UP Super TET अधिगम वक्र नोट्स – Kredoz IAS

UP Super TET Notes: अधिगम वक्र (Learning Curve) अध्याय 2 – बाल मनोविज्ञान नोट्स PDF Download

UP SUPER TET 2026 • भाग 1 • अध्याय 2

अधिगम वक्र (Learning Curve) – चैप्टर-वार नोट्स

बाल मनोविज्ञान, शिक्षण कौशल एवं जीवन कौशल • सहायक अध्यापक (प्राथमिक स्तर, कक्षा 1–5) • उ.प्र. शिक्षा सेवा चयन आयोग

वक्र के प्रकार , पठार , विस्मरण वक्र , ग्राफ , ट्रिक्स , अभ्यास प्रश्न – सब एक जगह।

विषय-सूची

क्र. अनुभाग
1 अधिगम वक्र : अर्थ एवं परिचय
2 अधिगम वक्र की प्रमुख परिभाषाएँ
3 अधिगम वक्र की विशेषताएँ
4 अधिगम वक्र के प्रकार
5 अधिगम वक्र की अवस्थाएँ
6 अधिगम पठार (Plateau)
7 पठार के कारण एवं निवारण
8 अधिगम वक्र को प्रभावित करने वाले कारक
9 अधिगम वक्र का शैक्षिक महत्व
10 विस्मरण वक्र एवं संबंधित तथ्य
11 परीक्षा उपयोगी तथ्य एवं अभ्यास प्रश्न
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अधिगम वक्र : अर्थ एवं परिचय

अधिगम वक्र (Learning Curve) सीखने की प्रगति का
ग्राफीय (रेखाचित्रीय) प्रदर्शन है। यह बताता है कि अभ्यास के साथ
व्यक्ति की उपलब्धि कितनी, किस गति से और किस दिशा में बदलती है।

  • सीखना अमूर्त प्रक्रिया है; अधिगम वक्र उसे मूर्त और मापने
    योग्य
    बना देता है।

  • ग्राफ में X-अक्ष (क्षैतिज) पर अभ्यास / प्रयास / समय और
    Y-अक्ष (ऊर्ध्वाधर) पर उपलब्धि / प्रगति / सही उत्तर दिखाए जाते
    हैं।

  • यदि Y-अक्ष पर त्रुटियाँ या लगा समय
    दिखाया जाए, तो वक्र नीचे की ओर जाता है — इसे त्रुटि
    वक्र / समय वक्र
    कहते हैं।

  • वक्र से सीखने की मात्रा, गति, उन्नति, अवनति और स्थिरता
    (पठार)
    का पता चलता है।

  • सीखने में प्रगति कभी भी एक समान नहीं होती; इसलिए वक्र
    प्रायः टेढ़ा-मेढ़ा (अनियमित) होता है।

  • पठार की घटना सबसे पहले ब्रायन एवं हार्टर (1897) ने
    टेलीग्राफी (तार-भाषा) सीखने के अध्ययन में देखी।

◆ अधिगम वक्र के दो अक्ष

अक्ष क्या दर्शाता है उदाहरण
X-अक्ष (क्षैतिज / भुज) स्वतंत्र चर — अभ्यास की संख्या, प्रयास, दिन, समय प्रयास 1, 2, 3 … / दिन 1, 2, 3 …
Y-अक्ष (ऊर्ध्वाधर / कोटि) आश्रित चर — उपलब्धि, प्रगति, सही उत्तर, गति प्रति मिनट टाइप किए शब्द
याद रखें: उपलब्धि वक्र ऊपर की ओर उठता
है, जबकि त्रुटि वक्र और समय वक्र नीचे की ओर गिरते हैं — दोनों
सीखने में प्रगति ही दिखाते हैं।
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अधिगम वक्र की प्रमुख परिभाषाएँ

क्र. विद्वान परिभाषा मुख्य शब्द
1 स्किनर “सीखने का वक्र किसी दी हुई क्रिया में उन्नति या अवनति का कागज़ पर प्रदर्शन
है।”
उन्नति या अवनति
2 गेट्स व अन्य “अधिगम वक्र सीखने की प्रक्रिया की गति और प्रगति को प्रदर्शित करते हैं।” गति और प्रगति
3 रेबर्न “सीखने का वक्र सीखने वाले की कुशलता की दिशा में होने वाली प्रगति को व्यक्त करता
है।”
कुशलता की प्रगति
4 क्रो एवं क्रो “अधिगम वक्र अभ्यास द्वारा सीखने में होने वाली उन्नति या अवनति का ग्राफीय
चित्रण है।”
ग्राफीय चित्रण
5 गैरिसन “अधिगम वक्र सीखने की मात्रा, गति तथा सीमा को प्रकट करता है।” मात्रा, गति, सीमा
नोट: विभिन्न पुस्तकों में परिभाषाओं के शब्द थोड़े बदलते हैं;
परीक्षा में प्रायः मुख्य शब्द से विद्वान पहचानना होता है।
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अधिगम वक्र की विशेषताएँ

विशेषता व्याख्या
ग्राफीय प्रदर्शन सीखने की प्रगति को रेखाचित्र द्वारा दिखाता है।
प्रगति असमान सीखने की गति हर समय एक जैसी नहीं रहती।
उतार-चढ़ाव थकान, रुचि, प्रेरणा के कारण वक्र में उतार-चढ़ाव आते हैं।
पठार की उपस्थिति कुछ समय प्रगति रुक जाती है — वक्र समतल हो जाता है।
सीमा (Limit) प्रत्येक व्यक्ति की सीखने की एक अधिकतम शारीरिक / मानसिक सीमा होती है।
व्यक्तिगत भिन्नता एक ही कार्य के लिए अलग-अलग व्यक्तियों के वक्र अलग होते हैं।
कार्य पर निर्भर सरल कार्य और कठिन कार्य के वक्र भिन्न आकार के होते हैं।
निदानात्मक शिक्षक को कमज़ोरी और रुकावट का पता चलता है।
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अधिगम वक्र के प्रकार

आकार के आधार पर अधिगम वक्र मुख्यतः चार प्रकार के होते हैं —
सरल रेखीय, उन्नतोदर, नतोदर और मिश्रित (S-आकार)।

चित्र : अधिगम वक्र के चार प्रकार (X-अक्ष = अभ्यास, Y-अक्ष =
उपलब्धि)

प्रकार दूसरा नाम प्रगति का स्वरूप कब बनता है उदाहरण
1. सरल रेखीय (Straight Line) समान प्रगति वक्र पूरे समय समान गति से प्रगति बहुत कम; सैद्धांतिक / आदर्श स्थिति प्रायः वास्तविक जीवन में दुर्लभ
2. उन्नतोदर (Convex) ऋणात्मक त्वरित (Negatively Accelerated) आरम्भ में तीव्र, बाद में धीमी सरल कार्य, अधिक रुचि, पूर्व अनुभव साइकिल चलाना, सरल कविता याद करना
3. नतोदर (Concave) धनात्मक त्वरित (Positively Accelerated) आरम्भ में धीमी, बाद में तीव्र कठिन / नया कार्य, कम पूर्व ज्ञान नई भाषा, टाइपिंग, गणित के कठिन प्रश्न
4. मिश्रित (S-आकार / Sigmoid) मिश्रित वक्र आरम्भ में धीमी, बीच में तीव्र, अंत में धीमी लम्बे व जटिल कार्य संगीत वाद्य, कार चलाना सीखना
ट्रिक: उन्नतोदर = उछलकर शुरू (पहले तेज़)
→ ऋणात्मक त्वरित; नतोदर =
नरम शुरुआत (पहले धीमा) → धनात्मक
त्वरित
।
ध्यान दें: सबसे अधिक पाया जाने वाला वक्र उन्नतोदर
(ऋणात्मक त्वरित)
है, क्योंकि आरम्भ में उत्साह और नवीनता अधिक होती है। सबसे
कम पाया जाने वाला सरल रेखीय वक्र है।
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अधिगम वक्र की अवस्थाएँ

एक सामान्य अधिगम वक्र में पाँच अवस्थाएँ दिखाई देती हैं; तीसरी
अवस्था पठार परीक्षा की दृष्टि से सबसे महत्वपूर्ण है।

चित्र : अधिगम वक्र की अवस्थाएँ — पीला भाग पठार दर्शाता है

प्रारम्भिक अवस्था ➜ तीव्र उन्नति ➜ पठार ➜ पुनः उन्नति ➜ शारीरिक सीमा
क्र. अवस्था क्या होता है कारण
1 प्रारम्भिक अवस्था प्रगति धीमी; सीखने वाला कार्य से परिचित होता है नया कार्य, अनिश्चितता, अभ्यस्त न होना
2 तीव्र उन्नति की अवस्था प्रगति तेज़ी से बढ़ती है उत्साह, रुचि, नवीनता, सफलता का आनंद
3 पठार की अवस्था प्रगति लगभग रुक जाती है; वक्र समतल थकान, रुचि में कमी, विधि दोष, ज्ञान का संगठन
4 पुनः उन्नति की अवस्था पठार के बाद फिर प्रगति नई विधि, पुनः प्रेरणा, ज्ञान का सुदृढ़ीकरण
5 शारीरिक / चरम सीमा आगे प्रगति संभव नहीं; स्थायी स्थिरता व्यक्ति की अधिकतम शारीरिक-मानसिक क्षमता
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अधिगम पठार (Plateau of Learning)

अधिगम पठार वह अवस्था है जब लगातार अभ्यास के बावजूद सीखने में
कोई प्रगति दिखाई नहीं देती और अधिगम वक्र समतल
(क्षैतिज)
हो जाता है।

◆ पठार की परिभाषाएँ

विद्वान परिभाषा
रॉस “सीखने के वक्र में पठार वह अवस्था है जिसमें सीखने वाले की प्रगति रुक जाती
है।”
स्किनर “पठार अधिगम वक्र की वह स्थिति है जो सीखने में प्रगति के अभाव को प्रकट करती
है।”
सॉरेन्सन “सीखने के पठार वे समय हैं जब वक्र में उन्नति नहीं होती।”
क्रो एवं क्रो “पठार अधिगम की वह स्थिति है जिसमें प्रयास के बावजूद उन्नति नहीं होती और वक्र
सीधा हो जाता है।”

◆ पठार की विशेषताएँ

  • पठार अस्थायी होता है; उचित उपाय से दूर किया जा सकता
    है।

  • एक ही अधिगम में एक से अधिक पठार आ सकते हैं।

  • पठार प्रायः जटिल और लम्बे कार्यों में आते हैं; सरल कार्यों में
    कम।

  • पठार के समय भीतर-ही-भीतर ज्ञान का संगठन / सुदृढ़ीकरण
    होता रहता है — इसलिए इसे “तैयारी का काल” भी माना जाता है।

  • हर व्यक्ति में पठार का समय और अवधि अलग होती
    है।

◆ पठार बनाम शारीरिक सीमा

आधार अधिगम पठार शारीरिक सीमा
स्वरूप अस्थायी स्थायी
स्थान अधिगम के बीच में अधिगम के अंत में
दूर करना उचित उपायों से संभव संभव नहीं
कारण थकान, अरुचि, दोषपूर्ण विधि व्यक्ति की अधिकतम क्षमता
बाद में पुनः उन्नति होती है आगे उन्नति नहीं होती
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पठार के कारण एवं निवारण

क्र. पठार का कारण निवारण (उपाय)
1 थकान — शारीरिक या मानसिक बीच-बीच में विश्राम; वितरित अभ्यास
2 रुचि का अभाव / नीरसता रोचक विधियाँ, खेल, सहायक सामग्री
3 अभिप्रेरणा की कमी प्रशंसा, पुरस्कार, लक्ष्य निर्धारण, परिणाम का ज्ञान
4 दोषपूर्ण शिक्षण / अभ्यास विधि विधि में परिवर्तन; उचित मार्गदर्शन
5 कार्य की जटिलता कार्य को छोटे भागों में बाँटना (सरल से जटिल)
6 पुरानी विधि छोड़कर नई अपनाना (ज्ञान का संगठन) धैर्य रखना; यह स्वाभाविक काल है
7 अस्वस्थता / बीमारी उचित स्वास्थ्य, पोषण और आराम
8 प्रतिकूल वातावरण (शोर, प्रकाश की कमी) शांत और अनुकूल वातावरण
9 गलत आदतें / संवेगात्मक तनाव गलत आदतों का सुधार, चिंता कम करना, परामर्श
10 शारीरिक सीमा के निकट पहुँचना लक्ष्य को यथार्थवादी रखना
शिक्षक के लिए: पठार आने पर छात्र को निराश न होने
दें
; उसे बताएँ कि यह सीखने का सामान्य भाग है, और विधि बदलें,
प्रेरणा दें, विश्राम दें
।
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अधिगम वक्र को प्रभावित करने वाले कारक

सीखने वाला ➜ कार्य / विषय ➜ विधि ➜ वातावरण
कारक-समूह प्रमुख कारक
सीखने वाले से संबंधित आयु, बुद्धि, रुचि, अभिप्रेरणा, स्वास्थ्य, थकान, पूर्व अनुभव, आकांक्षा स्तर
कार्य से संबंधित कार्य की कठिनाई, लम्बाई, सार्थकता, नवीनता
विधि से संबंधित संकलित या वितरित अभ्यास, पूर्ण या अंश विधि, परिणाम का ज्ञान
(Feedback)
वातावरण से संबंधित शांत वातावरण, प्रकाश, वायु, शिक्षक का व्यवहार, सहपाठी
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अधिगम वक्र का शैक्षिक महत्व

उपयोग व्याख्या
प्रगति का ज्ञान छात्र और शिक्षक दोनों को सीखने की प्रगति का स्पष्ट पता चलता है।
पठार की पहचान प्रगति रुकने का समय जानकर उचित उपाय किए जा सकते हैं।
विधियों का मूल्यांकन कौन-सी शिक्षण विधि अधिक प्रभावी है — यह तुलना संभव होती है।
व्यक्तिगत भिन्नता अलग-अलग छात्रों के वक्र देखकर व्यक्तिगत शिक्षण की योजना।
अभिप्रेरणा अपनी प्रगति का ग्राफ देखकर छात्र प्रेरित होते हैं (परिणाम का ज्ञान)।
निदान व उपचार कमज़ोरी का निदान कर उपचारात्मक शिक्षण।
पाठ्यक्रम व समय-सारणी कार्य की कठिनाई के अनुसार समय और क्रम का निर्धारण।
सीमा का ज्ञान छात्र से उसकी क्षमता के अनुसार यथार्थवादी अपेक्षा।
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विस्मरण वक्र एवं संबंधित तथ्य (अतिरिक्त)

विस्मरण वक्र (Forgetting Curve) अधिगम वक्र का उल्टा है —
यह दिखाता है कि समय के साथ सीखी गई सामग्री कितनी भूल जाती
है। इसे हरमन एबिंगहॉस (1885) ने निरर्थक शब्दांशों
(Nonsense Syllables)
पर प्रयोग करके दिया।

चित्र : एबिंगहॉस का विस्मरण वक्र — सबसे अधिक भूलना पहले कुछ घंटों
में

  • सीखने के तुरंत बाद सबसे तेज़ी से भूलना होता है; बाद में भूलने
    की गति धीमी हो जाती है।

  • एबिंगहॉस ने स्मृति मापन की बचत विधि (Saving Method)
    दी।

  • विस्मरण कम करने के उपाय: पुनरावृत्ति (Revision), अति-अधिगम
    (Over-learning), अर्थपूर्ण अधिगम, वितरित अभ्यास
    ।

आधार अधिगम वक्र विस्मरण वक्र
दर्शाता है अभ्यास के साथ प्रगति समय के साथ भूलना
दिशा प्रायः ऊपर की ओर नीचे की ओर
संबंधित नाम ब्रायन एवं हार्टर (पठार, 1897) एबिंगहॉस (1885)
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परीक्षा उपयोगी तथ्य एवं अभ्यास प्रश्न

◆ (क) एक पंक्ति में महत्वपूर्ण तथ्य

प्रश्न उत्तर
अधिगम वक्र क्या है सीखने की प्रगति का ग्राफीय प्रदर्शन
X-अक्ष पर क्या होता है अभ्यास / प्रयास / समय
Y-अक्ष पर क्या होता है उपलब्धि / प्रगति
आरम्भ में तेज़, बाद में धीमी प्रगति उन्नतोदर वक्र (ऋणात्मक त्वरित)
आरम्भ में धीमी, बाद में तेज़ प्रगति नतोदर वक्र (धनात्मक त्वरित)
धीमी — तेज़ — धीमी प्रगति मिश्रित / S-आकार वक्र
सबसे अधिक पाया जाने वाला वक्र उन्नतोदर वक्र
सबसे कम पाया जाने वाला वक्र सरल रेखीय वक्र
प्रगति रुक जाने की अवस्था अधिगम पठार
पठार का स्वरूप अस्थायी
पठार की सर्वप्रथम खोज ब्रायन एवं हार्टर (1897), टेलीग्राफी अध्ययन
स्थायी रुकावट शारीरिक सीमा
विस्मरण वक्र एबिंगहॉस (1885)
पठार का एक प्रमुख उपाय विधि परिवर्तन, विश्राम, अभिप्रेरणा

◆ (ख) भ्रम से बचें

  • उन्नतोदर ≠ धनात्मक त्वरित — उन्नतोदर वक्र
    ऋणात्मक त्वरित होता है (पहले तेज़, फिर धीमा)।

  • पठार का अर्थ सीखना बंद होना नहीं है; भीतर ज्ञान का
    संगठन चलता रहता है।

  • त्रुटि वक्र का नीचे जाना अवनति नहीं, प्रगति
    है।

◆ (ग) अभ्यास प्रश्न (MCQ)

प्रश्न 1. अधिगम वक्र में X-अक्ष पर प्रायः दर्शाया जाता है
—

(A) उपलब्धि (B) अभ्यास / प्रयास (C) त्रुटियाँ (D) बुद्धि

प्रश्न 2. आरम्भ में तीव्र और बाद में धीमी प्रगति वाला वक्र है
—

(A) नतोदर (B) सरल रेखीय (C) उन्नतोदर (D) मिश्रित

प्रश्न 3. नतोदर वक्र को यह भी कहते हैं —

(A) ऋणात्मक त्वरित (B) धनात्मक त्वरित (C) समान प्रगति (D) S-आकार

प्रश्न 4. सीखने में प्रगति का अस्थायी रूप से रुक जाना कहलाता है
—

(A) शारीरिक सीमा (B) विस्मरण (C) अधिगम पठार (D) स्थानांतरण

प्रश्न 5. अधिगम पठार की घटना सर्वप्रथम किसने देखी?

(A) एबिंगहॉस (B) ब्रायन एवं हार्टर (C) थॉर्नडाइक (D) स्किनर

प्रश्न 6. निम्न में से कौन पठार का कारण नहीं है?

(A) थकान (B) रुचि का अभाव (C) उचित अभिप्रेरणा (D) दोषपूर्ण विधि

प्रश्न 7. नया और कठिन कार्य सीखने में प्रायः कौन-सा वक्र
बनता है?

(A) उन्नतोदर (B) नतोदर (C) सरल रेखीय (D) कोई नहीं

प्रश्न 8. विस्मरण वक्र किसने दिया?

(A) पावलॉव (B) एबिंगहॉस (C) गैने (D) बंडूरा

प्रश्न 9. पठार और शारीरिक सीमा में मुख्य अंतर है —

(A) दोनों स्थायी हैं (B) पठार अस्थायी, सीमा स्थायी (C) पठार स्थायी, सीमा
अस्थायी (D) कोई अंतर नहीं

प्रश्न 10. “धीमी — तेज़ — धीमी” प्रगति किस वक्र में होती
है?

(A) उन्नतोदर (B) नतोदर (C) मिश्रित / S-आकार (D) सरल रेखीय

उत्तर कुंजी: 1-B, 2-C, 3-B, 4-C, 5-B, 6-C, 7-B, 8-B,
9-B, 10-C

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