UPSC PRELIMS 2026 : Science & Technology Questions & Answer with analysis
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UPSC PRE 2026 — विज्ञान और प्रौद्योगिकी

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प्रश्न 44. DHRUV64 के बारे में निम्नलिखित में से कौन-सा/कौन-से कथन सही है/हैं?

  1. यह DIR-V कार्यक्रम के अंतर्गत निर्मित तृतीय चिप है, जिसका समग्र उद्देश्य भारत के लिए माइक्रोप्रोसेसरों के निर्माण को समर्थ बनाना है।
  2. यह भारत का प्रथम घरेलू 0 GHz, 64-बिट डुअल-कोर माइक्रोप्रोसेसर है।

विकल्प:

(a) केवल 1

(b) केवल 2

(c) 1 और 2 दोनों

(d) न तो 1, न ही 2

सही उत्तर: (c) 1 और 2 दोनों

व्याख्या:

कथन 1 — सही है। DHRUV64, DIR-V (डिजिटल इंडिया RISC-V) कार्यक्रम के अंतर्गत C-DAC द्वारा निर्मित तीसरी चिप है। इससे पहले VEGA (पहली चिप) और MOUSHIK (दूसरी चिप) बनाई गई थीं। कार्यक्रम का उद्देश्य भारत को माइक्रोप्रोसेसर निर्माण में आत्मनिर्भर बनाना है।

कथन 2 — सही है। DHRUV64 भारत का पहला घरेलू 1.0 GHz, 64-बिट डुअल-कोर माइक्रोप्रोसेसर है। यह RISC-V ओपन-सोर्स आर्किटेक्चर पर आधारित है और 180nm प्रोसेस नोड पर बना है।

DHRUV64 का पूरा संदर्भ:

  • पूर्ण नाम: Dependable High-performance RISC-V Unified Processor 64-bit
  • विकासकर्ता: C-DAC (सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ एडवांस्ड कंप्यूटिंग), पुणे — MeitY के अंतर्गत
  • आर्किटेक्चर: RISC-V — ओपन-सोर्स, कोई लाइसेंस शुल्क नहीं (ARM या x86 के विपरीत)
  • विशेषताएं: 64-बिट, डुअल-कोर, 1.0 GHz क्लॉक स्पीड, 180nm फैब्रिकेशन
  • DIR-V चिप क्रम: VEGA → MOUSHIK → DHRUV64
  • उपयोग: एज कंप्यूटिंग, सरकारी सर्वर, रक्षा इलेक्ट्रॉनिक्स, IoT
  • रणनीतिक महत्व: अमेरिका, ताइवान, दक्षिण कोरिया पर चिप निर्भरता कम करना — विशेषकर अमेरिका-चीन चिप युद्ध के बाद TSMC आपूर्ति श्रृंखला जोखिम को देखते हुए

भारत का सेमीकंडक्टर मिशन (व्यापक संदर्भ):

  • इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन (ISM) दिसंबर 2021 में MeitY के अंतर्गत शुरू हुआ
  • स्वीकृत संयंत्र: टाटा-PSMC गुजरात (28nm), CG पावर-रेनेसास गुजरात, टाटा OSAT असम (पैकेजिंग/परीक्षण), HCL-फॉक्सकॉन UP (डिस्प्ले फैब)
  • 2030 लक्ष्य: वैश्विक सेमीकंडक्टर आपूर्ति श्रृंखला का हिस्सा बनना

कठिनाई स्तर: मध्यम (Moderate)

परीक्षार्थियों को DIR-V कार्यक्रम की चिप क्रमावली (VEGA → MOUSHIK → DHRUV64) याद रखनी होगी। जो केवल “भारत ने चिप बनाई” जानते हैं वे उलझेंगे।

यह प्रश्न क्यों पूछा गया: UPSC ने यह प्रश्न इसलिए पूछा क्योंकि भारत का सेमीकंडक्टर आत्मनिर्भरता अभियान 2021-2025 के बीच की सबसे बड़ी तकनीकी नीतिगत पहल है। चिप की कमी (2020-22 की वैश्विक चिप शॉर्टेज) ने भारत को अपनी कमजोरी का एहसास कराया। DHRUV64 उस दिशा में ठोस कदम है।

परीक्षक की मंशा: परीक्षक यह जांचना चाहता था कि अभ्यर्थी को सिर्फ “चिप बनी” की सतही जानकारी है या DIR-V की पूरी चिप क्रमावली और DHRUV64 की विशिष्ट तकनीकी जानकारी है। “तृतीय चिप” वाला कथन सावधान अभ्यर्थियों को ही सही लगेगा।

ट्रेंड विश्लेषण: UPSC 2022 में स्वदेशी तकनीक (TEJAS), 2023 में अंतरिक्ष (आदित्य L1), 2024 में AI और चिप से जुड़े प्रश्न आए। 2026 में सेमीकंडक्टर और RISC-V से प्रश्न आना स्वाभाविक था। आगे भी प्रति वर्ष 1-2 ऐसे प्रश्न आते रहेंगे।

आगे के लिए नोट्स:

  • C-DAC और MeitY की PIB विज्ञप्तियां पढ़ें
  • RISC-V क्या है — यह समझें (ओपन-सोर्स ISA, भारत की पहली पसंद क्यों)
  • इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन के सभी स्वीकृत संयंत्र याद करें
  • Economic Survey का इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण अध्याय पढ़ें
  • CHIPS Act (USA), EU Chips Act से तुलना करें — वैश्विक चिप राजनीति समझें

प्रश्न 45. हाल ही में, भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) ने बम निरोधक प्रणाली के परीक्षण और मूल्यांकन के लिए एक राष्ट्रीय मानक प्रवर्तित किया है। इस प्रणाली के संबंध में निम्नलिखित में से कौन-सा/कौन-से कथन सही है/हैं?

  1. नए मानक को IS 19445:2025 के रूप में जाना जाता है।
  2. इससे विभिन्न एजेंसियों के बीच उपकरण की अंतर-संचालनीयता (interoperability of equipment) में सुधार होगा।
  3. DRDO के TBRL द्वारा 30वें सेंट्रल साइंटिफिक रिसर्च इंस्टिट्यूट, रूस के सहयोग से इसका विकास किया गया।

विकल्प:

(a) 1, 2 और 3

(b) केवल 2 और 3

(c) केवल 1 और 2

(d) केवल 1

सही उत्तर: (c) केवल 1 और 2

व्याख्या:

कथन 1 — सही है। इस मानक का आधिकारिक नाम IS 19445:2025 है। BIS (भारतीय मानक ब्यूरो) ने इसे 2025 में प्रवर्तित किया।

कथन 2 — सही है। यह मानक विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों जैसे CRPF, BSF, NSG, पुलिस बलों के बीच बम निरोधक उपकरणों की अंतर-संचालनीयता सुनिश्चित करता है — यानी एक एजेंसी का उपकरण दूसरी एजेंसी भी उपयोग कर सके।

कथन 3 — गलत है। TBRL (टर्मिनल बैलिस्टिक्स रिसर्च लेबोरेटरी), चंडीगढ़ ने इसे स्वतंत्र रूप से विकसित किया — रूस के किसी संस्थान के सहयोग से नहीं। यह DRDO की स्वदेशी पहल है।

TBRL और BIS का संदर्भ:

  • TBRL: DRDO की प्रयोगशाला, चंडीगढ़ — विशेषज्ञता: विस्फोटक, बम निरोधक, बैलिस्टिक परीक्षण
  • BIS: भारतीय मानक ब्यूरो — उपभोक्ता मामले मंत्रालय के अंतर्गत — राष्ट्रीय मानक निर्धारण संस्था
  • IS 19445:2025 का महत्व: पहली बार भारत के पास बम निरोधक प्रणाली का अपना राष्ट्रीय मानक आया
  • पहले: विदेशी मानकों (NATO, MIL-STD) पर निर्भरता थी
  • अब: स्वदेशी मानक से भारतीय परिस्थितियों के अनुकूल उपकरण बनेंगे
  • लाभ: आतंकवाद विरोध, IED (Improvised Explosive Device) निष्क्रियण में बेहतर क्षमता

बम निरोधक प्रणाली के घटक जो इस मानक में शामिल हैं:

  • Bomb Disposal Suit (बम निरोधक सूट) — परीक्षण मानदंड
  • Remote-operated vehicle (ROV) — दूर से संचालित वाहन
  • X-ray imaging systems — बम की पहचान के लिए
  • Disruptors — बम को निष्क्रिय करने वाले उपकरण
  • Communication equipment — विभिन्न एजेंसियों के बीच

कठिनाई स्तर: कठिन (Hard)

कथन 3 में “रूस के सहयोग” वाला जाल सबसे खतरनाक है। अभ्यर्थी जो भारत-रूस रक्षा सहयोग के बारे में जानते हैं, वे इसे सही मान लेंगे। लेकिन यह पूर्णतः स्वदेशी विकास है।

यह प्रश्न क्यों पूछा गया: आंतरिक सुरक्षा तकनीक का मानकीकरण UPSC के लिए महत्वपूर्ण विषय है। जब भारत विदेशी मानकों से हटकर अपने राष्ट्रीय मानक बनाता है, तो यह आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ा कदम होता है। यह प्रश्न “Atmanirbhar Bharat in Defence” की थीम पर आधारित है।

परीक्षक की मंशा: परीक्षक ने जानबूझकर “रूस के सहयोग” का जाल बिछाया। भारत-रूस के बीच कई रक्षा सहयोग हैं (BrahMos, T-90 टैंक, Su-30 MKI) इसलिए अभ्यर्थी आसानी से भ्रमित होते हैं। परीक्षक यह देखना चाहता था कि अभ्यर्थी स्वदेशी DRDO परियोजनाओं की सटीक जानकारी रखता है या नहीं।

ट्रेंड विश्लेषण: UPSC में रक्षा तकनीक मानकीकरण से प्रश्न 2021 के बाद से बढ़े हैं। 2023 में BIS के खाद्य मानक, 2024 में साइबर सुरक्षा मानक से प्रश्न आए। 2026 में बम निरोधक मानक स्वाभाविक अगला चरण था।

आगे के लिए नोट्स:

  • BIS और उसके कार्य याद करें — यह केवल ISI मार्क तक सीमित नहीं है
  • DRDO की प्रयोगशालाओं की सूची बनाएं — कौन सी लैब किस क्षेत्र में काम करती है
  • TBRL चंडीगढ़ — विस्फोटक और बैलिस्टिक परीक्षण
  • भारत के रक्षा मानकीकरण का इतिहास पढ़ें
  • IED और काउंटर-IED तकनीक — नक्सल और आतंकवाद विरोध में महत्व

प्रश्न 49. भारत के स्वदेशी नवीन उच्च रिज़ोल्यूशन मौसम मॉडल ‘भारत पूर्वानुमान प्रणाली’ के संबंध में निम्नलिखित में से कौन-सा/कौन-से कथन सही है/हैं?

  1. इसका उद्देश्य पंचायत समूह के स्तर पर पूर्वानुमान सृजित करना है।
  2. इसे आईआईटी दिल्ली (IIT Delhi) द्वारा विकसित किया गया है।

विकल्प:

(a) केवल 1

(b) केवल 2

(c) 1 और 2 दोनों

(d) न तो 1, न ही 2

सही उत्तर: (c) 1 और 2 दोनों

व्याख्या:

कथन 1 — सही है। भारत पूर्वानुमान प्रणाली का उद्देश्य पंचायत स्तर तक अत्यंत स्थानीय मौसम पूर्वानुमान देना है — यानी गांव-स्तरीय किसान भी अपने खेत के लिए सटीक मौसम जानकारी पा सकें।

कथन 2 — सही है। इसे IIT दिल्ली ने विकसित किया है — पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय (MoES) के सहयोग से।

भारत पूर्वानुमान प्रणाली का पूरा संदर्भ:

  • विकासकर्ता: IIT दिल्ली + पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय
  • यह क्या करती है: पारंपरिक IMD मॉडल से 5-10 गुना अधिक रिज़ोल्यूशन पर मौसम पूर्वानुमान
  • रिज़ोल्यूशन: 6 किमी × 6 किमी ग्रिड (पहले 12-25 किमी था)
  • पूर्वानुमान क्षमता: 72 घंटे आगे तक, हर 3 घंटे पर अपडेट
  • पंचायत स्तर पर उपलब्धता: ग्रामीण किसान, मछुआरे, आपदा प्रबंधन के लिए
  • क्यों महत्वपूर्ण: भारत में 60% से अधिक खेती वर्षा पर निर्भर — सटीक पूर्वानुमान से फसल नुकसान कम होगा
  • तुलना: पहले IMD का NCUM (National Centre for Medium Range Weather Forecasting) मॉडल था — भारत पूर्वानुमान प्रणाली उससे बेहतर है
  • वैश्विक संदर्भ: यूरोप का ECMWF मॉडल विश्व में सर्वश्रेष्ठ माना जाता था — भारत अब अपना मॉडल बना रहा है

किसानों पर प्रभाव:

  • बुवाई और कटाई का सही समय तय करना
  • सिंचाई की योजना बनाना
  • ओले, आंधी, अतिवृष्टि की पहले चेतावनी
  • PM Fasal Bima Yojana के दावों को सत्यापित करने में सहायता

कठिनाई स्तर: मध्यम (Moderate)

दोनों कथन सही हैं — यह अपने आप में एक जाल है। अभ्यर्थी अक्सर सोचते हैं “दोनों सही नहीं हो सकते” और एक को गलत मान लेते हैं। IIT दिल्ली का नाम सुनकर कुछ को लगता है कि IMD या ISRO ने बनाया होगा।

यह प्रश्न क्यों पूछा गया: कृषि और मौसम विज्ञान का संगम UPSC के लिए आदर्श विषय है। “स्वदेशी तकनीक + ग्रामीण लाभ + पंचायत तक पहुंच” — यह तीनों थीम एक साथ इस प्रश्न में हैं। यह प्रश्न GS-3 (कृषि + विज्ञान-प्रौद्योगिकी) दोनों के लिए प्रासंगिक है।

परीक्षक की मंशा: परीक्षक ने IIT दिल्ली बनाम IMD का भ्रम उत्पन्न करने की कोशिश की। अधिकांश अभ्यर्थी मौसम पूर्वानुमान को स्वचालित रूप से IMD से जोड़ते हैं। जो अभ्यर्थी PIB और पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय की विज्ञप्तियां पढ़ते हैं, केवल वही जानते हैं कि यह IIT दिल्ली का प्रोजेक्ट है।

ट्रेंड विश्लेषण: मौसम विज्ञान और कृषि तकनीक से UPSC 2021 में Mission Mausam, 2023 में NOAA सहयोग, 2024 में चक्रवात पूर्वानुमान से प्रश्न आए। आगे भी हर वर्ष इस क्षेत्र से 1 प्रश्न अपेक्षित है।

आगे के लिए नोट्स:

  • IMD, NCMRF, IITM पुणे — तीनों की भूमिका अलग-अलग समझें
  • पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय की सभी प्रमुख परियोजनाएं: Deep Ocean Mission, O-SMART, Argo Float
  • PM Fasal Bima Yojana में तकनीक का उपयोग — मौसम डेटा कैसे काम करता है
  • राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन (NDMA) में मौसम पूर्वानुमान की भूमिका

प्रश्न 51. ब्लॉकचेन प्रौद्योगिकी (blockchain technology) की विशेषताओं के संबंध में निम्नलिखित में से कौन-से कथन सही हैं?

  1. डेटाबेस में भंडारित अभिलेख, परिवर्तन के जोखिम के बिना, संबंधित हितधारकों को दृश्यगोचर करवाए जा सकते हैं।
  2. संपूर्ण डेटाबेस की प्रतियों को बहुत सारे कंप्यूटरों के एक नेटवर्क पर भंडारित किया जाता है, जिनका तुल्यकालन (sync) सेकंडों के भीतर होता है।
  3. कंसोर्टियम ब्लॉकचेन (consortium blockchain) सार्वजनिक और निजी ब्लॉकचेनों का मिश्रण है, जो चयनित डेटा पहुंच की अनुमति देता है।
  4. गणितीय ऐल्गोरिथ्म एक बार अभिलिखित किए जा चुके किसी भी डेटा के परिवर्तन या विलोपन को असंभव बना देते हैं।

विकल्प:

(a) 1 और 3

(b) केवल 2 और 4

(c) 1, 2 और 4

(d) केवल 1 और 4

सही उत्तर: (c) 1, 2 और 4

व्याख्या:

कथन 1 — सही है। ब्लॉकचेन में डेटा सभी अधिकृत हितधारकों को दिखता है (transparency) लेकिन बदला नहीं जा सकता (immutability)। यह “trustless transparency” का आधार है।

कथन 2 — सही है। ब्लॉकचेन एक वितरित खाता (distributed ledger) है — एक ही डेटाबेस की हजारों प्रतियां हजारों कंप्यूटरों पर एक साथ होती हैं और सेकंडों में sync होती हैं। इसीलिए इसे हैक करना लगभग असंभव है।

कथन 3 — गलत है। Consortium Blockchain वह है जहां कुछ चुनी हुई संस्थाओं (जैसे बैंकों का समूह) का नियंत्रण होता है — यह पूरी तरह सार्वजनिक नहीं होती और न ही पूरी तरह निजी। यह कहना कि यह “सार्वजनिक और निजी का मिश्रण” है — तकनीकी रूप से अधूरा/गलत विवरण है। Consortium ब्लॉकचेन में प्रवेश के लिए अनुमति लेनी पड़ती है (permissioned) जो इसे public blockchain से अलग करती है।

कथन 4 — सही है। क्रिप्टोग्राफिक हैशिंग एल्गोरिदम (SHA-256 आदि) एक बार दर्ज डेटा को बदलना या मिटाना असंभव बना देते हैं — यही ब्लॉकचेन की “immutability” है।

ब्लॉकचेन का पूरा संदर्भ:

  • ब्लॉकचेन = विकेंद्रीकृत, वितरित, अपरिवर्तनीय डिजिटल खाता
  • प्रकार: Public (Bitcoin, Ethereum), Private (Hyperledger), Consortium (R3, Quorum)
  • भारत में उपयोग: DigiLocker (भूमि रिकॉर्ड), NITI Aayog का IndiaChain, SEBI का बॉन्ड सत्यापन, TradeLens (बंदरगाह), RBI CBDC (डिजिटल रुपया — ब्लॉकचेन-आधारित)
  • Web3: इंटरनेट का अगला संस्करण जहां ब्लॉकचेन केंद्रीय भूमिका निभाएगी
  • NFT (Non-Fungible Token): ब्लॉकचेन पर डिजिटल स्वामित्व
  • Smart Contract: ब्लॉकचेन पर स्वचालित अनुबंध — बिना मध्यस्थ के लेनदेन

कठिनाई स्तर: मध्यम (Moderate)

कथन 3 का “consortium” वाला जाल ज्यादातर अभ्यर्थियों को फंसाता है। जो लोग सतही रूप से ब्लॉकचेन जानते हैं वे सोचते हैं consortium = public + private मिश्रण = सही। लेकिन तकनीकी परिभाषा में consortium एक अलग श्रेणी है।

यह प्रश्न क्यों पूछा गया: RBI का डिजिटल रुपया (CBDC), ONDC, NFT, Web3 — 2023-2025 में ब्लॉकचेन आधारित नीतियां भारत में तेजी से आईं। UPSC इस तकनीकी आधार को समझना चाहता है जिस पर ये नीतियां टिकी हैं।

परीक्षक की मंशा: परीक्षक यह जांचना चाहता था कि अभ्यर्थी ब्लॉकचेन की तकनीकी विशेषताओं (immutability, distributed ledger, cryptographic algorithm) को सतही शब्दों से परे समझता है या नहीं। Consortium ब्लॉकचेन की गलत परिभाषा जानबूझकर डाली गई।

ट्रेंड विश्लेषण: 2022 में Cryptocurrency, 2023 में CBDC/डिजिटल रुपया, 2024 में NFT और Web3, 2026 में ब्लॉकचेन की तकनीकी विशेषताएं — यह क्रमिक गहराई दिखाता है। आगे Smart Contract और DeFi (Decentralised Finance) से प्रश्न आ सकते हैं।

आगे के लिए नोट्स:

  • तीनों प्रकार की ब्लॉकचेन (Public, Private, Consortium) की परिभाषा और उदाहरण याद करें
  • RBI का CBDC (डिजिटल रुपया) पायलट — खुदरा और थोक दोनों
  • NITI Aayog का IndiaChain कार्यक्रम
  • ब्लॉकचेन बनाम पारंपरिक डेटाबेस — मुख्य अंतर
  • SHA-256 हैशिंग क्या है — सरल भाषा में समझें

प्रश्न 66. आनुवंशिक चिकित्सा (जेनेटिक मेडिसिन) के संबंध में निम्नलिखित में से कौन-सा/कौन-से कथन सही है/हैं?

  1. आनुवंशिक चिकित्सा, रोग के लिए उत्तरदायी खराब जीन को सही करती है/की कमी को पूरा करती है।
  2. निर्मित विषाणुओं (engineered viruses) और लिपिड नैनोकणों का प्रयोग आनुवंशिक चिकित्सा के वाहक के रूप में किया जाता है।
  3. आनुवंशिक चिकित्सा संपूर्ण डीएनए (DNA) अनुक्रम को बदल देती है।

विकल्प:

(a) केवल 1

(b) केवल 2 और 3

(c) केवल 1 और 2

(d) 1, 2 और 3

सही उत्तर: (c) केवल 1 और 2

व्याख्या:

कथन 1 — सही है। जीन थेरेपी का मूल उद्देश्य किसी रोग के लिए जिम्मेदार दोषपूर्ण जीन को ठीक करना या उसकी कमी पूरी करना है। उदाहरण: सिकल सेल एनीमिया में HBB जीन को ठीक करना।

कथन 2 — सही है। जीन को कोशिका तक पहुंचाने के लिए “वेक्टर” (वाहक) की जरूरत होती है — इंजीनियर्ड वायरस (Adeno-associated virus, Lentivirus) और लिपिड नैनोपार्टिकल (जैसे COVID वैक्सीन में mRNA पहुंचाने के लिए उपयोग) दोनों प्रमुख वाहक हैं।

कथन 3 — गलत है। जीन थेरेपी पूरे DNA अनुक्रम को नहीं बदलती। यह केवल एक विशिष्ट दोषपूर्ण जीन को ठीक करती है या बदलती है — पूरे जीनोम को नहीं।

जेनेटिक मेडिसिन का पूरा संदर्भ:

  • जीन थेरेपी के प्रकार: Somatic Gene Therapy (शरीर की कोशिकाओं में — वंशजों में नहीं जाता), Germline Gene Therapy (प्रजनन कोशिकाओं में — वंशजों में भी जाता — नैतिक विवाद)
  • CRISPR-Cas9: क्रांतिकारी जीन संपादन तकनीक — “जेनेटिक कैंची” — 2020 में रसायन विज्ञान नोबेल पुरस्कार
  • भारत में जीन थेरेपी: ICMR की गाइडलाइन 2019, DBT की जैव प्रौद्योगिकी नियामक ढांचा
  • विश्व की पहली जीन थेरेपी: 1990 में ADA-SCID (इम्यूनोडेफिशिएंसी) के लिए
  • हाल की सफलताएं: सिकल सेल एनीमिया के लिए Casgevy (2023, FDA-अनुमोदित पहला CRISPR उपचार)
  • भारत में सिकल सेल: आदिवासी जनसंख्या में उच्च प्रसार — PM Modi ने राष्ट्रीय सिकल सेल अनीमिया उन्मूलन मिशन 2023 लॉन्च किया
  • लिपिड नैनोपार्टिकल: COVID-19 mRNA वैक्सीन (Pfizer, Moderna) ने इस तकनीक को विश्व-प्रसिद्ध किया

कठिनाई स्तर: मध्यम (Moderate)

कथन 3 का जाल “संपूर्ण DNA अनुक्रम” वाला है। जो लोग जीन थेरेपी और DNA रिप्रोग्रामिंग को एक मानते हैं, वे इसे सही समझ लेंगे। लेकिन जीन थेरेपी केवल लक्षित जीन तक सीमित है।

यह प्रश्न क्यों पूछा गया: 2023 में CRISPR का पहला नैदानिक उपयोग, 2024 में भारत का सिकल सेल मिशन, 2025 में जीन संपादन के नैतिक विवाद — ये सभी घटनाएं इस प्रश्न की पृष्ठभूमि हैं। UPSC GS-3 में “जैव प्रौद्योगिकी के लाभ और चिंताएं” एक स्थायी विषय है।

परीक्षक की मंशा: परीक्षक यह जांचना चाहता था कि अभ्यर्थी जीन थेरेपी और जीनोम एडिटिंग के बीच का अंतर जानता है। “पूरे DNA को बदलना” एक बड़ा भ्रम है जो प्रचलित समाचारों में अक्सर फैलाया जाता है। यह प्रश्न उसी भ्रम को परखता है।

ट्रेंड विश्लेषण: UPSC 2021 में CRISPR, 2022 में mRNA वैक्सीन, 2023 में GenomeIndia, 2024 में जीन थेरेपी नैतिकता — जैव प्रौद्योगिकी से प्रति वर्ष 1-2 प्रश्न आते हैं। 2027 तक Synthetic Biology और Designer Organisms से प्रश्न आ सकते हैं।

आगे के लिए नोट्स:

  • CRISPR-Cas9 कैसे काम करता है — सरल भाषा में समझें
  • Somatic बनाम Germline Gene Therapy का नैतिक अंतर
  • PM सिकल सेल अनीमिया उन्मूलन मिशन 2023 के लक्ष्य
  • ICMR और DBT की जैव प्रौद्योगिकी नीतियां
  • लिपिड नैनोपार्टिकल — COVID वैक्सीन से जीन थेरेपी तक का सफर

प्रश्न 67. यंत्र अधिगम (मशीन लर्निंग) में प्रयुक्त लार्ज लैंगवेज मॉडलों (LLMs) के संबंध में निम्नलिखित में से कौन-सा/कौन-से कथन सही है/हैं?

  1. LLMs निकटस्थ संभावित शब्दों के लिए प्रायिकताएं निर्दिष्ट करते हैं और तत्पश्चात सर्वोच्च प्रायिकता वाले शब्द को चुनते हैं।
  2. LLMs पूर्वानुमान संबंधी वृटियों को न्यूनतम करने के लिए गणितीय इष्टतमीकरण के माध्यम से डेटा का संसाधन (process) करते हैं।
  3. LLMs निष्पक्ष निर्गम (unbiased outputs) उत्पन्न करते हैं।

विकल्प:

(a) केवल 1

(b) केवल 1 और 2

(c) केवल 2 और 3

(d) 1, 2 और 3

सही उत्तर: (b) केवल 1 और 2

व्याख्या:

कथन 1 — सही है। LLMs मूलतः “अगले सबसे संभावित शब्द/टोकन” का अनुमान लगाने वाली प्रणाली हैं। वे प्रत्येक संभावित अगले शब्द को एक प्रायिकता (probability) देते हैं और सर्वोच्च वाले को चुनते हैं — यही Autoregressive Language Modeling है।

कथन 2 — सही है। LLMs का प्रशिक्षण Gradient Descent नामक गणितीय अनुकूलन विधि से होता है — जो पूर्वानुमान त्रुटियों को बार-बार घटाकर मॉडल को बेहतर बनाती है। इसीलिए GPT-4 को प्रशिक्षित करने में अरबों गणनाएं करनी पड़ती हैं।

कथन 3 — गलत है। LLMs पूर्णतः निष्पक्ष नहीं होते। वे उन्हीं पूर्वाग्रहों (biases) को विरासत में लेते हैं जो उनके प्रशिक्षण डेटा में थे। उदाहरण: यदि प्रशिक्षण डेटा में लैंगिक पूर्वाग्रह है तो LLM भी लैंगिक पूर्वाग्रह दिखाएगा। यह AI Ethics का सबसे बड़ा मुद्दा है।

LLMs का पूरा संदर्भ:

  • LLM के उदाहरण: GPT-4 (OpenAI), Gemini (Google), Claude (Anthropic), LLaMA (Meta), Ola Krutrim (भारतीय)
  • काम कैसे करते हैं: Transformer architecture → Attention mechanism → Next-token prediction → Autoregressive generation
  • प्रशिक्षण डेटा: इंटरनेट का विशाल भाग — Wikipedia, books, code, social media
  • Parameters: GPT-4 में अनुमानित 1.76 trillion parameters (भार/weight)
  • Hallucination: LLM द्वारा गलत लेकिन आत्मविश्वास से कही गई बात — बड़ी समस्या
  • Bias के प्रकार: Gender bias, racial bias, confirmation bias, recency bias
  • भारत में LLM: IITM का Sarvam AI (22 भारतीय भाषाएं), Ola Krutrim, BhasaVerse
  • AI Act (EU): 2024 में लागू — LLM उपयोग का पहला व्यापक कानून
  • भारत की AI नीति: IndiaAI Mission 2024 — 10,000 GPU compute infrastructure

कठिनाई स्तर: कठिन (Hard)

कथन 3 सबसे बड़ा जाल है। “AI निष्पक्ष और तटस्थ है” — यह एक प्रचलित गलत धारणा है। UPSC परीक्षक ने इसी धारणा को परखा। AI Ethics की गहरी समझ रखने वाले ही इसे तुरंत गलत पहचान पाएंगे।

यह प्रश्न क्यों पूछा गया: ChatGPT का उदय (2022), भारत सरकार की AI नीति (2024), AI का प्रशासन में उपयोग, AI के नैतिक खतरे — ये सभी UPSC के अनुसार “युग-परिवर्तनकारी तकनीक” के उदाहरण हैं। LLM की तकनीकी समझ परीक्षार्थी को इस युग को नीति स्तर पर समझने में मदद करती है।

परीक्षक की मंशा: परीक्षक यह देखना चाहता था कि अभ्यर्थी LLM को “जादुई बक्से” की तरह नहीं बल्कि गणितीय प्रक्रिया के रूप में समझता है। और यह भी कि वह AI के सीमाओं (bias, hallucination) के बारे में जागरूक है। यह नीति निर्माताओं के लिए आवश्यक ज्ञान है।

ट्रेंड विश्लेषण: UPSC 2022 में Machine Learning की परिभाषा, 2023 में Deep Learning, 2024 में Generative AI — अब 2026 में LLM की तकनीकी विशेषताएं। आगे Multimodal AI, AI Governance, Explainable AI (XAI) से प्रश्न आ सकते हैं।

आगे के लिए नोट्स:

  • Transformer architecture का मूल सिद्धांत — Attention is All You Need (2017 paper)
  • Gradient Descent क्या है — सरल भाषा में
  • AI Bias के प्रकार और उदाहरण याद करें
  • IndiaAI Mission 2024 के 7 स्तंभ
  • EU AI Act की मुख्य श्रेणियां (High Risk, Limited Risk, Minimal Risk)
  • Hallucination समस्या और RAG (Retrieval Augmented Generation) समाधान

प्रश्न 68. स्टेल्थ (stealth) प्रौद्योगिकी के संबंध में निम्नलिखित में से कौन-सा/कौन-से कथन सही है/हैं?

  1. स्टेल्थ वस्तुओं (objects) में अति-लघु रेडार अनुप्रस्थ-परिच्छेद (क्रॉस-सेक्शन) होता है और उन्हें रेडार अवशोषक पदार्थ से विलेपित किया जाता है।
  2. विशिष्ट आवृत्तियों का प्रयोग करके स्टेल्थ वस्तुओं (objects) का पता लगाया जा सकता है।
  3. स्टेल्थ वस्तुओं (objects) को मेटा-पदार्थों (metamaterials) से विलेपित किया जाता है ताकि विद्युत्-चुम्बकीय विकिरण के प्रकीर्णन में वृद्धि की जा सके।

विकल्प:

(a) केवल 1

(b) केवल 2 और 3

(c) केवल 1 और 2

(d) 1, 2 और 3

सही उत्तर: (c) केवल 1 और 2

व्याख्या:

कथन 1 — सही है। स्टेल्थ तकनीक का मूल सिद्धांत है — रेडार क्रॉस-सेक्शन (RCS) को न्यूनतम करना। यह दो तरीकों से होता है: (a) विमान का आकार ऐसा बनाना जो रेडार तरंगों को वापस न भेजे, (b) RAM (Radar Absorbing Material) कोटिंग लगाना जो रेडार तरंगों को सोख ले।

कथन 2 — सही है। पूर्ण स्टेल्थ असंभव है। विशिष्ट निम्न-आवृत्ति रेडार (VHF/UHF बैंड) स्टेल्थ विमानों को पकड़ सकते हैं। रूस का Nebo-M और चीन का JY-26 रेडार इसी सिद्धांत पर काम करते हैं।

कथन 3 — गलत है। मेटामटेरियल का उपयोग विद्युत-चुंबकीय विकिरण के प्रकीर्णन को बढ़ाने के लिए नहीं, बल्कि उसे मोड़ने (bend/redirect) के लिए होता है — ताकि रेडार तरंगें विमान के चारों ओर से निकल जाएं। “प्रकीर्णन बढ़ाना” स्टेल्थ का उद्देश्य नहीं — यह तो रेडार पर और ज्यादा दिखाएगा।

स्टेल्थ तकनीक का पूरा संदर्भ:

  • RCS (Radar Cross Section): एक काल्पनिक क्षेत्रफल जो बताता है कि कोई वस्तु रेडार को कितना संकेत वापस भेजती है — जितना कम उतना बेहतर
  • स्टेल्थ तकनीक के आयाम: आकार (Geometry), कोटिंग (RAM), इंजन डिजाइन (नोजल आकार), कॉकपिट कैनोपी (रेडार-अवशोषक)
  • प्रसिद्ध स्टेल्थ विमान: F-22 Raptor, F-35 Lightning II (USA), B-2 Spirit Bomber (USA), J-20 (चीन), Su-57 (रूस)
  • भारतीय संदर्भ: AMCA (Advanced Medium Combat Aircraft) — भारत का स्टेल्थ लड़ाकू विमान विकास — 5th Gen
  • मेटामटेरियल: प्रकृति में न पाए जाने वाले इंजीनियर्ड पदार्थ — नकारात्मक अपवर्तनांक — “अदृश्यता लबादा” (invisibility cloak) का वैज्ञानिक आधार
  • Low Observable (LO) technology: स्टेल्थ का आधिकारिक नाम

कठिनाई स्तर: मध्यम (Moderate)

कथन 3 का “प्रकीर्णन बढ़ाना” वाला जाल तकनीकी जानकारी के बिना पकड़ना मुश्किल है। मेटामटेरियल का नाम सुनकर अधिकांश इसे सही मान लेंगे।

यह प्रश्न क्यों पूछा गया: AMCA, F-35 की भारत को बिक्री की चर्चा, रूस-यूक्रेना युद्ध में स्टेल्थ ड्रोन का उपयोग — ये सभी 2024-25 की घटनाएं इस प्रश्न की पृष्ठभूमि हैं। रक्षा तकनीक में “क्या है और कैसे काम करता है” समझना UPSC के लिए जरूरी है।

परीक्षक की मंशा: परीक्षक ने मेटामटेरियल का गलत उपयोग दिखाकर जांचा कि अभ्यर्थी “buzzword” से परे तकनीकी सिद्धांत समझता है या नहीं। स्टेल्थ तकनीक में RCS कम करना लक्ष्य है — बढ़ाना नहीं।

ट्रेंड विश्लेषण: 2022 में हाइपरसोनिक मिसाइल, 2023 में ड्रोन तकनीक, 2024 में साइबर युद्ध, 2026 में स्टेल्थ तकनीक। आगे Directed Energy Weapons (लेजर हथियार), Electromagnetic Pulse (EMP), Quantum Radar से प्रश्न आ सकते हैं।

आगे के लिए नोट्स:

  • AMCA परियोजना — ADA (Aeronautical Development Agency) द्वारा
  • RAM (Radar Absorbing Material) के प्रकार
  • मेटामटेरियल की परिभाषा और उपयोग के क्षेत्र
  • भारत के 5th Gen विमान कार्यक्रम की स्थिति
  • रक्षा तकनीक में भारत की आत्मनिर्भरता — iDEX पहल

प्रश्न 69. आधुनिक विमानों में प्रयुक्त होने वाले ब्लैक बॉक्सों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन-सा/कौन-से कथन सही है/हैं?

  1. उनमें लाल प्रकाश स्पंद उत्सर्जित करने वाला एक बीकन होता है ताकि उनकी अंतर्जलीय खोज को सुकर बनाया जा सके।
  2. वे कॉकपिट वॉइस और फ्लाइट डेटा, दोनों को रिकॉर्ड करते हैं।
  3. उनके मेमोरी यूनिटों के निर्माण में या तो जंगरोधी इस्पात (स्टेनलेस स्टील) या टाइटेनियम का उपयोग किया जाता है।

विकल्प:

(a) केवल 1

(b) केवल 2 और 3

(c) केवल 1 और 2

(d) 1, 2 और 3

सही उत्तर: (b) केवल 2 और 3

व्याख्या:

कथन 1 — गलत है। ब्लैक बॉक्स का Underwater Locator Beacon (ULB) लाल प्रकाश नहीं बल्कि ध्वनि पिंग (acoustic ping) उत्सर्जित करता है — 37.5 kHz की अल्ट्रासोनिक आवृत्ति पर। यह ध्वनि पानी के अंदर कई किलोमीटर तक सुनी जा सकती है। लाल प्रकाश पानी में प्रभावी नहीं होता।

कथन 2 — सही है। आधुनिक विमानों में दो अलग रिकॉर्डर होते हैं — CVR (Cockpit Voice Recorder) और FDR (Flight Data Recorder)। व्यावहारिक रूप से दोनों एक ही इकाई में “ब्लैक बॉक्स” के नाम से जाने जाते हैं।

कथन 3 — सही है। ब्लैक बॉक्स की मेमोरी यूनिट स्टेनलेस स्टील या टाइटेनियम की कठोर सुरक्षात्मक आवरण में होती है — 1100°C तापमान, 3400G का आघात, 6000 मीटर गहरे पानी का दबाव सहन करने में सक्षम।

ब्लैक बॉक्स का पूरा संदर्भ:

  • ब्लैक बॉक्स वास्तव में नारंगी रंग का होता है — आसानी से दिखे इसलिए
  • CVR: पिछले 2 घंटे की कॉकपिट की आवाजें रिकॉर्ड करता है
  • FDR: पिछले 25 घंटे का उड़ान डेटा — ऊंचाई, गति, दिशा, इंजन पैरामीटर
  • ULB: पानी में गिरने पर 37.5 kHz पिंग, 30 दिनों तक, 6000 मीटर गहराई तक काम करता है
  • आविष्कार: 1950s में David Warren (ऑस्ट्रेलिया) ने किया
  • ICAO अनिवार्यता: सभी वाणिज्यिक विमानों में FDR और CVR अनिवार्य — ICAO Annex 6
  • MH370 हादसे के बाद: 37.5 kHz को 8.8 kHz से बदलने पर विचार — अधिक गहराई तक पहुंच के लिए
  • भारत में: AAIB (Aircraft Accident Investigation Bureau) ब्लैक बॉक्स विश्लेषण करता है

कठिनाई स्तर: सरल (Easy)

कथन 1 का “लाल प्रकाश बनाम ध्वनि पिंग” भेद सरल है लेकिन जो सतही जानकारी रखते हैं वे “बीकन = प्रकाश” मान लेंगे। बाकी दोनों कथन सुपरिचित हैं।

यह प्रश्न क्यों पूछा गया: UPSC में विमानन सुरक्षा और दुर्घटना जांच प्रक्रिया से समय-समय पर प्रश्न आते हैं। 2024 में कई विमान दुर्घटनाएं (यमन, जापान, नेपाल) और MH370 की 10वीं वर्षगांठ ने ब्लैक बॉक्स चर्चा में रहे।

परीक्षक की मंशा: “बीकन = प्रकाश” वाली सामान्य धारणा को तोड़ना। ब्लैक बॉक्स पानी में ध्वनि से खोजा जाता है, प्रकाश से नहीं — यह तकनीकी सटीकता परीक्षार्थी को जांचती है।

ट्रेंड विश्लेषण: विमानन सुरक्षा से UPSC में छिटपुट प्रश्न आते हैं — 2019 में DGCA सुधार, 2022 में विमानन विधेयक, 2025 में ब्लैक बॉक्स। आगे UAS Traffic Management (ड्रोन ट्रैफिक), Urban Air Mobility से प्रश्न संभव।

आगे के लिए नोट्स:

  • CVR और FDR का अंतर स्पष्ट करें
  • ICAO Annex 6 — विमान रिकॉर्डिंग आवश्यकताएं
  • AAIB भारत — विमान दुर्घटना जांच प्रक्रिया
  • MH370 — विश्व की सबसे बड़ी विमान रहस्य और ब्लैक बॉक्स की सीमाएं
  • ELT (Emergency Locator Transmitter) — ब्लैक बॉक्स से अलग, दुर्घटना में GPS संकेत

प्रश्न 70. हरित (ग्रीन) हाइड्रोजन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन-सा/कौन-से कथन सही है/हैं?

  1. यह विकार्बनीकृत (decarbonized) हाइड्रोजन है जो प्राकृतिक गैस के पुनरुत्पादन द्वारा प्राप्त होती है जिसमें कार्बन अभिग्रहण और संचयन (CCS) भी सम्मिलित है।
  2. नवीकरणीय ऊर्जा से जनित विद्युत का उपयोग करके जल के विद्युत-अपघटन द्वारा इसका उत्पादन किया जाता है।
  3. भारत के राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन का लक्ष्य, वर्ष 2030 तक वार्षिक ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में लगभग 50 MMT की कमी लाना है।

विकल्प:

(a) केवल 1

(b) केवल 2 और 3

(c) केवल 2

(d) 1, 2 और 3

सही उत्तर: (b) केवल 2 और 3

व्याख्या:

कथन 1 — गलत है। कथन 1 में वर्णित प्रक्रिया “ब्लू हाइड्रोजन” है, हरित नहीं। ब्लू हाइड्रोजन प्राकृतिक गैस के Steam Methane Reforming (SMR) से बनती है जिसमें निकलने वाले CO₂ को CCS से पकड़ा जाता है। हरित हाइड्रोजन पूरी तरह अलग प्रक्रिया से बनती है।

कथन 2 — सही है। हरित हाइड्रोजन = नवीकरणीय ऊर्जा (सौर/पवन) से बिजली बनाओ → उस बिजली से इलेक्ट्रोलाइजर चलाओ → पानी (H₂O) को हाइड्रोजन (H₂) और ऑक्सीजन (O₂) में तोड़ो → शुद्ध हरित हाइड्रोजन मिलती है। पूरी प्रक्रिया में कोई कार्बन उत्सर्जन नहीं।

कथन 3 — सही है। राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन का 2030 तक लक्ष्य: 5 MMT वार्षिक हरित हाइड्रोजन उत्पादन क्षमता और लगभग 50 MMT वार्षिक GHG उत्सर्जन में कमी।

हाइड्रोजन रंग कोड — पूरी सूची:

  • हरित हाइड्रोजन: नवीकरणीय ऊर्जा + इलेक्ट्रोलिसिस — शून्य कार्बन
  • नीला हाइड्रोजन: प्राकृतिक गैस + SMR + CCS — कम कार्बन
  • ग्रे हाइड्रोजन: प्राकृतिक गैस + SMR — CCS नहीं — उच्च कार्बन (सबसे सस्ता, सबसे प्रचलित)
  • काला/भूरा हाइड्रोजन: कोयले से — सबसे अधिक कार्बन
  • गुलाबी हाइड्रोजन: परमाणु ऊर्जा + इलेक्ट्रोलिसिस
  • फ़िरोज़ा हाइड्रोजन: मीथेन पाइरोलिसिस — ठोस कार्बन उप-उत्पाद

भारत का राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन:

  • घोषणा: जनवरी 2023, MoNRE के अंतर्गत
  • लक्ष्य 2030: 5 MMT/वर्ष उत्पादन, 50 MMT CO₂ कमी, ₹8 लाख करोड़ निवेश, 6 लाख रोजगार
  • SIGHT (Strategic Interventions for Green Hydrogen Transition): इलेक्ट्रोलाइजर निर्माण और हरित हाइड्रोजन उत्पादन को प्रोत्साहन
  • उपयोग क्षेत्र: उर्वरक उद्योग (अमोनिया), इस्पात उद्योग, परिवहन (ईंधन सेल वाहन), ऊर्जा भंडारण
  • चुनौती: हरित हाइड्रोजन की लागत अभी ग्रे से 4-5 गुना अधिक

कठिनाई स्तर: मध्यम (Moderate)

कथन 1 में “ब्लू बनाम ग्रीन हाइड्रोजन” का भेद सबसे बड़ा जाल है। CCS का जिक्र सुनते ही कुछ अभ्यर्थी “हां, यह तो स्वच्छ है” मान लेंगे। लेकिन Green = Renewable electricity + Electrolysis — यह परिभाषा पक्की होनी चाहिए।

यह प्रश्न क्यों पूछा गया: राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन 2023 में लॉन्च हुआ — UPSC के लिए इसकी तकनीकी और नीतिगत दोनों परतें महत्वपूर्ण हैं। भारत का 2070 Net Zero लक्ष्य और हरित हाइड्रोजन की केंद्रीय भूमिका UPSC की दीर्घकालिक थीम है।

परीक्षक की मंशा: हाइड्रोजन के रंग कोड की सटीक जानकारी परखना। “CCS = स्वच्छ = हरित” — यह गलत धारणा बहुत प्रचलित है। परीक्षक ने इसी को जाल बनाया। हरित और नीले हाइड्रोजन का अंतर न जानने वाले अभ्यर्थी फंसेंगे।

ट्रेंड विश्लेषण: 2021 में Hydrogen Economy, 2022 में National Hydrogen Mission, 2023 में SIGHT, 2024 में Green Hydrogen हब — यह विषय प्रति वर्ष UPSC में आता है। आगे Hydrogen Fuel Cell Vehicle (FCEV), Green Ammonia, Power-to-X तकनीक से प्रश्न संभव।

आगे के लिए नोट्स:

  • हाइड्रोजन के सभी रंग कोड — परिभाषा और उदाहरण
  • National Green Hydrogen Mission 2023 — सभी लक्ष्य याद करें
  • SIGHT कार्यक्रम के घटक
  • इलेक्ट्रोलाइजर के प्रकार: Alkaline, PEM, Solid Oxide
  • Green Ammonia — उर्वरक उद्योग में उपयोग और भारत की रणनीति

प्रश्न 71. भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम में निजी संस्थाओं की भागीदारी के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. भारतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष संवर्धन एवं प्राधिकरण केंद्र (IN-SPACe) एक स्वायत्त अभिकरण है जिसकी स्थापना निजी संस्थाओं की भागीदारी को सुकर बनाने के लिए की गई है।
  2. अग्निकुल कॉसमॉस ने विश्व में पहली बार 3D-प्रिंटेड रॉकेट इंजन का उपयोग करके उड़ान (फ्लाइट) का प्रक्षेपण किया।
  3. स्काईरूट एयरोस्पेस ने GSLV के लिए तरल ईंधन (Liquid fuel) विकसित किया।

विकल्प:

  • (a) केवल 1
  • (b) केवल 2 और 3
  • (c) केवल 1 और 2
  • (d) 1, 2 और 3

सही उत्तर: (c) केवल 1 और 2

व्याख्या:

कथन 1 — सही है। IN-SPACe (Indian National Space Promotion and Authorisation Centre) की स्थापना 2020 में DOS (Department of Space) के अंतर्गत की गई। यह निजी क्षेत्र को अंतरिक्ष गतिविधियों में भाग लेने की अनुमति देने, नियमन करने और बढ़ावा देने का कार्य करती है।

कथन 2 — सही है। अग्निकुल कॉसमॉस (IIT मद्रास इनक्यूबेटेड स्टार्टअप) ने मई 2024 में Agnibaan SOrTeD का सफल प्रक्षेपण किया — यह विश्व का पहला रॉकेट था जिसमें पूरी तरह 3D-प्रिंटेड सेमी-क्रायोजेनिक इंजन (Agnilet) था।

कथन 3 — गलत है। स्काईरूट एयरोस्पेस ने GSLV के लिए नहीं, बल्कि अपने खुद के रॉकेट “Vikram-S” (नवंबर 2022 में पहला उप-कक्षीय प्रक्षेपण) और “Vikram-1” के लिए तरल ईंधन इंजन (Kalam series) विकसित किया। GSLV ISRO का रॉकेट है जिसका इंजन ISRO ही बनाता है।

भारतीय अंतरिक्ष में निजी क्षेत्र — पूरा संदर्भ:

  • IN-SPACe: “Single Window” नियामक — अंतरिक्ष विभाग और निजी उद्योग के बीच
  • अग्निकुल कॉसमॉस: पहला 3D-प्रिंटेड रॉकेट इंजन (Agnilet) — अनुकूलन योग्य प्रक्षेपण वाहन
  • स्काईरूट एयरोस्पेस: Vikram श्रृंखला — भारत की पहली निजी रॉकेट कंपनी ने प्रक्षेपण किया
  • Pixxel: भारत का पहला निजी पृथ्वी निगरानी उपग्रह
  • Dhruva Space: निजी उपग्रह और प्रक्षेपण सेवाएं
  • GalaxEye: मल्टी-सेंसर इर्थ ऑब्जर्वेशन
  • India Space Policy 2023: निजी क्षेत्र को उपग्रह निर्माण, प्रक्षेपण, ग्राउंड स्टेशन — सब में अनुमति
  • iDEX (Innovations for Defence Excellence): रक्षा-अंतरिक्ष स्टार्टअप को फंडिंग

कठिनाई स्तर: मध्यम (Moderate)

कथन 3 का जाल — “स्काईरूट ने GSLV के लिए ईंधन बनाया” — GSLV एक प्रसिद्ध नाम है इसलिए अभ्यर्थी इसे सही मान सकते हैं। लेकिन स्काईरूट का अपना रॉकेट (Vikram) है, GSLV से इसका कोई संबंध नहीं।

यह प्रश्न क्यों पूछा गया: भारत की अंतरिक्ष नीति 2023 और IN-SPACe की स्थापना — ये दोनों मिलकर भारतीय अंतरिक्ष क्षेत्र का निजीकरण करने की दिशा में ऐतिहासिक कदम हैं। 2024 में अग्निकुल की 3D-प्रिंटेड रॉकेट उड़ान वैश्विक समाचार बनी थी।

परीक्षक की मंशा: अभ्यर्थी को पता होना चाहिए कि कौन सी निजी कंपनी किस काम के लिए जानी जाती है। “स्काईरूट = GSLV का ईंधन” जैसे गलत जोड़ बनाने वाले अभ्यर्थी यहां फंसेंगे।

ट्रेंड विश्लेषण: 2022 में ISRO की उपलब्धियां, 2023 में Chandrayaan-3, 2024 में Aditya L1 और निजी अंतरिक्ष, 2026 में IN-SPACe और 3D-प्रिंटेड रॉकेट। आगे Gaganyaan (2026 लक्ष्य), NISAR (NASA-ISRO SAR), SpaceDex से प्रश्न संभव।

आगे के लिए नोट्स:

  • IN-SPACe, NSIL, DOS — तीनों की भूमिका अलग-अलग समझें
  • भारत की प्रमुख अंतरिक्ष निजी कंपनियां और उनकी विशेषता
  • India Space Policy 2023 के मुख्य प्रावधान
  • Vikram-S और Agnibaan की उड़ानों की जानकारी
  • Gaganyaan मिशन — astronaut training status

प्रश्न 72. ड्रोन झुंडों (स्वार्म्स) के संबंध में निम्नलिखित में से कौन-सा/कौन-से कथन सही है/हैं?

  1. वे कमांड केंद्र के साथ संचार के लिए टेराहर्ट्ज़ बैंड आवृत्ति का प्रयोग करते हैं।
  2. झुंड (स्वार्म) में सम्मिलित कोई ड्रोन, झुंड के अन्य ड्रोनों के साथ संचार कर सकता है।
  3. ड्रोन झुंड के हमले को रोकने के लिए जीपीएस स्पूफिंग (GPS Spoofing) सामान्यतः प्रयोग में लाई जाने वाली तकनीक है।

विकल्प:

(a) केवल 1

(b) केवल 2 और 3

(c) केवल 1 और 2

(d) 1, 2 और 3

सही उत्तर: (b) केवल 2 और 3

व्याख्या:

कथन 1 — गलत है। ड्रोन झुंड कमांड सेंटर से संचार के लिए टेराहर्ट्ज़ (THz) बैंड का नहीं, बल्कि सामान्यतः 2.4 GHz/5.8 GHz रेडियो फ्रीक्वेंसी या माइक्रोवेव बैंड का उपयोग करते हैं। THz तरंगें अभी प्रयोगशाला स्तर पर हैं और बहुत कम दूरी पर काम करती हैं।

कथन 2 — सही है। ड्रोन झुंड की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता है — Mesh Communication Network। झुंड का हर ड्रोन बाकी ड्रोनों से सीधे संवाद कर सकता है — बिना केंद्रीय नियंत्रण के। एक ड्रोन नष्ट हो जाए तो बाकी काम जारी रखते हैं।

कथन 3 — सही है। GPS Spoofing — नकली GPS संकेत भेजकर ड्रोन को गलत स्थान का भान कराना — ड्रोन झुंड को भटकाने की सबसे प्रचलित तकनीक है। रूस-यूक्रेना युद्ध में इसका व्यापक उपयोग हुआ।

ड्रोन स्वार्म का पूरा संदर्भ:

  • स्वार्म ड्रोन = सैकड़ों-हजारों छोटे ड्रोनों का समन्वित दल जो मिलकर एक बड़े लक्ष्य पर हमला करते हैं
  • Mesh Network: कोई एकल कमांड नहीं — distributed intelligence — जैसे मधुमक्खियों का झुंड
  • AI की भूमिका: स्वार्म ड्रोन AI से चलते हैं — real-time target recognition और coordination
  • काउंटर-ड्रोन तकनीक: GPS Spoofing, RF Jamming, Directed Energy (Laser), Net guns, Trained eagles
  • भारतीय रक्षा: iDEX के अंतर्गत स्वार्म ड्रोन विकास, DRDO का स्वार्म ड्रोन प्रदर्शन 2021
  • वैश्विक उदाहरण: USA का LOCUST programme, चीन का 3,000 ड्रोन प्रदर्शन, यूक्रेना में Shahed ड्रोन झुंड
  • Starlink जैसे उपग्रह से नियंत्रण: भविष्य का ड्रोन नेटवर्क
  • Anti-Drone Policy भारत: 2022 में UAS Rules और Anti-Drone guidelines जारी

कठिनाई स्तर: मध्यम (Moderate)

कथन 1 में “टेराहर्ट्ज़” — यह एक आधुनिक तकनीकी शब्द है जो अभ्यर्थियों को प्रभावशाली लगता है और वे इसे सही मान लेते हैं। लेकिन THz तकनीक अभी व्यावहारिक ड्रोन संचार में उपयोग नहीं होती।

यह प्रश्न क्यों पूछा गया: रूस-यूक्रेना युद्ध में ड्रोन झुंड का विनाशकारी उपयोग, भारत पर ड्रोन हमले (पंजाब 2021, जम्मू 2021 एयरबेस), इजराइल-हमास संघर्ष में ड्रोन — 2024-25 की सैन्य तकनीक में ड्रोन सबसे चर्चित विषय रहा।

परीक्षक की मंशा: “टेराहर्ट्ज़” जैसे प्रभावशाली तकनीकी शब्द को जानबूझकर गलत संदर्भ में डाला गया। परीक्षक यह देखना चाहता था कि अभ्यर्थी buzzword को परे रखकर तकनीकी सत्यता जांच सकता है।

ट्रेंड विश्लेषण: 2022 में ड्रोन नीति, 2023 में सैन्य ड्रोन, 2024 में Counter-Drone तकनीक, 2026 में स्वार्म ड्रोन। आगे Hypersonic Drone, Underwater Drone (UUV), AI-controlled Autonomous Weapons से प्रश्न संभव।

आगे के लिए नोट्स:

  • भारत की UAS Policy 2021 और संशोधन
  • iDEX ड्रोन परियोजनाएं — Airspace, Ducted Fan, स्वार्म ड्रोन
  • Counter-Drone System: DRDO का Smash 2000, Rafael (इजराइल) Drone Dome
  • GPS Spoofing बनाम GPS Jamming — तकनीकी अंतर
  • Starlink और ड्रोन युद्ध में इसकी भूमिका (यूक्रेना का उदाहरण)

प्रश्न 73. जीनोमइंडिया परियोजना के संबंध में निम्नलिखित में से कौन-सा/कौन-से कथन सही है/हैं?

  1. यह मानव जीनोम परियोजना का एक भाग है।
  2. यह परियोजना भारत सरकार के जैव प्रौद्योगिकी विभाग (DBT) के द्वारा वित्तपोषित है।
  3. इसका मुख्य लक्ष्य भारतीय जनसंख्या की आनुवंशिक विविधता की सूची तैयार करना है।

विकल्प:

(a) केवल 1

(b) केवल 2 और 3

(c) केवल 1 और 2

(d) 1, 2 और 3

सही उत्तर: (b) केवल 2 और 3

व्याख्या:

कथन 1 — गलत है। GenomeIndia मानव जीनोम परियोजना (Human Genome Project, 1990-2003) का हिस्सा नहीं है। HGP एक अंतर्राष्ट्रीय परियोजना थी जो पहले ही पूरी हो चुकी है। GenomeIndia पूरी तरह एक स्वतंत्र भारतीय परियोजना है।

कथन 2 — सही है। GenomeIndia परियोजना DBT (Department of Biotechnology), भारत सरकार द्वारा वित्तपोषित है। इसका नेतृत्व IISc बंगलुरु कर रहा है।

कथन 3 — सही है। परियोजना का मुख्य उद्देश्य भारत की 1.4 अरब जनसंख्या की आनुवंशिक विविधता को समझना है — विभिन्न जातीय समूहों, जनजातियों और क्षेत्रों के जीनोम का अध्ययन।

GenomeIndia का पूरा संदर्भ:

  • शुरुआत: 2020, 20 संस्थाओं की भागीदारी — IISc, IITs, CSIR, AIIMS आदि
  • लक्ष्य: 10,000 भारतीय व्यक्तियों का whole genome sequencing
  • क्यों महत्वपूर्ण: भारत की जनसंख्या आनुवंशिक रूप से अत्यंत विविध — 5000+ जातियां, 700+ जनजातियां, हजारों अंतर्विवाह समूह
  • फायदे: भारतीयों के लिए विशिष्ट दवाइयां बनाना (Pharmacogenomics), रोगों की आनुवंशिक प्रवृत्ति समझना, Precision Medicine
  • Precision Medicine: हर व्यक्ति के जीनोम के अनुसार व्यक्तिगत उपचार
  • Rakhigarhi DNA study: 2019 में हड़प्पा कंकालों का DNA विश्लेषण — आर्यन आक्रमण सिद्धांत को चुनौती
  • Human Genome Project (HGP): 1990-2003, USA-UK-France-Germany-Japan-China, पहला मानव जीनोम अनुक्रम

कठिनाई स्तर: मध्यम (Moderate)

कथन 1 में HGP से जोड़ना सबसे बड़ा जाल है। “GenomeIndia = Human Genome Project का हिस्सा” — यह स्वाभाविक लगता है लेकिन गलत है।

यह प्रश्न क्यों पूछा गया: Precision Medicine, Pharmacogenomics और भारत की आनुवंशिक विविधता 2023-25 में चर्चा में रहे। DBT की बड़ी परियोजना का UPSC में आना स्वाभाविक था।

परीक्षक की मंशा: “GenomeIndia = HGP का हिस्सा” — यह भ्रम जानबूझकर पैदा किया। परीक्षक जांचना चाहता था कि अभ्यर्थी स्वतंत्र भारतीय वैज्ञानिक परियोजनाओं को वैश्विक परियोजनाओं से अलग पहचान सकता है।

ट्रेंड विश्लेषण: 2021 में Human Genome Project, 2022 में CRISPR, 2023 में Pharmacogenomics, 2026 में GenomeIndia। आगे Synthetic Biology, Microbiome India Initiative से प्रश्न संभव।

आगे के लिए नोट्स:

  • HGP (1990-2003) बनाम GenomeIndia (2020-) का अंतर
  • DBT की प्रमुख परियोजनाएं — BioE3 Policy, BIRAC
  • Precision Medicine और Pharmacogenomics क्या है
  • IISc की भूमिका — GenomeIndia leadership
  • Rakhigarhi और Harappan DNA — आर्यन प्रश्न पर नया प्रकाश

प्रश्न 74. राष्ट्रीय क्वांटम मिशन (NQM) के संबंध में निम्नलिखित में से कौन-सा/कौन-से कथन सही है/हैं?

  1. इसका उद्देश्य 50–1000 भौतिक क्यूबिट की क्षमता वाले मध्यवर्ती-स्तर के क्वांटम कंप्यूटर विकसित करना है।
  2. इसके कार्यान्वयन के अंतर्गत संपूर्ण भारत के शैक्षणिक और राष्ट्रीय अनुसंधान एवं विकास संस्थानों (R&D institutes) में चार विषयगत (थीमेटिक) केंद्रों (T-Hubs) की स्थापना करना सम्मिलित है।

विकल्प:

(a) केवल 1

(b) केवल 2

(c) 1 और 2 दोनों

(d) न तो 1, न ही 2

सही उत्तर: (c) 1 और 2 दोनों

व्याख्या:

कथन 1 — सही है। NQM का लक्ष्य 2031 तक 50-1000 physical qubits की क्षमता वाले intermediate-scale quantum computers विकसित करना है। यह NISQ (Noisy Intermediate-Scale Quantum) कंप्यूटिंग के स्तर पर है।

कथन 2 — सही है। NQM के अंतर्गत 4 थीमेटिक हब (T-Hubs) स्थापित किए जाएंगे — देश भर के प्रमुख शैक्षणिक और R&D संस्थानों में। ये चार T-Hubs क्वांटम के चार मुख्य क्षेत्रों पर केंद्रित होंगे।

NQM का पूरा संदर्भ:

  • स्वीकृति: अप्रैल 2023, कैबिनेट ने ₹6003 करोड़ की मंजूरी दी
  • मंत्रालय: विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MoST) / DST
  • अवधि: 2023-2031 (8 वर्ष)
  • 4 T-Hubs के विषय: (1) क्वांटम कंप्यूटिंग, (2) क्वांटम संचार, (3) क्वांटम सेंसिंग और मेट्रोलॉजी, (4) क्वांटम सामग्री और उपकरण
  • क्वांटम कंप्यूटिंग क्या है: साधारण कंप्यूटर Bits (0 या 1) उपयोग करता है; क्वांटम कंप्यूटर Qubits उपयोग करता है जो एक साथ 0 और 1 दोनों हो सकता है (Superposition)
  • Quantum Advantage: कुछ समस्याओं (क्रिप्टोग्राफी तोड़ना, ड्रग डिस्कवरी, फाइनेंशियल मॉडलिंग) में classical computers से लाखों गुना तेज
  • वैश्विक प्रतिस्पर्धा: USA (IBM 1000+ qubit), China, EU — सभी क्वांटम दौड़ में
  • Quantum Supremacy: Google ने 2019 में 200 सेकंड में वह काम किया जो classical computer को 10,000 साल लगते
  • भारत का स्तर: अभी शुरुआती चरण — NQM से 2031 तक meaningful quantum capability का लक्ष्य
  • Quantum Communication: Quantum Key Distribution (QKD) — अटूट सुरक्षित संचार — भारत-चीन LAC पर रणनीतिक महत्व

कठिनाई स्तर: मध्यम (Moderate)

दोनों कथन सही हैं — यह अपने आप में जाल है। “50-1000 qubit” की विशिष्ट संख्या और “4 T-Hubs” — दोनों सटीक जानकारी मांगते हैं।

यह प्रश्न क्यों पूछा गया: NQM 2023 में कैबिनेट से ₹6003 करोड़ के साथ पास हुई — यह भारत की सबसे बड़ी वैज्ञानिक निवेश परियोजनाओं में से एक है। Quantum Computing राष्ट्रीय सुरक्षा (encryption), आर्थिक प्रतिस्पर्धा और वैज्ञानिक क्षमता — तीनों के लिए महत्वपूर्ण है।

परीक्षक की मंशा: NQM के विशिष्ट आंकड़े (50-1000 qubit, 4 T-Hubs) याद हों या नहीं — यह परखना। जो अभ्यर्थी केवल “भारत ने क्वांटम मिशन लॉन्च किया” जानता है, वह दोनों कथनों की सत्यता नहीं जांच पाएगा।

ट्रेंड विश्लेषण: 2022 में Quantum Entanglement (Nobel Prize), 2023 में NQM लॉन्च, 2024 में Quantum Communication, 2026 में NQM के विशिष्ट लक्ष्य। आगे Quantum Internet, Post-Quantum Cryptography से प्रश्न संभव।

आगे के लिए नोट्स:

  • Qubit, Superposition, Entanglement — तीनों अवधारणाएं सरल भाषा में समझें
  • NQM के 4 T-Hubs के विषय और संस्थान
  • Quantum vs Classical Computing — कौन सी समस्याएं quantum के लिए उपयुक्त
  • Post-Quantum Cryptography — जब quantum computers RSA encryption तोड़ दें तब क्या
  • IBM, Google, China की quantum प्रगति — वैश्विक स्थिति

प्रश्न 75. भारत के डीप ओशन मिशन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन-सा/कौन-से कथन सही है/हैं?

  1. इसे भारत सरकार के पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय द्वारा आरंभ किया गया था।
  2. गहरे समुद्री खोज हेतु 3 लोगों को ले जाने के लिए मत्स्य-6000 को डिज़ाइन किया गया है।
  3. इस मिशन के अंतर्गत समुद्रयान एक परियोजना है।

विकल्प:

(a) केवल 1

(b) केवल 2 और 3

(c) केवल 1 और 2

(d) 1, 2 और 3

सही उत्तर: (b) केवल 2 और 3

व्याख्या:

कथन 1 — गलत है। डीप ओशन मिशन पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय (Ministry of Earth Sciences, MoES) के अंतर्गत है — न कि पत्तन/पोत परिवहन मंत्रालय के। यह एक बहुत प्रचलित भ्रम है।

कथन 2 — सही है। मत्स्य-6000 एक मानवयुक्त पनडुब्बी (submersible) है जो 3 व्यक्तियों को 6000 मीटर गहराई तक ले जाने में सक्षम है। इसे NIOT (National Institute of Ocean Technology), चेन्नई द्वारा विकसित किया जा रहा है।

कथन 3 — सही है। समुद्रयान, डीप ओशन मिशन के अंतर्गत एक उप-परियोजना है जिसमें मत्स्य-6000 का उपयोग करके गहरे समुद्री संसाधनों की खोज की जाएगी।

डीप ओशन मिशन का पूरा संदर्भ:

  • स्वीकृति: जून 2021, ₹4077 करोड़, 5 वर्ष
  • मंत्रालय: MoES (Ministry of Earth Sciences) — यह ISRO नहीं, Shipping नहीं
  • 6 प्रमुख घटक: (1) Deep Sea Mining + manned submersible, (2) Ocean Climate Change Advisory Services, (3) Technological Innovation for Deep-sea, (4) Deep Ocean Survey and Exploration, (5) Energy and freshwater from ocean, (6) Ocean Biology and Marine Biodiversity
  • मत्स्य-6000: 2.1 मीटर व्यास का titanium sphere, 12 घंटे की क्षमता, 96 घंटे आपातकालीन ऑक्सीजन
  • लक्ष्य: Polymetallic nodules खनन (कोबाल्ट, मैंगनीज, निकेल, तांबा) — समुद्र तल पर मिलते हैं
  • India’s Exclusive Economic Zone (EEZ): 2.37 million km² — इसमें विशाल समुद्री संसाधन
  • वैश्विक संदर्भ: China का Jiaolong, USA का Alvin, Japan का Shinkai 6500 — अब भारत का मत्स्य-6000
  • समुद्र में खनिज: भारत को ISA (International Seabed Authority) से अंटार्कटिका और हिंद महासागर में खनन अन्वेषण का लाइसेंस मिला है

कठिनाई स्तर: मध्यम (Moderate)

कथन 1 में मंत्रालय का भ्रम सबसे बड़ा जाल है। “समुद्र = नौवहन मंत्रालय” — यह स्वाभाविक लगता है लेकिन गलत है। MoES वैज्ञानिक अन्वेषण के लिए है।

यह प्रश्न क्यों पूछा गया: Deep Ocean Mission 2021 में लॉन्च हुआ और 2024-25 में मत्स्य-6000 के परीक्षण की खबरें आईं। Blue Economy, समुद्री खनिज, और भारत का 2 मिलियन km² EEZ — ये UPSC के लिए महत्वपूर्ण नीतिगत विषय हैं।

परीक्षक की मंशा: “समुद्री मिशन = नौवहन मंत्रालय” — यह स्वाभाविक गलती है। परीक्षक ने MoES बनाम Shipping Ministry का भेद जानबूझकर जांचा। साथ ही “3 व्यक्ति” की विशिष्ट जानकारी भी परखी।

ट्रेंड विश्लेषण: 2021 में Blue Economy नीति, 2022 में ISA खनन लाइसेंस, 2023 में Deep Ocean Mission घटक, 2026 में मत्स्य-6000 विशेषताएं। आगे Ocean Thermal Energy Conversion (OTEC), Desalination से प्रश्न संभव।

आगे के लिए नोट्स:

  • MoES की सभी प्रमुख परियोजनाएं: Deep Ocean Mission, O-SMART, TROPICS, Argo Floats, INCOIS
  • मत्स्य-6000 की तकनीकी विशेषताएं
  • Polymetallic nodules क्या हैं — किन खनिजों से मिलते हैं
  • ISA (International Seabed Authority) — UNCLOS के अंतर्गत
  • India’s EEZ 2.37 million km² — भारत का समुद्री दावा क्षेत्र
  • Blue Economy का अर्थ और भारत की नीति

समग्र निष्कर्ष — विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी खंड

इस पेपर की मुख्य थीम्स:

  1. आत्मनिर्भर तकनीक (Q44, Q45, Q71, Q74, Q75): DHRUV64, BIS मानक, अग्निकुल, NQM, डीप ओशन — सभी भारत की “Make in India” और “Atmanirbhar Bharat” नीति से जुड़े प्रश्न हैं।
  2. AI और डिजिटल तकनीक (Q51, Q67): ब्लॉकचेन और LLM — दोनों 2022-25 की सबसे चर्चित तकनीकें। AI की सीमाएं (bias, hallucination) समझना जरूरी है।
  3. रक्षा और अंतरिक्ष तकनीक (Q68, Q72): स्टेल्थ और ड्रोन झुंड — दोनों रूस-यूक्रेना युद्ध और भारत की रक्षा जरूरतों के संदर्भ में।
  4. जैव प्रौद्योगिकी (Q66, Q73): जीन थेरेपी और GenomeIndia — Precision Medicine की ओर भारत का कदम।
  5. पर्यावरण-ऊर्जा (Q70): हरित हाइड्रोजन — Net Zero 2070 की रीढ़।
  6. मौसम-कृषि तकनीक (Q49): भारत पूर्वानुमान प्रणाली — ग्रामीण भारत के लिए तकनीक।

आगे की तैयारी के लिए सबसे महत्वपूर्ण स्रोत:

  • PIB (pib.gov.in) — रोज़ाना विज्ञान-प्रौद्योगिकी विज्ञप्तियां पढ़ें
  • Yojana पत्रिका — तकनीक विशेषांक
  • विज्ञान प्रगति और Science Reporter
  • MoES, MeitY, DBT, DST, ISRO की वार्षिक रिपोर्टें
  • Economic Survey का Technology अध्याय
  • NITI Aayog की रिपोर्टें — AI, Blockchain, Quantum