेसिक शिक्षा परिषद / निदेशालय ➜ SCERT, लखनऊ
ज़िला — BSA, DIET ➜ विकास खंड — BEO / खंड शिक्षा अधिकारी, BRC ➜ न्याय पंचायत — NPRC / संकुल ➜ विद्यालय — प्रधानाध्यापक, SMC
स्तर / संस्था प्रमुख पदाधिकारी / कार्य
बेसिक शिक्षा विभाग (शासन स्तर) अपर मुख्य सचिव / प्रमुख सचिव — बेसिक शिक्षा; नीति निर्धारण
उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा परिषद उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा अधिनियम 1972 के अंतर्गत गठित;
मुख्यालय प्रयागराज; परिषदीय प्राथमिक व उच्च प्राथमिक विद्यालयों
का संचालन; सचिव — बेसिक शिक्षा परिषद
महानिदेशक, स्कूल शिक्षा / बेसिक शिक्षा निदेशालय राज्य स्तर पर योजनाओं का क्रियान्वयन व निगरानी
राज्य परियोजना कार्यालय (समग्र शिक्षा) समग्र शिक्षा अभियान का क्रियान्वयन
SCERT, लखनऊ पाठ्यक्रम, प्रशिक्षण, शोध, पाठ्यपुस्तक; DIET का मार्गदर्शन
मंडल स्तर मंडलीय सहायक शिक्षा निदेशक (बेसिक) — AD Basic
ज़िला स्तर ज़िला बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) — ज़िले के परिषदीय
विद्यालयों का प्रशासन; DIET — प्रशिक्षण व अकादमिक सहायता
(प्राचार्य)
विकास खंड स्तर खंड शिक्षा अधिकारी (BEO) — निरीक्षण, प्रशासन;
BRC — अकादमिक सहायता
न्याय पंचायत / संकुल स्तर NPRC / संकुल संसाधन केंद्र; ARP (अकादमिक रिसोर्स
पर्सन)
व SRG (राज्य संदर्भ समूह) द्वारा विद्यालयों का
सहयोगात्मक पर्यवेक्षण
विद्यालय स्तर प्रधानाध्यापक, सहायक अध्यापक, शिक्षामित्र, अनुदेशक; विद्यालय प्रबंधन
समिति (SMC)
; ग्राम पंचायत
उत्तर प्रदेश — महत्वपूर्ण: परिषदीय शिक्षकों की भर्ती हेतु
उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग (2023 में गठित —
उच्चतर शिक्षा सेवा आयोग व माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड के
विलय से) तथा परीक्षा नियामक प्राधिकारी (PNP), प्रयागराज —
UP TET, D.El.Ed. परीक्षाएँ। निगरानी हेतु प्रेरणा पोर्टल /
ऐप
।
नोट: प्रशासनिक पदों के नाम, संस्थाओं की संरचना और पोर्टल
समय-समय पर बदलते रहते हैं — परीक्षा से पहले बेसिक शिक्षा विभाग, उत्तर
प्रदेश
की नवीनतम जानकारी देखें।
6

विद्यालय प्रबंधन एवं प्रधानाध्यापक की भूमिका

विद्यालय प्रबंधन का अर्थ है विद्यालय के मानवीय,
भौतिक और वित्तीय संसाधनों
का इस प्रकार उपयोग करना कि बच्चों
का सर्वांगीण विकास
और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित
हो।

संसाधन शामिल
मानवीय संसाधन प्रधानाध्यापक, शिक्षक, छात्र, अभिभावक, SMC, रसोइया, समुदाय
भौतिक संसाधन भवन, कक्षा-कक्ष, फ़र्नीचर, पुस्तकालय, प्रयोगशाला, खेल का मैदान, शौचालय, पेयजल,
TLM, ICT उपकरण
वित्तीय संसाधन सरकारी अनुदान (कम्पोज़िट स्कूल ग्रांट), योजनाओं की राशि, सामुदायिक सहयोग
समय संसाधन शैक्षिक सत्र, कार्य-दिवस, समय-सारणी

◆ प्रधानाध्यापक की भूमिका

भूमिका कार्य
प्रशासक विद्यालय का संचालन, अभिलेख, नियमों का पालन, पत्राचार
शैक्षिक नेता (Instructional Leader) शिक्षण की गुणवत्ता, अधिगम परिणाम, नवाचार
पर्यवेक्षक शिक्षकों का मार्गदर्शन, कक्षा अवलोकन
योजनाकार वार्षिक योजना, विद्यालय विकास योजना (SMC के साथ)
समन्वयक शिक्षकों, छात्रों, अभिभावकों, SMC, अधिकारियों के बीच
वित्त प्रबंधक अनुदान का उचित उपयोग, लेखा-जोखा
जनसंपर्क अधिकारी समुदाय से संबंध, नामांकन अभियान
अनुशासन व कल्याण सुरक्षित, भयमुक्त वातावरण; MDM, स्वास्थ्य
मित्र, दार्शनिक एवं मार्गदर्शक शिक्षकों व छात्रों के लिए
कथन: “जैसा प्रधानाध्यापक, वैसा
विद्यालय
” — प्रधानाध्यापक को विद्यालय रूपी “जहाज़ का
कप्तान”
/ “मेहराब की मुख्य आधारशिला (Keystone)”
कहा जाता है।

◆ विद्यालय की अन्य प्रबंधन व्यवस्थाएँ

व्यवस्था विवरण
स्टाफ़ बैठक नियमित शिक्षक बैठक — योजना, समस्याएँ, निर्णय
विद्यालय प्रबंधन समिति (SMC) 75% अभिभावक, 50% महिलाएँ; विद्यालय विकास योजना, निगरानी; प्रायः
मासिक बैठक
सहगामी क्रियाएँ बाल सभा, खेल, सांस्कृतिक कार्यक्रम, मीना मंच, इको क्लब, स्काउट-गाइड
अभिभावक-शिक्षक बैठक (PTM) प्रगति साझा करना
विद्यालय सुरक्षा आपदा प्रबंधन, अग्नि सुरक्षा, बाल सुरक्षा नीति
MDM / PM पोषण प्रबंधन स्वच्छता, गुणवत्ता, अभिलेख
बाल संसद / मीना मंच छात्रों की लोकतांत्रिक भागीदारी; बालिका सशक्तिकरण
7

समय-सारणी एवं विद्यालय अभिलेख

◆ (क) समय-सारणी (Time-table)

समय-सारणी विद्यालय का “दूसरा दर्पण” / “विद्यालय
की धड़कन”
कही जाती है — यह बताती है कि कौन-सा विषय, कौन-सा
शिक्षक, किस कक्षा में, किस समय
पढ़ाएगा।

समय-सारणी निर्माण के सिद्धांत
मनोवैज्ञानिक सिद्धांत — कठिन विषय (गणित,
विज्ञान) प्रारंभिक कालांशों
में, जब बच्चे तरोताज़ा हों
थकान का ध्यान — कठिन और सरल विषयों को
बारी-बारी से; मध्यांतर के बाद हल्के / क्रियात्मक विषय
विविधता — एक ही विषय लगातार न हो
कालांश की अवधि — छोटी कक्षाओं में छोटे कालांश (30–35
मिनट)
विश्राम / मध्यांतर की व्यवस्था
शिक्षकों पर समान कार्य-भार; योग्यता व रुचि के अनुसार
विषय
सहगामी क्रियाओं — खेल, कला, पुस्तकालय — को स्थान
लचीलापन — मौसम, त्योहार, विशेष परिस्थिति के अनुसार
सरकारी नियमों (RTE कार्य-दिवस, घंटे) का पालन
उपलब्ध संसाधनों — कमरे, प्रयोगशाला, खेल का मैदान — का
ध्यान
समय-सारणी के प्रकार विवरण
मुख्य / सामान्य समय-सारणी (Master Time-table) पूरे विद्यालय की — सभी कक्षाएँ व शिक्षक
कक्षा समय-सारणी एक कक्षा की — कक्षा में लगी
शिक्षक समय-सारणी प्रत्येक शिक्षक के कालांश
रिक्त कालांश समय-सारणी शिक्षकों के खाली कालांश — अनुपस्थिति में व्यवस्था
सहगामी क्रिया समय-सारणी खेल, कला, सांस्कृतिक गतिविधियाँ
बहु-कक्षा शिक्षण (Multi-grade Teaching): एक शिक्षक
द्वारा एक ही समय में एक से अधिक कक्षाओं को पढ़ाना — ग्रामीण /
कम शिक्षक वाले विद्यालयों में आम; समूह कार्य, स्व-अधिगम सामग्री, सहपाठी
शिक्षण
से प्रबंधन।

◆ (ख) विद्यालय अभिलेख (School Records)

अभिलेख / पंजिका उद्देश्य
प्रवेश एवं निष्कासन पंजिका (Admission Register) छात्रों का प्रवेश, जन्मतिथि, स्थानांतरण — स्थायी अभिलेख
छात्र उपस्थिति पंजिका दैनिक उपस्थिति
शिक्षक उपस्थिति पंजिका शिक्षकों की उपस्थिति, अवकाश
स्थानांतरण प्रमाणपत्र (TC) पंजिका TC जारी करना
स्टॉक पंजिका (भंडार पंजिका) विद्यालय की सामग्री — फ़र्नीचर, उपकरण, TLM
कैश बुक / रोकड़ बही आय-व्यय का लेखा
MDM / PM पोषण पंजिका भोजन करने वाले बच्चे, खाद्यान्न, रसोइया
निःशुल्क पाठ्यपुस्तक / गणवेश वितरण पंजिका वितरण का अभिलेख
SMC बैठक कार्यवाही पंजिका SMC की बैठकें व निर्णय
निरीक्षण पंजिका अधिकारियों के निरीक्षण व सुझाव
आगंतुक पंजिका विद्यालय आने वाले व्यक्ति
संचयी अभिलेख प्रत्येक छात्र की सम्पूर्ण प्रगति
शिक्षक डायरी / पाठ योजना पंजिका दैनिक शिक्षण कार्य
मूल्यांकन / उपलब्धि पंजिका परीक्षा व CCE के परिणाम
आदेश / परिपत्र पंजिका, पत्राचार पंजिका विभागीय आदेश
पुस्तकालय पंजिका पुस्तकों का लेन-देन
महत्व: अभिलेख विद्यालय का “इतिहास और
स्मृति”
हैं — प्रशासन, नियोजन, मूल्यांकन, जवाबदेही और
पारदर्शिता
के लिए आवश्यक। अब अधिकांश अभिलेख डिजिटल (प्रेरणा
पोर्टल, UDISE+)
पर भी रखे जाते हैं।
8

पर्यवेक्षण एवं निरीक्षण

आधार निरीक्षण (Inspection) पर्यवेक्षण (Supervision)
उद्देश्य कमियाँ खोजना, नियम पालन की जाँच शिक्षण में सुधार और मार्गदर्शन
प्रकृति औपचारिक, निरंकुश, दोष-खोजी लोकतांत्रिक, सहयोगात्मक, रचनात्मक
संबंध अधिकारी-अधीनस्थ मित्र, सहयोगी, मार्गदर्शक
दृष्टिकोण परंपरागत आधुनिक
अनुवर्ती कार्य प्रायः नहीं निरंतर सहायता
परिणाम भय आत्मविश्वास व व्यावसायिक विकास
आधुनिक दृष्टिकोण: परंपरागत “निरीक्षण”
का स्थान अब “सहयोगात्मक / अकादमिक पर्यवेक्षण” (Supportive
Supervision)
ने ले लिया है — उत्तर प्रदेश में ARP /
SRG
द्वारा।
पर्यवेक्षण के प्रकार अर्थ
सुधारात्मक (Corrective) गलतियाँ पहचानकर सुधारना
निवारक (Preventive) समस्याओं का पूर्वानुमान कर पहले से रोकना
रचनात्मक (Constructive) शिक्षक की क्षमताओं का विकास, नए विचार देना
सृजनात्मक (Creative) शिक्षक को स्वयं नवाचार के लिए प्रेरित करना
नैदानिक पर्यवेक्षण (Clinical Supervision) मॉरिस कोगन (1973) व रॉबर्ट गोल्डहैमर
— पूर्व-अवलोकन बैठक → कक्षा अवलोकन → विश्लेषण → पश्च-अवलोकन बैठक
(प्रतिपुष्टि)
सहकर्मी पर्यवेक्षण (Peer Supervision) शिक्षक एक-दूसरे की कक्षा का अवलोकन कर सुझाव दें
अच्छे पर्यवेक्षक के गुण
सहानुभूति, धैर्य, निष्पक्षता; शिक्षक का सम्मान
विषय व शिक्षणशास्त्र का ज्ञान; आदर्श
पाठ
प्रस्तुत करने की क्षमता
विशिष्ट, रचनात्मक प्रतिपुष्टि — केवल आलोचना नहीं
अनुवर्ती सहायता और संसाधन उपलब्ध कराना
लोकतांत्रिक और सहयोगात्मक व्यवहार
9

शैक्षिक नेतृत्व, नियोजन एवं वित्त

◆ (क) शैक्षिक नेतृत्व

नेतृत्व शैली विशेषता
निरंकुश / लोकतांत्रिक / अहस्तक्षेपी कर्ट लेविन, लिपिट व व्हाइट (1939) — लोकतांत्रिक
सर्वश्रेष्ठ
परिवर्तनकारी नेतृत्व (Transformational) जेम्स मैकग्रेगर बर्न्स (1978), बर्नार्ड बास — प्रेरणा, दृष्टि,
अनुयायियों का विकास
लेन-देन आधारित (Transactional) पुरस्कार-दंड के आधार पर कार्य करवाना
अनुदेशात्मक नेतृत्व (Instructional) शिक्षण-अधिगम की गुणवत्ता पर केंद्रित — प्रधानाध्यापक का मुख्य कार्य
वितरित नेतृत्व (Distributed) नेतृत्व का शिक्षकों व समितियों में बँटवारा
सेवक नेतृत्व (Servant) रॉबर्ट ग्रीनलीफ़ — दूसरों की सेवा द्वारा नेतृत्व
मैकग्रेगर का X और Y सिद्धांत (1960): सिद्धांत X — कर्मचारी
स्वभाव से आलसी, नियंत्रण आवश्यक (निरंकुश); सिद्धांत Y — कर्मचारी
स्वयं प्रेरित, उत्तरदायित्व चाहते हैं (लोकतांत्रिक)। हर्ज़बर्ग —
द्वि-कारक (स्वास्थ्य कारक व प्रेरक) सिद्धांत।

◆ (ख) शैक्षिक नियोजन

वर्तमान स्थिति का आकलन ➜ लक्ष्य निर्धारण ➜ विकल्प व प्राथमिकता ➜ योजना निर्माण ➜ क्रियान्वयन ➜ मूल्यांकन
प्रकार अर्थ
वृहद् नियोजन (Macro) राष्ट्रीय / राज्य स्तर पर
सूक्ष्म नियोजन (Micro) ग्राम / विद्यालय स्तर पर — स्थानीय आवश्यकताओं के अनुसार
अल्पकालीन / दीर्घकालीन 1 वर्ष / 5 वर्ष या अधिक
विद्यालय विकास योजना (SDP) RTE धारा 22 — SMC द्वारा; 3 वर्षीय योजना, वार्षिक
उप-योजनाएँ
SWOT विश्लेषण: विद्यालय नियोजन में —
Strengths (शक्तियाँ), Weaknesses
(कमज़ोरियाँ), Opportunities (अवसर),
Threats (ख़तरे) का विश्लेषण।

◆ (ग) शैक्षिक वित्त

वित्त के स्रोत विवरण
केंद्र सरकार समग्र शिक्षा (केंद्र-राज्य अंश — सामान्यतः 60:40; पूर्वोत्तर व
हिमालयी राज्यों में 90:10), PM पोषण, PM श्री
राज्य सरकार शिक्षकों का वेतन, राज्य योजनाएँ
स्थानीय निकाय पंचायत, नगर निकाय
कम्पोज़िट स्कूल ग्रांट विद्यालय के रखरखाव, स्वच्छता, छोटी मरम्मत, TLM हेतु — नामांकन के आधार
पर
सामुदायिक सहयोग / CSR / दान स्थानीय सहयोग, कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व
लक्ष्य: कोठारी आयोग और NEP 2020 —
शिक्षा पर सार्वजनिक व्यय GDP का 6%।
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गुणवत्ता प्रबंधन एवं ई-प्रशासन

अवधारणा / उपकरण विवरण
सम्पूर्ण गुणवत्ता प्रबंधन (TQM) डब्ल्यू. एडवर्ड्स डेमिंग — निरंतर सुधार; PDCA चक्र
(Plan-Do-Check-Act)
/ डेमिंग चक्र; सबकी भागीदारी; “ग्राहक” (छात्र)
केंद्रित
शाला सिद्धि (2015) NIEPA — विद्यालय मानक एवं मूल्यांकन
ढाँचा
; विद्यालय का स्व-मूल्यांकन और बाह्य मूल्यांकन;
7 मुख्य क्षेत्र
कार्य-निष्पादन श्रेणीकरण सूचकांक (PGI) शिक्षा मंत्रालय — राज्यों / ज़िलों की शिक्षा व्यवस्था का श्रेणीकरण
UDISE+ विद्यालयी शिक्षा के लिए एकीकृत ज़िला सूचना प्रणाली — सभी
विद्यालयों का ऑनलाइन डेटा (नामांकन, शिक्षक, सुविधाएँ)
राष्ट्रीय उपलब्धि सर्वेक्षण (NAS) NCERT — कक्षा 3, 5, 8, 10 के अधिगम स्तर; 2024 से PARAKH राष्ट्रीय
सर्वेक्षण
ASER रिपोर्ट प्रथम (NGO) — ग्रामीण बच्चों के पठन व गणित स्तर का वार्षिक
सर्वेक्षण
शिक्षक जवाबदेही उपस्थिति, अधिगम परिणाम, सतत व्यावसायिक विकास (NEP 2020 — वर्ष में
50 घंटे CPD)

◆ ई-प्रशासन (E-governance) एवं डिजिटल पहलें

पहल उपयोग
प्रेरणा पोर्टल / ऐप (उत्तर प्रदेश) परिषदीय विद्यालयों की निगरानी, उपस्थिति, DBT, निरीक्षण
दीक्षा (DIKSHA) शिक्षकों व छात्रों के लिए डिजिटल सामग्री; ऊर्जावान पाठ्यपुस्तकें (QR कोड)
PRABANDH पोर्टल समग्र शिक्षा की योजना व निगरानी
शाला दर्पण / शाला कोष विद्यालय सूचना / वित्तीय प्रबंधन (विभिन्न राज्यों में)
PM ई-विद्या / स्वयं प्रभा डिजिटल व टीवी आधारित शिक्षा
विद्या समीक्षा केंद्र (VSK) राज्य स्तर पर डेटा-आधारित निगरानी
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परीक्षा उपयोगी तथ्य एवं अभ्यास प्रश्न

◆ (क) एक पंक्ति में महत्वपूर्ण तथ्य

प्रश्न उत्तर
वैज्ञानिक प्रबंधन के जनक एफ. डब्ल्यू. टेलर
आधुनिक प्रबंधन के जनक; 14 सिद्धांत हेनरी फ़ेयोल
POSDCORB लूथर गुलिक व उर्विक (1937)
“सही छात्र, सही शिक्षक, सही शिक्षा” ग्राहम बाल्फ़ोर
नौकरशाही मॉडल मैक्स वेबर
सर्वश्रेष्ठ प्रशासन शैली लोकतांत्रिक
पंचायती राज व शिक्षा का विकेंद्रीकरण 73वाँ संशोधन (1992) — 11वीं अनुसूची
शिक्षा पर सर्वोच्च सलाहकार निकाय CABE (1920)
NCERT की स्थापना 1961
NCTE को वैधानिक दर्जा 1995
शैक्षिक नियोजन व प्रशासन की राष्ट्रीय संस्था NIEPA
DIET की स्थापना NPE 1986 (1987–88 से)
MHRD का नाम पुनः शिक्षा मंत्रालय 2020
उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा परिषद UP बेसिक शिक्षा अधिनियम 1972; प्रयागराज
ज़िले में परिषदीय विद्यालयों के प्रमुख अधिकारी BSA (ज़िला बेसिक शिक्षा अधिकारी)
विद्यालय विकास योजना RTE धारा 22 — SMC
नैदानिक पर्यवेक्षण मॉरिस कोगन (1973)
X और Y सिद्धांत डगलस मैकग्रेगर (1960)
TQM व PDCA चक्र डब्ल्यू. एडवर्ड्स डेमिंग
शाला सिद्धि NIEPA (2015)
ASER रिपोर्ट प्रथम (NGO)

◆ (ख) भ्रम से बचें

  • टेलर = वैज्ञानिक प्रबंधन; फ़ेयोल = प्रशासनिक /
    आधुनिक प्रबंधन (14 सिद्धांत)
    ; गुलिक =
    POSDCORB
    ।

  • निरीक्षण = दोष-खोजी; पर्यवेक्षण = सुधार व
    मार्गदर्शन
    ।

  • आदेश की एकता = एक अधिकारी से आदेश; निर्देश की
    एकता
    = एक उद्देश्य, एक योजना।

  • 73वाँ संशोधन पंचायती राज (11वीं अनुसूची);
    74वाँ नगरीय निकाय (12वीं अनुसूची)।

  • NIEPA — नियोजन व प्रशासन; NCERT
    — पाठ्यचर्या व पाठ्यपुस्तक; NCTE — शिक्षक शिक्षा।

◆ (ग) अभ्यास प्रश्न (MCQ)

प्रश्न 1. POSDCORB में “S” का अर्थ है —

(A) Supervision (B) Staffing (C) Scheduling (D) Sanction

प्रश्न 2. “आधुनिक प्रबंधन के जनक” किसे कहा जाता है?

(A) टेलर (B) हेनरी फ़ेयोल (C) गुलिक (D) वेबर

प्रश्न 3. शैक्षिक प्रशासन की सर्वश्रेष्ठ शैली मानी जाती है
—

(A) निरंकुश (B) लोकतांत्रिक (C) अहस्तक्षेपी (D) नौकरशाही

प्रश्न 4. शिक्षक शिक्षा के मानक निर्धारित करने वाली संस्था है
—

(A) NCERT (B) NIEPA (C) NCTE (D) CBSE

प्रश्न 5. समय-सारणी में गणित जैसे कठिन विषय किस समय रखने
चाहिए?

(A) अंतिम कालांश (B) मध्यांतर के तुरंत बाद (C) प्रारंभिक कालांश (D) कभी भी

प्रश्न 6. निरीक्षण की तुलना में पर्यवेक्षण —

(A) अधिक दोष-खोजी है (B) सुधार व मार्गदर्शन पर केंद्रित है (C) केवल औपचारिक है
(D) भय उत्पन्न करता है

प्रश्न 7. पंचायती राज संस्थाओं को प्राथमिक शिक्षा का दायित्व
किस संविधान संशोधन से मिला?

(A) 42वाँ (B) 73वाँ (C) 86वाँ (D) 93वाँ

प्रश्न 8. DIET की स्थापना की अनुशंसा किस नीति में की
गई?

(A) NPE 1968 (B) NPE 1986 (C) NCF 2005 (D) NEP 2020

प्रश्न 9. उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा परिषद का गठन किस
अधिनियम के अंतर्गत हुआ?

(A) UP बेसिक शिक्षा अधिनियम 1972 (B) RTE 2009 (C) UP माध्यमिक शिक्षा
अधिनियम 1921 (D) NCTE अधिनियम 1993

प्रश्न 10. “आदेश की एकता” (Unity of Command) का सिद्धांत
किसका है?

(A) गुलिक (B) फ़ेयोल (C) टेलर (D) डेमिंग

प्रश्न 11. विद्यालय की सामग्री (फ़र्नीचर, उपकरण) का अभिलेख
किस पंजिका में रखा जाता है?

(A) प्रवेश पंजिका (B) स्टॉक पंजिका (C) उपस्थिति पंजिका (D) आगंतुक पंजिका

प्रश्न 12. “शाला सिद्धि” कार्यक्रम किस संस्था द्वारा विकसित
है?

(A) NCERT (B) NIEPA (C) NCTE (D) UGC

उत्तर कुंजी: 1-B, 2-B, 3-B, 4-C, 5-C, 6-B, 7-B, 8-B,
9-A, 10-B, 11-B, 12-B

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