वन (संरक्षण एवं संवर्धन) संशोधन नियम, 2025
केंद्र सरकार ने हाल ही में वन (संरक्षण और संवर्धन) अधिनियम, 1980 के तहत अपने अधिकारों का उपयोग करते हुए 2023 नियमों में संशोधन किया है। इन नए नियमों का उद्देश्य है – परियोजनाओं की मंजूरी प्रक्रिया को सरल बनाना, प्रतिपूरक वनीकरण को और प्रभावी करना, रणनीतिक संसाधनों का कुशल प्रबंधन करना तथा कानून के प्रवर्तन को सशक्त बनाना।
संशोधन के मुख्य बिंदु
1. मंजूरी प्रक्रिया को सरल बनाना
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रक्षा, राष्ट्रीय महत्व और आपातकालीन परियोजनाओं के लिए ऑफ़लाइन आवेदन का प्रावधान किया गया।
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सैद्धांतिक (चरण-I) मंजूरी की वैधता को 2 वर्ष से बढ़ाकर 5 वर्ष कर दिया गया।
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चरण-I (सैद्धांतिक) और चरण-II (अंतिम) अनुमोदन की स्पष्ट परिभाषा दी गई है।
2. प्रतिपूरक वनीकरण संबंधी सुधार
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भूमि बैंकिंग प्रणाली शुरू की जाएगी।
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प्रतिपूरक वनीकरण की अनिवार्यताओं को पूरा करने के लिए मौजूदा केंद्रीय योजना के तहत वनरोपण की अनुमति दी गई।
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चरण-I अनुमोदन के बाद राज्य सरकारें वन भूमि को वन विभागों को हस्तांतरित कर सकती हैं।
3. रणनीतिक संसाधन प्रबंधन
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महत्वपूर्ण खनिजों के खनन हेतु विशेष प्रावधान किए गए।
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भूमि उपयोग की न्यूनतम अवधि को 20 वर्ष से घटाकर 10 वर्ष कर दिया गया।
4. कानून का सशक्त प्रवर्तन
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बेहतर निगरानी और रिपोर्टिंग की व्यवस्था की गई।
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वन अधिकारियों को कानूनी कार्रवाई शुरू करने के व्यापक अधिकार प्रदान किए गए।
वन (संरक्षण) अधिनियम का विकास
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1980 से पूर्व:
वनों का विषय राज्य सूची में था। कृषि, उद्योग और खनन जैसे कार्यों हेतु बड़े पैमाने पर वन भूमि का उपयोग होता था। -
42वां संविधान संशोधन (1976):
वनों को राज्य सूची से हटाकर समवर्ती सूची में रखा गया। -
वन (संरक्षण) अधिनियम, 1980:
वन भूमि को अन्य कार्यों में उपयोग करने की प्रक्रिया को केंद्रीकृत किया गया और वन कटाई पर नियंत्रण लगाया गया। -
1988 संशोधन:
वन भूमि को निजी संस्थाओं को लीज पर देने की प्रक्रिया को विनियमित किया गया। -
वन (संरक्षण) संशोधन अधिनियम, 2023:
जलवायु संबंधी लक्ष्यों के अनुरूप विकास और पारिस्थितिकी संरक्षण में संतुलन साधने पर जोर दिया गया। -
वन (संरक्षण एवं संवर्धन) संशोधन नियम, 2025:
मंजूरी प्रणाली में सुधार, प्रतिपूरक वनीकरण को सरल और प्रभावी बनाना, खनिज संसाधनों के दोहन की समयसीमा को कम करना तथा कानून को और मजबूत करना इसके मुख्य उद्देश्य हैं।
निष्कर्ष
वन (संरक्षण एवं संवर्धन) संशोधन नियम, 2025 यह दर्शाते हैं कि भारत सरकार विकास परियोजनाओं और पारिस्थितिकी संरक्षण के बीच संतुलन बनाने का प्रयास कर रही है। जहाँ एक ओर रक्षा और राष्ट्रीय महत्व की परियोजनाओं को त्वरित मंजूरी देने की दिशा में कदम उठाया गया है, वहीं दूसरी ओर प्रतिपूरक वनीकरण और निगरानी प्रणाली को मजबूत करके पर्यावरण संरक्षण को भी प्राथमिकता दी गई है।