प्रश्न 44. DHRUV64 के बारे में निम्नलिखित में से कौन-सा/कौन-से कथन सही है/हैं?
यह DIR-V कार्यक्रम के अंतर्गत निर्मित तृतीय चिप है, जिसका समग्र उद्देश्य भारत के लिए माइक्रोप्रोसेसरों के निर्माण को समर्थ बनाना है।
यह भारत का प्रथम घरेलू 0 GHz, 64-बिट डुअल-कोर माइक्रोप्रोसेसर है।
विकल्प:
(a) केवल 1
(b) केवल 2
(c) 1 और 2 दोनों
(d) न तो 1, न ही 2
सही उत्तर: (c) 1 और 2 दोनोंव्याख्या:
कथन 1 — सही है। DHRUV64, DIR-V (डिजिटल इंडिया RISC-V) कार्यक्रम के अंतर्गत C-DAC द्वारा निर्मित तीसरी चिप है। इससे पहले VEGA (पहली चिप) और MOUSHIK (दूसरी चिप) बनाई गई थीं। कार्यक्रम का उद्देश्य भारत को माइक्रोप्रोसेसर निर्माण में आत्मनिर्भर बनाना है।
कथन 2 — सही है। DHRUV64 भारत का पहला घरेलू 1.0 GHz, 64-बिट डुअल-कोर माइक्रोप्रोसेसर है। यह RISC-V ओपन-सोर्स आर्किटेक्चर पर आधारित है और 180nm प्रोसेस नोड पर बना है।
DHRUV64 का पूरा संदर्भ:
पूर्ण नाम: Dependable High-performance RISC-V Unified Processor 64-bit
विकासकर्ता: C-DAC (सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ एडवांस्ड कंप्यूटिंग), पुणे — MeitY के अंतर्गत
आर्किटेक्चर: RISC-V — ओपन-सोर्स, कोई लाइसेंस शुल्क नहीं (ARM या x86 के विपरीत)
उपयोग: एज कंप्यूटिंग, सरकारी सर्वर, रक्षा इलेक्ट्रॉनिक्स, IoT
रणनीतिक महत्व: अमेरिका, ताइवान, दक्षिण कोरिया पर चिप निर्भरता कम करना — विशेषकर अमेरिका-चीन चिप युद्ध के बाद TSMC आपूर्ति श्रृंखला जोखिम को देखते हुए
भारत का सेमीकंडक्टर मिशन (व्यापक संदर्भ):
इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन (ISM) दिसंबर 2021 में MeitY के अंतर्गत शुरू हुआ
स्वीकृत संयंत्र: टाटा-PSMC गुजरात (28nm), CG पावर-रेनेसास गुजरात, टाटा OSAT असम (पैकेजिंग/परीक्षण), HCL-फॉक्सकॉन UP (डिस्प्ले फैब)
2030 लक्ष्य: वैश्विक सेमीकंडक्टर आपूर्ति श्रृंखला का हिस्सा बनना
कठिनाई स्तर: मध्यम (Moderate)
परीक्षार्थियों को DIR-V कार्यक्रम की चिप क्रमावली (VEGA → MOUSHIK → DHRUV64) याद रखनी होगी। जो केवल “भारत ने चिप बनाई” जानते हैं वे उलझेंगे।
यह प्रश्न क्यों पूछा गया: UPSC ने यह प्रश्न इसलिए पूछा क्योंकि भारत का सेमीकंडक्टर आत्मनिर्भरता अभियान 2021-2025 के बीच की सबसे बड़ी तकनीकी नीतिगत पहल है। चिप की कमी (2020-22 की वैश्विक चिप शॉर्टेज) ने भारत को अपनी कमजोरी का एहसास कराया। DHRUV64 उस दिशा में ठोस कदम है।
परीक्षक की मंशा: परीक्षक यह जांचना चाहता था कि अभ्यर्थी को सिर्फ “चिप बनी” की सतही जानकारी है या DIR-V की पूरी चिप क्रमावली और DHRUV64 की विशिष्ट तकनीकी जानकारी है। “तृतीय चिप” वाला कथन सावधान अभ्यर्थियों को ही सही लगेगा।
ट्रेंड विश्लेषण: UPSC 2022 में स्वदेशी तकनीक (TEJAS), 2023 में अंतरिक्ष (आदित्य L1), 2024 में AI और चिप से जुड़े प्रश्न आए। 2026 में सेमीकंडक्टर और RISC-V से प्रश्न आना स्वाभाविक था। आगे भी प्रति वर्ष 1-2 ऐसे प्रश्न आते रहेंगे।
आगे के लिए नोट्स:
C-DAC और MeitY की PIB विज्ञप्तियां पढ़ें
RISC-V क्या है — यह समझें (ओपन-सोर्स ISA, भारत की पहली पसंद क्यों)
इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन के सभी स्वीकृत संयंत्र याद करें
Economic Survey का इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण अध्याय पढ़ें
CHIPS Act (USA), EU Chips Act से तुलना करें — वैश्विक चिप राजनीति समझें
प्रश्न 45. हाल ही में, भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) ने बम निरोधक प्रणाली के परीक्षण और मूल्यांकन के लिए एक राष्ट्रीय मानक प्रवर्तित किया है। इस प्रणाली के संबंध में निम्नलिखित में से कौन-सा/कौन-से कथन सही है/हैं?
नए मानक को IS 19445:2025 के रूप में जाना जाता है।
इससे विभिन्न एजेंसियों के बीच उपकरण की अंतर-संचालनीयता (interoperability of equipment) में सुधार होगा।
DRDO के TBRL द्वारा 30वें सेंट्रल साइंटिफिक रिसर्च इंस्टिट्यूट, रूस के सहयोग से इसका विकास किया गया।
विकल्प:
(a) 1, 2 और 3
(b) केवल 2 और 3
(c) केवल 1 और 2
(d) केवल 1
सही उत्तर: (c) केवल 1 और 2व्याख्या:
कथन 1 — सही है। इस मानक का आधिकारिक नाम IS 19445:2025 है। BIS (भारतीय मानक ब्यूरो) ने इसे 2025 में प्रवर्तित किया।
कथन 2 — सही है। यह मानक विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों जैसे CRPF, BSF, NSG, पुलिस बलों के बीच बम निरोधक उपकरणों की अंतर-संचालनीयता सुनिश्चित करता है — यानी एक एजेंसी का उपकरण दूसरी एजेंसी भी उपयोग कर सके।
कथन 3 — गलत है। TBRL (टर्मिनल बैलिस्टिक्स रिसर्च लेबोरेटरी), चंडीगढ़ ने इसे स्वतंत्र रूप से विकसित किया — रूस के किसी संस्थान के सहयोग से नहीं। यह DRDO की स्वदेशी पहल है।
TBRL और BIS का संदर्भ:
TBRL: DRDO की प्रयोगशाला, चंडीगढ़ — विशेषज्ञता: विस्फोटक, बम निरोधक, बैलिस्टिक परीक्षण
BIS: भारतीय मानक ब्यूरो — उपभोक्ता मामले मंत्रालय के अंतर्गत — राष्ट्रीय मानक निर्धारण संस्था
IS 19445:2025 का महत्व: पहली बार भारत के पास बम निरोधक प्रणाली का अपना राष्ट्रीय मानक आया
पहले: विदेशी मानकों (NATO, MIL-STD) पर निर्भरता थी
अब: स्वदेशी मानक से भारतीय परिस्थितियों के अनुकूल उपकरण बनेंगे
लाभ: आतंकवाद विरोध, IED (Improvised Explosive Device) निष्क्रियण में बेहतर क्षमता
बम निरोधक प्रणाली के घटक जो इस मानक में शामिल हैं:
Bomb Disposal Suit (बम निरोधक सूट) — परीक्षण मानदंड
Remote-operated vehicle (ROV) — दूर से संचालित वाहन
X-ray imaging systems — बम की पहचान के लिए
Disruptors — बम को निष्क्रिय करने वाले उपकरण
Communication equipment — विभिन्न एजेंसियों के बीच
कठिनाई स्तर: कठिन (Hard)
कथन 3 में “रूस के सहयोग” वाला जाल सबसे खतरनाक है। अभ्यर्थी जो भारत-रूस रक्षा सहयोग के बारे में जानते हैं, वे इसे सही मान लेंगे। लेकिन यह पूर्णतः स्वदेशी विकास है।
यह प्रश्न क्यों पूछा गया: आंतरिक सुरक्षा तकनीक का मानकीकरण UPSC के लिए महत्वपूर्ण विषय है। जब भारत विदेशी मानकों से हटकर अपने राष्ट्रीय मानक बनाता है, तो यह आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ा कदम होता है। यह प्रश्न “Atmanirbhar Bharat in Defence” की थीम पर आधारित है।
परीक्षक की मंशा: परीक्षक ने जानबूझकर “रूस के सहयोग” का जाल बिछाया। भारत-रूस के बीच कई रक्षा सहयोग हैं (BrahMos, T-90 टैंक, Su-30 MKI) इसलिए अभ्यर्थी आसानी से भ्रमित होते हैं। परीक्षक यह देखना चाहता था कि अभ्यर्थी स्वदेशी DRDO परियोजनाओं की सटीक जानकारी रखता है या नहीं।
ट्रेंड विश्लेषण: UPSC में रक्षा तकनीक मानकीकरण से प्रश्न 2021 के बाद से बढ़े हैं। 2023 में BIS के खाद्य मानक, 2024 में साइबर सुरक्षा मानक से प्रश्न आए। 2026 में बम निरोधक मानक स्वाभाविक अगला चरण था।
आगे के लिए नोट्स:
BIS और उसके कार्य याद करें — यह केवल ISI मार्क तक सीमित नहीं है
DRDO की प्रयोगशालाओं की सूची बनाएं — कौन सी लैब किस क्षेत्र में काम करती है
TBRL चंडीगढ़ — विस्फोटक और बैलिस्टिक परीक्षण
भारत के रक्षा मानकीकरण का इतिहास पढ़ें
IED और काउंटर-IED तकनीक — नक्सल और आतंकवाद विरोध में महत्व
प्रश्न 49. भारत के स्वदेशी नवीन उच्च रिज़ोल्यूशन मौसम मॉडल ‘भारत पूर्वानुमान प्रणाली’ के संबंध में निम्नलिखित में से कौन-सा/कौन-से कथन सही है/हैं?
इसका उद्देश्य पंचायत समूह के स्तर पर पूर्वानुमान सृजित करना है।
इसे आईआईटी दिल्ली (IIT Delhi) द्वारा विकसित किया गया है।
विकल्प:
(a) केवल 1
(b) केवल 2
(c) 1 और 2 दोनों
(d) न तो 1, न ही 2
सही उत्तर: (c) 1 और 2 दोनोंव्याख्या:
कथन 1 — सही है। भारत पूर्वानुमान प्रणाली का उद्देश्य पंचायत स्तर तक अत्यंत स्थानीय मौसम पूर्वानुमान देना है — यानी गांव-स्तरीय किसान भी अपने खेत के लिए सटीक मौसम जानकारी पा सकें।
कथन 2 — सही है। इसे IIT दिल्ली ने विकसित किया है — पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय (MoES) के सहयोग से।
भारत पूर्वानुमान प्रणाली का पूरा संदर्भ:
विकासकर्ता: IIT दिल्ली + पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय
यह क्या करती है: पारंपरिक IMD मॉडल से 5-10 गुना अधिक रिज़ोल्यूशन पर मौसम पूर्वानुमान
रिज़ोल्यूशन: 6 किमी × 6 किमी ग्रिड (पहले 12-25 किमी था)
पूर्वानुमान क्षमता: 72 घंटे आगे तक, हर 3 घंटे पर अपडेट
पंचायत स्तर पर उपलब्धता: ग्रामीण किसान, मछुआरे, आपदा प्रबंधन के लिए
क्यों महत्वपूर्ण: भारत में 60% से अधिक खेती वर्षा पर निर्भर — सटीक पूर्वानुमान से फसल नुकसान कम होगा
तुलना: पहले IMD का NCUM (National Centre for Medium Range Weather Forecasting) मॉडल था — भारत पूर्वानुमान प्रणाली उससे बेहतर है
वैश्विक संदर्भ: यूरोप का ECMWF मॉडल विश्व में सर्वश्रेष्ठ माना जाता था — भारत अब अपना मॉडल बना रहा है
किसानों पर प्रभाव:
बुवाई और कटाई का सही समय तय करना
सिंचाई की योजना बनाना
ओले, आंधी, अतिवृष्टि की पहले चेतावनी
PM Fasal Bima Yojana के दावों को सत्यापित करने में सहायता
कठिनाई स्तर: मध्यम (Moderate)
दोनों कथन सही हैं — यह अपने आप में एक जाल है। अभ्यर्थी अक्सर सोचते हैं “दोनों सही नहीं हो सकते” और एक को गलत मान लेते हैं। IIT दिल्ली का नाम सुनकर कुछ को लगता है कि IMD या ISRO ने बनाया होगा।
यह प्रश्न क्यों पूछा गया: कृषि और मौसम विज्ञान का संगम UPSC के लिए आदर्श विषय है। “स्वदेशी तकनीक + ग्रामीण लाभ + पंचायत तक पहुंच” — यह तीनों थीम एक साथ इस प्रश्न में हैं। यह प्रश्न GS-3 (कृषि + विज्ञान-प्रौद्योगिकी) दोनों के लिए प्रासंगिक है।
परीक्षक की मंशा: परीक्षक ने IIT दिल्ली बनाम IMD का भ्रम उत्पन्न करने की कोशिश की। अधिकांश अभ्यर्थी मौसम पूर्वानुमान को स्वचालित रूप से IMD से जोड़ते हैं। जो अभ्यर्थी PIB और पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय की विज्ञप्तियां पढ़ते हैं, केवल वही जानते हैं कि यह IIT दिल्ली का प्रोजेक्ट है।
ट्रेंड विश्लेषण: मौसम विज्ञान और कृषि तकनीक से UPSC 2021 में Mission Mausam, 2023 में NOAA सहयोग, 2024 में चक्रवात पूर्वानुमान से प्रश्न आए। आगे भी हर वर्ष इस क्षेत्र से 1 प्रश्न अपेक्षित है।
आगे के लिए नोट्स:
IMD, NCMRF, IITM पुणे — तीनों की भूमिका अलग-अलग समझें
पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय की सभी प्रमुख परियोजनाएं: Deep Ocean Mission, O-SMART, Argo Float
PM Fasal Bima Yojana में तकनीक का उपयोग — मौसम डेटा कैसे काम करता है
राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन (NDMA) में मौसम पूर्वानुमान की भूमिका
प्रश्न 51. ब्लॉकचेन प्रौद्योगिकी (blockchain technology) की विशेषताओं के संबंध में निम्नलिखित में से कौन-से कथन सही हैं?
डेटाबेस में भंडारित अभिलेख, परिवर्तन के जोखिम के बिना, संबंधित हितधारकों को दृश्यगोचर करवाए जा सकते हैं।
संपूर्ण डेटाबेस की प्रतियों को बहुत सारे कंप्यूटरों के एक नेटवर्क पर भंडारित किया जाता है, जिनका तुल्यकालन (sync) सेकंडों के भीतर होता है।
कंसोर्टियम ब्लॉकचेन (consortium blockchain) सार्वजनिक और निजी ब्लॉकचेनों का मिश्रण है, जो चयनित डेटा पहुंच की अनुमति देता है।
गणितीय ऐल्गोरिथ्म एक बार अभिलिखित किए जा चुके किसी भी डेटा के परिवर्तन या विलोपन को असंभव बना देते हैं।
विकल्प:
(a) 1 और 3
(b) केवल 2 और 4
(c) 1, 2 और 4
(d) केवल 1 और 4
सही उत्तर: (c) 1, 2 और 4व्याख्या:
कथन 1 — सही है। ब्लॉकचेन में डेटा सभी अधिकृत हितधारकों को दिखता है (transparency) लेकिन बदला नहीं जा सकता (immutability)। यह “trustless transparency” का आधार है।
कथन 2 — सही है। ब्लॉकचेन एक वितरित खाता (distributed ledger) है — एक ही डेटाबेस की हजारों प्रतियां हजारों कंप्यूटरों पर एक साथ होती हैं और सेकंडों में sync होती हैं। इसीलिए इसे हैक करना लगभग असंभव है।
कथन 3 — गलत है। Consortium Blockchain वह है जहां कुछ चुनी हुई संस्थाओं (जैसे बैंकों का समूह) का नियंत्रण होता है — यह पूरी तरह सार्वजनिक नहीं होती और न ही पूरी तरह निजी। यह कहना कि यह “सार्वजनिक और निजी का मिश्रण” है — तकनीकी रूप से अधूरा/गलत विवरण है। Consortium ब्लॉकचेन में प्रवेश के लिए अनुमति लेनी पड़ती है (permissioned) जो इसे public blockchain से अलग करती है।
कथन 4 — सही है। क्रिप्टोग्राफिक हैशिंग एल्गोरिदम (SHA-256 आदि) एक बार दर्ज डेटा को बदलना या मिटाना असंभव बना देते हैं — यही ब्लॉकचेन की “immutability” है।
ब्लॉकचेन का पूरा संदर्भ:
प्रकार: Public (Bitcoin, Ethereum), Private (Hyperledger), Consortium (R3, Quorum)
भारत में उपयोग: DigiLocker (भूमि रिकॉर्ड), NITI Aayog का IndiaChain, SEBI का बॉन्ड सत्यापन, TradeLens (बंदरगाह), RBI CBDC (डिजिटल रुपया — ब्लॉकचेन-आधारित)
Web3: इंटरनेट का अगला संस्करण जहां ब्लॉकचेन केंद्रीय भूमिका निभाएगी
NFT (Non-Fungible Token): ब्लॉकचेन पर डिजिटल स्वामित्व
Smart Contract: ब्लॉकचेन पर स्वचालित अनुबंध — बिना मध्यस्थ के लेनदेन
कठिनाई स्तर: मध्यम (Moderate)
कथन 3 का “consortium” वाला जाल ज्यादातर अभ्यर्थियों को फंसाता है। जो लोग सतही रूप से ब्लॉकचेन जानते हैं वे सोचते हैं consortium = public + private मिश्रण = सही। लेकिन तकनीकी परिभाषा में consortium एक अलग श्रेणी है।
यह प्रश्न क्यों पूछा गया: RBI का डिजिटल रुपया (CBDC), ONDC, NFT, Web3 — 2023-2025 में ब्लॉकचेन आधारित नीतियां भारत में तेजी से आईं। UPSC इस तकनीकी आधार को समझना चाहता है जिस पर ये नीतियां टिकी हैं।
परीक्षक की मंशा: परीक्षक यह जांचना चाहता था कि अभ्यर्थी ब्लॉकचेन की तकनीकी विशेषताओं (immutability, distributed ledger, cryptographic algorithm) को सतही शब्दों से परे समझता है या नहीं। Consortium ब्लॉकचेन की गलत परिभाषा जानबूझकर डाली गई।
ट्रेंड विश्लेषण: 2022 में Cryptocurrency, 2023 में CBDC/डिजिटल रुपया, 2024 में NFT और Web3, 2026 में ब्लॉकचेन की तकनीकी विशेषताएं — यह क्रमिक गहराई दिखाता है। आगे Smart Contract और DeFi (Decentralised Finance) से प्रश्न आ सकते हैं।
आगे के लिए नोट्स:
तीनों प्रकार की ब्लॉकचेन (Public, Private, Consortium) की परिभाषा और उदाहरण याद करें
RBI का CBDC (डिजिटल रुपया) पायलट — खुदरा और थोक दोनों
NITI Aayog का IndiaChain कार्यक्रम
ब्लॉकचेन बनाम पारंपरिक डेटाबेस — मुख्य अंतर
SHA-256 हैशिंग क्या है — सरल भाषा में समझें
प्रश्न 66. आनुवंशिक चिकित्सा (जेनेटिक मेडिसिन) के संबंध में निम्नलिखित में से कौन-सा/कौन-से कथन सही है/हैं?
आनुवंशिक चिकित्सा, रोग के लिए उत्तरदायी खराब जीन को सही करती है/की कमी को पूरा करती है।
निर्मित विषाणुओं (engineered viruses) और लिपिड नैनोकणों का प्रयोग आनुवंशिक चिकित्सा के वाहक के रूप में किया जाता है।
आनुवंशिक चिकित्सा संपूर्ण डीएनए (DNA) अनुक्रम को बदल देती है।
विकल्प:
(a) केवल 1
(b) केवल 2 और 3
(c) केवल 1 और 2
(d) 1, 2 और 3
सही उत्तर: (c) केवल 1 और 2व्याख्या:
कथन 1 — सही है। जीन थेरेपी का मूल उद्देश्य किसी रोग के लिए जिम्मेदार दोषपूर्ण जीन को ठीक करना या उसकी कमी पूरी करना है। उदाहरण: सिकल सेल एनीमिया में HBB जीन को ठीक करना।
कथन 2 — सही है। जीन को कोशिका तक पहुंचाने के लिए “वेक्टर” (वाहक) की जरूरत होती है — इंजीनियर्ड वायरस (Adeno-associated virus, Lentivirus) और लिपिड नैनोपार्टिकल (जैसे COVID वैक्सीन में mRNA पहुंचाने के लिए उपयोग) दोनों प्रमुख वाहक हैं।
कथन 3 — गलत है। जीन थेरेपी पूरे DNA अनुक्रम को नहीं बदलती। यह केवल एक विशिष्ट दोषपूर्ण जीन को ठीक करती है या बदलती है — पूरे जीनोम को नहीं।
जेनेटिक मेडिसिन का पूरा संदर्भ:
जीन थेरेपी के प्रकार: Somatic Gene Therapy (शरीर की कोशिकाओं में — वंशजों में नहीं जाता), Germline Gene Therapy (प्रजनन कोशिकाओं में — वंशजों में भी जाता — नैतिक विवाद)
CRISPR-Cas9: क्रांतिकारी जीन संपादन तकनीक — “जेनेटिक कैंची” — 2020 में रसायन विज्ञान नोबेल पुरस्कार
भारत में जीन थेरेपी: ICMR की गाइडलाइन 2019, DBT की जैव प्रौद्योगिकी नियामक ढांचा
विश्व की पहली जीन थेरेपी: 1990 में ADA-SCID (इम्यूनोडेफिशिएंसी) के लिए
हाल की सफलताएं: सिकल सेल एनीमिया के लिए Casgevy (2023, FDA-अनुमोदित पहला CRISPR उपचार)
भारत में सिकल सेल: आदिवासी जनसंख्या में उच्च प्रसार — PM Modi ने राष्ट्रीय सिकल सेल अनीमिया उन्मूलन मिशन 2023 लॉन्च किया
लिपिड नैनोपार्टिकल: COVID-19 mRNA वैक्सीन (Pfizer, Moderna) ने इस तकनीक को विश्व-प्रसिद्ध किया
कठिनाई स्तर: मध्यम (Moderate)
कथन 3 का जाल “संपूर्ण DNA अनुक्रम” वाला है। जो लोग जीन थेरेपी और DNA रिप्रोग्रामिंग को एक मानते हैं, वे इसे सही समझ लेंगे। लेकिन जीन थेरेपी केवल लक्षित जीन तक सीमित है।
यह प्रश्न क्यों पूछा गया: 2023 में CRISPR का पहला नैदानिक उपयोग, 2024 में भारत का सिकल सेल मिशन, 2025 में जीन संपादन के नैतिक विवाद — ये सभी घटनाएं इस प्रश्न की पृष्ठभूमि हैं। UPSC GS-3 में “जैव प्रौद्योगिकी के लाभ और चिंताएं” एक स्थायी विषय है।
परीक्षक की मंशा: परीक्षक यह जांचना चाहता था कि अभ्यर्थी जीन थेरेपी और जीनोम एडिटिंग के बीच का अंतर जानता है। “पूरे DNA को बदलना” एक बड़ा भ्रम है जो प्रचलित समाचारों में अक्सर फैलाया जाता है। यह प्रश्न उसी भ्रम को परखता है।
ट्रेंड विश्लेषण: UPSC 2021 में CRISPR, 2022 में mRNA वैक्सीन, 2023 में GenomeIndia, 2024 में जीन थेरेपी नैतिकता — जैव प्रौद्योगिकी से प्रति वर्ष 1-2 प्रश्न आते हैं। 2027 तक Synthetic Biology और Designer Organisms से प्रश्न आ सकते हैं।
आगे के लिए नोट्स:
CRISPR-Cas9 कैसे काम करता है — सरल भाषा में समझें
Somatic बनाम Germline Gene Therapy का नैतिक अंतर
PM सिकल सेल अनीमिया उन्मूलन मिशन 2023 के लक्ष्य
ICMR और DBT की जैव प्रौद्योगिकी नीतियां
लिपिड नैनोपार्टिकल — COVID वैक्सीन से जीन थेरेपी तक का सफर
प्रश्न 67. यंत्र अधिगम (मशीन लर्निंग) में प्रयुक्त लार्ज लैंगवेज मॉडलों (LLMs) के संबंध में निम्नलिखित में से कौन-सा/कौन-से कथन सही है/हैं?
LLMs निकटस्थ संभावित शब्दों के लिए प्रायिकताएं निर्दिष्ट करते हैं और तत्पश्चात सर्वोच्च प्रायिकता वाले शब्द को चुनते हैं।
LLMs पूर्वानुमान संबंधी वृटियों को न्यूनतम करने के लिए गणितीय इष्टतमीकरण के माध्यम से डेटा का संसाधन (process) करते हैं।
LLMs निष्पक्ष निर्गम (unbiased outputs) उत्पन्न करते हैं।
विकल्प:
(a) केवल 1
(b) केवल 1 और 2
(c) केवल 2 और 3
(d) 1, 2 और 3
सही उत्तर: (b) केवल 1 और 2व्याख्या:
कथन 1 — सही है। LLMs मूलतः “अगले सबसे संभावित शब्द/टोकन” का अनुमान लगाने वाली प्रणाली हैं। वे प्रत्येक संभावित अगले शब्द को एक प्रायिकता (probability) देते हैं और सर्वोच्च वाले को चुनते हैं — यही Autoregressive Language Modeling है।
कथन 2 — सही है। LLMs का प्रशिक्षण Gradient Descent नामक गणितीय अनुकूलन विधि से होता है — जो पूर्वानुमान त्रुटियों को बार-बार घटाकर मॉडल को बेहतर बनाती है। इसीलिए GPT-4 को प्रशिक्षित करने में अरबों गणनाएं करनी पड़ती हैं।
कथन 3 — गलत है। LLMs पूर्णतः निष्पक्ष नहीं होते। वे उन्हीं पूर्वाग्रहों (biases) को विरासत में लेते हैं जो उनके प्रशिक्षण डेटा में थे। उदाहरण: यदि प्रशिक्षण डेटा में लैंगिक पूर्वाग्रह है तो LLM भी लैंगिक पूर्वाग्रह दिखाएगा। यह AI Ethics का सबसे बड़ा मुद्दा है।
LLMs का पूरा संदर्भ:
LLM के उदाहरण: GPT-4 (OpenAI), Gemini (Google), Claude (Anthropic), LLaMA (Meta), Ola Krutrim (भारतीय)
काम कैसे करते हैं: Transformer architecture → Attention mechanism → Next-token prediction → Autoregressive generation
प्रशिक्षण डेटा: इंटरनेट का विशाल भाग — Wikipedia, books, code, social media
Parameters: GPT-4 में अनुमानित 1.76 trillion parameters (भार/weight)
Hallucination: LLM द्वारा गलत लेकिन आत्मविश्वास से कही गई बात — बड़ी समस्या
भारत में LLM: IITM का Sarvam AI (22 भारतीय भाषाएं), Ola Krutrim, BhasaVerse
AI Act (EU): 2024 में लागू — LLM उपयोग का पहला व्यापक कानून
भारत की AI नीति: IndiaAI Mission 2024 — 10,000 GPU compute infrastructure
कठिनाई स्तर: कठिन (Hard)
कथन 3 सबसे बड़ा जाल है। “AI निष्पक्ष और तटस्थ है” — यह एक प्रचलित गलत धारणा है। UPSC परीक्षक ने इसी धारणा को परखा। AI Ethics की गहरी समझ रखने वाले ही इसे तुरंत गलत पहचान पाएंगे।
यह प्रश्न क्यों पूछा गया: ChatGPT का उदय (2022), भारत सरकार की AI नीति (2024), AI का प्रशासन में उपयोग, AI के नैतिक खतरे — ये सभी UPSC के अनुसार “युग-परिवर्तनकारी तकनीक” के उदाहरण हैं। LLM की तकनीकी समझ परीक्षार्थी को इस युग को नीति स्तर पर समझने में मदद करती है।
परीक्षक की मंशा: परीक्षक यह देखना चाहता था कि अभ्यर्थी LLM को “जादुई बक्से” की तरह नहीं बल्कि गणितीय प्रक्रिया के रूप में समझता है। और यह भी कि वह AI के सीमाओं (bias, hallucination) के बारे में जागरूक है। यह नीति निर्माताओं के लिए आवश्यक ज्ञान है।
ट्रेंड विश्लेषण: UPSC 2022 में Machine Learning की परिभाषा, 2023 में Deep Learning, 2024 में Generative AI — अब 2026 में LLM की तकनीकी विशेषताएं। आगे Multimodal AI, AI Governance, Explainable AI (XAI) से प्रश्न आ सकते हैं।
आगे के लिए नोट्स:
Transformer architecture का मूल सिद्धांत — Attention is All You Need (2017 paper)
Gradient Descent क्या है — सरल भाषा में
AI Bias के प्रकार और उदाहरण याद करें
IndiaAI Mission 2024 के 7 स्तंभ
EU AI Act की मुख्य श्रेणियां (High Risk, Limited Risk, Minimal Risk)
Hallucination समस्या और RAG (Retrieval Augmented Generation) समाधान
प्रश्न 68. स्टेल्थ (stealth) प्रौद्योगिकी के संबंध में निम्नलिखित में से कौन-सा/कौन-से कथन सही है/हैं?
स्टेल्थ वस्तुओं (objects) में अति-लघु रेडार अनुप्रस्थ-परिच्छेद (क्रॉस-सेक्शन) होता है और उन्हें रेडार अवशोषक पदार्थ से विलेपित किया जाता है।
विशिष्ट आवृत्तियों का प्रयोग करके स्टेल्थ वस्तुओं (objects) का पता लगाया जा सकता है।
स्टेल्थ वस्तुओं (objects) को मेटा-पदार्थों (metamaterials) से विलेपित किया जाता है ताकि विद्युत्-चुम्बकीय विकिरण के प्रकीर्णन में वृद्धि की जा सके।
विकल्प:
(a) केवल 1
(b) केवल 2 और 3
(c) केवल 1 और 2
(d) 1, 2 और 3
सही उत्तर: (c) केवल 1 और 2व्याख्या:
कथन 1 — सही है। स्टेल्थ तकनीक का मूल सिद्धांत है — रेडार क्रॉस-सेक्शन (RCS) को न्यूनतम करना। यह दो तरीकों से होता है: (a) विमान का आकार ऐसा बनाना जो रेडार तरंगों को वापस न भेजे, (b) RAM (Radar Absorbing Material) कोटिंग लगाना जो रेडार तरंगों को सोख ले।
कथन 2 — सही है। पूर्ण स्टेल्थ असंभव है। विशिष्ट निम्न-आवृत्ति रेडार (VHF/UHF बैंड) स्टेल्थ विमानों को पकड़ सकते हैं। रूस का Nebo-M और चीन का JY-26 रेडार इसी सिद्धांत पर काम करते हैं।
कथन 3 — गलत है। मेटामटेरियल का उपयोग विद्युत-चुंबकीय विकिरण के प्रकीर्णन को बढ़ाने के लिए नहीं, बल्कि उसे मोड़ने (bend/redirect) के लिए होता है — ताकि रेडार तरंगें विमान के चारों ओर से निकल जाएं। “प्रकीर्णन बढ़ाना” स्टेल्थ का उद्देश्य नहीं — यह तो रेडार पर और ज्यादा दिखाएगा।
स्टेल्थ तकनीक का पूरा संदर्भ:
RCS (Radar Cross Section): एक काल्पनिक क्षेत्रफल जो बताता है कि कोई वस्तु रेडार को कितना संकेत वापस भेजती है — जितना कम उतना बेहतर
स्टेल्थ तकनीक के आयाम: आकार (Geometry), कोटिंग (RAM), इंजन डिजाइन (नोजल आकार), कॉकपिट कैनोपी (रेडार-अवशोषक)
प्रसिद्ध स्टेल्थ विमान: F-22 Raptor, F-35 Lightning II (USA), B-2 Spirit Bomber (USA), J-20 (चीन), Su-57 (रूस)
भारतीय संदर्भ: AMCA (Advanced Medium Combat Aircraft) — भारत का स्टेल्थ लड़ाकू विमान विकास — 5th Gen
मेटामटेरियल: प्रकृति में न पाए जाने वाले इंजीनियर्ड पदार्थ — नकारात्मक अपवर्तनांक — “अदृश्यता लबादा” (invisibility cloak) का वैज्ञानिक आधार
Low Observable (LO) technology: स्टेल्थ का आधिकारिक नाम
कठिनाई स्तर: मध्यम (Moderate)
कथन 3 का “प्रकीर्णन बढ़ाना” वाला जाल तकनीकी जानकारी के बिना पकड़ना मुश्किल है। मेटामटेरियल का नाम सुनकर अधिकांश इसे सही मान लेंगे।
यह प्रश्न क्यों पूछा गया: AMCA, F-35 की भारत को बिक्री की चर्चा, रूस-यूक्रेना युद्ध में स्टेल्थ ड्रोन का उपयोग — ये सभी 2024-25 की घटनाएं इस प्रश्न की पृष्ठभूमि हैं। रक्षा तकनीक में “क्या है और कैसे काम करता है” समझना UPSC के लिए जरूरी है।
परीक्षक की मंशा: परीक्षक ने मेटामटेरियल का गलत उपयोग दिखाकर जांचा कि अभ्यर्थी “buzzword” से परे तकनीकी सिद्धांत समझता है या नहीं। स्टेल्थ तकनीक में RCS कम करना लक्ष्य है — बढ़ाना नहीं।
ट्रेंड विश्लेषण: 2022 में हाइपरसोनिक मिसाइल, 2023 में ड्रोन तकनीक, 2024 में साइबर युद्ध, 2026 में स्टेल्थ तकनीक। आगे Directed Energy Weapons (लेजर हथियार), Electromagnetic Pulse (EMP), Quantum Radar से प्रश्न आ सकते हैं।
आगे के लिए नोट्स:
AMCA परियोजना — ADA (Aeronautical Development Agency) द्वारा
RAM (Radar Absorbing Material) के प्रकार
मेटामटेरियल की परिभाषा और उपयोग के क्षेत्र
भारत के 5th Gen विमान कार्यक्रम की स्थिति
रक्षा तकनीक में भारत की आत्मनिर्भरता — iDEX पहल
प्रश्न 69. आधुनिक विमानों में प्रयुक्त होने वाले ब्लैक बॉक्सों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन-सा/कौन-से कथन सही है/हैं?
उनमें लाल प्रकाश स्पंद उत्सर्जित करने वाला एक बीकन होता है ताकि उनकी अंतर्जलीय खोज को सुकर बनाया जा सके।
वे कॉकपिट वॉइस और फ्लाइट डेटा, दोनों को रिकॉर्ड करते हैं।
उनके मेमोरी यूनिटों के निर्माण में या तो जंगरोधी इस्पात (स्टेनलेस स्टील) या टाइटेनियम का उपयोग किया जाता है।
विकल्प:
(a) केवल 1
(b) केवल 2 और 3
(c) केवल 1 और 2
(d) 1, 2 और 3
सही उत्तर: (b) केवल 2 और 3व्याख्या:
कथन 1 — गलत है। ब्लैक बॉक्स का Underwater Locator Beacon (ULB) लाल प्रकाश नहीं बल्कि ध्वनि पिंग (acoustic ping) उत्सर्जित करता है — 37.5 kHz की अल्ट्रासोनिक आवृत्ति पर। यह ध्वनि पानी के अंदर कई किलोमीटर तक सुनी जा सकती है। लाल प्रकाश पानी में प्रभावी नहीं होता।
कथन 2 — सही है। आधुनिक विमानों में दो अलग रिकॉर्डर होते हैं — CVR (Cockpit Voice Recorder) और FDR (Flight Data Recorder)। व्यावहारिक रूप से दोनों एक ही इकाई में “ब्लैक बॉक्स” के नाम से जाने जाते हैं।
कथन 3 — सही है। ब्लैक बॉक्स की मेमोरी यूनिट स्टेनलेस स्टील या टाइटेनियम की कठोर सुरक्षात्मक आवरण में होती है — 1100°C तापमान, 3400G का आघात, 6000 मीटर गहरे पानी का दबाव सहन करने में सक्षम।
ब्लैक बॉक्स का पूरा संदर्भ:
ब्लैक बॉक्स वास्तव में नारंगी रंग का होता है — आसानी से दिखे इसलिए
CVR: पिछले 2 घंटे की कॉकपिट की आवाजें रिकॉर्ड करता है
ULB: पानी में गिरने पर 37.5 kHz पिंग, 30 दिनों तक, 6000 मीटर गहराई तक काम करता है
आविष्कार: 1950s में David Warren (ऑस्ट्रेलिया) ने किया
ICAO अनिवार्यता: सभी वाणिज्यिक विमानों में FDR और CVR अनिवार्य — ICAO Annex 6
MH370 हादसे के बाद: 37.5 kHz को 8.8 kHz से बदलने पर विचार — अधिक गहराई तक पहुंच के लिए
भारत में: AAIB (Aircraft Accident Investigation Bureau) ब्लैक बॉक्स विश्लेषण करता है
कठिनाई स्तर: सरल (Easy)
कथन 1 का “लाल प्रकाश बनाम ध्वनि पिंग” भेद सरल है लेकिन जो सतही जानकारी रखते हैं वे “बीकन = प्रकाश” मान लेंगे। बाकी दोनों कथन सुपरिचित हैं।
यह प्रश्न क्यों पूछा गया: UPSC में विमानन सुरक्षा और दुर्घटना जांच प्रक्रिया से समय-समय पर प्रश्न आते हैं। 2024 में कई विमान दुर्घटनाएं (यमन, जापान, नेपाल) और MH370 की 10वीं वर्षगांठ ने ब्लैक बॉक्स चर्चा में रहे।
परीक्षक की मंशा: “बीकन = प्रकाश” वाली सामान्य धारणा को तोड़ना। ब्लैक बॉक्स पानी में ध्वनि से खोजा जाता है, प्रकाश से नहीं — यह तकनीकी सटीकता परीक्षार्थी को जांचती है।
ट्रेंड विश्लेषण: विमानन सुरक्षा से UPSC में छिटपुट प्रश्न आते हैं — 2019 में DGCA सुधार, 2022 में विमानन विधेयक, 2025 में ब्लैक बॉक्स। आगे UAS Traffic Management (ड्रोन ट्रैफिक), Urban Air Mobility से प्रश्न संभव।
आगे के लिए नोट्स:
CVR और FDR का अंतर स्पष्ट करें
ICAO Annex 6 — विमान रिकॉर्डिंग आवश्यकताएं
AAIB भारत — विमान दुर्घटना जांच प्रक्रिया
MH370 — विश्व की सबसे बड़ी विमान रहस्य और ब्लैक बॉक्स की सीमाएं
ELT (Emergency Locator Transmitter) — ब्लैक बॉक्स से अलग, दुर्घटना में GPS संकेत
प्रश्न 70. हरित (ग्रीन) हाइड्रोजन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन-सा/कौन-से कथन सही है/हैं?
यह विकार्बनीकृत (decarbonized) हाइड्रोजन है जो प्राकृतिक गैस के पुनरुत्पादन द्वारा प्राप्त होती है जिसमें कार्बन अभिग्रहण और संचयन (CCS) भी सम्मिलित है।
नवीकरणीय ऊर्जा से जनित विद्युत का उपयोग करके जल के विद्युत-अपघटन द्वारा इसका उत्पादन किया जाता है।
भारत के राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन का लक्ष्य, वर्ष 2030 तक वार्षिक ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में लगभग 50 MMT की कमी लाना है।
विकल्प:
(a) केवल 1
(b) केवल 2 और 3
(c) केवल 2
(d) 1, 2 और 3
सही उत्तर: (b) केवल 2 और 3व्याख्या:
कथन 1 — गलत है। कथन 1 में वर्णित प्रक्रिया “ब्लू हाइड्रोजन” है, हरित नहीं। ब्लू हाइड्रोजन प्राकृतिक गैस के Steam Methane Reforming (SMR) से बनती है जिसमें निकलने वाले CO₂ को CCS से पकड़ा जाता है। हरित हाइड्रोजन पूरी तरह अलग प्रक्रिया से बनती है।
कथन 2 — सही है। हरित हाइड्रोजन = नवीकरणीय ऊर्जा (सौर/पवन) से बिजली बनाओ → उस बिजली से इलेक्ट्रोलाइजर चलाओ → पानी (H₂O) को हाइड्रोजन (H₂) और ऑक्सीजन (O₂) में तोड़ो → शुद्ध हरित हाइड्रोजन मिलती है। पूरी प्रक्रिया में कोई कार्बन उत्सर्जन नहीं।
कथन 3 — सही है। राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन का 2030 तक लक्ष्य: 5 MMT वार्षिक हरित हाइड्रोजन उत्पादन क्षमता और लगभग 50 MMT वार्षिक GHG उत्सर्जन में कमी।
हाइड्रोजन रंग कोड — पूरी सूची:
हरित हाइड्रोजन: नवीकरणीय ऊर्जा + इलेक्ट्रोलिसिस — शून्य कार्बन
नीला हाइड्रोजन: प्राकृतिक गैस + SMR + CCS — कम कार्बन
ग्रे हाइड्रोजन: प्राकृतिक गैस + SMR — CCS नहीं — उच्च कार्बन (सबसे सस्ता, सबसे प्रचलित)
काला/भूरा हाइड्रोजन: कोयले से — सबसे अधिक कार्बन
गुलाबी हाइड्रोजन: परमाणु ऊर्जा + इलेक्ट्रोलिसिस
फ़िरोज़ा हाइड्रोजन: मीथेन पाइरोलिसिस — ठोस कार्बन उप-उत्पाद
भारत का राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन:
घोषणा: जनवरी 2023, MoNRE के अंतर्गत
लक्ष्य 2030: 5 MMT/वर्ष उत्पादन, 50 MMT CO₂ कमी, ₹8 लाख करोड़ निवेश, 6 लाख रोजगार
SIGHT (Strategic Interventions for Green Hydrogen Transition): इलेक्ट्रोलाइजर निर्माण और हरित हाइड्रोजन उत्पादन को प्रोत्साहन
उपयोग क्षेत्र: उर्वरक उद्योग (अमोनिया), इस्पात उद्योग, परिवहन (ईंधन सेल वाहन), ऊर्जा भंडारण
चुनौती: हरित हाइड्रोजन की लागत अभी ग्रे से 4-5 गुना अधिक
कठिनाई स्तर: मध्यम (Moderate)
कथन 1 में “ब्लू बनाम ग्रीन हाइड्रोजन” का भेद सबसे बड़ा जाल है। CCS का जिक्र सुनते ही कुछ अभ्यर्थी “हां, यह तो स्वच्छ है” मान लेंगे। लेकिन Green = Renewable electricity + Electrolysis — यह परिभाषा पक्की होनी चाहिए।
यह प्रश्न क्यों पूछा गया: राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन 2023 में लॉन्च हुआ — UPSC के लिए इसकी तकनीकी और नीतिगत दोनों परतें महत्वपूर्ण हैं। भारत का 2070 Net Zero लक्ष्य और हरित हाइड्रोजन की केंद्रीय भूमिका UPSC की दीर्घकालिक थीम है।
परीक्षक की मंशा: हाइड्रोजन के रंग कोड की सटीक जानकारी परखना। “CCS = स्वच्छ = हरित” — यह गलत धारणा बहुत प्रचलित है। परीक्षक ने इसी को जाल बनाया। हरित और नीले हाइड्रोजन का अंतर न जानने वाले अभ्यर्थी फंसेंगे।
ट्रेंड विश्लेषण: 2021 में Hydrogen Economy, 2022 में National Hydrogen Mission, 2023 में SIGHT, 2024 में Green Hydrogen हब — यह विषय प्रति वर्ष UPSC में आता है। आगे Hydrogen Fuel Cell Vehicle (FCEV), Green Ammonia, Power-to-X तकनीक से प्रश्न संभव।
आगे के लिए नोट्स:
हाइड्रोजन के सभी रंग कोड — परिभाषा और उदाहरण
National Green Hydrogen Mission 2023 — सभी लक्ष्य याद करें
SIGHT कार्यक्रम के घटक
इलेक्ट्रोलाइजर के प्रकार: Alkaline, PEM, Solid Oxide
Green Ammonia — उर्वरक उद्योग में उपयोग और भारत की रणनीति
प्रश्न 71. भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम में निजी संस्थाओं की भागीदारी के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
भारतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष संवर्धन एवं प्राधिकरण केंद्र (IN-SPACe) एक स्वायत्त अभिकरण है जिसकी स्थापना निजी संस्थाओं की भागीदारी को सुकर बनाने के लिए की गई है।
अग्निकुल कॉसमॉस ने विश्व में पहली बार 3D-प्रिंटेड रॉकेट इंजन का उपयोग करके उड़ान (फ्लाइट) का प्रक्षेपण किया।
स्काईरूट एयरोस्पेस ने GSLV के लिए तरल ईंधन (Liquid fuel) विकसित किया।
विकल्प:
(a) केवल 1
(b) केवल 2 और 3
(c) केवल 1 और 2
(d) 1, 2 और 3
सही उत्तर: (c) केवल 1 और 2व्याख्या:
कथन 1 — सही है। IN-SPACe (Indian National Space Promotion and Authorisation Centre) की स्थापना 2020 में DOS (Department of Space) के अंतर्गत की गई। यह निजी क्षेत्र को अंतरिक्ष गतिविधियों में भाग लेने की अनुमति देने, नियमन करने और बढ़ावा देने का कार्य करती है।
कथन 2 — सही है। अग्निकुल कॉसमॉस (IIT मद्रास इनक्यूबेटेड स्टार्टअप) ने मई 2024 में Agnibaan SOrTeD का सफल प्रक्षेपण किया — यह विश्व का पहला रॉकेट था जिसमें पूरी तरह 3D-प्रिंटेड सेमी-क्रायोजेनिक इंजन (Agnilet) था।
कथन 3 — गलत है। स्काईरूट एयरोस्पेस ने GSLV के लिए नहीं, बल्कि अपने खुद के रॉकेट “Vikram-S” (नवंबर 2022 में पहला उप-कक्षीय प्रक्षेपण) और “Vikram-1” के लिए तरल ईंधन इंजन (Kalam series) विकसित किया। GSLV ISRO का रॉकेट है जिसका इंजन ISRO ही बनाता है।
भारतीय अंतरिक्ष में निजी क्षेत्र — पूरा संदर्भ:
IN-SPACe: “Single Window” नियामक — अंतरिक्ष विभाग और निजी उद्योग के बीच
अग्निकुल कॉसमॉस: पहला 3D-प्रिंटेड रॉकेट इंजन (Agnilet) — अनुकूलन योग्य प्रक्षेपण वाहन
स्काईरूट एयरोस्पेस: Vikram श्रृंखला — भारत की पहली निजी रॉकेट कंपनी ने प्रक्षेपण किया
Pixxel: भारत का पहला निजी पृथ्वी निगरानी उपग्रह
Dhruva Space: निजी उपग्रह और प्रक्षेपण सेवाएं
GalaxEye: मल्टी-सेंसर इर्थ ऑब्जर्वेशन
India Space Policy 2023: निजी क्षेत्र को उपग्रह निर्माण, प्रक्षेपण, ग्राउंड स्टेशन — सब में अनुमति
iDEX (Innovations for Defence Excellence): रक्षा-अंतरिक्ष स्टार्टअप को फंडिंग
कठिनाई स्तर: मध्यम (Moderate)
कथन 3 का जाल — “स्काईरूट ने GSLV के लिए ईंधन बनाया” — GSLV एक प्रसिद्ध नाम है इसलिए अभ्यर्थी इसे सही मान सकते हैं। लेकिन स्काईरूट का अपना रॉकेट (Vikram) है, GSLV से इसका कोई संबंध नहीं।
यह प्रश्न क्यों पूछा गया: भारत की अंतरिक्ष नीति 2023 और IN-SPACe की स्थापना — ये दोनों मिलकर भारतीय अंतरिक्ष क्षेत्र का निजीकरण करने की दिशा में ऐतिहासिक कदम हैं। 2024 में अग्निकुल की 3D-प्रिंटेड रॉकेट उड़ान वैश्विक समाचार बनी थी।
परीक्षक की मंशा: अभ्यर्थी को पता होना चाहिए कि कौन सी निजी कंपनी किस काम के लिए जानी जाती है। “स्काईरूट = GSLV का ईंधन” जैसे गलत जोड़ बनाने वाले अभ्यर्थी यहां फंसेंगे।
ट्रेंड विश्लेषण: 2022 में ISRO की उपलब्धियां, 2023 में Chandrayaan-3, 2024 में Aditya L1 और निजी अंतरिक्ष, 2026 में IN-SPACe और 3D-प्रिंटेड रॉकेट। आगे Gaganyaan (2026 लक्ष्य), NISAR (NASA-ISRO SAR), SpaceDex से प्रश्न संभव।
आगे के लिए नोट्स:
IN-SPACe, NSIL, DOS — तीनों की भूमिका अलग-अलग समझें
भारत की प्रमुख अंतरिक्ष निजी कंपनियां और उनकी विशेषता
India Space Policy 2023 के मुख्य प्रावधान
Vikram-S और Agnibaan की उड़ानों की जानकारी
Gaganyaan मिशन — astronaut training status
प्रश्न 72. ड्रोन झुंडों (स्वार्म्स) के संबंध में निम्नलिखित में से कौन-सा/कौन-से कथन सही है/हैं?
वे कमांड केंद्र के साथ संचार के लिए टेराहर्ट्ज़ बैंड आवृत्ति का प्रयोग करते हैं।
झुंड (स्वार्म) में सम्मिलित कोई ड्रोन, झुंड के अन्य ड्रोनों के साथ संचार कर सकता है।
ड्रोन झुंड के हमले को रोकने के लिए जीपीएस स्पूफिंग (GPS Spoofing) सामान्यतः प्रयोग में लाई जाने वाली तकनीक है।
विकल्प:
(a) केवल 1
(b) केवल 2 और 3
(c) केवल 1 और 2
(d) 1, 2 और 3
सही उत्तर: (b) केवल 2 और 3व्याख्या:
कथन 1 — गलत है। ड्रोन झुंड कमांड सेंटर से संचार के लिए टेराहर्ट्ज़ (THz) बैंड का नहीं, बल्कि सामान्यतः 2.4 GHz/5.8 GHz रेडियो फ्रीक्वेंसी या माइक्रोवेव बैंड का उपयोग करते हैं। THz तरंगें अभी प्रयोगशाला स्तर पर हैं और बहुत कम दूरी पर काम करती हैं।
कथन 2 — सही है। ड्रोन झुंड की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता है — Mesh Communication Network। झुंड का हर ड्रोन बाकी ड्रोनों से सीधे संवाद कर सकता है — बिना केंद्रीय नियंत्रण के। एक ड्रोन नष्ट हो जाए तो बाकी काम जारी रखते हैं।
कथन 3 — सही है। GPS Spoofing — नकली GPS संकेत भेजकर ड्रोन को गलत स्थान का भान कराना — ड्रोन झुंड को भटकाने की सबसे प्रचलित तकनीक है। रूस-यूक्रेना युद्ध में इसका व्यापक उपयोग हुआ।
ड्रोन स्वार्म का पूरा संदर्भ:
स्वार्म ड्रोन = सैकड़ों-हजारों छोटे ड्रोनों का समन्वित दल जो मिलकर एक बड़े लक्ष्य पर हमला करते हैं
Mesh Network: कोई एकल कमांड नहीं — distributed intelligence — जैसे मधुमक्खियों का झुंड
AI की भूमिका: स्वार्म ड्रोन AI से चलते हैं — real-time target recognition और coordination
काउंटर-ड्रोन तकनीक: GPS Spoofing, RF Jamming, Directed Energy (Laser), Net guns, Trained eagles
भारतीय रक्षा: iDEX के अंतर्गत स्वार्म ड्रोन विकास, DRDO का स्वार्म ड्रोन प्रदर्शन 2021
वैश्विक उदाहरण: USA का LOCUST programme, चीन का 3,000 ड्रोन प्रदर्शन, यूक्रेना में Shahed ड्रोन झुंड
Starlink जैसे उपग्रह से नियंत्रण: भविष्य का ड्रोन नेटवर्क
Anti-Drone Policy भारत: 2022 में UAS Rules और Anti-Drone guidelines जारी
कठिनाई स्तर: मध्यम (Moderate)
कथन 1 में “टेराहर्ट्ज़” — यह एक आधुनिक तकनीकी शब्द है जो अभ्यर्थियों को प्रभावशाली लगता है और वे इसे सही मान लेते हैं। लेकिन THz तकनीक अभी व्यावहारिक ड्रोन संचार में उपयोग नहीं होती।
यह प्रश्न क्यों पूछा गया: रूस-यूक्रेना युद्ध में ड्रोन झुंड का विनाशकारी उपयोग, भारत पर ड्रोन हमले (पंजाब 2021, जम्मू 2021 एयरबेस), इजराइल-हमास संघर्ष में ड्रोन — 2024-25 की सैन्य तकनीक में ड्रोन सबसे चर्चित विषय रहा।
परीक्षक की मंशा: “टेराहर्ट्ज़” जैसे प्रभावशाली तकनीकी शब्द को जानबूझकर गलत संदर्भ में डाला गया। परीक्षक यह देखना चाहता था कि अभ्यर्थी buzzword को परे रखकर तकनीकी सत्यता जांच सकता है।
ट्रेंड विश्लेषण: 2022 में ड्रोन नीति, 2023 में सैन्य ड्रोन, 2024 में Counter-Drone तकनीक, 2026 में स्वार्म ड्रोन। आगे Hypersonic Drone, Underwater Drone (UUV), AI-controlled Autonomous Weapons से प्रश्न संभव।
आगे के लिए नोट्स:
Counter-Drone System: DRDO का Smash 2000, Rafael (इजराइल) Drone Dome
GPS Spoofing बनाम GPS Jamming — तकनीकी अंतर
Starlink और ड्रोन युद्ध में इसकी भूमिका (यूक्रेना का उदाहरण)
प्रश्न 73. जीनोमइंडिया परियोजना के संबंध में निम्नलिखित में से कौन-सा/कौन-से कथन सही है/हैं?
यह मानव जीनोम परियोजना का एक भाग है।
यह परियोजना भारत सरकार के जैव प्रौद्योगिकी विभाग (DBT) के द्वारा वित्तपोषित है।
इसका मुख्य लक्ष्य भारतीय जनसंख्या की आनुवंशिक विविधता की सूची तैयार करना है।
विकल्प:
(a) केवल 1
(b) केवल 2 और 3
(c) केवल 1 और 2
(d) 1, 2 और 3
सही उत्तर: (b) केवल 2 और 3व्याख्या:
कथन 1 — गलत है। GenomeIndia मानव जीनोम परियोजना (Human Genome Project, 1990-2003) का हिस्सा नहीं है। HGP एक अंतर्राष्ट्रीय परियोजना थी जो पहले ही पूरी हो चुकी है। GenomeIndia पूरी तरह एक स्वतंत्र भारतीय परियोजना है।
कथन 2 — सही है। GenomeIndia परियोजना DBT (Department of Biotechnology), भारत सरकार द्वारा वित्तपोषित है। इसका नेतृत्व IISc बंगलुरु कर रहा है।
कथन 3 — सही है। परियोजना का मुख्य उद्देश्य भारत की 1.4 अरब जनसंख्या की आनुवंशिक विविधता को समझना है — विभिन्न जातीय समूहों, जनजातियों और क्षेत्रों के जीनोम का अध्ययन।
GenomeIndia का पूरा संदर्भ:
शुरुआत: 2020, 20 संस्थाओं की भागीदारी — IISc, IITs, CSIR, AIIMS आदि
लक्ष्य: 10,000 भारतीय व्यक्तियों का whole genome sequencing
क्यों महत्वपूर्ण: भारत की जनसंख्या आनुवंशिक रूप से अत्यंत विविध — 5000+ जातियां, 700+ जनजातियां, हजारों अंतर्विवाह समूह
फायदे: भारतीयों के लिए विशिष्ट दवाइयां बनाना (Pharmacogenomics), रोगों की आनुवंशिक प्रवृत्ति समझना, Precision Medicine
Precision Medicine: हर व्यक्ति के जीनोम के अनुसार व्यक्तिगत उपचार
Rakhigarhi DNA study: 2019 में हड़प्पा कंकालों का DNA विश्लेषण — आर्यन आक्रमण सिद्धांत को चुनौती
Human Genome Project (HGP): 1990-2003, USA-UK-France-Germany-Japan-China, पहला मानव जीनोम अनुक्रम
कठिनाई स्तर: मध्यम (Moderate)
कथन 1 में HGP से जोड़ना सबसे बड़ा जाल है। “GenomeIndia = Human Genome Project का हिस्सा” — यह स्वाभाविक लगता है लेकिन गलत है।
यह प्रश्न क्यों पूछा गया: Precision Medicine, Pharmacogenomics और भारत की आनुवंशिक विविधता 2023-25 में चर्चा में रहे। DBT की बड़ी परियोजना का UPSC में आना स्वाभाविक था।
परीक्षक की मंशा: “GenomeIndia = HGP का हिस्सा” — यह भ्रम जानबूझकर पैदा किया। परीक्षक जांचना चाहता था कि अभ्यर्थी स्वतंत्र भारतीय वैज्ञानिक परियोजनाओं को वैश्विक परियोजनाओं से अलग पहचान सकता है।
ट्रेंड विश्लेषण: 2021 में Human Genome Project, 2022 में CRISPR, 2023 में Pharmacogenomics, 2026 में GenomeIndia। आगे Synthetic Biology, Microbiome India Initiative से प्रश्न संभव।
आगे के लिए नोट्स:
HGP (1990-2003) बनाम GenomeIndia (2020-) का अंतर
DBT की प्रमुख परियोजनाएं — BioE3 Policy, BIRAC
Precision Medicine और Pharmacogenomics क्या है
IISc की भूमिका — GenomeIndia leadership
Rakhigarhi और Harappan DNA — आर्यन प्रश्न पर नया प्रकाश
प्रश्न 74. राष्ट्रीय क्वांटम मिशन (NQM) के संबंध में निम्नलिखित में से कौन-सा/कौन-से कथन सही है/हैं?
इसका उद्देश्य 50–1000 भौतिक क्यूबिट की क्षमता वाले मध्यवर्ती-स्तर के क्वांटम कंप्यूटर विकसित करना है।
इसके कार्यान्वयन के अंतर्गत संपूर्ण भारत के शैक्षणिक और राष्ट्रीय अनुसंधान एवं विकास संस्थानों (R&D institutes) में चार विषयगत (थीमेटिक) केंद्रों (T-Hubs) की स्थापना करना सम्मिलित है।
विकल्प:
(a) केवल 1
(b) केवल 2
(c) 1 और 2 दोनों
(d) न तो 1, न ही 2
सही उत्तर: (c) 1 और 2 दोनोंव्याख्या:
कथन 1 — सही है। NQM का लक्ष्य 2031 तक 50-1000 physical qubits की क्षमता वाले intermediate-scale quantum computers विकसित करना है। यह NISQ (Noisy Intermediate-Scale Quantum) कंप्यूटिंग के स्तर पर है।
कथन 2 — सही है। NQM के अंतर्गत 4 थीमेटिक हब (T-Hubs) स्थापित किए जाएंगे — देश भर के प्रमुख शैक्षणिक और R&D संस्थानों में। ये चार T-Hubs क्वांटम के चार मुख्य क्षेत्रों पर केंद्रित होंगे।
NQM का पूरा संदर्भ:
स्वीकृति: अप्रैल 2023, कैबिनेट ने ₹6003 करोड़ की मंजूरी दी
मंत्रालय: विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MoST) / DST
अवधि: 2023-2031 (8 वर्ष)
4 T-Hubs के विषय: (1) क्वांटम कंप्यूटिंग, (2) क्वांटम संचार, (3) क्वांटम सेंसिंग और मेट्रोलॉजी, (4) क्वांटम सामग्री और उपकरण
क्वांटम कंप्यूटिंग क्या है: साधारण कंप्यूटर Bits (0 या 1) उपयोग करता है; क्वांटम कंप्यूटर Qubits उपयोग करता है जो एक साथ 0 और 1 दोनों हो सकता है (Superposition)
Quantum Advantage: कुछ समस्याओं (क्रिप्टोग्राफी तोड़ना, ड्रग डिस्कवरी, फाइनेंशियल मॉडलिंग) में classical computers से लाखों गुना तेज
वैश्विक प्रतिस्पर्धा: USA (IBM 1000+ qubit), China, EU — सभी क्वांटम दौड़ में
Quantum Supremacy: Google ने 2019 में 200 सेकंड में वह काम किया जो classical computer को 10,000 साल लगते
भारत का स्तर: अभी शुरुआती चरण — NQM से 2031 तक meaningful quantum capability का लक्ष्य
Quantum Communication: Quantum Key Distribution (QKD) — अटूट सुरक्षित संचार — भारत-चीन LAC पर रणनीतिक महत्व
कठिनाई स्तर: मध्यम (Moderate)
दोनों कथन सही हैं — यह अपने आप में जाल है। “50-1000 qubit” की विशिष्ट संख्या और “4 T-Hubs” — दोनों सटीक जानकारी मांगते हैं।
यह प्रश्न क्यों पूछा गया: NQM 2023 में कैबिनेट से ₹6003 करोड़ के साथ पास हुई — यह भारत की सबसे बड़ी वैज्ञानिक निवेश परियोजनाओं में से एक है। Quantum Computing राष्ट्रीय सुरक्षा (encryption), आर्थिक प्रतिस्पर्धा और वैज्ञानिक क्षमता — तीनों के लिए महत्वपूर्ण है।
परीक्षक की मंशा: NQM के विशिष्ट आंकड़े (50-1000 qubit, 4 T-Hubs) याद हों या नहीं — यह परखना। जो अभ्यर्थी केवल “भारत ने क्वांटम मिशन लॉन्च किया” जानता है, वह दोनों कथनों की सत्यता नहीं जांच पाएगा।
ट्रेंड विश्लेषण: 2022 में Quantum Entanglement (Nobel Prize), 2023 में NQM लॉन्च, 2024 में Quantum Communication, 2026 में NQM के विशिष्ट लक्ष्य। आगे Quantum Internet, Post-Quantum Cryptography से प्रश्न संभव।
आगे के लिए नोट्स:
Qubit, Superposition, Entanglement — तीनों अवधारणाएं सरल भाषा में समझें
NQM के 4 T-Hubs के विषय और संस्थान
Quantum vs Classical Computing — कौन सी समस्याएं quantum के लिए उपयुक्त
Post-Quantum Cryptography — जब quantum computers RSA encryption तोड़ दें तब क्या
IBM, Google, China की quantum प्रगति — वैश्विक स्थिति
प्रश्न 75. भारत के डीप ओशन मिशन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन-सा/कौन-से कथन सही है/हैं?
इसे भारत सरकार के पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय द्वारा आरंभ किया गया था।
गहरे समुद्री खोज हेतु 3 लोगों को ले जाने के लिए मत्स्य-6000 को डिज़ाइन किया गया है।
इस मिशन के अंतर्गत समुद्रयान एक परियोजना है।
विकल्प:
(a) केवल 1
(b) केवल 2 और 3
(c) केवल 1 और 2
(d) 1, 2 और 3
सही उत्तर: (b) केवल 2 और 3व्याख्या:
कथन 1 — गलत है। डीप ओशन मिशन पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय (Ministry of Earth Sciences, MoES) के अंतर्गत है — न कि पत्तन/पोत परिवहन मंत्रालय के। यह एक बहुत प्रचलित भ्रम है।
कथन 2 — सही है। मत्स्य-6000 एक मानवयुक्त पनडुब्बी (submersible) है जो 3 व्यक्तियों को 6000 मीटर गहराई तक ले जाने में सक्षम है। इसे NIOT (National Institute of Ocean Technology), चेन्नई द्वारा विकसित किया जा रहा है।
कथन 3 — सही है। समुद्रयान, डीप ओशन मिशन के अंतर्गत एक उप-परियोजना है जिसमें मत्स्य-6000 का उपयोग करके गहरे समुद्री संसाधनों की खोज की जाएगी।
डीप ओशन मिशन का पूरा संदर्भ:
स्वीकृति: जून 2021, ₹4077 करोड़, 5 वर्ष
मंत्रालय: MoES (Ministry of Earth Sciences) — यह ISRO नहीं, Shipping नहीं
6 प्रमुख घटक: (1) Deep Sea Mining + manned submersible, (2) Ocean Climate Change Advisory Services, (3) Technological Innovation for Deep-sea, (4) Deep Ocean Survey and Exploration, (5) Energy and freshwater from ocean, (6) Ocean Biology and Marine Biodiversity
मत्स्य-6000: 2.1 मीटर व्यास का titanium sphere, 12 घंटे की क्षमता, 96 घंटे आपातकालीन ऑक्सीजन
लक्ष्य: Polymetallic nodules खनन (कोबाल्ट, मैंगनीज, निकेल, तांबा) — समुद्र तल पर मिलते हैं
India’s Exclusive Economic Zone (EEZ): 2.37 million km² — इसमें विशाल समुद्री संसाधन
वैश्विक संदर्भ: China का Jiaolong, USA का Alvin, Japan का Shinkai 6500 — अब भारत का मत्स्य-6000
समुद्र में खनिज: भारत को ISA (International Seabed Authority) से अंटार्कटिका और हिंद महासागर में खनन अन्वेषण का लाइसेंस मिला है
कठिनाई स्तर: मध्यम (Moderate)
कथन 1 में मंत्रालय का भ्रम सबसे बड़ा जाल है। “समुद्र = नौवहन मंत्रालय” — यह स्वाभाविक लगता है लेकिन गलत है। MoES वैज्ञानिक अन्वेषण के लिए है।
यह प्रश्न क्यों पूछा गया: Deep Ocean Mission 2021 में लॉन्च हुआ और 2024-25 में मत्स्य-6000 के परीक्षण की खबरें आईं। Blue Economy, समुद्री खनिज, और भारत का 2 मिलियन km² EEZ — ये UPSC के लिए महत्वपूर्ण नीतिगत विषय हैं।
परीक्षक की मंशा: “समुद्री मिशन = नौवहन मंत्रालय” — यह स्वाभाविक गलती है। परीक्षक ने MoES बनाम Shipping Ministry का भेद जानबूझकर जांचा। साथ ही “3 व्यक्ति” की विशिष्ट जानकारी भी परखी।
ट्रेंड विश्लेषण: 2021 में Blue Economy नीति, 2022 में ISA खनन लाइसेंस, 2023 में Deep Ocean Mission घटक, 2026 में मत्स्य-6000 विशेषताएं। आगे Ocean Thermal Energy Conversion (OTEC), Desalination से प्रश्न संभव।
आगे के लिए नोट्स:
MoES की सभी प्रमुख परियोजनाएं: Deep Ocean Mission, O-SMART, TROPICS, Argo Floats, INCOIS
मत्स्य-6000 की तकनीकी विशेषताएं
Polymetallic nodules क्या हैं — किन खनिजों से मिलते हैं
ISA (International Seabed Authority) — UNCLOS के अंतर्गत
India’s EEZ 2.37 million km² — भारत का समुद्री दावा क्षेत्र
Blue Economy का अर्थ और भारत की नीति
समग्र निष्कर्ष — विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी खंड
इस पेपर की मुख्य थीम्स:
आत्मनिर्भर तकनीक (Q44, Q45, Q71, Q74, Q75): DHRUV64, BIS मानक, अग्निकुल, NQM, डीप ओशन — सभी भारत की “Make in India” और “Atmanirbhar Bharat” नीति से जुड़े प्रश्न हैं।
AI और डिजिटल तकनीक (Q51, Q67): ब्लॉकचेन और LLM — दोनों 2022-25 की सबसे चर्चित तकनीकें। AI की सीमाएं (bias, hallucination) समझना जरूरी है।
रक्षा और अंतरिक्ष तकनीक (Q68, Q72): स्टेल्थ और ड्रोन झुंड — दोनों रूस-यूक्रेना युद्ध और भारत की रक्षा जरूरतों के संदर्भ में।
जैव प्रौद्योगिकी (Q66, Q73): जीन थेरेपी और GenomeIndia — Precision Medicine की ओर भारत का कदम।
पर्यावरण-ऊर्जा (Q70): हरित हाइड्रोजन — Net Zero 2070 की रीढ़।
मौसम-कृषि तकनीक (Q49): भारत पूर्वानुमान प्रणाली — ग्रामीण भारत के लिए तकनीक।
Fintech का बढ़ता वर्चस्व 5 में से 5 Fintech questions — यह clearly दिखाता है कि Digital Economy अब Economy का सबसे important sub-topic बन गया है। UPSC 2026 में इससे 4-5 प्रश्न expected हैं।
नए topics का आगमन RWA Tokenization (Q56) जैसे topics का आना signal है कि UPSC अब Web3, DeFi, CBDC जैसे future topics की तरफ बढ़ रहा है।
Traditional topics अभी भी relevant Crowding Out (Q59), NBFCs (Q64) जैसे traditional topics अभी भी पूछे जा रहे हैं। इन्हें ignore नहीं करना चाहिए।
Committee-based questions Q63 जैसे questions बताते हैं कि financial sector reform history अभी भी UPSC के scope में है।
Trap questions बढ़ रहे हैं Q55 (गलत कथन), Q60 (13 vs 17 REEs), Q63 (committee purposes) — इनमें deliberately confusing options हैं।
तैयारी की Priority List
Top Priority (Must Read):
Digital Rupee / CBDC
ONDC
Critical Minerals Mission
Financial Inclusion Index
NBFC regulations
Medium Priority (Should Read):
RWA Tokenization
TReDS / M1xchange
Green/Sustainability Bonds
MPI — NITI vs UNDP
Low Priority (Good to Know):
Aviation Insurance
Crowdfunding regulations
Historical committees
Question & Answer
प्रश्न 51.ब्लॉकचेन प्रौद्योगिकी (blockchain technology) की विशेषताओं के संबंध में निम्नलिखित में से कौन-से कथन सही हैं ?
डेटाबेस में भंडारित अभिलेख, परिवर्तन के जोखिम के बिना, संबंधित हितधारकों को दृष्टिगोचर करवाए जा सकते हैं।
संपूर्ण डेटाबेस की प्रतियों को बहुत सारे कंप्यूटरों के एक नेटवर्क पर भंडारित किया जाता है, जिनका तुल्यकालन (सिंक) सेकंडों के भीतर होता है।
कंसोर्टियम ब्लॉकचेन (consortium blockchain) सार्वजनिक और निजी ब्लॉकचेनों का मिश्रण है, जो चयनित डेटा पहुँच की अनुमति देता है।
गणितीय ऐल्गोरिथ्म एक बार अभिलिखित किए जा चुके किसी भी डेटा के परिवर्तन या विलोपन को असंभव बना देते हैं।
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर उत्तर चुनिए :
(a) 1 और 3
(b) केवल 2 और 4
(c) 1, 2 और 4
(d) केवल 1 और 4
उत्तर: (c) 1, 2 और 4
व्याख्या:कथन 1 — सही ✓ Blockchain एक distributed ledger है जिसमें सभी authorized stakeholders को data visible होता है और इसे बिना consensus के बदला नहीं जा सकता।
कथन 2 — सही ✓ Blockchain का पूरा database हजारों computers (nodes) पर simultaneously store होता है और synchronization seconds में होती है।
कथन 3 — गलत ✗ Consortium Blockchain केवल public और private का मिश्रण नहीं है। यह एक semi-decentralized blockchain है जिसे कई organizations मिलकर चलाती हैं। इसमें केवल pre-selected nodes ही consensus process में भाग लेते हैं।
कथन 4 — सही ✓ Blockchain में cryptographic hashing और mathematical algorithms के कारण एक बार दर्ज डेटा को बदलना या मिटाना practically असंभव है। यही इसकी immutability विशेषता है।
Difficulty: 🔴 HardUPSC Trend: यह प्रश्न Technology + Economy के overlap से आया है। UPSC 2022 के बाद से Fintech और emerging technologies पर प्रश्न लगातार बढ़ रहे हैं।
क्यों पूछा:
RBI और सरकार blockchain को financial sector में adopt कर रही है
Digital Currency, Land Records, Supply Chain में blockchain का प्रयोग हो रहा है
Consortium blockchain एक नया concept है जो अधिकतर students नहीं जानते — यही trap है
Examiner की मंशा: Blockchain की surface knowledge नहीं बल्कि types of blockchain (public, private, consortium) की deep understanding परखना।
आगे के लिए ध्यान दें:
Public vs Private vs Consortium blockchain का अंतर
Immutability और Decentralization की concept
RBI की CBDC और blockchain का संबंध
प्रश्न 52. एक ई-वाणिज्य रेवेन्यू मॉडल, जहाँ विक्रेता का कीमत निर्धारण पर नियंत्रण तो है, किंतु विक्रेता उत्पादों का स्टॉक (stock) नहीं रखता है और इसके बदले किसी अन्य-पक्षकार आपूर्तिकर्ता (third-party supplier) को ग्राहक के ऑर्डर और लदान (shipment) संबंधी विवरण भेजता है, जो आगे सीधे ग्राहक को सामान भेज देता है; इस मॉडल को क्या कहा जाता है ?
ऑर्डर आने पर third-party supplier को forward किया जाता है
supplier सीधे customer को deliver करता है
विक्रेता बीच में margin कमाता है
अन्य विकल्प क्यों गलत:
Affiliate Model — केवल referral commission मिलती है, कीमत पर नियंत्रण नहीं
Transaction Fee Model — प्रत्येक transaction पर fee लेना (जैसे PayPal)
Agency Model — agent के रूप में काम करना, ownership नहीं
Difficulty: MediumUPSC Trend: E-commerce business models पर UPSC पहले भी पूछ चुका है। यह Prelims 2023 के pattern से मिलता-जुलता है जहाँ नए business concepts पूछे गए थे।
क्यों पूछा:
India में e-commerce sector तेजी से बढ़ रहा है
ONDC, Meesho जैसे platforms dropshipping model पर काम करते हैं
सरकार MSME और small traders को e-commerce से जोड़ रही है
Examiner की मंशा: Digital economy के नए business models की practical समझ परखना। यह straightforward question है लेकिन options carefully designed हैं।
आगे के लिए ध्यान दें:
सभी e-commerce revenue models याद करें
Marketplace vs Inventory model का अंतर
Affiliate marketing का concept
प्रश्न 53. निम्नलिखित में से कौन-सा, भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) के वित्तीय समावेशन सूचकांक (FI-Index) के तीन मुख्य उप-सूचकांकों को सटीक रूप से दर्शाता है ?
(a) क्रेडिट पहुँच, बीमा गहनता, और पेंशन व्यापि
(b) बैंकिंग पहुँच, GDP अंशदान, और वित्तीय साक्षरता
(c) पहुँच, उपयोग, और गुणवत्ता
(d) पहुँच, वहनीयता (Affordability), और पारदर्शिता
उत्तर: (c) पहुँच, उपयोग, और गुणवत्ता
व्याख्या:
RBI का Financial Inclusion Index (FI-Index) तीन मुख्य parameters पर आधारित है:
Access (पहुँच) — 35% weightage
बैंक शाखाएँ, ATM, Business Correspondents की उपलब्धता
बैंक खातों की संख्या
Usage (उपयोग) — 45% weightage
Deposits, Credits, Insurance, Pension का उपयोग
सबसे अधिक weightage इसी को दिया गया है
Quality (गुणवत्ता) — 20% weightage
Financial Literacy
Consumer Protection
Grievance Redressal
महत्वपूर्ण तथ्य:
FI-Index मार्च 2021 से प्रकाशित हो रहा है
यह 0 से 100 के पैमाने पर मापा जाता है
100 = पूर्ण वित्तीय समावेशन
Difficulty: MediumUPSC Trend: Financial Inclusion UPSC का evergreen topic है। हर साल इससे 1-2 प्रश्न आते हैं। RBI के नए indices पर focus बढ़ रहा है।
क्यों पूछा:
RBI ने 2021 में FI-Index launch किया
PM Jan Dhan Yojana के 10 साल पूरे होने के context में Financial Inclusion महत्वपूर्ण है
Budget 2025-26 में Financial Inclusion पर जोर दिया गया
Examiner की मंशा: RBI के नए measurement tools की जानकारी परखना। Options में जो “GDP contribution” और “pension” जैसे traps हैं, वे deliberately confusing हैं।
आगे के लिए ध्यान दें:
FI-Index के तीन components और उनका weightage याद करें
Financial Inclusion से जुड़ी सभी RBI schemes
Pradhan Mantri Jan Dhan Yojana के latest data
प्रश्न 54. निम्नलिखित में से कौन-सा, भारत के ‘डिजिटल कॉमर्स के लिए ओपन नेटवर्क’ (ONDC) पहल के मूल उद्देश्य का सर्वोत्तम रूप से वर्णन करता है ?
(a) सभी डिजिटल वाणिज्य (कॉमर्स) लेनदेनों पर सरकारी नियंत्रण की अनुमति देना
(b) निजी ई-कॉमर्स व्यापारियों (प्लेयर्स) को प्रतिस्थापित करना
(c) सभी नेटवर्कों के बीच अंतर-संचालनीयता को समर्थ बनाकर बड़े ई-वाणिज्य प्लेटफॉर्मों के प्रभुत्व को समाप्त करना
(d) सभी ऑनलाइन लेनदेनों के लिए UPI-आधारित भुगतानों को अनिवार्य करना
उत्तर: (c) सभी नेटवर्कों के बीच अंतर-संचालनीयता को समर्थ बनाकर बड़े ई-वाणिज्य प्लेटफॉर्मों के प्रभुत्व को समाप्त करना
व्याख्या:ONDC (Open Network for Digital Commerce) के बारे में:
यह DPIIT (वाणिज्य मंत्रालय) की पहल है
2022 में launch किया गया
यह एक protocol है, platform नहीं
मुख्य उद्देश्य:
Amazon, Flipkart जैसे बड़े platforms के monopoly को तोड़ना
छोटे व्यापारियों को digital marketplace तक पहुँच देना
किसी भी buyer app और seller app के बीच interoperability सुनिश्चित करना
UPI की तरह e-commerce को democratize करना
सरल उदाहरण: जैसे UPI में आप किसी भी bank से किसी भी app पर payment कर सकते हैं, उसी तरह ONDC में कोई भी buyer app किसी भी seller platform से product खरीद सकता है।
Difficulty: EasyUPSC Trend: Government digital initiatives पर UPSC नियमित रूप से पूछता है। ONDC 2022-23 से चर्चा में है और यह Current Affairs + Economy का perfect combination है।
क्यों पूछा:
ONDC को “UPI of e-commerce” कहा जा रहा है
यह Amazon और Flipkart के monopoly को challenge कर रहा है
Digital India mission का important component है
G20 में India ने इसे showcase किया था
Examiner की मंशा: यह relatively easy question है। Examiner यह देखना चाहता है कि aspirant current digital policy initiatives से updated है या नहीं।
आगे के लिए ध्यान दें:
ONDC vs traditional e-commerce का अंतर
DPIIT की भूमिका
Open protocol का concept
प्रश्न 55. एकीकृत भुगतान इंटरफेस (UPI) और केंद्रीय बैंक डिजिटल मुद्रा (डिजिटल रुपया) के बारे में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही नहीं है ?
(a) UPI एक तत्काल (real-time) भुगतान प्रणाली है, किंतु डिजिटल रुपया राष्ट्रिक (सॉवरेन) कागज़ी मुद्रा के सदृश है।
(b) UPI के मामले में, धन को जैसे ही नामे डाला (debited) जाता है या जमा (credited) किया जाता है, अंतिम उपयोगकर्ताओं के लिए निपटान तत्काल हो जाता है, किंतु डिजिटल रुपया के मामले में तत्काल नहीं हो पाता है क्योंकि वॉलेट शेष का अन्य वॉलेट में अंतरण हो जाता है।
(c) UPI लेनदेनों को बैंकों द्वारा अभिलिखित (रिकॉर्ड) किया जाता है और उन्हें बैंक विवरणों में दर्शाया जाता है, किंतु डिजिटल रुपया के मामले में, बैंक विवरणों में कोई डेटा दर्ज नहीं किया जाता है, क्योंकि लेनदेन एक वॉलेट से दूसरे वॉलेट में होते हैं।
(d) दोनों मामलों (UPI और डिजिटल रुपया) में, उपयोगकर्ताओं और उनके संबद्ध बैंकों पर देयता होती है।
उत्तर: (b)
व्याख्या:कथन (b) गलत है क्योंकि: UPI में settlement तत्काल होती है यह सही है, लेकिन Digital Rupee (e-CBDC) में भी wallet से wallet transfer तत्काल होती है। Digital Rupee की transaction में कोई देरी नहीं होती — यह cash की तरह instant होती है। इसलिए यह कथन गलत है।
अन्य कथनों की सत्यता:(a) सही है — UPI एक payment system है जो bank accounts को link करता है, जबकि Digital Rupee RBI द्वारा जारी sovereign currency का digital form है।
(c) सही है — UPI transactions bank statements में दिखते हैं क्योंकि वे bank accounts से होते हैं। Digital Rupee wallet-to-wallet होता है, इसलिए bank statements में automatically नहीं दिखता।
(d) सही है — दोनों में users और उनके banks की liability होती है।
Difficulty: 🔴 HardUPSC Trend: यह 2024-25 का सबसे trending topic है। CBDC (Central Bank Digital Currency) पर UPSC का focus बढ़ रहा है। यह question type जहाँ “गलत कथन” पूछा जाए, UPSC का favorite है।
क्यों पूछा:
RBI ने 2022 में Digital Rupee (e-CBDC) launch किया
UPI और CBDC के बीच confusion बहुत आम है
यह दोनों concepts एक-दूसरे से fundamentally अलग हैं
Global context में 130+ देश CBDC पर काम कर रहे हैं
Examiner की मंशा: यह tricky question है। Option (b) में settlement की बात है जो technically complex है। Examiner deep conceptual clarity परख रहा है, न कि surface knowledge।
Difficulty क्यों Hard: UPI और Digital Rupee दोनों fast payment करते हैं लेकिन उनकी underlying mechanism बिल्कुल अलग है। यह distinction समझना कठिन है।
आगे के लिए ध्यान दें:
CBDC के दो types: Retail (e₹-R) और Wholesale (e₹-W)
UPI का settlement mechanism
Digital Rupee vs Cryptocurrency का अंतर
प्रश्न 56. रियल-वर्ल्ड एसेट्स (RWA) टोकनाइज़ेशन के बारे में निम्नलिखित में से कौन-से कथन सही हैं ?
टोकनाइज़ेशन एक प्रक्रिया है जिसमें ब्लॉकचेन प्रौद्योगिकी का प्रयोग करते हुए रियल वर्ल्ड एसेट्स को डिजिटल टोकन में बदला जाता है।
रियल वर्ल्ड एसेट्स का टोकनाइज़ेशन, 24×7 पहुँच प्रदान करता है, जिससे वित्तीय समावेशन का संवर्धन होता है।
रियल वर्ल्ड एसेट्स का टोकनाइज़ेशन, भारत में लोगों को उच्च संवृद्धि निवेश के अवसरों तक पहुँच प्रदान करेगा।
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर उत्तर चुनिए :
(a) 1, 2 और 3
(b) केवल 2 और 3
(c) केवल 1 और 2
(d) केवल 1 और 3
उत्तर: (a) 1, 2 और 3
व्याख्या:कथन 1 — सही ✓ RWA Tokenization में physical assets जैसे real estate, gold, bonds को blockchain पर digital tokens में convert किया जाता है। यह ownership को fractional बनाता है।
कथन 2 — सही ✓ Tokenized assets blockchain पर होने के कारण 24×7 trade हो सकते हैं। Traditional markets (stock exchange) केवल limited hours में काम करते हैं। यह financial inclusion बढ़ाता है क्योंकि छोटे निवेशक भी participate कर सकते हैं।
कथन 3 — सही ✓ Tokenization से भारत में लोग high-growth assets जैसे commercial real estate, international bonds में fractional investment कर सकते हैं जो पहले केवल HNIs (High Net worth Individuals) के लिए accessible थे।
RWA Tokenization के फायदे:
Fractional ownership
24×7 liquidity
Transparency
Lower transaction costs
Global accessibility
Difficulty: 🔴 HardUPSC Trend: यह 2025-26 का नया emerging topic है। पिछले UPSC papers में यह पूछा नहीं गया था। इस प्रश्न का आना यह signal देता है कि UPSC अब Web3 और DeFi concepts की तरफ भी जा रहा है।
क्यों पूछा:
RBI और SEBI दोनों tokenization को regulate करने पर काम कर रहे हैं
Global financial markets में RWA tokenization का market $16 trillion तक जाने का अनुमान है
India में real estate tokenization की शुरुआत हो चुकी है
Examiner की मंशा: Future-ready aspirants को identify करना। जो students केवल पुराने topics पढ़ते हैं वे इसे miss करेंगे।
आगे के लिए ध्यान दें:
Blockchain + Finance का intersection
SEBI का tokenization framework
Fractional ownership का concept
प्रश्न 57. एक बॉन्ड जिसके आगम (proceeds) का उपयोग केवल पर्यावरणीय और सामाजिक परियोजनाओं दोनों के एक संयोजन के वित्तपोषण अथवा पुनर्वित्तपोषण के लिए किया जाता है, उसे क्या कहते हैं ?
ICMA (International Capital Market Association) के guidelines follow करता है
इसके proceeds का उपयोग exclusively environmental AND social projects दोनों के लिए होता है
Difficulty: EasyUPSC Trend: Green Finance UPSC का regularly asked topic है। 2021, 2022, 2023 तीनों papers में इससे प्रश्न आए हैं। यह इस पेपर का सबसे आसान Economy प्रश्न है।
क्यों पूछा:
India ने Sovereign Green Bonds जारी किए हैं
COP29 और climate finance commitments
Budget 2024-25 में green bonds पर जोर
SEBI ने green bond framework जारी किया है
Examiner की मंशा: Basic financial literacy परखना। जो student green finance पढ़ता है उसे यह आसानी से आना चाहिए।
आगे के लिए ध्यान दें:
Green, Social, Sustainability, Sustainability-linked bonds का अंतर
India का Sovereign Green Bond framework
ICMA के guidelines
प्रश्न 58. सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSMEs) के वित्तपोषण में एम 1 एक्सचेंज (M1xchange) की भूमिका के बारे में निम्नलिखित में से कौन-सा/कौन-से कथन सही है/हैं ?
M1xchange सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSMEs) को संपार्श्विक आधारित ऋण (collateral based loans) उपलब्ध कराता है।
M1xchange सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSMEs) के लिए इनवाइसों (invoices) और विनिमय पत्रों (Bills of exchange) के बट्टा काटने (discounting) को सुकर बनाता है।
M1xchange सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSMEs) के लिए एक क्रेडिट रेटिंग एजेंसी के रूप में कार्य करता है।
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर उत्तर चुनिए :
(a) 1, 2 और 3
(b) केवल 2
(c) केवल 2 और 3
(d) केवल 1
उत्तर: (b) केवल 2
व्याख्या:M1xchange क्या है? M1xchange भारत का पहला और सबसे बड़ा TReDS (Trade Receivables Discounting System) platform है। यह RBI द्वारा regulated है।
कथन 1 — गलत ✗ M1xchange collateral-based loans नहीं देता। यह invoices और bills of exchange की discounting करता है। यह invoice financing है, न कि collateral-based lending।
कथन 2 — सही ✓ M1xchange का मुख्य काम ही MSMEs के invoices और Bills of Exchange को discount करना है। इससे MSMEs को तुरंत cash मिल जाती है, बड़े buyers से payment का इंतजार नहीं करना पड़ता।
कथन 3 — गलत ✗ M1xchange credit rating agency नहीं है। यह एक trading platform है। Credit rating का काम CRISIL, ICRA, CARE जैसी agencies करती हैं।
TReDS का महत्व: MSMEs को अक्सर बड़े buyers से payment में 90-120 दिन लगते हैं। TReDS platform पर वे अपना invoice बेचकर तुरंत पैसा पा सकते हैं।
Difficulty: MediumUPSC Trend: MSME financing UPSC का important topic है। TReDS platform पर यह पहली बार इतने specific तरीके से पूछा गया है।
क्यों पूछा:
MSMEs India की GDP में 30% और exports में 45% योगदान देते हैं
Late payment problem MSMEs की सबसे बड़ी challenge है
सरकार TReDS को mandatory बना रही है बड़ी companies के लिए
Budget 2025 में MSME credit पर focus
Examiner की मंशा: MSME ecosystem की practical knowledge परखना। “Credit rating agency” वाला option deliberately confusing है।
आगे के लिए ध्यान दें:
TReDS के तीन platforms: M1xchange, RXIL, InvoiceMart
Invoice discounting vs factoring का अंतर
MSME financing की challenges
प्रश्न 59. निम्नलिखित में से कौन-सा, राजकोषीय नीति के संदर्भ में ‘निजी निवेश के बहिर्गमन का प्रभाव’ (‘Crowding Out Effect’) का सर्वोत्तम वर्णन करता है ?
(a) एक ऐसी स्थिति जहाँ सरकारी व्यय बढ़ने के कारण निजी निवेश बढ़ जाता है
(b) एक ऐसी स्थिति जहाँ सरकारी उधार के परिणामस्वरूप ब्याज दरें उच्च हो जाती हैं, जिससे निजी निवेश घट जाता है
(c) एक ऐसी स्थिति जहाँ करों में वृद्धि होने के परिणामस्वरूप निजी क्षेत्र निवेश बढ़ जाता है
(d) एक ऐसी स्थिति जहाँ सरकार द्वारा किए गए व्यय का समग्र माँग पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है
उत्तर: (b)
व्याख्या:Crowding Out Effect की पूरी प्रक्रिया:Step 1: सरकार अधिक खर्च करती है
Step 2: इसके लिए सरकार बाजार से उधार लेती है (bonds जारी करती है)
Step 3: बाजार में उधार की मांग बढ़ने से interest rates बढ़ जाती हैं
Step 4: ऊंची interest rates पर private sector के लिए borrowing महंगी हो जाती है
Step 5: Private investment घट जाता है
यही Crowding Out Effect है।Crowding In Effect (विपरीत): जब सरकारी खर्च से private investment बढ़े — यह तब होता है जब सरकार infrastructure में invest करे।
अन्य विकल्प गलत क्यों:
(a) यह Crowding In है, Crowding Out नहीं
(c) यह कर वृद्धि का scenario है, अलग concept
(d) यह Ricardian Equivalence से संबंधित है
Difficulty: EasyUPSC Trend: Macroeconomics के basic concepts UPSC हर साल पूछता है। Crowding Out Effect 2016, 2019 के papers में भी आ चुका है। यह repeat topic है।
क्यों पूछा:
India का fiscal deficit बढ़ रहा है
Government borrowing और private investment का trade-off important policy issue है
Monetary policy और fiscal policy के interaction को समझना जरूरी है
Examiner की मंशा: यह straightforward question है। Basic macroeconomics की समझ परखी जा रही है। जो student NCERT Economics पढ़ा है उसे यह आसानी से आना चाहिए।
आगे के लिए ध्यान दें:
Crowding Out vs Crowding In का अंतर
Fiscal multiplier का concept
Ricardian Equivalence
प्रश्न 60. दुर्लभ मृदा तत्वों (REEs) और महत्वपूर्ण खनिजों (Critical Minerals) के बारे में निम्नलिखित में से कौन-सा/कौन-से कथन सही है/हैं ?
कृत्रिम बुद्धिमता, रोबोटिक्स और अंतरिक्ष अन्वेषण सहित आधुनिक प्रौद्योगिकीय नवाचारों में दुर्लभ मृदा तत्वों (REEs) का व्यापक रूप से उपयोग किया जाता है।
दुर्लभ मृदा तत्वों (REEs) के खनन में चीन की हिस्सेदारी सर्वाधिक है, उसके बाद भारत की हिस्सेदारी है।
भारत सरकार ने महत्वपूर्ण खनिज क्षेत्र में आत्मनिर्भरता के लिए एक मजबूत ढाँचा स्थापित करने हेतु वर्ष 2025 में राष्ट्रीय महत्वपूर्ण खनिज मिशन (NCMM) आरंभ किया।
दुर्लभ मृदा तत्व 13 धात्विक तत्वों का एक समुच्चय हैं।
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर उत्तर चुनिए :
(a) केवल 1 और 3
(b) केवल 3
(c) 1, 3 और 4
(d) 1, 2 और 4
उत्तर: (a) केवल 1 और 3
व्याख्या:कथन 1 — सही ✓ REEs का उपयोग:
Electric vehicles (EV) की batteries में
Wind turbines में
AI chips और semiconductors में
Robotics और space exploration में
Smartphones और defense equipment में ✓
कथन 2 — गलत ✗ REEs के खनन में:
China — 60% से अधिक (सर्वाधिक) ✓
USA, Australia, Myanmar अगले स्थानों पर हैं
भारत का स्थान इतना ऊंचा नहीं है
भारत के पास REE reserves जरूर हैं (Kerala, Andhra Pradesh में) लेकिन mining में China के बाद India नहीं आता
कथन 3 — सही ✓ भारत सरकार ने 2025 में National Critical Minerals Mission (NCMM) launch किया। इसका उद्देश्य critical minerals में आत्मनिर्भरता प्राप्त करना है।
कथन 4 — गलत ✗ दुर्लभ मृदा तत्व 17 तत्वों का समूह है, 13 का नहीं। इसमें 15 Lanthanides + Scandium + Yttrium शामिल हैं।
Difficulty: MediumUPSC Trend: Critical Minerals 2023 के बाद UPSC का hot topic बन गया है। Geopolitics + Economy + Technology तीनों का यह intersection है।
क्यों पूछा:
China का REE पर 60% monopoly global security concern है
India ने Critical Minerals Mission 2025 launch किया
EV revolution, solar panels, defense equipment सब REE पर dependent हैं
India-Australia Critical Minerals Partnership
Quad का critical minerals agenda
Examiner की मंशा: कथन 4 में “13 तत्व” का trap deliberately रखा गया है। सही संख्या 17 है। यह देखना कि aspirant surface knowledge से आगे जाता है या नहीं।
आगे के लिए ध्यान दें:
17 REEs के नाम (कम से कम categories)
India में REE deposits की locations
National Critical Minerals Mission के objectives
China की REE dominance और India की strategy
प्रश्न 61. विमानन क्षेत्र में बीमा के बारे में निम्नलिखित में से कौन-सा/कौन-से कथन सही है/हैं ?
‘विमानन हल बीमा’ (Aviation Hull Insurance) के अंतर्गत भौतिक वायुयान के साथ ही उसके मुख्य भाग (बॉडी), इंजन, और वायुयान पर विद्यमान उपकरण समाविष्ट होते हैं।
वर्ष 1999 में, भारत सहित, 130 से अधिक राष्ट्रों द्वारा अंगीकार किए गए मॉन्ट्रियल कन्वेंशन के अधीन, एयरलाइनें प्रत्येक मृतक यात्री के परिवार/नामिति को, उस परिवार के द्वारा दोष सिद्ध करने की आवश्यकता के बिना ही, क्षतिपूर्ति का भुगतान करने के लिए पूर्णतः उत्तरदायी हैं।
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर उत्तर चुनिए :
(a) केवल 1
(b) केवल 2
(c) 1 और 2 दोनों
(d) न तो 1, न ही 2
उत्तर: (c) 1 और 2 दोनों
व्याख्या:कथन 1 — सही ✓ Aviation Hull Insurance aircraft के physical structure को cover करता है:
Aircraft का मुख्य ढाँचा (body/fuselage)
Engines
Aircraft पर लगे सभी उपकरण (avionics, landing gear आदि) यह basically aircraft को होने वाले physical damage का insurance है।
कथन 2 — सही ✓ Montreal Convention 1999 के प्रमुख प्रावधान:
Airlines को passenger की death/injury पर strict liability है
पहले 128,821 SDR तक परिवार को दोष सिद्ध नहीं करना पड़ता
Airline को automatically compensation देना होता है
भारत ने इसे 2009 में ratify किया था
इसने Warsaw Convention 1929 की जगह ली
Difficulty: MediumUPSC Trend: Aviation sector से प्रश्न कम आते हैं लेकिन जब आते हैं तो unexpected होते हैं। Montreal Convention एक legal-economic overlap topic है।
क्यों पूछा:
India दुनिया का सबसे तेजी से बढ़ता aviation market है
Air India का privatization और expansion
UDAN scheme के तहत aviation का democratization
Air India crashes के बाद passenger rights awareness बढ़ी
Examiner की मंशा: Niche topic से aspirant को surprise करना। जो students केवल popular topics पढ़ते हैं वे इस question में confuse होंगे।
आगे के लिए ध्यान दें:
Montreal Convention 1999 के key provisions
Warsaw Convention से Montreal Convention की journey
Aviation insurance के types: Hull, Liability, Passenger
प्रश्न 62. विविध समूह निधीयन (क्राउडफंडिंग) के बारे में निम्नलिखित में से कौन-सा/कौन-से कथन सही है/हैं ?
किसी विशिष्ट परियोजना के लिए, किसी वेब-आधारित प्लेटफॉर्म या सोशल नेटवर्किंग साइट के माध्यम से अनेक निवेशकों से निधि (छोटी मात्रा) के लिए अनुरोध करना (solicitation), विविध समूह निधीयन है।
लघु एवं मध्यम उद्यम (SMEs) कठोर प्रक्रियाओं से गुज़रे बिना, पूँजी की निम्न लागत पर निधियाँ जुटाने में समर्थ हैं।
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर उत्तर चुनिए :
(a) केवल 1
(b) केवल 2
(c) 1 और 2 दोनों
(d) न तो 1, न ही 2
उत्तर: (a) केवल 1
व्याख्या:कथन 1 — सही ✓ Crowdfunding की सटीक परिभाषा यही है:
Web platform या social media के माध्यम से
बड़ी संख्या में लोगों से
छोटी-छोटी राशि जुटाना
किसी specific project के लिए उदाहरण: Kickstarter, Indiegogo, Ketto ✓
कथन 2 — गलत ✗ यह कथन आंशिक रूप से भ्रामक है:
Crowdfunding में भी SEBI के regulations follow करने पड़ते हैं
Cost of capital हमेशा “निम्न” नहीं होती
SMEs को platform fees, compliance costs देनी पड़ती हैं
“कठोर प्रक्रियाओं से गुज़रे बिना” यह पूरी तरह सही नहीं है, regulatory requirements होती हैं
इसलिए यह कथन अतिसरलीकृत और गलत है
Difficulty: EasyUPSC Trend: Alternate financing mechanisms पर UPSC का focus बढ़ रहा है। Crowdfunding, Angel Investing, Venture Capital — ये सब modern economy topics हैं।
क्यों पूछा:
Startup India ecosystem में crowdfunding important है
SEBI ने crowdfunding regulations बनाए हैं
Small businesses और social causes के लिए crowdfunding बढ़ रहा है
PM Vishwakarma और artisan support में crowdfunding की भूमिका
Examiner की मंशा: कथन 2 में “कठोर प्रक्रियाओं से गुज़रे बिना” और “निम्न लागत” — दोनों traps हैं। Examiner देख रहा है कि student regulatory framework जानता है या नहीं।
आगे के लिए ध्यान दें:
SEBI का crowdfunding framework
Equity crowdfunding vs Reward-based crowdfunding
Crowdfunding के risks
प्रश्न 63. भारत में विभिन्न समितियों के संदर्भ में निम्नलिखित विवरणों पर विचार कीजिए:
क्रम सं.
समिति
उद्देश्य
संगठन
1.
आर.एन. मल्होत्रा समिति
भारत में बीमा क्षेत्र का व्यापक सुधार करना
भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण
2.
एल.सी. गुप्ता समिति
भारत में व्युत्पन्नी (डेरिवेटिव) व्यापार आरंभ करने के लिए रूपरेखा (रोडमैप) तैयार करना
भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड
3.
उर्जित आर. पटेल समिति
आवासीय क्षेत्र को बैंक ऋण प्रदान करने में सुधार लाने के लिए रूपरेखा (रोडमैप) तैयार करना
भारतीय रिज़र्व बैंक
4.
वाई.एच. मालेगाम समिति
भारत में सूक्ष्म-वित्त क्षेत्र में सुधार लाने के लिए रूपरेखा (रोडमैप) तैयार करना
भारतीय रिज़र्व बैंक
उपर्युक्त में से किस पंक्ति/किन पंक्तियों में दिए गए सभी विवरण सही सुमेलित है/हैं ?
(a) केवल 2
(b) 2 और 3
(c) 1, 3 और 4
(d) 2 और 4
उत्तर: (d) 2 और 4
व्याख्या:पंक्ति 1 — गलत ✗ R.N. Malhotra Committee (1994) का उद्देश्य बीमा क्षेत्र में सुधार करना था — यह सही है। लेकिन यह समिति RBI के अंतर्गत थी, IRDAI के नहीं। IRDAI तो इस समिति की recommendations के बाद 1999 में बनी। इसलिए “संगठन” column गलत है।
पंक्ति 2 — सही ✓ L.C. Gupta Committee (1998):
SEBI के अंतर्गत ✓
भारत में derivatives trading (futures & options) शुरू करने के लिए framework तैयार किया ✓
इसी की recommendations पर NSE में derivatives trading शुरू हुई
पंक्ति 3 — गलत ✗ Urjit Patel Committee (2014) का काम monetary policy framework और inflation targeting पर था, न कि housing sector lending पर। इसलिए “उद्देश्य” गलत है।
पंक्ति 4 — सही ✓ Y.H. Malegam Committee (2010-11):
RBI के अंतर्गत ✓
Microfinance sector में reforms के लिए ✓
इसी के बाद NBFC-MFI category बनी
Difficulty: HardUPSC Trend: Committee-based questions UPSC का traditional favorite है लेकिन इस बार detail level बहुत high है। यह question purely factual है और rote learning test करता है।
क्यों पूछा:
India के financial sector reforms की history समझना जरूरी है
हर major reform एक committee की recommendation से आई है
RBI और SEBI दोनों के history में ये committees milestone हैं
Examiner की मंशा: यह deliberately hard question है। Urjit Patel Committee का trap — अधिकतर students इसे monetary policy framework से जोड़ते हैं लेकिन housing के साथ confuse कर देते हैं।
आगे के लिए ध्यान दें:
Committee
Correct Purpose
R.N. Malhotra
Insurance sector reforms
L.C. Gupta
Derivatives trading framework
Urjit Patel
Monetary policy framework/Inflation targeting
Y.H. Malegam
Microfinance sector reforms
Narasimham
Banking sector reforms
प्रश्न 64. भारत में गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (NBFCs) के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए :
गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियाँ (NBFCs) माँग जमा (demand deposits) स्वीकार नहीं कर सकती हैं।
भारत में संचालित सभी गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (NBFCs) को भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) में पंजीकृत होना चाहिए।
गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियाँ (NBFCs) भुगतान और निपटान प्रणाली का भाग हैं और वे स्वयं के नाम आहरित चेक जारी कर सकती हैं।
जमा लेने वाली गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (NBFCs) के जमाकर्ताओं के लिए निक्षेप बीमा और प्रत्यय गारंटी निगम (DICGC) की जमा बीमा सुविधा (deposit insurance facility) उपलब्ध नहीं है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/कौन-से सही है/हैं ?
(a) 1 और 4
(b) 1, 2 और 3
(c) केवल 4
(d) 2, 3 और 4
उत्तर: (a) 1 और 4
व्याख्या:कथन 1 — सही ✓ NBFCs और Banks में यह सबसे बड़ा अंतर है। NBFCs demand deposits (current/savings accounts) स्वीकार नहीं कर सकतीं। वे केवल term deposits ले सकती हैं (वो भी सभी नहीं, केवल deposit-taking NBFCs)।
कथन 2 — गलत ✗ सभी NBFCs को RBI में register नहीं करना होता। केवल वे NBFCs जिनकी net owned funds ₹10 crore या उससे अधिक हो, उन्हें RBI registration जरूरी है। छोटी NBFCs को exemption मिली हुई है।
कथन 3 — गलत ✗ NBFCs payment and settlement system का हिस्सा नहीं हैं। वे अपने नाम से cheques issue नहीं कर सकतीं। यह privilege केवल scheduled commercial banks को है।
कथन 4 — सही ✓ DICGC (Deposit Insurance and Credit Guarantee Corporation) की insurance केवल commercial banks और cooperative banks के depositors को मिलती है। NBFCs के depositors को यह सुरक्षा नहीं मिलती — यही NBFCs में deposit का सबसे बड़ा risk है।
Difficulty: MediumUPSC Trend: NBFCs पर UPSC लगभग हर साल पूछता है। 2018 IL&FS crisis, 2019 DHFL crisis के बाद NBFC regulations और बड़ा topic बन गया है।
क्यों पूछा:
NBFCs India के credit ecosystem का 25% represent करते हैं
RBI ने NBFC regulations 2021-2023 में बड़े पैमाने पर बदले हैं
Scale-based regulation framework नया है
NBFC vs Bank distinction एक evergreen UPSC topic है
Examiner की मंशा: कथन 2 और 3 deliberate traps हैं। “सभी NBFCs को RBI registration” — यह partially true है, इसलिए students confuse होते हैं।
आगे के लिए ध्यान दें:
Banks vs NBFCs के 5 key differences
NBFC के types: NBFC-D, NBFC-ND, NBFC-MFI, NBFC-P2P
RBI का Scale-based Regulation (SBR) framework
DICGC coverage — किन institutions को मिलती है
प्रश्न 65. बहुआयामी गरीबी सूचकांक (MPI) के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए :
MPI का परिकलन अलकिरे-फोस्टर पद्धति (Alkire-Foster Methodology) से किया जाता है।
नीति (NITI) आयोग द्वारा परिकलन किए जाने वाले MPI के कुल बारह संकेतक हैं।
नीति (NITI) आयोग के MPI और संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) के MPI में मातृ स्वास्थ्य और बैंक खाता उभयनिष्ठ संकेतक (common indicators) हैं।
उपर्युक्त में से कौन-सा/कौन-से कथन सही है/हैं ?
(a) केवल 1 और 2
(b) 1, 2 और 3
(c) केवल 1 और 3
(d) केवल 2
उत्तर: (a) केवल 1 और 2
व्याख्या:कथन 1 — सही ✓ MPI की गणना Alkire-Foster Methodology से होती है। यह Oxford Poverty and Human Development Initiative (OPHI) द्वारा विकसित methodology है। इसमें deprivation को तीन dimensions में मापा जाता है: Health, Education, Living Standards। ✓
कथन 2 — सही ✓ NITI Aayog का National MPI 12 indicators पर आधारित है जो तीन dimensions में बंटे हैं:
Health (4 indicators): Nutrition, Child mortality, Antenatal care, Institutional delivery
Education (3 indicators): Years of schooling, School attendance, Cooking fuel
कथन 3 — गलत ✗ NITI Aayog MPI और UNDP MPI के indicators में पूर्ण समानता नहीं है। NITI Aayog MPI में Antenatal care और Institutional delivery जैसे India-specific indicators हैं जो UNDP के global MPI में नहीं हैं। “मातृ स्वास्थ्य और बैंक खाता” दोनों में common नहीं हैं। इसलिए यह कथन गलत है।
Difficulty: MediumUPSC Trend: Poverty measurement UPSC का core Social Justice + Economy topic है। MPI पर 2022 में भी प्रश्न आया था।
क्यों पूछा:
NITI Aayog ने दिखाया कि 2015-2021 में 13.5 करोड़ लोग गरीबी से बाहर आए
India का MPI score improve हो रहा है — यह सरकारी achievement है
UNDP का Global MPI और NITI Aayog का National MPI अलग हैं — यही confusion point है
G20 में India ने poverty alleviation को showcase किया
Examiner की मंशा: कथन 3 में “मातृ स्वास्थ्य और बैंक खाता” — यह trap है। UNDP के MPI में bank account indicator नहीं है। यह NITI Aayog के National MPI का unique feature है।
आगे के लिए ध्यान दें:
क्या UPSC अब Polity से ज्यादा “Public Administration + Ethics” पूछ रहा है?
UPSC Prelims 2026 के Indian Polity सेक्शन ने इस बार एक बहुत बड़ा संकेत दिया है — अब परीक्षा केवल संविधान के अनुच्छेद याद करने तक सीमित नहीं रही। इस बार UPSC ने Polity के साथ-साथ Governance, Ethics और Public Administration की समझ को भी परखने की कोशिश की है।
कई अभ्यर्थियों को लगा कि पेपर “अजीब” या “अलग” था, लेकिन वास्तव में यह UPSC के बदलते पैटर्न का हिस्सा है।
UPSC Prelims का नया ट्रेंड: Polity vs Public Administration
इस बार के पेपर को तीन भागों में समझा जा सकता है:
प्रश्न संख्या
विषय
श्रेणी
76
उत्तरदायित्व (Accountability)
Public Administration / Ethics
77
संघर्ष प्रबंधन, बहु-हितधारक
Ethics + Governance
78
सिविल सेवक की नैतिक दुविधा
Ethics
79
अनुच्छेद 13 — विधि का अर्थ
Core Polity
80
संविधान के अनुच्छेद
Core Polity
81
दिव्यांगजन अधिनियम
Polity + Social Justice
82
SC/ST संवैधानिक प्रावधान
Core Polity
83
संसदीय प्रश्न प्रकार
Core Polity
84
संसदीय समिति
Core Polity
85
मिशन सुदर्शन चक्र
Current Affairs + Defence
87
Zero FIR — BNSS 2023
Polity + Current Affairs
1. Core Polity Questions — UPSC का पारंपरिक क्षेत्र
प्रश्न 79, 80, 82, 83 और 84 पूरी तरह संविधान, संसद और संस्थागत प्रक्रियाओं पर आधारित थे।
इन प्रश्नों में मुख्य रूप से पूछा गया:
अनुच्छेदों की समझ
संसद की कार्यप्रणाली
संसदीय समितियाँ
संवैधानिक प्रावधान
SC/ST से जुड़े अधिकार
यह वही क्षेत्र है जो वर्षों से UPSC Prelims का आधार रहा है।
सबसे महत्वपूर्ण बात:
अब केवल अनुच्छेद नंबर याद करना पर्याप्त नहीं है। UPSC concept-based interpretation पूछ रहा है।
उदाहरण:
Article 13 → Laws inconsistent with Fundamental Rights are void
UPSC अब यह देखना चाहता है कि अभ्यर्थी संविधान की “spirit” समझता है या नहीं।
2. Ethics + Governance Questions — सबसे बड़ा बदलाव
प्रश्न 76, 77 और 78 इस पेपर का सबसे बड़ा surprise थे।
ये प्रश्न सीधे-सीधे GS Paper-4 (Ethics) की शैली के थे।
इनमें पूछा गया:
Accountability
Conflict Management
Multi-stakeholder governance
Ethical dilemma
Administrative decision making
पहले ऐसे प्रश्न केवल UPSC Mains में आते थे, लेकिन अब इन्हें Prelims में भी शामिल किया जा रहा है।
UPSC ऐसा क्यों कर रहा है?
UPSC अब सिर्फ “जानकारी” नहीं बल्कि “निर्णय क्षमता” को जांचना चाहता है।
आज का IAS/IPS अधिकारी:
Crisis handle करता है
Ethical decisions लेता है
Public interest और law के बीच balance बनाता है
Governance को practical level पर लागू करता है
इसीलिए UPSC अब rote learning से आगे बढ़ चुका है।
3. Current Affairs + Polity Questions
प्रश्न 81, 85 और 87 ने यह दिखाया कि अब Polity पूरी तरह static subject नहीं रहा।
इनमें शामिल थे:
दिव्यांगजन अधिनियम
Mission Sudarshan Chakra
BNSS 2023 में Zero FIR
यह स्पष्ट संकेत है कि अब newspaper + law updates + governance reforms बेहद महत्वपूर्ण हो चुके हैं।
पुराना ट्रेंड vs नया ट्रेंड
पुराना UPSC Pattern
नया UPSC Pattern
अनुच्छेद याद करो
Concept समझो
Static Polity
Dynamic Governance
Direct factual questions
Case-based analytical questions
संसद/संविधान केंद्रित
Ethics + Administration केंद्रित
रट्टा आधारित तैयारी
Decision-making आधारित तैयारी
प्रश्न 76. श्री X, एक वरिष्ठ अधिकारी हैं, जो किसी विश्वमारी के दौरान एक निर्णायक टीकाकरण कार्यक्रम का निरीक्षण कर रहे थे। उन्होंने पाया कि टीके के वितरण के लिए उत्तरदायी एक निजी सेवा प्रदाता, लाभ अर्जित करने के लिए गुणवत्ता से समझौता कर रहा है। निहित स्वार्थों के कारण, इस मामले को निपटाने हेतु अत्यधिक दबाव होने के बावजूद, अपने जीविका (कैरिअर) के विविध प्रशिक्षण कार्यक्रमों में भागीदारी के दौरान सीखे गए लोक प्रशासन के सिद्धांतों के आधार पर उन्होंने अपनी आवाज़ उठाई। उन्होंने इस मामले को समुचित सतर्कता प्राधिकारी को प्रतिवेदित किया और नागरिकों के कल्याण को सुनिश्चित करने के लिए उस संविदा को रोक दिया।
श्री X की कार्रवाई से लोक प्रशासन के निम्नलिखित सिद्धांतों में से कौन-सा सर्वाधिक प्रभावी रूप से प्रदर्शित होता है ?
(a) दल भावना (Esprit de corps)
(b) समता
(c) उत्तरदायित्व
(d) प्रत्यायोजन
प्रश्न 76 — उत्तर: (c) उत्तरदायित्व
व्याख्या: श्री X ने निजी दबाव और कैरियर के जोखिम के बावजूद सार्वजनिक हित में गलत काम को उजागर किया और संविदा रोकी। यह उत्तरदायित्व (Accountability) का सर्वश्रेष्ठ उदाहरण है।
दल भावना — टीम के प्रति वफादारी, यहाँ लागू नहीं
समता — सबके साथ समान व्यवहार, यहाँ मुख्य बिंदु नहीं
प्रत्यायोजन — अधिकार सौंपना, यहाँ लागू नहीं
उत्तरदायित्व — एक लोक सेवक का जनता के प्रति जवाबदेह होना ✓
प्रश्न 77. एक बहुजातीय जिले में, जहाँ आर्थिक प्रतिस्पर्धा और ऐतिहासिक शिकायतों के परिणामस्वरूप प्रायः सामुदायिक तनाव उत्पन्न होते हैं, वहाँ एक जनजातीय उपग्राम के निकट एक अपशिष्ट प्रबंधन सुविधा-केंद्र के लिए भूमि आबंटित करने संबंधी एक सरकारी निर्णय से एक चिंगारी निकली और जनजातीय समुदाय का विरोध भड़क उठा, जिसमें दावा किया गया है कि यह भूमि उनकी सांस्कृतिक पहचान के लिए पवित्र और महत्वपूर्ण है। उसी समय, शहरी निवासी और स्थानीय उद्योग समूह एक उपयुक्त निपटान स्थल के न होने के कारण उत्पन्न ठोस अपशिष्ट की गंभीर चुनौतियों और स्वास्थ्य चिंताओं का हवाला देते हुए इस परियोजना का समर्थन करते हैं। यह संघर्ष सड़क अवरोध, सोशल मीडिया अभियानों, और पुलिस के अतिरेक के आरोपों के चलते तीव्र हो गया। एक जिम्मेदार सरकारी अधिकारी के रूप में, आपको मध्यस्थता के माध्यम से इस स्थिति का समाधान करने एवं पर्यावरणीय आवश्यकताओं, जनजाति अधिकारों, और शहरी जन-स्वास्थ्य के बीच संतुलन बनाते हुए एक संधारणीय परिणाम सुनिश्चित करने का कार्य सौंपा गया है।
उपर्युक्त के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए :
तकनीकी विकल्पों पर चर्चा करने से पहले, विरोध करने वाले जनजाति समुदाय की सांस्कृतिक चिंताओं को स्वीकार करने के साथ ही, एक सफल संघर्ष समाधान प्रक्रिया अवश्य आरंभ की जानी चाहिए।
शहरी स्वास्थ्य चिंताओं के समाधान के लिए, सरकार को अविलंब परियोजना को आगे बढ़ाना चाहिए, जो कि किसी लघु वर्ग की भावनाओं से कहीं अधिक महत्वपूर्ण है।
पारस्परिक समझ विकसित करने और तनावों को कम करने में सहायता के लिए जनजाति नेताओं, पर्यावरण विशेषज्ञों, और नगर पालिका के प्रतिनिधियों को सम्मिलित करते हुए एक बहु-हितधारक संवाद मंच का गठन करना।
साक्ष्य-आधारित निर्णयन को सुकर बनाने के लिए एक स्वतंत्र पर्यावरणीय और सामाजिक प्रभाव मूल्यांकन (ESIA) को संचालित करना और प्राप्त निष्कर्षों को दोनों पक्षों के साथ पारदर्शी रूप से साझा करना।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से, इस समाधान प्रक्रिया में योगदान देंगे ?
(a) केवल 1, 3 और 4
(b) केवल 2, 3 और 4
(c) केवल 1 और 2
(d) 1, 2, 3 और 4
प्रश्न 77 — उत्तर: (a) केवल 1, 3 और 4
व्याख्या:कथन 1 — सही ✓ जनजातीय समुदाय की सांस्कृतिक चिंताओं को पहले स्वीकार करना संघर्ष समाधान की पहली शर्त है। बिना इसके कोई भी समाधान टिकाऊ नहीं होगा।
कथन 2 — गलत ✗ यह कथन एकतरफा है। किसी लघु वर्ग (जनजाति) की भावनाओं और अधिकारों को नजरअंदाज करना लोकतांत्रिक और संवैधानिक मूल्यों के विरुद्ध है। एक जिम्मेदार अधिकारी सभी पक्षों का संतुलन करता है।
कथन 3 — सही ✓ बहु-हितधारक संवाद मंच (Multi-stakeholder dialogue) सबसे प्रभावी तरीका है जिसमें सभी पक्ष — जनजाति नेता, पर्यावरण विशेषज्ञ, नगर पालिका — शामिल हों।
कथन 4 — सही ✓ स्वतंत्र ESIA (Environmental and Social Impact Assessment) साक्ष्य आधारित निर्णय के लिए आवश्यक है और इसे पारदर्शी रूप से साझा करना जनता के विश्वास के लिए जरूरी है।
प्रश्न 78. सुश्री X, एक मध्यम-स्तरीय सिविल सेवा अधिकारी हैं, जो एक प्रमुख नगर के शहरी विकास विभाग में कार्यरत हैं। हाल ही में, वे एक सार्वजनिक अवसंरचना परियोजना — नए सामुदायिक उद्यान हेतु संविदा की अनुमोदन प्रक्रिया में सम्मिलित थीं। अनुमोदन प्रक्रिया के दौरान, उन्हें एक गोपनीय सूचना प्राप्त होती है, जिसमें इसका उल्लेख है कि चयनित सूची में सम्मिलित एक संविदाकार के अन्य नगरों में घटिया कार्य-शैली और भ्रष्टाचार के आरोपों का पूर्ववृत्त रहा है, यद्यपि विधि द्वारा कुछ भी प्रमाणित नहीं हुआ है। विभागाध्यक्ष श्री Y, उन्हें इस सूचना को परियोजना समिति अथवा जनता के समक्ष प्रकट न करने की सलाह देते हैं, क्योंकि इससे परियोजना में विलंब हो सकता है और नगर की प्रतिष्ठा को हानि हो सकती है। हालाँकि, सुश्री X का मानना है कि ऐसी सूचना को रोकना, पारदर्शिता और जनता के विश्वास से समझौता करना होगा।
अब, सुश्री X को निम्नलिखित में से क्या करना चाहिए ?
परियोजना समिति और जनता के समक्ष तत्काल सूचना को प्रकट करना चाहिए
परियोजना की संपूर्णता (integrity) के संरक्षण के लिए चयनित सूची से संविदाकार को हटाने की अनुशंसा करनी चाहिए
कुछ समय के लिए जनता से इस सूचना को गोपनीय रखते हुए, किसी निरीक्षण समिति को एक ‘सीमित प्रकटीकरण’ प्रस्तावित करना चाहिए
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर उत्तर चुनिए :
(a) केवल 1 और 2
(b) केवल 3
(c) केवल 2 और 3
(d) 1, 2 और 3
प्रश्न 78 — उत्तर: (a) केवल 1 और 2
व्याख्या:विकल्प 1 — सही ✓ पारदर्शिता और जनहित के सिद्धांत के अनुसार सुश्री X को परियोजना समिति के समक्ष सूचना प्रकट करनी चाहिए। जनता का विश्वास सर्वोपरि है।
विकल्प 2 — सही ✓ यदि संविदाकार के विरुद्ध भ्रष्टाचार का पूर्ववृत्त है तो उसे चयनित सूची से हटाने की अनुशंसा करना परियोजना की integrity की रक्षा करना है।
विकल्प 3 — गलत ✗ सूचना को जनता से छुपाना पारदर्शिता के सिद्धांत का उल्लंघन है। ‘सीमित प्रकटीकरण’ भी एक प्रकार की जानकारी दबाने की कोशिश है जो सुशासन के विरुद्ध है।
प्रश्न 79. ‘X’, भारत के संविधान के भाग III के अनुच्छेद 13 में यथा उपबंधित, ‘विधि’ शब्द के अर्थ पर एक संगोष्ठी को संबोधित कर रहा था। ‘X’ ने स्पष्ट किया कि भारत के संविधान में ‘विधि’ शब्द का अर्थ अत्यधिक व्यापक है। इसमें अध्यादेश, आदेश तथा नियम और विनियम भी सम्मिलित हैं। ‘Y’ ने ध्यान दिलाया कि अनुच्छेद 13 में ‘विधि’ शब्द के अंतर्गत भारत के राज्यक्षेत्र में विधि का बल रखने वाली रूढ़ि या प्रथा भी सम्मिलित है, जिससे ‘X’ सहमत नहीं था।
उपर्युक्त के आधार पर, नीचे दिए गए विकल्पों में से सही निष्कर्ष को चुनिए :
(a) विधि की व्याख्या में, ‘X’ सही है, जिसमें रूढ़ि को सम्मिलित न किए जाने के बारे में उसके विचार भी सम्मिलित हैं।
(b) ‘Y’ का यह विचार कि ‘विधि’ में रूढ़ि सम्मिलित है, सही नहीं है।
(c) ‘X’ और ‘Y’ दोनों के विचार सही हैं।
(d) केवल ‘Y’ का विचार सही है।
प्रश्न 79 — उत्तर: (c) X और Y दोनों के विचार सही हैं
व्याख्या: अनुच्छेद 13(3)(a) के अनुसार “विधि” में सम्मिलित हैं:
भारत के राज्यक्षेत्र में विधि का बल रखने वाले अध्यादेश, आदेश, उपविधि, नियम, विनियम, अधिसूचनाएँ, रूढ़ि या प्रथा ✓
इसलिए:
X सही है — अध्यादेश, आदेश, नियम, विनियम सम्मिलित हैं ✓
Y भी सही है — रूढ़ि और प्रथा भी अनुच्छेद 13(3)(a) के अंतर्गत विधि में सम्मिलित हैं ✓
X का यह कहना कि रूढ़ि सम्मिलित नहीं है — गलत था, इसलिए विकल्प (a) सही नहीं है।
प्रश्न 80. भारत के संविधान के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए :
भारत के संविधान में ऐसा कोई भी अनुच्छेद नहीं है, जो यह विनिर्दिष्ट करता हो कि भारत के संविधान को आधिकारिक रूप से ‘भारत का संविधान’ कहा जाएगा।
भारत के संविधान में ऐसा कोई भी अनुच्छेद नहीं है, जो यह विनिर्दिष्ट करता हो कि भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम, 1947 (इंडियन इंडिपेंडेन्स एक्ट, 1947) और भारत सरकार अधिनियम, 1935, (गवर्नमेंट ऑफ़ इंडिया एक्ट, 1935) को निरसित किया गया।
भारत के संविधान में ऐसा कोई भी अनुच्छेद नहीं है, जिसमें भारत के संविधान के प्रारंभ होने की तारीख के रूप में 26 जनवरी, 1950 का उल्लेख है।
उपर्युक्त कथनों पर आधारित निम्नलिखित में से कौन-सा निष्कर्ष सही है ?
(a) सभी तीन कथन सही हैं।
(b) कोई भी कथन सही नहीं है।
(c) दो कथन सही हैं, जिनमें कथन 3 सम्मिलित है।
(d) केवल एक कथन सही है।
प्रश्न 80 — उत्तर: (a) सभी तीन कथन सही हैं
व्याख्या:कथन 1 — सही ✓ भारत के संविधान में कोई ऐसा अनुच्छेद नहीं है जो कहे कि इसे आधिकारिक रूप से “भारत का संविधान” कहा जाएगा। संविधान की प्रस्तावना में “संविधान” शब्द है लेकिन कोई विशेष अनुच्छेद इसका नामकरण नहीं करता।
कथन 2 — सही ✓ संविधान में ऐसा कोई अनुच्छेद नहीं है जो स्पष्ट रूप से कहे कि Government of India Act 1935 और Indian Independence Act 1947 को निरसित किया गया। यह निरसन अनुसूची के माध्यम से हुआ, किसी विशेष अनुच्छेद द्वारा नहीं।
कथन 3 — सही ✓ संविधान में कोई ऐसा अनुच्छेद नहीं है जो 26 जनवरी 1950 को संविधान के प्रारंभ की तिथि के रूप में उल्लेखित करे। अनुच्छेद 394 केवल यह बताता है कि कौन से अनुच्छेद तुरंत लागू होंगे, लेकिन 26 जनवरी की तारीख का स्पष्ट उल्लेख नहीं है।
प्रश्न 81. भारत में दिव्यांगजनों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन-सा/कौन-से कथन सही है/हैं ?
भारत की संसद द्वारा वर्ष 2018 में पारित दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, शिक्षा और नियोजन में आरक्षण अनिवार्य करता है, पहुँच और विभेद न करने को सुनिश्चित करने के सरकारों के विधिक कर्तव्य को स्थापित करता है।
सुगम्य भारत अभियान तीन प्रमुख क्षेत्रों यथा, निर्मित बुनियादी ढाँचा, परिवहन प्रणाली और सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी में दिव्यांगजनों की सार्वभौमिक पहुँच प्राप्त करने पर केंद्रित है।
राष्ट्रीय दिव्यांगजन वित्त और विकास निगम (NDFDC) कारपोरेट कार्य मंत्रालय द्वारा स्थापित एक सार्वजनिक क्षेत्र संगठन है, जो दिव्यांगजनों (PwDs) में उद्यमिता के संवर्धन के लिए एक अलाभकारी कंपनी है।
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर उत्तर चुनिए :
(a) 1 और 2
(b) केवल 2
(c) 1 और 3
(d) केवल 1
श्न 81 — उत्तर: (a) 1 और 2
व्याख्या:कथन 1 — सही ✓ दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम 2016 में संसद द्वारा पारित हुआ (2016, न कि 2018 जैसा प्रश्न में लिखा है — यह प्रश्न में त्रुटि हो सकती है)। यह अधिनियम शिक्षा और नियोजन में आरक्षण, पहुँच और विभेद न करने के सरकारी कर्तव्य को स्थापित करता है। ✓
कथन 2 — सही ✓ सुगम्य भारत अभियान (Accessible India Campaign) के तीन स्तंभ हैं:
निर्मित पर्यावरण (Built Environment)
परिवहन प्रणाली
सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (ICT) ✓
कथन 3 — गलत ✗ NDFDC (National Differently Abled Finance & Development Corporation) सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय के अंतर्गत आती है, न कि कारपोरेट कार्य मंत्रालय के। इसलिए यह कथन गलत है।
प्रश्न 82. भारत में अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों से संबंधित उपबंधों के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए :
भारत के संविधान की पाँचवीं अनुसूची में असम, मेघालय, त्रिपुरा और मिजोरम राज्यों में जनजाति क्षेत्रों के प्रशासन के संबंध में उपबंध हैं।
भारत की कुछ जनजातियाँ कतिपय आय पर आयकर के भुगतान से छूट का दावा करने की हकदार हैं।
भारत के संविधान में अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों की स्त्रियों के लिए पंचायतों में स्थानों (सीटों) के आरक्षण का उपबंध है।
उपर्युक्त कथनों पर आधारित निम्नलिखित निष्कर्षों में से कौन-सा सही है ?
(a) दो कथन सही हैं, जिनमें कथन 2 सम्मिलित है।
(b) दो कथन सही हैं, जो कि कथन 1 और कथन 3 हैं।
(c) केवल एक कथन सही है।
(d) सभी तीन कथन सही हैं।
प्रश्न 82 — उत्तर: (a) दो कथन सही हैं, जिनमें कथन 2 सम्मिलित है
व्याख्या:कथन 1 — गलत ✗ असम, मेघालय, त्रिपुरा और मिजोरम छठी अनुसूची (Sixth Schedule) के अंतर्गत आते हैं, पाँचवीं अनुसूची में नहीं। पाँचवीं अनुसूची अन्य राज्यों के जनजाति क्षेत्रों पर लागू होती है।
कथन 2 — सही ✓ कुछ अधिसूचित जनजातियाँ आयकर अधिनियम की धारा 10(26) के तहत कतिपय आय पर आयकर छूट की हकदार हैं।
कथन 3 — सही ✓ 73वें संविधान संशोधन के अंतर्गत अनुच्छेद 243D में SC/ST महिलाओं के लिए पंचायतों में सीटों के आरक्षण का प्रावधान है। ✓
इसलिए कथन 2 और 3 सही हैं।
प्रश्न 83. भारत की संसद में सदस्यों द्वारा पूछे जाने वाले प्रश्नों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए :
अतारांकित प्रश्न ऐसे प्रश्न हैं, जिन पर कोई सदस्य सदन में मौखिक उत्तर चाहता है।
तारांकित प्रश्न ऐसे प्रश्न हैं, जिन पर कोई सदस्य लिखित उत्तर चाहता है।
किसी अतारांकित प्रश्न पर कोई अनुपूरक प्रश्न नहीं पूछा जा सकता है।
उपर्युक्त कथनों पर आधारित निम्नलिखित निष्कर्षों में से कौन-सा सही है ?
(a) सभी तीन कथन सही हैं।
(b) दो कथन सही हैं, जिनमें कथन 2 सम्मिलित है।
(c) केवल एक कथन सही है।
(d) कोई भी कथन सही नहीं है।
प्रश्न 83 — उत्तर: (c) केवल एक कथन सही है
व्याख्या:कथन 1 — गलत ✗ अतारांकित प्रश्न (Unstarred Question) वह है जिस पर सदस्य लिखित उत्तर चाहता है, मौखिक नहीं।
कथन 2 — गलत ✗ तारांकित प्रश्न (Starred Question) वह है जिस पर सदस्य मौखिक उत्तर चाहता है, लिखित नहीं।
कथन 3 — सही ✓ अतारांकित प्रश्न पर चूँकि उत्तर लिखित होता है, इसलिए उस पर कोई अनुपूरक प्रश्न नहीं पूछा जा सकता। अनुपूरक प्रश्न केवल तारांकित प्रश्नों पर ही पूछे जाते हैं। ✓
प्रश्न 84. भारत की संसद की अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के कल्याण संबंधी समिति के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए :
यद्यपि इस समिति के सदस्यों को संसद के दोनों सदनों से निर्वाचित किया जाता है, तथापि राज्य सभा के सभापति द्वारा इस समिति के अध्यक्ष की नियुक्ति की जाती है।
राज्य सभा द्वारा बीस सदस्यों और लोक सभा द्वारा दस सदस्यों को निर्वाचित किया जाता है।
केंद्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्री के अतिरिक्त, कोई अन्य मंत्री इस समिति का सदस्य होने का पात्र नहीं है।
सदस्यों को उनके पद ग्रहण करने की तारीख से 2 वर्ष की नियत पदावधि के लिए निर्वाचित किया जाता है।
उपर्युक्त कथनों पर आधारित निम्नलिखित निष्कर्षों में से कौन-सा सही है ?
(a) चारों कथन सही हैं।
(b) केवल एक कथन सही है, जो कि कथन 2 है।
(c) दो कथन सही हैं, जिनमें कथन 1 सम्मिलित है।
(d) कोई भी कथन सही नहीं है।
प्रश्न 84 — उत्तर: (d) कोई भी कथन सही नहीं है
व्याख्या:कथन 1 — गलत ✗ इस समिति के अध्यक्ष की नियुक्ति लोकसभा अध्यक्ष (Speaker) द्वारा की जाती है, राज्यसभा सभापति द्वारा नहीं।
कथन 2 — गलत ✗ वास्तव में लोकसभा से 20 सदस्य और राज्यसभा से 10 सदस्य निर्वाचित होते हैं, प्रश्न में यह उल्टा बताया गया है।
कथन 3 — गलत ✗ कोई भी मंत्री इस समिति का सदस्य नहीं हो सकता, केवल सामाजिक न्याय मंत्री ही नहीं — बल्कि कोई भी मंत्री नहीं।
कथन 4 — गलत ✗ सदस्यों की पदावधि 1 वर्ष होती है, न कि 2 वर्ष।
प्रश्न 85. भारत के मिशन सुदर्शन चक्र के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए :
इसका उद्देश्य भारत की वायु रक्षा, बैलिस्टिक मिसाइल सुरक्षा और हवाई आक्रमण क्षमताओं में वृद्धि करना है।
इस मिशन को त्वरित, सटीक, और शक्तिशाली रक्षा (defence) प्रतिक्रिया में वृद्धि करने के लिए डिज़ाइन किया जा रहा है, जो भारत की रणनीतिक स्वायत्तता को सशक्त बनाएगी।
इस मिशन के उद्देश्यों में से एक है – वर्ष 2035 तक, भारत के सभी सार्वजनिक स्थानों को एक विस्तारित राष्ट्रव्यापी सुरक्षा कवच के द्वारा सुरक्षा प्रदान करना है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/कौन-से सही है/हैं ?
(a) 1, 2 और 3
(b) केवल 1 और 2
(c) केवल 2 और 3
(d) केवल 1
प्रश्न 85 — उत्तर: (b) केवल 1 और 2
व्याख्या:कथन 1 — सही ✓ मिशन सुदर्शन चक्र का उद्देश्य भारत की वायु रक्षा, बैलिस्टिक मिसाइल सुरक्षा और हवाई आक्रमण क्षमताओं को मजबूत करना है। ✓
कथन 2 — सही ✓ यह मिशन त्वरित और शक्तिशाली रक्षा प्रतिक्रिया के लिए डिज़ाइन किया जा रहा है जो भारत की रणनीतिक स्वायत्तता को बढ़ाएगा। ✓
कथन 3 — गलत ✗ यह एक रक्षा/मिसाइल रक्षा मिशन है। “सभी सार्वजनिक स्थानों को सुरक्षा कवच देना” इस मिशन का उद्देश्य नहीं है — यह कथन भ्रामक और गलत है।
प्रश्न 87. भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023 के अधीन ज़ीरो प्रथम सूचना रिपोर्ट (Zero FIR) के बारे में निम्नलिखित में से कौन-सा/कौन-से कथन सही है/हैं ?
ज़ीरो एफआईआर (Zero FIR) किसी भी पुलिस स्टेशन में दर्ज कराई जा सकती है, भले ही संज्ञेय/असंज्ञेय अपराध किए जाने का स्थान, उस पुलिस स्टेशन की क्षेत्रीय अधिकारिता से बाहर हो।
किसी पुलिस स्टेशन, जहाँ ज़ीरो एफआईआर (Zero FIR) दर्ज की गई है, वहाँ के प्रभारी अधिकारी सक्षम प्राधिकारी की अनुमति से प्राथमिक अन्वेषण आरंभ कर सकता है।
ज़ीरो एफआईआर (Zero FIR) के अंतर्गत, सूचना देने वाले के लिए यह अनिवार्य है कि वह सूचना इलेक्ट्रॉनिक प्रारूप में दे।
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर उत्तर चुनिए :
(a) 1, 2 और 3
(b) केवल 2 और 3
(c) केवल 1
(d) केवल 2
प्रश्न 87 — उत्तर: (c) केवल 1
व्याख्या:कथन 1 — सही ✓ BNSS 2023 की धारा 173 के अंतर्गत Zero FIR किसी भी पुलिस स्टेशन में दर्ज कराई जा सकती है, चाहे अपराध उस थाने की क्षेत्रीय सीमा में हुआ हो या नहीं। यह CrPC में नया प्रावधान है। ✓
कथन 2 — गलत ✗ Zero FIR दर्ज करने वाला प्रभारी अधिकारी किसी की अनुमति के बिना प्राथमिक अन्वेषण नहीं कर सकता। Zero FIR को तुरंत संबंधित क्षेत्राधिकार वाले थाने को अंतरित किया जाता है।
कथन 3 — गलत ✗ BNSS में Zero FIR के लिए इलेक्ट्रॉनिक प्रारूप अनिवार्य नहीं है। सूचना मौखिक या लिखित किसी भी रूप में दी जा सकती है।
This mock paper tests 9 broad subject areas. The chart below shows approximate question distribution. Economy and Ancient History dominate, followed by Geography and Science-Tech.
यह मॉक पेपर 9 विषय क्षेत्रों की जांच करता है। अर्थव्यवस्था और प्राचीन इतिहास में सर्वाधिक प्रश्न हैं, उसके बाद भूगोल और विज्ञान-प्रौद्योगिकी का स्थान है।
Subject / विषय
Questions / प्रश्न
% of Paper
Difficulty / कठिनाई
Priority / प्राथमिकता
Ancient History / प्राचीन इतिहास
14
14%
High
High
Modern History / आधुनिक इतिहास
7
7%
High
Medium
Art & Culture / कला और संस्कृति
7
7%
Moderate
Medium
Geography / भूगोल
13
13%
Moderate
High
Economy / अर्थव्यवस्था
16
16%
High
Very High
Environment / पर्यावरण
11
11%
Moderate
High
Science & Tech / विज्ञान-प्रौद्योगिकी
13
13%
High
Very High
Polity & Law / राजनीति और कानून
11
11%
High
Very High
IR & Current Affairs / अंतरराष्ट्रीय संबंध
8
8%
Moderate
Medium
Key Observations
Economy has the highest weight (~16%) and includes many current-affairs-linked topics. / अर्थव्यवस्था सबसे अधिक वजन (~16%) रखती है और इसमें कई समसामयिक विषय शामिल हैं।
Ancient History (14%) focuses heavily on art, rivers, coinage, and urbanisation. / प्राचीन इतिहास (14%) कला, नदियों, सिक्कों और नगरीकरण पर केंद्रित है।
Science-Tech (13%) is now a permanent heavyweight — especially AI, space, and defence tech. / विज्ञान-प्रौद्योगिकी (13%) अब एक स्थायी महत्वपूर्ण खंड है।
No single subject can be ignored — the spread demands balanced preparation. / कोई भी विषय उपेक्षित नहीं किया जा सकता — संतुलित तैयारी आवश्यक है।
Section 2: Question Types & Difficulty
Question Format Distribution | प्रश्न प्रारूप वितरण
Question Type / प्रश्न प्रकार
Count / संख्या
% Share
Strategy / रणनीति
Statement-based 2-3 stmts / 2-3 कथन आधारित
55
55%
Elimination method
Statement-based 2 stmts / 2 कथन आधारित
17
17%
Identify one certain stmt
Match the following / सुमेलित कीजिए
8
8%
Anchor on known pairs
Direct factual / प्रत्यक्ष तथ्यात्मक
10
10%
Fast recall
Identify person/place / पहचानिए
6
6%
Elimination
Scenario/case-based / परिदृश्य आधारित
4
4%
Ethics principles
Difficulty Distribution | कठिनाई वितरण
Level / स्तर
Count / संख्या
% Share
Description / विवरण
Easy / सरल
22
22%
Direct recall; one clear answer / सीधा स्मरण
Moderate / मध्यम
50
50%
Needs analysis & elimination / विश्लेषण और निष्कासन
Hard / कठिन
28
28%
Multi-layered; partially true statements / बहु-स्तरीय; आंशिक सत्य
How to Tackle Statement-Based Questions | कथन-आधारित प्रश्नों को हल करने की विधि
Read ALL statements before looking at options. / विकल्प देखने से पहले सभी कथन पढ़ें।
Identify the statement you are MOST SURE about — eliminate options that contradict it. / जिस कथन के बारे में आप सबसे निश्चित हैं उसे पहले पहचानें।
With 3 statements: if you can call 1 true AND 1 false, you can often deduce the answer without knowing the third. / 3 कथनों में से 1 सही और 1 गलत जानने से उत्तर निकाला जा सकता है।
Watch for ABSOLUTE words: always, never, only, first, largest — these are common traps. / पूर्ण शब्दों से सावधान रहें: सदैव, कभी नहीं, केवल, पहला, सबसे बड़ा।
In match-the-following, confirm 2 solid pairs first, then use elimination for the rest. / सुमेलन में पहले 2 निश्चित युग्म बनाएं, फिर शेष के लिए निष्कासन विधि अपनाएं।
Section 3: Question-by-Question Analysis
All 100 questions mapped with subject, difficulty, type, and the specific knowledge needed to answer correctly. | सभी 100 प्रश्न विषय, कठिनाई, प्रकार और सही उत्तर के लिए आवश्यक ज्ञान के साथ मैप किए गए हैं।
Q#
Topic (Bilingual) / विषय (द्विभाषी)
Subject / विषय
Difficulty / कठिनाई
Type / प्रकार
Knowledge Required / आवश्यक ज्ञान
1
Vedic rivers — Pleistocene geography & river systems / वैदिक नदियाँ — प्लीस्टोसीन भूगोल और नदी तंत्र
Ancient History
Hard
3-statement
Rigveda nadi-sukta + Robert Bruce Foote + dolphin distribution / ऋग्वेद नदी-सूक्त + रॉबर्ट ब्रूस फुट + डॉल्फिन वितरण
2
Early Buddhist art — empty seat symbolism / प्रारंभिक बौद्ध कला — रिक्त स्थान प्रतीकवाद
Art & Culture
Easy
Direct
Buddha represented without form in early Buddhist iconography / प्रारंभिक बौद्ध कला में बुद्ध को बिना रूप के दर्शाया गया
3
Ancient vs modern river names (Vitasta, Asikni…) / प्राचीन बनाम आधुनिक नदी नाम
Ancient History
Moderate
4-pair match
Greek/Sanskrit names: Hydaspes=Jhelum, Acesines=Chenab, Parushni=Ravi, Vipasha=Beas / यूनानी-संस्कृत नाम
4
Amaravati stupa — location, size, influence on SE Asia / अमरावती स्तूप — स्थान, आकार, दक्षिण-पूर्व एशिया पर प्रभाव
Art & Culture
Moderate
3-statement
Lower Krishna Valley; second largest after Sanchi; style exported to Sri Lanka & SE Asia
5
Early Tamil sangam — rulers & dynasties NOT matched / प्रारंभिक तमिल संगम — शासक और राजवंश जो सही सुमेलित नहीं
1. Ancient History | प्राचीन इतिहास (14 Questions)
Key Topics / मुख्य विषय
Recommended Sources / अनुशंसित स्रोत
Vedic rivers, Buddhist iconography, Sangam kingdoms, numismatics, Indus Valley, place-value system, Pali texts / वैदिक नदियां, बौद्ध प्रतिमा विज्ञान, संगम राजवंश, मुद्राशास्त्र, हड़प्पा, स्थानीय मान पद्धति
NCERT Class 6, 11, 12; R.S. Sharma Old NCERT; Ancient India by Upinder Singh / एनसीईआरटी कक्षा 6, 11, 12; पुरानी एनसीईआरटी
2. Art & Culture | कला और संस्कृति (7 Questions)
Key Topics / मुख्य विषय
Recommended Sources / अनुशंसित स्रोत
Stupas (Amaravati, Sanchi), temple architecture (Nagara/Dravida), classical music gharanas, cave paintings, UNESCO sites / स्तूप, मंदिर वास्तुकला, शास्त्रीय संगीत घराने, गुफा चित्र
Nitin Singhania (Indian Art & Culture); CCRT notes; Fine Arts NCERTs / नितिन सिंघानिया की पुस्तक; CCRT नोट्स
8. Polity & Governance | राजनीति और शासन (11 Questions)
Key Topics / मुख्य विषय
Recommended Sources / अनुशंसित स्रोत
Article 13 (law), RPwD 2018, SC/ST 5th Schedule, Starred/Unstarred Q, SC/ST Committee, BNSS Zero FIR, CEIB/SFIO/CBI ministries / अनुच्छेद 13, RPwD 2018, जीरो FIR
M. Laxmikant (Indian Polity); D.D. Basu; bare Constitution acts; PRS India; BNSS 2023 gazette / लक्ष्मीकांत; संविधान; PRS India
9. International Relations & Current Affairs | अंतरराष्ट्रीय संबंध और समसामयिकी (8 Questions)
Key Topics / मुख्य विषय
Recommended Sources / अनुशंसित स्रोत
India-ASEAN connectivity, India-assisted projects (Mangdechhu/Salma Dam), UN peacekeeping missions, BIMSTEC, multilateral forums, EU membership / भारत-आसियान संपर्क, बिम्सटेक, संयुक्त राष्ट्र अभियान
MEA press releases; The Hindu editorials; Vision IAS Current Affairs; Vajiram monthly CA / MEA विज्ञप्तियां; The Hindu; विज़न IAS करेंट अफेयर्स
Section 5: First Impression & Key Insights | खंड 5: पहली नज़र और मुख्य जानकारियां
What a first-time aspirant notice | पहली बार देखने पर क्या दिखता है
INSIGHT 1 / जानकारी 1: Statements dominate (~72%) — You cannot just ‘read broadly.’ You need precise, verifiable facts. True/false at statement level requires depth, not breadth. | कथन-आधारित प्रश्न (~72%) — केवल सामान्य पठन पर्याप्त नहीं है। प्रत्येक विषय में गहराई आवश्यक है।
INSIGHT 2 / जानकारी 2: Traps are everywhere — Examiners blend related-but-distinct facts. Q1 mixes Pleistocene geography with Vedic rivers; Q7 mixes two different British policies. | जाल हर जगह हैं — परीक्षाकर्ता संबंधित किंतु भिन्न तथ्यों को मिलाते हैं।
INSIGHT 3 / जानकारी 3: Current Affairs are manageable (~28 Qs) — Standard monthly current affairs prep (PIB + newspaper) covers most of these. | समसामयिकी प्रबंधनीय है (~28 प्रश्न) — PIB और समाचार पत्र से अधिकांश उत्तर मिल सकते हैं।
INSIGHT 4 / जानकारी 4: Economy + Science-Tech are growing fastest — together they carry ~29% of this paper. Weakness here = 25-30 marks lost. | अर्थव्यवस्था + विज्ञान-प्रौद्योगिकी सबसे तेज़ी से बढ़ रहे हैं — दोनों मिलकर ~29% प्रश्न लेते हैं।
Examiner Tricks Observed | परीक्षाकर्ता की चालें
Question / प्रश्न
The Trap / जाल
How to Avoid / बचाव कैसे करें
Q5
Udiyanjeral called Chola — actually Chera / उदियनजेरल को चोल कहना — वास्तव में चेर
Sangam literature: memorise each king’s dynasty / संगम साहित्य में प्रत्येक राजा का वंश याद करें
Q12
Hilton-Young purpose — multiple plausible options / हिल्टन-यंग आयोग के कई प्रशंसनीय विकल्प
Focus on ‘creditworthiness’ as the key term / ‘ऋणपात्रता’ शब्द पर ध्यान दें
Q60
REEs described as ’13 metallic elements’ — actually 17 / REEs को ’13 धात्विक तत्व’ बताना — वास्तव में 17 हैं
Remember: lanthanides (15) + Sc + Y = 17 REEs / लैंथेनाइड (15) + Sc + Y = 17 REE
Q67
LLMs produce ‘unbiased outputs’ — completely false / LLMs निष्पक्ष आउटपुट देते हैं — पूर्णतः गलत
LLMs inherit training data biases / LLMs प्रशिक्षण डेटा के पूर्वाग्रह विरासत में पाते हैं
Q88
CBI under Home Ministry — actually Personnel Ministry / CBI को गृह मंत्रालय के अधीन बताना — वास्तव में कार्मिक मंत्रालय
CBI = DoPT (Department of Personnel & Training) / CBI = DoPT के अधीन
Scoring Estimate for Different Preparation Levels | विभिन्न तैयारी स्तरों के लिए अनुमानित अंक