UPSC Prelims का झुकाव — Polity vs Public Administration
Click Here for complete UPSC Prelims GS Paper
क्या UPSC अब Polity से ज्यादा “Public Administration + Ethics” पूछ रहा है?
UPSC Prelims 2026 के Indian Polity सेक्शन ने इस बार एक बहुत बड़ा संकेत दिया है — अब परीक्षा केवल संविधान के अनुच्छेद याद करने तक सीमित नहीं रही। इस बार UPSC ने Polity के साथ-साथ Governance, Ethics और Public Administration की समझ को भी परखने की कोशिश की है।
कई अभ्यर्थियों को लगा कि पेपर “अजीब” या “अलग” था, लेकिन वास्तव में यह UPSC के बदलते पैटर्न का हिस्सा है।
UPSC Prelims का नया ट्रेंड: Polity vs Public Administration
इस बार के पेपर को तीन भागों में समझा जा सकता है:
| प्रश्न संख्या | विषय | श्रेणी |
| 76 | उत्तरदायित्व (Accountability) | Public Administration / Ethics |
| 77 | संघर्ष प्रबंधन, बहु-हितधारक | Ethics + Governance |
| 78 | सिविल सेवक की नैतिक दुविधा | Ethics |
| 79 | अनुच्छेद 13 — विधि का अर्थ | Core Polity |
| 80 | संविधान के अनुच्छेद | Core Polity |
| 81 | दिव्यांगजन अधिनियम | Polity + Social Justice |
| 82 | SC/ST संवैधानिक प्रावधान | Core Polity |
| 83 | संसदीय प्रश्न प्रकार | Core Polity |
| 84 | संसदीय समिति | Core Polity |
| 85 | मिशन सुदर्शन चक्र | Current Affairs + Defence |
| 87 | Zero FIR — BNSS 2023 | Polity + Current Affairs |
1. Core Polity Questions — UPSC का पारंपरिक क्षेत्र
प्रश्न 79, 80, 82, 83 और 84 पूरी तरह संविधान, संसद और संस्थागत प्रक्रियाओं पर आधारित थे।
इन प्रश्नों में मुख्य रूप से पूछा गया:
- अनुच्छेदों की समझ
- संसद की कार्यप्रणाली
- संसदीय समितियाँ
- संवैधानिक प्रावधान
- SC/ST से जुड़े अधिकार
यह वही क्षेत्र है जो वर्षों से UPSC Prelims का आधार रहा है।
सबसे महत्वपूर्ण बात:
अब केवल अनुच्छेद नंबर याद करना पर्याप्त नहीं है। UPSC concept-based interpretation पूछ रहा है।
उदाहरण:
Article 13 → Laws inconsistent with Fundamental Rights are void
UPSC अब यह देखना चाहता है कि अभ्यर्थी संविधान की “spirit” समझता है या नहीं।
2. Ethics + Governance Questions — सबसे बड़ा बदलाव
प्रश्न 76, 77 और 78 इस पेपर का सबसे बड़ा surprise थे।
ये प्रश्न सीधे-सीधे GS Paper-4 (Ethics) की शैली के थे।
इनमें पूछा गया:
- Accountability
- Conflict Management
- Multi-stakeholder governance
- Ethical dilemma
- Administrative decision making
पहले ऐसे प्रश्न केवल UPSC Mains में आते थे, लेकिन अब इन्हें Prelims में भी शामिल किया जा रहा है।
UPSC ऐसा क्यों कर रहा है?
UPSC अब सिर्फ “जानकारी” नहीं बल्कि “निर्णय क्षमता” को जांचना चाहता है।
आज का IAS/IPS अधिकारी:
- Crisis handle करता है
- Ethical decisions लेता है
- Public interest और law के बीच balance बनाता है
- Governance को practical level पर लागू करता है
इसीलिए UPSC अब rote learning से आगे बढ़ चुका है।
3. Current Affairs + Polity Questions
प्रश्न 81, 85 और 87 ने यह दिखाया कि अब Polity पूरी तरह static subject नहीं रहा।
इनमें शामिल थे:
- दिव्यांगजन अधिनियम
- Mission Sudarshan Chakra
- BNSS 2023 में Zero FIR
यह स्पष्ट संकेत है कि अब newspaper + law updates + governance reforms बेहद महत्वपूर्ण हो चुके हैं।
पुराना ट्रेंड vs नया ट्रेंड
| पुराना UPSC Pattern | नया UPSC Pattern |
| अनुच्छेद याद करो | Concept समझो |
| Static Polity | Dynamic Governance |
| Direct factual questions | Case-based analytical questions |
| संसद/संविधान केंद्रित | Ethics + Administration केंद्रित |
| रट्टा आधारित तैयारी | Decision-making आधारित तैयारी |
प्रश्न 76. श्री X, एक वरिष्ठ अधिकारी हैं, जो किसी विश्वमारी के दौरान एक निर्णायक टीकाकरण कार्यक्रम का निरीक्षण कर रहे थे। उन्होंने पाया कि टीके के वितरण के लिए उत्तरदायी एक निजी सेवा प्रदाता, लाभ अर्जित करने के लिए गुणवत्ता से समझौता कर रहा है। निहित स्वार्थों के कारण, इस मामले को निपटाने हेतु अत्यधिक दबाव होने के बावजूद, अपने जीविका (कैरिअर) के विविध प्रशिक्षण कार्यक्रमों में भागीदारी के दौरान सीखे गए लोक प्रशासन के सिद्धांतों के आधार पर उन्होंने अपनी आवाज़ उठाई। उन्होंने इस मामले को समुचित सतर्कता प्राधिकारी को प्रतिवेदित किया और नागरिकों के कल्याण को सुनिश्चित करने के लिए उस संविदा को रोक दिया।
श्री X की कार्रवाई से लोक प्रशासन के निम्नलिखित सिद्धांतों में से कौन-सा सर्वाधिक प्रभावी रूप से प्रदर्शित होता है ?
(a) दल भावना (Esprit de corps)
(b) समता
(c) उत्तरदायित्व
(d) प्रत्यायोजन
प्रश्न 76 — उत्तर: (c) उत्तरदायित्व
व्याख्या: श्री X ने निजी दबाव और कैरियर के जोखिम के बावजूद सार्वजनिक हित में गलत काम को उजागर किया और संविदा रोकी। यह उत्तरदायित्व (Accountability) का सर्वश्रेष्ठ उदाहरण है।
- दल भावना — टीम के प्रति वफादारी, यहाँ लागू नहीं
- समता — सबके साथ समान व्यवहार, यहाँ मुख्य बिंदु नहीं
- प्रत्यायोजन — अधिकार सौंपना, यहाँ लागू नहीं
- उत्तरदायित्व — एक लोक सेवक का जनता के प्रति जवाबदेह होना ✓
प्रश्न 77. एक बहुजातीय जिले में, जहाँ आर्थिक प्रतिस्पर्धा और ऐतिहासिक शिकायतों के परिणामस्वरूप प्रायः सामुदायिक तनाव उत्पन्न होते हैं, वहाँ एक जनजातीय उपग्राम के निकट एक अपशिष्ट प्रबंधन सुविधा-केंद्र के लिए भूमि आबंटित करने संबंधी एक सरकारी निर्णय से एक चिंगारी निकली और जनजातीय समुदाय का विरोध भड़क उठा, जिसमें दावा किया गया है कि यह भूमि उनकी सांस्कृतिक पहचान के लिए पवित्र और महत्वपूर्ण है। उसी समय, शहरी निवासी और स्थानीय उद्योग समूह एक उपयुक्त निपटान स्थल के न होने के कारण उत्पन्न ठोस अपशिष्ट की गंभीर चुनौतियों और स्वास्थ्य चिंताओं का हवाला देते हुए इस परियोजना का समर्थन करते हैं। यह संघर्ष सड़क अवरोध, सोशल मीडिया अभियानों, और पुलिस के अतिरेक के आरोपों के चलते तीव्र हो गया। एक जिम्मेदार सरकारी अधिकारी के रूप में, आपको मध्यस्थता के माध्यम से इस स्थिति का समाधान करने एवं पर्यावरणीय आवश्यकताओं, जनजाति अधिकारों, और शहरी जन-स्वास्थ्य के बीच संतुलन बनाते हुए एक संधारणीय परिणाम सुनिश्चित करने का कार्य सौंपा गया है।
उपर्युक्त के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए :
- तकनीकी विकल्पों पर चर्चा करने से पहले, विरोध करने वाले जनजाति समुदाय की सांस्कृतिक चिंताओं को स्वीकार करने के साथ ही, एक सफल संघर्ष समाधान प्रक्रिया अवश्य आरंभ की जानी चाहिए।
- शहरी स्वास्थ्य चिंताओं के समाधान के लिए, सरकार को अविलंब परियोजना को आगे बढ़ाना चाहिए, जो कि किसी लघु वर्ग की भावनाओं से कहीं अधिक महत्वपूर्ण है।
- पारस्परिक समझ विकसित करने और तनावों को कम करने में सहायता के लिए जनजाति नेताओं, पर्यावरण विशेषज्ञों, और नगर पालिका के प्रतिनिधियों को सम्मिलित करते हुए एक बहु-हितधारक संवाद मंच का गठन करना।
- साक्ष्य-आधारित निर्णयन को सुकर बनाने के लिए एक स्वतंत्र पर्यावरणीय और सामाजिक प्रभाव मूल्यांकन (ESIA) को संचालित करना और प्राप्त निष्कर्षों को दोनों पक्षों के साथ पारदर्शी रूप से साझा करना।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से, इस समाधान प्रक्रिया में योगदान देंगे ?
(a) केवल 1, 3 और 4
(b) केवल 2, 3 और 4
(c) केवल 1 और 2
(d) 1, 2, 3 और 4
प्रश्न 77 — उत्तर: (a) केवल 1, 3 और 4
व्याख्या:
कथन 1 — सही ✓ जनजातीय समुदाय की सांस्कृतिक चिंताओं को पहले स्वीकार करना संघर्ष समाधान की पहली शर्त है। बिना इसके कोई भी समाधान टिकाऊ नहीं होगा।
कथन 2 — गलत ✗ यह कथन एकतरफा है। किसी लघु वर्ग (जनजाति) की भावनाओं और अधिकारों को नजरअंदाज करना लोकतांत्रिक और संवैधानिक मूल्यों के विरुद्ध है। एक जिम्मेदार अधिकारी सभी पक्षों का संतुलन करता है।
कथन 3 — सही ✓ बहु-हितधारक संवाद मंच (Multi-stakeholder dialogue) सबसे प्रभावी तरीका है जिसमें सभी पक्ष — जनजाति नेता, पर्यावरण विशेषज्ञ, नगर पालिका — शामिल हों।
कथन 4 — सही ✓ स्वतंत्र ESIA (Environmental and Social Impact Assessment) साक्ष्य आधारित निर्णय के लिए आवश्यक है और इसे पारदर्शी रूप से साझा करना जनता के विश्वास के लिए जरूरी है।
प्रश्न 78. सुश्री X, एक मध्यम-स्तरीय सिविल सेवा अधिकारी हैं, जो एक प्रमुख नगर के शहरी विकास विभाग में कार्यरत हैं। हाल ही में, वे एक सार्वजनिक अवसंरचना परियोजना — नए सामुदायिक उद्यान हेतु संविदा की अनुमोदन प्रक्रिया में सम्मिलित थीं। अनुमोदन प्रक्रिया के दौरान, उन्हें एक गोपनीय सूचना प्राप्त होती है, जिसमें इसका उल्लेख है कि चयनित सूची में सम्मिलित एक संविदाकार के अन्य नगरों में घटिया कार्य-शैली और भ्रष्टाचार के आरोपों का पूर्ववृत्त रहा है, यद्यपि विधि द्वारा कुछ भी प्रमाणित नहीं हुआ है। विभागाध्यक्ष श्री Y, उन्हें इस सूचना को परियोजना समिति अथवा जनता के समक्ष प्रकट न करने की सलाह देते हैं, क्योंकि इससे परियोजना में विलंब हो सकता है और नगर की प्रतिष्ठा को हानि हो सकती है। हालाँकि, सुश्री X का मानना है कि ऐसी सूचना को रोकना, पारदर्शिता और जनता के विश्वास से समझौता करना होगा।
अब, सुश्री X को निम्नलिखित में से क्या करना चाहिए ?
- परियोजना समिति और जनता के समक्ष तत्काल सूचना को प्रकट करना चाहिए
- परियोजना की संपूर्णता (integrity) के संरक्षण के लिए चयनित सूची से संविदाकार को हटाने की अनुशंसा करनी चाहिए
- कुछ समय के लिए जनता से इस सूचना को गोपनीय रखते हुए, किसी निरीक्षण समिति को एक ‘सीमित प्रकटीकरण’ प्रस्तावित करना चाहिए
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर उत्तर चुनिए :
(a) केवल 1 और 2
(b) केवल 3
(c) केवल 2 और 3
(d) 1, 2 और 3
प्रश्न 78 — उत्तर: (a) केवल 1 और 2
व्याख्या:
विकल्प 1 — सही ✓ पारदर्शिता और जनहित के सिद्धांत के अनुसार सुश्री X को परियोजना समिति के समक्ष सूचना प्रकट करनी चाहिए। जनता का विश्वास सर्वोपरि है।
विकल्प 2 — सही ✓ यदि संविदाकार के विरुद्ध भ्रष्टाचार का पूर्ववृत्त है तो उसे चयनित सूची से हटाने की अनुशंसा करना परियोजना की integrity की रक्षा करना है।
विकल्प 3 — गलत ✗ सूचना को जनता से छुपाना पारदर्शिता के सिद्धांत का उल्लंघन है। ‘सीमित प्रकटीकरण’ भी एक प्रकार की जानकारी दबाने की कोशिश है जो सुशासन के विरुद्ध है।
प्रश्न 79. ‘X’, भारत के संविधान के भाग III के अनुच्छेद 13 में यथा उपबंधित, ‘विधि’ शब्द के अर्थ पर एक संगोष्ठी को संबोधित कर रहा था। ‘X’ ने स्पष्ट किया कि भारत के संविधान में ‘विधि’ शब्द का अर्थ अत्यधिक व्यापक है। इसमें अध्यादेश, आदेश तथा नियम और विनियम भी सम्मिलित हैं। ‘Y’ ने ध्यान दिलाया कि अनुच्छेद 13 में ‘विधि’ शब्द के अंतर्गत भारत के राज्यक्षेत्र में विधि का बल रखने वाली रूढ़ि या प्रथा भी सम्मिलित है, जिससे ‘X’ सहमत नहीं था।
उपर्युक्त के आधार पर, नीचे दिए गए विकल्पों में से सही निष्कर्ष को चुनिए :
(a) विधि की व्याख्या में, ‘X’ सही है, जिसमें रूढ़ि को सम्मिलित न किए जाने के बारे में उसके विचार भी सम्मिलित हैं।
(b) ‘Y’ का यह विचार कि ‘विधि’ में रूढ़ि सम्मिलित है, सही नहीं है।
(c) ‘X’ और ‘Y’ दोनों के विचार सही हैं।
(d) केवल ‘Y’ का विचार सही है।
प्रश्न 79 — उत्तर: (c) X और Y दोनों के विचार सही हैं
व्याख्या: अनुच्छेद 13(3)(a) के अनुसार “विधि” में सम्मिलित हैं:
- भारत के राज्यक्षेत्र में विधि का बल रखने वाले अध्यादेश, आदेश, उपविधि, नियम, विनियम, अधिसूचनाएँ, रूढ़ि या प्रथा ✓
इसलिए:
- X सही है — अध्यादेश, आदेश, नियम, विनियम सम्मिलित हैं ✓
- Y भी सही है — रूढ़ि और प्रथा भी अनुच्छेद 13(3)(a) के अंतर्गत विधि में सम्मिलित हैं ✓
X का यह कहना कि रूढ़ि सम्मिलित नहीं है — गलत था, इसलिए विकल्प (a) सही नहीं है।
प्रश्न 80. भारत के संविधान के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए :
- भारत के संविधान में ऐसा कोई भी अनुच्छेद नहीं है, जो यह विनिर्दिष्ट करता हो कि भारत के संविधान को आधिकारिक रूप से ‘भारत का संविधान’ कहा जाएगा।
- भारत के संविधान में ऐसा कोई भी अनुच्छेद नहीं है, जो यह विनिर्दिष्ट करता हो कि भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम, 1947 (इंडियन इंडिपेंडेन्स एक्ट, 1947) और भारत सरकार अधिनियम, 1935, (गवर्नमेंट ऑफ़ इंडिया एक्ट, 1935) को निरसित किया गया।
- भारत के संविधान में ऐसा कोई भी अनुच्छेद नहीं है, जिसमें भारत के संविधान के प्रारंभ होने की तारीख के रूप में 26 जनवरी, 1950 का उल्लेख है।
उपर्युक्त कथनों पर आधारित निम्नलिखित में से कौन-सा निष्कर्ष सही है ?
(a) सभी तीन कथन सही हैं।
(b) कोई भी कथन सही नहीं है।
(c) दो कथन सही हैं, जिनमें कथन 3 सम्मिलित है।
(d) केवल एक कथन सही है।
प्रश्न 80 — उत्तर: (a) सभी तीन कथन सही हैं
व्याख्या:
कथन 1 — सही ✓ भारत के संविधान में कोई ऐसा अनुच्छेद नहीं है जो कहे कि इसे आधिकारिक रूप से “भारत का संविधान” कहा जाएगा। संविधान की प्रस्तावना में “संविधान” शब्द है लेकिन कोई विशेष अनुच्छेद इसका नामकरण नहीं करता।
कथन 2 — सही ✓ संविधान में ऐसा कोई अनुच्छेद नहीं है जो स्पष्ट रूप से कहे कि Government of India Act 1935 और Indian Independence Act 1947 को निरसित किया गया। यह निरसन अनुसूची के माध्यम से हुआ, किसी विशेष अनुच्छेद द्वारा नहीं।
कथन 3 — सही ✓ संविधान में कोई ऐसा अनुच्छेद नहीं है जो 26 जनवरी 1950 को संविधान के प्रारंभ की तिथि के रूप में उल्लेखित करे। अनुच्छेद 394 केवल यह बताता है कि कौन से अनुच्छेद तुरंत लागू होंगे, लेकिन 26 जनवरी की तारीख का स्पष्ट उल्लेख नहीं है।
प्रश्न 81. भारत में दिव्यांगजनों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन-सा/कौन-से कथन सही है/हैं ?
- भारत की संसद द्वारा वर्ष 2018 में पारित दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, शिक्षा और नियोजन में आरक्षण अनिवार्य करता है, पहुँच और विभेद न करने को सुनिश्चित करने के सरकारों के विधिक कर्तव्य को स्थापित करता है।
- सुगम्य भारत अभियान तीन प्रमुख क्षेत्रों यथा, निर्मित बुनियादी ढाँचा, परिवहन प्रणाली और सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी में दिव्यांगजनों की सार्वभौमिक पहुँच प्राप्त करने पर केंद्रित है।
- राष्ट्रीय दिव्यांगजन वित्त और विकास निगम (NDFDC) कारपोरेट कार्य मंत्रालय द्वारा स्थापित एक सार्वजनिक क्षेत्र संगठन है, जो दिव्यांगजनों (PwDs) में उद्यमिता के संवर्धन के लिए एक अलाभकारी कंपनी है।
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर उत्तर चुनिए :
(a) 1 और 2
(b) केवल 2
(c) 1 और 3
(d) केवल 1
श्न 81 — उत्तर: (a) 1 और 2
व्याख्या:
कथन 1 — सही ✓ दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम 2016 में संसद द्वारा पारित हुआ (2016, न कि 2018 जैसा प्रश्न में लिखा है — यह प्रश्न में त्रुटि हो सकती है)। यह अधिनियम शिक्षा और नियोजन में आरक्षण, पहुँच और विभेद न करने के सरकारी कर्तव्य को स्थापित करता है। ✓
कथन 2 — सही ✓ सुगम्य भारत अभियान (Accessible India Campaign) के तीन स्तंभ हैं:
- निर्मित पर्यावरण (Built Environment)
- परिवहन प्रणाली
- सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (ICT) ✓
कथन 3 — गलत ✗ NDFDC (National Differently Abled Finance & Development Corporation) सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय के अंतर्गत आती है, न कि कारपोरेट कार्य मंत्रालय के। इसलिए यह कथन गलत है।
प्रश्न 82. भारत में अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों से संबंधित उपबंधों के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए :
- भारत के संविधान की पाँचवीं अनुसूची में असम, मेघालय, त्रिपुरा और मिजोरम राज्यों में जनजाति क्षेत्रों के प्रशासन के संबंध में उपबंध हैं।
- भारत की कुछ जनजातियाँ कतिपय आय पर आयकर के भुगतान से छूट का दावा करने की हकदार हैं।
- भारत के संविधान में अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों की स्त्रियों के लिए पंचायतों में स्थानों (सीटों) के आरक्षण का उपबंध है।
उपर्युक्त कथनों पर आधारित निम्नलिखित निष्कर्षों में से कौन-सा सही है ?
(a) दो कथन सही हैं, जिनमें कथन 2 सम्मिलित है।
(b) दो कथन सही हैं, जो कि कथन 1 और कथन 3 हैं।
(c) केवल एक कथन सही है।
(d) सभी तीन कथन सही हैं।
प्रश्न 82 — उत्तर: (a) दो कथन सही हैं, जिनमें कथन 2 सम्मिलित है
व्याख्या:
कथन 1 — गलत ✗ असम, मेघालय, त्रिपुरा और मिजोरम छठी अनुसूची (Sixth Schedule) के अंतर्गत आते हैं, पाँचवीं अनुसूची में नहीं। पाँचवीं अनुसूची अन्य राज्यों के जनजाति क्षेत्रों पर लागू होती है।
कथन 2 — सही ✓ कुछ अधिसूचित जनजातियाँ आयकर अधिनियम की धारा 10(26) के तहत कतिपय आय पर आयकर छूट की हकदार हैं।
कथन 3 — सही ✓ 73वें संविधान संशोधन के अंतर्गत अनुच्छेद 243D में SC/ST महिलाओं के लिए पंचायतों में सीटों के आरक्षण का प्रावधान है। ✓
इसलिए कथन 2 और 3 सही हैं।
प्रश्न 83. भारत की संसद में सदस्यों द्वारा पूछे जाने वाले प्रश्नों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए :
- अतारांकित प्रश्न ऐसे प्रश्न हैं, जिन पर कोई सदस्य सदन में मौखिक उत्तर चाहता है।
- तारांकित प्रश्न ऐसे प्रश्न हैं, जिन पर कोई सदस्य लिखित उत्तर चाहता है।
- किसी अतारांकित प्रश्न पर कोई अनुपूरक प्रश्न नहीं पूछा जा सकता है।
उपर्युक्त कथनों पर आधारित निम्नलिखित निष्कर्षों में से कौन-सा सही है ?
(a) सभी तीन कथन सही हैं।
(b) दो कथन सही हैं, जिनमें कथन 2 सम्मिलित है।
(c) केवल एक कथन सही है।
(d) कोई भी कथन सही नहीं है।
प्रश्न 83 — उत्तर: (c) केवल एक कथन सही है
व्याख्या:
कथन 1 — गलत ✗ अतारांकित प्रश्न (Unstarred Question) वह है जिस पर सदस्य लिखित उत्तर चाहता है, मौखिक नहीं।
कथन 2 — गलत ✗ तारांकित प्रश्न (Starred Question) वह है जिस पर सदस्य मौखिक उत्तर चाहता है, लिखित नहीं।
कथन 3 — सही ✓ अतारांकित प्रश्न पर चूँकि उत्तर लिखित होता है, इसलिए उस पर कोई अनुपूरक प्रश्न नहीं पूछा जा सकता। अनुपूरक प्रश्न केवल तारांकित प्रश्नों पर ही पूछे जाते हैं। ✓
प्रश्न 84. भारत की संसद की अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के कल्याण संबंधी समिति के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए :
- यद्यपि इस समिति के सदस्यों को संसद के दोनों सदनों से निर्वाचित किया जाता है, तथापि राज्य सभा के सभापति द्वारा इस समिति के अध्यक्ष की नियुक्ति की जाती है।
- राज्य सभा द्वारा बीस सदस्यों और लोक सभा द्वारा दस सदस्यों को निर्वाचित किया जाता है।
- केंद्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्री के अतिरिक्त, कोई अन्य मंत्री इस समिति का सदस्य होने का पात्र नहीं है।
- सदस्यों को उनके पद ग्रहण करने की तारीख से 2 वर्ष की नियत पदावधि के लिए निर्वाचित किया जाता है।
उपर्युक्त कथनों पर आधारित निम्नलिखित निष्कर्षों में से कौन-सा सही है ?
(a) चारों कथन सही हैं।
(b) केवल एक कथन सही है, जो कि कथन 2 है।
(c) दो कथन सही हैं, जिनमें कथन 1 सम्मिलित है।
(d) कोई भी कथन सही नहीं है।
प्रश्न 84 — उत्तर: (d) कोई भी कथन सही नहीं है
व्याख्या:
कथन 1 — गलत ✗ इस समिति के अध्यक्ष की नियुक्ति लोकसभा अध्यक्ष (Speaker) द्वारा की जाती है, राज्यसभा सभापति द्वारा नहीं।
कथन 2 — गलत ✗ वास्तव में लोकसभा से 20 सदस्य और राज्यसभा से 10 सदस्य निर्वाचित होते हैं, प्रश्न में यह उल्टा बताया गया है।
कथन 3 — गलत ✗ कोई भी मंत्री इस समिति का सदस्य नहीं हो सकता, केवल सामाजिक न्याय मंत्री ही नहीं — बल्कि कोई भी मंत्री नहीं।
कथन 4 — गलत ✗ सदस्यों की पदावधि 1 वर्ष होती है, न कि 2 वर्ष।
प्रश्न 85. भारत के मिशन सुदर्शन चक्र के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए :
- इसका उद्देश्य भारत की वायु रक्षा, बैलिस्टिक मिसाइल सुरक्षा और हवाई आक्रमण क्षमताओं में वृद्धि करना है।
- इस मिशन को त्वरित, सटीक, और शक्तिशाली रक्षा (defence) प्रतिक्रिया में वृद्धि करने के लिए डिज़ाइन किया जा रहा है, जो भारत की रणनीतिक स्वायत्तता को सशक्त बनाएगी।
- इस मिशन के उद्देश्यों में से एक है – वर्ष 2035 तक, भारत के सभी सार्वजनिक स्थानों को एक विस्तारित राष्ट्रव्यापी सुरक्षा कवच के द्वारा सुरक्षा प्रदान करना है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/कौन-से सही है/हैं ?
(a) 1, 2 और 3
(b) केवल 1 और 2
(c) केवल 2 और 3
(d) केवल 1
प्रश्न 85 — उत्तर: (b) केवल 1 और 2
व्याख्या:
कथन 1 — सही ✓ मिशन सुदर्शन चक्र का उद्देश्य भारत की वायु रक्षा, बैलिस्टिक मिसाइल सुरक्षा और हवाई आक्रमण क्षमताओं को मजबूत करना है। ✓
कथन 2 — सही ✓ यह मिशन त्वरित और शक्तिशाली रक्षा प्रतिक्रिया के लिए डिज़ाइन किया जा रहा है जो भारत की रणनीतिक स्वायत्तता को बढ़ाएगा। ✓
कथन 3 — गलत ✗ यह एक रक्षा/मिसाइल रक्षा मिशन है। “सभी सार्वजनिक स्थानों को सुरक्षा कवच देना” इस मिशन का उद्देश्य नहीं है — यह कथन भ्रामक और गलत है।
प्रश्न 87. भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023 के अधीन ज़ीरो प्रथम सूचना रिपोर्ट (Zero FIR) के बारे में निम्नलिखित में से कौन-सा/कौन-से कथन सही है/हैं ?
- ज़ीरो एफआईआर (Zero FIR) किसी भी पुलिस स्टेशन में दर्ज कराई जा सकती है, भले ही संज्ञेय/असंज्ञेय अपराध किए जाने का स्थान, उस पुलिस स्टेशन की क्षेत्रीय अधिकारिता से बाहर हो।
- किसी पुलिस स्टेशन, जहाँ ज़ीरो एफआईआर (Zero FIR) दर्ज की गई है, वहाँ के प्रभारी अधिकारी सक्षम प्राधिकारी की अनुमति से प्राथमिक अन्वेषण आरंभ कर सकता है।
- ज़ीरो एफआईआर (Zero FIR) के अंतर्गत, सूचना देने वाले के लिए यह अनिवार्य है कि वह सूचना इलेक्ट्रॉनिक प्रारूप में दे।
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर उत्तर चुनिए :
(a) 1, 2 और 3
(b) केवल 2 और 3
(c) केवल 1
(d) केवल 2
प्रश्न 87 — उत्तर: (c) केवल 1
व्याख्या:
कथन 1 — सही ✓ BNSS 2023 की धारा 173 के अंतर्गत Zero FIR किसी भी पुलिस स्टेशन में दर्ज कराई जा सकती है, चाहे अपराध उस थाने की क्षेत्रीय सीमा में हुआ हो या नहीं। यह CrPC में नया प्रावधान है। ✓
कथन 2 — गलत ✗ Zero FIR दर्ज करने वाला प्रभारी अधिकारी किसी की अनुमति के बिना प्राथमिक अन्वेषण नहीं कर सकता। Zero FIR को तुरंत संबंधित क्षेत्राधिकार वाले थाने को अंतरित किया जाता है।
कथन 3 — गलत ✗ BNSS में Zero FIR के लिए इलेक्ट्रॉनिक प्रारूप अनिवार्य नहीं है। सूचना मौखिक या लिखित किसी भी रूप में दी जा सकती है।
