सीखने का मूल्यांकन (Evaluation of Learning) – चैप्टर-वार नोट्स
बाल मनोविज्ञान, शिक्षण कौशल एवं जीवन कौशल • सहायक अध्यापक (प्राथमिक स्तर, कक्षा 1–5) • उ.प्र. शिक्षा सेवा चयन आयोग
ब्लूम वर्गीकरण , उपलब्धि परीक्षण , प्रश्नों के प्रकार , वैधता-विश्वसनीयता , ब्लूप्रिंट , पद विश्लेषण , निदान – सब एक जगह।
विषय-सूची
| क्र. | अनुभाग |
|---|---|
| 1 | सीखने का मूल्यांकन : परिचय एवं शैक्षिक उद्देश्य |
| 2 | ब्लूम का शैक्षिक उद्देश्यों का वर्गीकरण |
| 3 | उपलब्धि परीक्षण |
| 4 | प्रश्नों के प्रकार |
| 5 | अच्छे परीक्षण की विशेषताएँ |
| 6 | वैधता एवं विश्वसनीयता |
| 7 | परीक्षण निर्माण के चरण एवं ब्लूप्रिंट |
| 8 | पद विश्लेषण |
| 9 | निदानात्मक परीक्षण एवं उपचारात्मक शिक्षण |
| 10 | अंकन, ग्रेडिंग एवं प्राथमिक सांख्यिकी |
| 11 | परीक्षा उपयोगी तथ्य एवं अभ्यास प्रश्न |
सीखने का मूल्यांकन : परिचय
सीखने का मूल्यांकन यह जाँचता है कि शिक्षण के बाद बच्चे के ज्ञान, समझ,
कौशल और अभिवृत्ति में अपेक्षित परिवर्तन कितना आया।
इसके लिए पहले शैक्षिक उद्देश्य स्पष्ट करने होते हैं, फिर उन्हीं के आधार
पर परीक्षण बनाए जाते हैं।
| संप्रत्यय | अर्थ | उदाहरण |
|---|---|---|
| सामान्य उद्देश्य (Aim / General Objective) | व्यापक, दीर्घकालीन लक्ष्य | “छात्र भिन्न की अवधारणा समझें” |
| विशिष्ट / व्यवहारगत उद्देश्य (Specific / Behavioural Objective) |
मापने योग्य, स्पष्ट व्यवहार के रूप में | “छात्र दो भिन्नों की तुलना कर सकेंगे” |
| अधिगम परिणाम (Learning Outcome) | पाठ के बाद छात्र क्या कर पाएगा — प्रमाणित करने योग्य | “छात्र समान हर वाली भिन्नों को जोड़ता है” (NCERT) |
(Action verbs) होते हैं — पहचानता है, बताता है, तुलना करता है, वर्गीकृत
करता है, बनाता है। “जानता है”, “समझता है” जैसे शब्द मापने योग्य
नहीं होते।
व्यवहार, शर्त (स्थिति) और मानदंड तीनों हों। RCEM
पद्धति (क्षेत्रीय शिक्षा महाविद्यालय, मैसूर) भारत में प्रचलित है।
ब्लूम का शैक्षिक उद्देश्यों का वर्गीकरण
बेंजामिन एस. ब्लूम (1956) ने शैक्षिक उद्देश्यों को तीन क्षेत्रों में
बाँटा — संज्ञानात्मक, भावात्मक और क्रियात्मक। इसे ब्लूम
का वर्गीकरण (Bloom’s Taxonomy) कहते हैं।
| संज्ञानात्मक — सिर (Head) | ➜ | भावात्मक — हृदय (Heart) | ➜ | क्रियात्मक — हाथ (Hand) |
◆ (क) संज्ञानात्मक क्षेत्र — मूल (1956) एवं संशोधित
(2001)
संज्ञानात्मक क्षेत्र का पिरामिड — नीचे निम्न-स्तरीय, ऊपर उच्च-स्तरीय चिंतन
(मूल → संशोधित)
| स्तर | मूल ब्लूम (1956) | संशोधित — एंडरसन व क्रैथवोल (2001) | क्रियात्मक शब्द | उदाहरण प्रश्न |
|---|---|---|---|---|
| 1 | ज्ञान (Knowledge) | स्मरण (Remembering) | सूची बनाओ, नाम बताओ, परिभाषित करो | भारत की राजधानी क्या है? |
| 2 | बोध (Comprehension) | समझ (Understanding) | व्याख्या करो, अपने शब्दों में बताओ | प्रकाश संश्लेषण को समझाइए। |
| 3 | अनुप्रयोग (Application) | अनुप्रयोग (Applying) | हल करो, प्रयोग करो, गणना करो | इस आयत का क्षेत्रफल ज्ञात करो। |
| 4 | विश्लेषण (Analysis) | विश्लेषण (Analysing) | तुलना करो, अंतर बताओ, वर्गीकृत करो | पौधे और जंतु कोशिका में अंतर बताइए। |
| 5 | संश्लेषण (Synthesis) | मूल्यांकन (Evaluating) | निर्णय दो, औचित्य बताओ, आलोचना करो | कौन-सी योजना बेहतर है और क्यों? |
| 6 | मूल्यांकन (Evaluation) | सृजन (Creating) | रचना करो, डिज़ाइन करो, योजना बनाओ | पर्यावरण पर एक कविता रचिए। |
क्रियाएँ बनीं; (2) ज्ञान → स्मरण,
बोध → समझ; (3) संश्लेषण हटकर “सृजन” बना और
सबसे ऊपर गया; मूल्यांकन एक स्तर नीचे
आया।
उच्च-स्तरीय चिंतन कौशल (Higher Order Thinking Skills); स्तर
1–3 = निम्न-स्तरीय चिंतन (LOTS)।
◆ (ख) भावात्मक क्षेत्र — क्रैथवोल, ब्लूम व मासिया (1964)
| ग्रहण करना | ➜ | अनुक्रिया करना | ➜ | अनुमूल्यन (मूल्य देना) | ➜ | संगठन | ➜ | चरित्रीकरण |
| स्तर | अर्थ | उदाहरण |
|---|---|---|
| 1. ग्रहण करना (Receiving) | ध्यान देना, सुनने को तैयार होना | कहानी ध्यान से सुनना |
| 2. अनुक्रिया करना (Responding) | सक्रिय भागीदारी | चर्चा में भाग लेना |
| 3. अनुमूल्यन (Valuing) | किसी मूल्य को महत्व देना | स्वच्छता को महत्वपूर्ण मानना |
| 4. संगठन (Organization) | विभिन्न मूल्यों को व्यवस्थित करना | समय-प्रबंधन को प्राथमिकता |
| 5. चरित्रीकरण (Characterization) | मूल्य जीवन-शैली का हिस्सा बन जाए | सदा ईमानदारी से व्यवहार |
◆ (ग) क्रियात्मक क्षेत्र — आर. एच. डेव (1970)
| अनुकरण | ➜ | हस्तकौशल / कौशल साधन | ➜ | परिशुद्धता | ➜ | समन्वय | ➜ | स्वाभाविकीकरण |
| स्तर | अर्थ | उदाहरण |
|---|---|---|
| 1. अनुकरण (Imitation) | देखकर नकल करना | शिक्षक को देखकर अक्षर बनाना |
| 2. हस्तकौशल (Manipulation) | निर्देश से स्वयं करना | निर्देश पढ़कर मॉडल बनाना |
| 3. परिशुद्धता (Precision) | सही और सटीक करना | बिना गलती के सुलेख |
| 4. समन्वय (Articulation) | कई कौशलों को मिलाना | गाते हुए वाद्य बजाना |
| 5. स्वाभाविकीकरण (Naturalization) | सहज, स्वचालित रूप से करना | बिना सोचे टाइप करना |
ई. जे. सिम्पसन (1972) और हैरो (1972) ने भी
दिए।
उपलब्धि परीक्षण (Achievement Test)
उपलब्धि परीक्षण वह परीक्षण है जो यह मापता है कि छात्र ने
किसी विषय या कौशल में शिक्षण के बाद कितना सीखा। यह
“क्या सीखा” बताता है, जबकि बुद्धि परीक्षण “सीखने की
क्षमता” और अभिक्षमता परीक्षण “भविष्य में क्या सीख सकता
है” बताते हैं।
| विद्वान | परिभाषा |
|---|---|
| गैरिसन व अन्य | “उपलब्धि परीक्षण बालक की वर्तमान योग्यता या किसी विशिष्ट विषय के क्षेत्र में उसके ज्ञान की सीमा का मापन करता है।” |
| थॉर्नडाइक व हेगन | “उपलब्धि परीक्षण यह मापता है कि छात्र ने किसी निश्चित अनुदेशन के परिणामस्वरूप कितना सीखा है।” |
| इबेल | “उपलब्धि परीक्षण वह है जो छात्र द्वारा ग्रहण किए गए ज्ञान, कौशल या क्षमता का मापन करे।” |
◆ उपलब्धि परीक्षण के प्रकार
| आधार | प्रकार | व्याख्या |
|---|---|---|
| निर्माण के आधार पर | शिक्षक-निर्मित बनाम मानकीकृत | शिक्षक द्वारा अपनी कक्षा के लिए / विशेषज्ञों द्वारा, मानक (Norms) सहित, बड़े समूह के लिए |
| प्रस्तुति के आधार पर | मौखिक, लिखित, प्रायोगिक | — |
| प्रश्नों के आधार पर | निबंधात्मक, लघु-उत्तरीय, वस्तुनिष्ठ | — |
| उद्देश्य के आधार पर | निदानात्मक, पूर्वकथनात्मक (Prognostic), सर्वेक्षण | — |
| व्याख्या के आधार पर | मानक-संदर्भित, निकष-संदर्भित | — |
| आधार | शिक्षक-निर्मित परीक्षण | मानकीकृत परीक्षण |
|---|---|---|
| निर्माता | कक्षा शिक्षक | विशेषज्ञ समूह |
| क्षेत्र | अपनी कक्षा / पढ़ाई गई इकाई | व्यापक पाठ्यक्रम, बड़ा समूह |
| मानक (Norms) | नहीं | हाँ — आयु / कक्षा के मानक |
| वैधता-विश्वसनीयता | प्रायः ज्ञात नहीं | ज्ञात और उच्च |
| लचीलापन | अधिक | कम |
| लागत व समय | कम | अधिक |
प्रश्नों के प्रकार
| निबंधात्मक | ➜ | लघु-उत्तरीय | ➜ | अति लघु-उत्तरीय | ➜ | वस्तुनिष्ठ |
◆ (क) वस्तुनिष्ठ प्रश्नों का वर्गीकरण
| वर्ग | प्रकार | उदाहरण |
|---|---|---|
| प्रत्यास्मरण प्रकार (Recall type) — उत्तर स्मृति से लिखना |
सरल प्रत्यास्मरण (एक शब्द उत्तर) | भारत के प्रथम राष्ट्रपति कौन थे? |
| रिक्त स्थान पूर्ति | सूर्य एक ______ है। | |
| पहचान प्रकार (Recognition type) — दिए विकल्पों में से पहचानना |
सत्य / असत्य (एकांतर प्रत्युत्तर) | पृथ्वी गोल है। (सत्य / असत्य) |
| बहुविकल्पी (MCQ) | 4 विकल्पों में से सही चुनिए | |
| मिलान / मिलाइए (Matching) | स्तंभ A को स्तंभ B से मिलाइए | |
| वर्गीकरण / बेमेल छाँटिए | आम, केला, गाजर, सेब — बेमेल? | |
| क्रम व्यवस्था (Rearrangement) | घटनाओं को सही क्रम में लगाइए |
उपयोगी माना जाता है — सभी संज्ञानात्मक स्तरों की जाँच संभव, अनुमान (Guessing) की
संभावना कम। सत्य/असत्य में अनुमान की संभावना सबसे अधिक
(50%) होती है।
◆ (ख) प्रश्नों के प्रकारों की तुलना
| आधार | निबंधात्मक | लघु-उत्तरीय | वस्तुनिष्ठ |
|---|---|---|---|
| विषयवस्तु का प्रतिनिधित्व | कम (कुछ प्रश्न) | मध्यम | अधिक (बहुत प्रश्न) |
| अंकन में वस्तुनिष्ठता | कम — व्यक्तिनिष्ठ | मध्यम | सर्वाधिक |
| विश्वसनीयता | कम | मध्यम | अधिक |
| निर्माण | आसान | मध्यम | कठिन, अधिक समय |
| जाँच (अंकन) | कठिन, अधिक समय | मध्यम | आसान, शीघ्र, मशीन से भी |
| क्या जाँचता है | अभिव्यक्ति, संगठन, सृजनात्मकता, विचार | समझ, अनुप्रयोग | ज्ञान, समझ, अनुप्रयोग (अच्छे MCQ से उच्च स्तर भी) |
| कमज़ोरी | परीक्षक का प्रभाव, भाग्य | — | अनुमान, रटने को बढ़ावा, अभिव्यक्ति नहीं |
◆ (ग) खुले और बंद प्रश्न
| बंद प्रश्न (Closed-ended) | खुले प्रश्न (Open-ended) |
|---|---|
| एक निश्चित सही उत्तर | अनेक संभावित उत्तर |
| स्मरण की जाँच | चिंतन, कल्पना, सृजनात्मकता की जाँच |
| “7 × 8 कितना होता है?” | “यदि पेड़ बोल पाते तो क्या कहते?” |
| अभिसारी चिंतन (Convergent) | अपसारी चिंतन (Divergent) |
अच्छे परीक्षण की विशेषताएँ
एक अच्छे परीक्षण की चार मुख्य विशेषताएँ हैं — वैधता,
विश्वसनीयता, वस्तुनिष्ठता और व्यावहारिकता (उपयोगिता); इनमें
वैधता सबसे महत्वपूर्ण है।
| विशेषता | अर्थ |
|---|---|
| वैधता (Validity) | परीक्षण वही मापे जिसे मापने के लिए बना है — सबसे महत्वपूर्ण गुण |
| विश्वसनीयता (Reliability) | बार-बार प्रयोग करने पर संगत (Consistent) परिणाम दे |
| वस्तुनिष्ठता (Objectivity) | अंकन पर परीक्षक की व्यक्तिगत राय का प्रभाव न हो — कोई भी जाँचे, अंक समान |
| व्यावहारिकता / उपयोगिता (Usability) | समय, लागत, प्रशासन और अंकन में सुविधाजनक |
| विभेदकारिता (Discrimination) | तेज़ और कमज़ोर छात्रों में अंतर कर सके |
| व्यापकता (Comprehensiveness) | पूरे पाठ्यक्रम और सभी उद्देश्यों का प्रतिनिधित्व |
| मानक (Norms) | परिणामों की व्याख्या के लिए तुलनात्मक आधार (मानकीकृत परीक्षण में) |
| उचित कठिनाई स्तर | न बहुत आसान, न बहुत कठिन |
| स्पष्ट निर्देश | भाषा सरल व स्पष्ट |
वैधता एवं विश्वसनीयता

चित्र : लक्ष्य (Target) उपमा — विश्वसनीय पर अवैध | न विश्वसनीय न वैध |
विश्वसनीय और वैध
विश्वसनीय परीक्षण आवश्यक नहीं कि वैध हो। विश्वसनीयता, वैधता की
आवश्यक पर पर्याप्त नहीं शर्त है।
◆ (क) वैधता के प्रकार
| प्रकार | अर्थ | उदाहरण |
|---|---|---|
| विषयवस्तु वैधता (Content Validity) | परीक्षण पाठ्यक्रम की विषयवस्तु और उद्देश्यों का पूर्ण प्रतिनिधित्व करे — उपलब्धि परीक्षण के लिए सबसे महत्वपूर्ण |
ब्लूप्रिंट के अनुसार प्रश्न |
| आमुख / प्रत्यक्ष वैधता (Face Validity) | देखने में परीक्षण उपयुक्त लगे | गणित परीक्षा में गणित के प्रश्न |
| समवर्ती वैधता (Concurrent Validity) | परिणाम किसी अन्य मान्य कसौटी से मेल खाएँ (एक ही समय) | नए बुद्धि परीक्षण के अंक, पुराने मान्य परीक्षण से मेल |
| पूर्वकथन / भविष्यवाणी वैधता (Predictive Validity) | भविष्य के प्रदर्शन की सही भविष्यवाणी करे | प्रवेश परीक्षा के अंक → आगे की सफलता |
| निर्मित / संरचना वैधता (Construct Validity) | परीक्षण किसी सैद्धांतिक गुण (बुद्धि, चिंता) को सही मापे | बुद्धि परीक्षण वास्तव में बुद्धि मापता है |
◆ (ख) विश्वसनीयता ज्ञात करने की विधियाँ
| विधि | प्रक्रिया | मापता है |
|---|---|---|
| परीक्षण-पुनर्परीक्षण (Test-Retest) | एक ही परीक्षण, उसी समूह पर, कुछ समय बाद दोबारा | स्थिरता (Stability) |
| समानांतर / समतुल्य प्रारूप (Parallel Forms) | समान स्तर के दो अलग परीक्षण एक समूह पर | समतुल्यता (Equivalence) |
| अर्ध-विच्छेदन (Split-half) | एक परीक्षण को दो भागों (सम-विषम प्रश्न) में बाँटकर सहसंबंध; स्पीयरमैन-ब्राउन सूत्र |
आंतरिक संगति |
| तार्किक समानता / कूडर-रिचर्डसन (KR-20, KR-21) | सभी प्रश्नों की आंतरिक संगति | आंतरिक संगति |
| अंकक विश्वसनीयता (Inter-rater) | दो परीक्षकों के अंकों में सहसंबंध | अंकन की संगति |
(r) से व्यक्त करते हैं — 0 से +1 के बीच; +1 के
जितना निकट, उतना अधिक विश्वसनीय।
◆ (ग) वैधता व विश्वसनीयता को प्रभावित करने वाले कारक
-
परीक्षण की लम्बाई — अधिक प्रश्न → अधिक
विश्वसनीयता। -
अस्पष्ट निर्देश और कठिन भाषा — दोनों घटती हैं।
-
अनुमान (Guessing) — सत्य/असत्य में विश्वसनीयता घटती
है। -
अंकन की व्यक्तिनिष्ठता — निबंधात्मक प्रश्नों में।
-
छात्र की स्थिति — थकान, चिंता, बीमारी।
-
परीक्षण वातावरण — शोर, प्रकाश, नकल।
-
अनुचित कठिनाई स्तर।
परीक्षण निर्माण के चरण एवं ब्लूप्रिंट
| नियोजन (उद्देश्य + ब्लूप्रिंट) | ➜ | प्रश्न लेखन | ➜ | संपादन व प्रारंभिक प्रारूप |
| प्रारंभिक परीक्षण (Try-out) | ➜ | पद विश्लेषण | ➜ | अंतिम प्रारूप | ➜ | मानकीकरण व निर्देश पुस्तिका |
| चरण | कार्य |
|---|---|
| 1. नियोजन | उद्देश्य, विषयवस्तु, प्रश्नों के प्रकार, समय, अंक — ब्लूप्रिंट तैयार करना |
| 2. प्रश्न लेखन | ब्लूप्रिंट के अनुसार आवश्यकता से अधिक प्रश्न लिखना |
| 3. संपादन | भाषा सुधार, अस्पष्ट प्रश्न हटाना, निर्देश लिखना, उत्तर कुंजी बनाना |
| 4. प्रारंभिक परीक्षण | छोटे समूह पर परीक्षण देना |
| 5. पद विश्लेषण | कठिनाई स्तर और विभेदन क्षमता ज्ञात कर उपयुक्त प्रश्न चुनना |
| 6. अंतिम प्रारूप | चुने हुए प्रश्नों को सरल से कठिन क्रम में व्यवस्थित करना |
| 7. मानकीकरण | वैधता, विश्वसनीयता, मानक (Norms) ज्ञात करना; निर्देश पुस्तिका (Manual) बनाना |
◆ ब्लूप्रिंट (नील पत्र / रूपरेखा)
ब्लूप्रिंट परीक्षण की त्रि-आयामी योजना है,
जो बताता है कि किस उद्देश्य, किस विषयवस्तु और किस प्रकार के
प्रश्नों को कितना अंक-भार (Weightage) दिया जाएगा।
इससे विषयवस्तु वैधता बढ़ती है।
| उद्देश्य (ज्ञान, समझ, अनुप्रयोग…) | ➜ | विषयवस्तु (इकाइयाँ) | ➜ | प्रश्नों के प्रकार (निबंध, लघु, वस्तुनिष्ठ) |
◆ उदाहरण — कक्षा 5, गणित (कुल 40 अंक)
| इकाई ↓ / उद्देश्य → | ज्ञान | समझ | अनुप्रयोग | कौशल | कुल अंक |
|---|---|---|---|---|---|
| भिन्न | 2 (V) | 3 (S) | 4 (L) | 1 (V) | 10 |
| दशमलव | 2 (V) | 2 (S) | 4 (L) | — | 8 |
| क्षेत्रफल व परिमाप | 1 (V) | 3 (S) | 5 (L) | 3 (S) | 12 |
| आँकड़ों का प्रबंधन | 1 (V) | 2 (S) | 3 (S) | 4 (L) | 10 |
| कुल | 6 (15%) | 10 (25%) | 16 (40%) | 8 (20%) | 40 |
L = निबंधात्मक / दीर्घ-उत्तरीय। कोष्ठक में संख्या = अंक।
पद विश्लेषण (Item Analysis)
पद विश्लेषण प्रारंभिक परीक्षण के बाद हर प्रश्न (पद) की
गुणवत्ता जाँचने की प्रक्रिया है। इसमें मुख्यतः कठिनाई
स्तर और विभेदन सूचकांक ज्ञात किए जाते हैं।
| सूचकांक | सूत्र | व्याख्या |
|---|---|---|
| कठिनाई स्तर / कठिनाई सूचकांक (Difficulty Index, P) |
P = (सही उत्तर देने वालों की संख्या ÷ कुल छात्र) × 100 | P अधिक = प्रश्न आसान; P कम = प्रश्न कठिन। सामान्यतः 30% – 70% (कुछ पुस्तकों में 25–75%) वाले प्रश्न उपयुक्त |
| विभेदन सूचकांक (Discrimination Index, D) | D = (RU − RL) ÷ (N/2) — RU = उच्च समूह में सही, RL = निम्न समूह में सही, N = दोनों समूहों के कुल छात्र |
−1 से +1 के बीच; +0.4 या अधिक = उत्तम; 0.2 से कम = सुधार या हटाएँ; ऋणात्मक = त्रुटिपूर्ण प्रश्न |
| विकर्षक विश्लेषण (Distractor Analysis) | MCQ के गलत विकल्पों को कितने छात्रों ने चुना | जिस विकल्प को कोई न चुने, वह प्रभावी विकर्षक नहीं |
P = 60 ÷ 100 × 100 = 60% (मध्यम कठिनाई — उपयुक्त)। उच्च समूह
(27) में 20 और निम्न समूह (27) में 8 ने सही किया → D = (20 − 8) ÷ 27 ≈
0.44 (उत्तम)।
-
उच्च और निम्न समूह प्रायः कुल छात्रों के ऊपरी 27% और निचले
27% लिए जाते हैं (केली)। -
ऐसा प्रश्न जिसे सभी सही करें या कोई सही न करे — विभेदन
शून्य, इसलिए अनुपयोगी।
निदानात्मक परीक्षण एवं उपचारात्मक शिक्षण
निदानात्मक परीक्षण बताता है कि छात्र किस विशेष
बिंदु पर और क्यों गलती कर रहा है; उसके बाद उपचारात्मक
शिक्षण से कठिनाई दूर की जाती है। यह डॉक्टर द्वारा रोग का
निदान और फिर इलाज जैसा है।
| आधार | उपलब्धि परीक्षण | निदानात्मक परीक्षण |
|---|---|---|
| उद्देश्य | कितना सीखा — कुल उपलब्धि | कहाँ और क्यों कठिनाई — कमज़ोरी के कारण |
| परिणाम | एक कुल अंक / ग्रेड | हर उप-कौशल की विस्तृत जानकारी |
| क्षेत्र | व्यापक विषयवस्तु | सीमित, विशिष्ट इकाई |
| कठिनाई स्तर | मिश्रित | प्रायः सरल, क्रमिक |
| समय | सत्र / इकाई के अंत में | कठिनाई दिखने पर |
| अगला कदम | ग्रेड, कक्षोन्नति | उपचारात्मक शिक्षण |
◆ निदान एवं उपचार के चरण
| कठिनाई वाले छात्रों की पहचान | ➜ | कठिनाई का क्षेत्र जानना | ➜ | कारणों का निदान |
| उपचारात्मक शिक्षण | ➜ | पुनः मूल्यांकन | ➜ | अनुवर्ती कार्य (Follow-up) |
◆ उपचारात्मक शिक्षण के उपाय
-
व्यक्तिगत ध्यान और छोटे समूह में शिक्षण।
-
भिन्न शिक्षण विधि — मूर्त सामग्री, खेल, चित्र,
गतिविधियाँ। -
सहपाठी शिक्षण (Peer Tutoring) — तेज़ छात्र कमज़ोर
छात्र की सहायता करें। -
अतिरिक्त अभ्यास और कार्य-पत्रक।
-
सरल से कठिन और ज्ञात से अज्ञात
क्रम। -
प्रोत्साहन और आत्मविश्वास बढ़ाना; असफलता पर दंड
नहीं। -
अभिभावकों का सहयोग।
14 (छोटे अंक को बड़े से घटाना — उधार की अवधारणा का अभाव) — निदान से
ऐसी व्यवस्थित त्रुटियों (Systematic errors) का पता चलता
है।
अंकन, ग्रेडिंग एवं प्राथमिक सांख्यिकी
◆ (क) अंक प्रणाली बनाम ग्रेडिंग प्रणाली
| आधार | अंक प्रणाली | ग्रेडिंग प्रणाली |
|---|---|---|
| व्यक्त करना | संख्याओं में (0–100) | अक्षरों / श्रेणियों में (A, B, C) |
| तनाव | अधिक — 1–2 अंकों की होड़ | कम |
| त्रुटि का प्रभाव | अंकन की छोटी त्रुटि भी परिणाम बदलती है | त्रुटि का प्रभाव कम |
| तुलना | सूक्ष्म तुलना संभव | मोटी तुलना |
| अनुशंसा | — | NCF 2005, CCE — ग्रेडिंग को प्रोत्साहन |
| ग्रेडिंग का प्रकार | अर्थ |
|---|---|
| प्रत्यक्ष ग्रेडिंग | उत्तर का सीधे ग्रेड में मूल्यांकन |
| अप्रत्यक्ष ग्रेडिंग | पहले अंक, फिर अंकों को ग्रेड में बदलना |
| निरपेक्ष ग्रेडिंग (Absolute) | निश्चित अंक-सीमा पर ग्रेड (91–100 = A1) |
| सापेक्ष ग्रेडिंग (Relative) | समूह के प्रदर्शन के आधार पर ग्रेड (शीर्ष 10% = A) |
◆ (ख) प्राथमिक सांख्यिकी — परीक्षा के लिए
| माप | अर्थ | उदाहरण: 4, 6, 6, 8, 11 |
|---|---|---|
| माध्य (Mean) | सभी मानों का योग ÷ संख्या — सबसे अधिक प्रयुक्त केंद्रीय प्रवृत्ति | 35 ÷ 5 = 7 |
| माध्यिका (Median) | मानों को क्रम में रखने पर बीच का मान | 6 |
| बहुलक (Mode) | सबसे अधिक बार आने वाला मान | 6 |
| प्रसार (Range) | अधिकतम − न्यूनतम | 11 − 4 = 7 |
| मानक विचलन (SD) | मानों का माध्य से औसत विचलन — विचलनशीलता का सबसे विश्वसनीय माप |
— |
| सहसंबंध (Correlation) | दो चरों का संबंध; −1 से +1 | विश्वसनीयता / वैधता गुणांक |
| प्रतिशतक (Percentile) | किसी अंक से नीचे कितने प्रतिशत छात्र | 90वाँ प्रतिशतक = 90% छात्र नीचे |
पियर्सन)।
परीक्षा उपयोगी तथ्य एवं अभ्यास प्रश्न
◆ (क) एक पंक्ति में महत्वपूर्ण तथ्य
| प्रश्न | उत्तर |
|---|---|
| शैक्षिक उद्देश्यों का वर्गीकरण | बेंजामिन ब्लूम (1956) |
| संशोधित ब्लूम वर्गीकरण | एंडरसन व क्रैथवोल (2001) |
| संशोधित वर्गीकरण का सर्वोच्च स्तर | सृजन (Creating) |
| मूल वर्गीकरण का सर्वोच्च स्तर | मूल्यांकन (Evaluation) |
| भावात्मक क्षेत्र का वर्गीकरण | क्रैथवोल (1964) |
| क्रियात्मक क्षेत्र (अनुकरण से स्वाभाविकीकरण) | आर. एच. डेव |
| अच्छे परीक्षण का सबसे महत्वपूर्ण गुण | वैधता |
| संगत परिणाम देना | विश्वसनीयता |
| परीक्षक की राय का प्रभाव न हो | वस्तुनिष्ठता |
| उपलब्धि परीक्षण के लिए सबसे महत्वपूर्ण वैधता | विषयवस्तु वैधता |
| भविष्य के प्रदर्शन की भविष्यवाणी | पूर्वकथन वैधता |
| एक ही परीक्षण दो बार | परीक्षण-पुनर्परीक्षण विधि |
| अर्ध-विच्छेदन में प्रयुक्त सूत्र | स्पीयरमैन-ब्राउन |
| परीक्षण की त्रि-आयामी योजना | ब्लूप्रिंट |
| ब्लूप्रिंट के तीन आयाम | उद्देश्य, विषयवस्तु, प्रश्नों के प्रकार |
| सर्वाधिक अनुमान वाले प्रश्न | सत्य / असत्य |
| सबसे उपयोगी वस्तुनिष्ठ प्रश्न | बहुविकल्पी (MCQ) |
| कठिनाई स्तर के उपयुक्त प्रश्न | लगभग 30–70% |
| विभेदन सूचकांक का विस्तार | −1 से +1 |
| कठिनाई का कारण जानना | निदानात्मक परीक्षण |
◆ (ख) भ्रम से बचें
-
कठिनाई सूचकांक (P) अधिक = प्रश्न आसान — नाम से उल्टा
लगता है। -
विश्वसनीय ≠ वैध — घड़ी रोज़ 10 मिनट आगे हो तो
विश्वसनीय (संगत) है, पर वैध (सही) नहीं। -
संशोधित ब्लूम में “संश्लेषण” नहीं, उसकी जगह
“सृजन” है। -
ब्लूप्रिंट विषयवस्तु वैधता बढ़ाता है, विश्वसनीयता
नहीं।
◆ (ग) अभ्यास प्रश्न (MCQ)
प्रश्न 1. संशोधित ब्लूम वर्गीकरण (2001) में सबसे उच्च स्तर है
—
(A) मूल्यांकन (B) विश्लेषण (C) सृजन (D) संश्लेषण
प्रश्न 2. “छात्र दो भिन्नों की तुलना कर सकेंगे” — यह है —
(A) सामान्य उद्देश्य (B) व्यवहारगत उद्देश्य (C) लक्ष्य (D) मूल्य
प्रश्न 3. एक परीक्षण वही मापता है जिसके लिए बनाया गया है —
यह गुण है —
(A) विश्वसनीयता (B) वस्तुनिष्ठता (C) वैधता (D) व्यावहारिकता
प्रश्न 4. कौन-सा कथन सही है?
(A) विश्वसनीय परीक्षण सदा वैध होता है (B) वैध परीक्षण सदा विश्वसनीय होता है
(C) दोनों असंबंधित हैं (D) वैध परीक्षण कभी विश्वसनीय नहीं
प्रश्न 5. अर्ध-विच्छेदन विधि का प्रयोग किसके लिए होता
है?
(A) वैधता (B) विश्वसनीयता (C) कठिनाई स्तर (D) मानक
प्रश्न 6. ब्लूप्रिंट से मुख्य रूप से कौन-सी वैधता बढ़ती है?
(A) पूर्वकथन (B) समवर्ती (C) विषयवस्तु (D) निर्मित
प्रश्न 7. किस प्रकार के प्रश्नों में अनुमान लगाने की संभावना सबसे
अधिक है?
(A) बहुविकल्पी (B) मिलान (C) सत्य/असत्य (D) निबंधात्मक
प्रश्न 8. 100 में से 80 छात्रों ने एक प्रश्न सही किया; उसका
कठिनाई सूचकांक है —
(A) 20% (B) 80% (C) 0.2 (D) 100%
प्रश्न 9. भावात्मक क्षेत्र का सर्वोच्च स्तर है —
(A) अनुमूल्यन (B) संगठन (C) चरित्रीकरण (D) ग्रहण
प्रश्न 10. कठिनाई के कारणों का पता लगाने के लिए उपयुक्त है
—
(A) उपलब्धि परीक्षण (B) निदानात्मक परीक्षण (C) बुद्धि परीक्षण (D) अभिक्षमता
परीक्षण
प्रश्न 11. निबंधात्मक प्रश्नों की प्रमुख कमी है —
(A) अभिव्यक्ति की जाँच (B) अंकन में व्यक्तिनिष्ठता (C) निर्माण में आसानी (D) संगठन
क्षमता की जाँच
प्रश्न 12. 4, 6, 6, 8, 11 का माध्य है —
(A) 6 (B) 7 (C) 8 (D) 5
9-C, 10-B, 11-B, 12-B
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