UP Super TET पियाजे, पावलव, कोहलर और थार्नडाइक नोट्स – Kredoz IAS

UP Super TET Notes: पियाजे, पावलव, कोहलर और थार्नडाइक : रचना एवं आलोचनात्मक स्वरूप अध्याय 3 – बाल मनोविज्ञान नोट्स PDF Download

UP SUPER TET 2026 • भाग 1 • अध्याय 3

पियाजे, पावलव, कोहलर और थार्नडाइक : रचना एवं आलोचनात्मक स्वरूप – चैप्टर-वार नोट्स

बाल मनोविज्ञान, शिक्षण कौशल एवं जीवन कौशल • सहायक अध्यापक (प्राथमिक स्तर, कक्षा 1–5) • उ.प्र. शिक्षा सेवा चयन आयोग

प्रयोग , चरण , शैक्षिक महत्व , आलोचना , तुलना तालिकाएँ , अभ्यास प्रश्न – सब एक जगह।

विषय-सूची

क्र. अनुभाग
1 अधिगम सिद्धांतों का परिचय एवं वर्गीकरण
2 थॉर्नडाइक — प्रयास एवं त्रुटि सिद्धांत
3 पावलॉव — शास्त्रीय अनुबंधन सिद्धांत
4 कोहलर — अंतर्दृष्टि (सूझ) सिद्धांत एवं गेस्टाल्टवाद
5 पियाजे — संज्ञानात्मक विकास सिद्धांत
6 चारों सिद्धांतों की तुलना
7 परीक्षा उपयोगी तथ्य एवं अभ्यास प्रश्न
1

अधिगम सिद्धांतों का परिचय एवं वर्गीकरण

अधिगम सिद्धांत बताते हैं कि व्यक्ति कैसे सीखता है। इन्हें मुख्यतः
दो वर्गों में बाँटा जाता है — व्यवहारवादी (S-R / साहचर्यवादी)
और संज्ञानात्मक (क्षेत्र / गेस्टाल्ट) सिद्धांत।

व्यवहारवादी — थॉर्नडाइक, पावलॉव, स्किनर ➜ संज्ञानात्मक — कोहलर, पियाजे, ब्रूनर
आधार व्यवहारवादी (S-R) सिद्धांत संज्ञानात्मक सिद्धांत
बल बाहरी, दिखाई देने वाले व्यवहार पर आंतरिक मानसिक प्रक्रियाओं (चिंतन, समझ) पर
सीखना उद्दीपक और अनुक्रिया का संबंध (बंध) संबंधों का प्रत्यक्षीकरण, सूझ, संरचना का निर्माण
सीखने वाला निष्क्रिय, वातावरण से संचालित सक्रिय, ज्ञान का निर्माता
प्रमुख विद्वान थॉर्नडाइक, पावलॉव, स्किनर, वाटसन, हल कोहलर, कोफ्का, वर्दाइमर, पियाजे, ब्रूनर, लेविन
प्रयोग मुख्यतः पशुओं पर (बिल्ली, कुत्ता, चूहा) वनमानुष, बच्चे
शिक्षण अभ्यास, पुनर्बलन, पुरस्कार समस्या समाधान, खोज, समझ

◆ चारों मनोवैज्ञानिक — एक नज़र में

मनोवैज्ञानिक देश सिद्धांत प्रयोग / आधार वर्ग
थॉर्नडाइक (1874–1949) अमेरिका प्रयास एवं त्रुटि (संबंधवाद) भूखी बिल्ली + पहेली बक्सा व्यवहारवादी
पावलॉव (1849–1936) रूस शास्त्रीय अनुबंधन कुत्ता + घंटी + भोजन व्यवहारवादी
कोहलर (1887–1967) जर्मनी अंतर्दृष्टि / सूझ (गेस्टाल्ट) चिम्पैंजी सुल्तान + केला + छड़ी संज्ञानात्मक
पियाजे (1896–1980) स्विट्ज़रलैंड संज्ञानात्मक विकास अपने बच्चों का निरीक्षण (नैदानिक विधि) संज्ञानात्मक / रचनावादी
2

थॉर्नडाइक — प्रयास एवं त्रुटि सिद्धांत

एडवर्ड ली थॉर्नडाइक (अमेरिका) के अनुसार सीखना
उद्दीपक (S) और अनुक्रिया (R) के बीच बंध (Connection) बनने की
प्रक्रिया है, जो बार-बार के प्रयास और त्रुटियों से बनता है।

◆ सिद्धांत के विभिन्न नाम

नाम अंग्रेज़ी
प्रयास एवं त्रुटि का सिद्धांत Trial and Error Theory
संबंधवाद / संयोजनवाद Connectionism
उद्दीपक-अनुक्रिया (S-R) सिद्धांत Stimulus-Response Theory
बंध सिद्धांत / आबंध सिद्धांत Bond Theory
प्रयत्न एवं भूल का सिद्धांत Theory of Trial and Error
अधिगम का संबंध सिद्धांत Connection Theory of Learning
मुख्य पुस्तकें: Animal Intelligence (1898 शोध-प्रबंध; 1911
पुस्तक) और Educational Psychology (1913)। थॉर्नडाइक को
प्रायः “शिक्षा मनोविज्ञान का जनक” कहा जाता है।

◆ थॉर्नडाइक का प्रयोग — भूखी बिल्ली और पहेली बक्सा

  1. एक भूखी बिल्ली को पहेली बक्से (Puzzle
    Box)
    में बंद किया गया, जिसका दरवाज़ा एक लीवर /
    चटखनी
    दबाने से खुलता था।

  2. बक्से के बाहर मछली (भोजन) रखी गई — यह बिल्ली के लिए
    उद्दीपक था।

  3. बिल्ली ने बाहर निकलने के लिए अनेक अनियमित प्रयास किए —
    पंजे मारना, उछलना, काटना।

  4. संयोगवश उसका पंजा लीवर पर पड़ा, दरवाज़ा खुला और उसे भोजन मिला।

  5. प्रयोग बार-बार दोहराने पर गलत प्रयास घटते गए और बाहर
    निकलने का समय कम होता गया।

  6. अंत में बिल्ली बंद होते ही तुरंत लीवर दबाकर बाहर आने लगी
    — यही अधिगम था।

चित्र : प्रयासों की संख्या बढ़ने के साथ बाहर निकलने का समय धीरे-धीरे घटता
है

◆ प्रयास एवं त्रुटि द्वारा सीखने के चरण

चालक / प्रेरणा (भूख) ➜ लक्ष्य (भोजन) ➜ बाधा (बंद बक्सा)
अनेक अनियमित प्रयास ➜ संयोगवश सफलता ➜ सही अनुक्रिया का चयन व स्थायीकरण

◆ थॉर्नडाइक के अधिगम के नियम (सारांश)

प्रकार नियम
मुख्य / प्राथमिक (3) तत्परता का नियम, अभ्यास का नियम (उपयोग व अनुपयोग), प्रभाव का नियम
गौण (5) बहु-अनुक्रिया, मानसिक स्थिति / मनोवृत्ति, आंशिक क्रिया, सादृश्य / आत्मीकरण,
साहचर्यात्मक स्थानांतरण
विस्तार: इन नियमों का विस्तृत विवरण एवं कक्षा-शिक्षण में
उपयोग अध्याय 1 में दिया गया है।

◆ शैक्षिक महत्व (रचनात्मक पक्ष)

  • छोटे बच्चों व मंदबुद्धि बालकों के लिए उपयोगी, जिनमें
    तर्क-शक्ति कम होती है।

  • कौशल अधिगम — टाइपिंग, साइकिल चलाना, तैरना, खेल,
    चित्रकला में प्रभावी।

  • धैर्य और परिश्रम का विकास — असफलता के बाद भी प्रयास
    करते रहना।

  • अभ्यास और दोहराव का महत्व — गणित, सुलेख,
    पहाड़े।

  • पुरस्कार और प्रोत्साहन (प्रभाव का नियम) से सीखना स्थायी
    होता है।

  • गलतियों से सीखना — त्रुटियों को पहचानकर सुधारने की
    आदत।

  • समस्या समाधान में आत्मनिर्भरता।

◆ आलोचनात्मक पक्ष (सीमाएँ)

  • यांत्रिक (Mechanical) सिद्धांत — सीखने को मशीन जैसी
    क्रिया मानता है।

  • बुद्धि, चिंतन और सूझ की उपेक्षा — मनुष्य सोच-समझकर भी
    सीखता है।

  • समय और ऊर्जा की बर्बादी — अनेक व्यर्थ प्रयास होते
    हैं।

  • पशुओं पर आधारित — बिल्ली के परिणाम पूरी तरह मनुष्य पर
    लागू नहीं होते।

  • रटने को बढ़ावा — समझ के बजाय दोहराव पर बल।

  • उच्च मानसिक कार्यों (तर्क, कल्पना) की व्याख्या नहीं
    करता।

  • गेस्टाल्टवादियों (कोहलर) ने कहा कि सीखना अंशों के जोड़ से नहीं, पूर्ण
    के प्रत्यक्षीकरण
    से होता है।

3

पावलॉव — शास्त्रीय अनुबंधन सिद्धांत

इवान पेट्रोविच पावलॉव (रूस) एक शरीर-क्रिया
विज्ञानी
थे, जिन्हें पाचन क्रिया पर शोध के लिए
1904 में नोबेल पुरस्कार मिला। उनके अनुसार जब एक
स्वाभाविक उद्दीपक के साथ कृत्रिम उद्दीपक
बार-बार दिया जाता है, तो कृत्रिम उद्दीपक भी वही अनुक्रिया उत्पन्न करने लगता
है।

◆ सिद्धांत के विभिन्न नाम

नाम अंग्रेज़ी
शास्त्रीय / प्राचीन / क्लासिकल अनुबंधन Classical Conditioning
संबद्ध / अनुकूलित अनुक्रिया सिद्धांत Conditioned Response Theory
प्रतिस्थापन का सिद्धांत Substitution Theory
अनुबंधित प्रतिवर्त सिद्धांत Conditioned Reflex Theory
अनैच्छिक अनुबंधन / S-प्रकार अनुबंधन Respondent / Type-S Conditioning
अनुकूलन का सिद्धांत Theory of Conditioning
मुख्य पुस्तक: Conditioned Reflexes (1927)। पावलॉव के
प्रयोग को अमेरिका में जे. बी. वाटसन ने लोकप्रिय बनाया।

◆ पावलॉव का प्रयोग — कुत्ता, घंटी और भोजन

  1. एक भूखे कुत्ते को प्रयोगशाला में बाँधा गया और उसकी
    लार नली से लार की मात्रा मापी गई।

  2. कुत्ते को भोजन दिया गया, तो उसके मुँह में
    लार आई — यह स्वाभाविक अनुक्रिया
    थी।

  3. भोजन देने से ठीक पहले घंटी बजाई गई; यह क्रम कई बार
    दोहराया गया।

  4. बाद में केवल घंटी बजाने पर भी, बिना भोजन के, कुत्ते के मुँह
    में लार आने लगी।

  5. घंटी (कृत्रिम उद्दीपक) ने भोजन (स्वाभाविक उद्दीपक) का स्थान ले
    लिया
    — इसे अनुबंधन कहते हैं।

◆ अनुबंधन की तीन अवस्थाएँ

अवस्था क्या होता है सूत्र
1. अनुबंधन से पहले भोजन से लार; घंटी से कोई लार नहीं UCS (भोजन) → UCR (लार); NS (घंटी) → कोई अनुक्रिया नहीं
2. अनुबंधन के दौरान घंटी और भोजन साथ-साथ, बार-बार CS (घंटी) + UCS (भोजन) → UCR (लार)
3. अनुबंधन के बाद केवल घंटी से लार CS (घंटी) → CR (लार)
घंटी (CS) + भोजन (UCS) ➜ लार (UCR) ➜ केवल घंटी (CS) ➜ लार (CR)
संक्षिप्त रूप पूरा नाम हिंदी प्रयोग में
UCS Unconditioned Stimulus स्वाभाविक / अनुबंधित-रहित उद्दीपक भोजन
UCR Unconditioned Response स्वाभाविक अनुक्रिया भोजन से लार
NS Neutral Stimulus तटस्थ उद्दीपक अनुबंधन से पहले की घंटी
CS Conditioned Stimulus अनुबंधित / कृत्रिम उद्दीपक घंटी
CR Conditioned Response अनुबंधित अनुक्रिया घंटी से लार

◆ शास्त्रीय अनुबंधन से जुड़े प्रमुख संप्रत्यय

संप्रत्यय अर्थ उदाहरण
विलोपन (Extinction) CS के बाद UCS बार-बार न देने पर CR धीरे-धीरे समाप्त होना घंटी के बाद भोजन न मिलने पर लार बंद
स्वतः पुनर्प्राप्ति (Spontaneous Recovery) विलोपन के कुछ समय बाद CR का अपने आप लौट आना विश्राम के बाद घंटी पर फिर लार
उद्दीपक सामान्यीकरण (Generalization) CS जैसे मिलते-जुलते उद्दीपकों पर भी CR होना मिलती-जुलती दूसरी घंटी पर भी लार
उद्दीपक विभेदीकरण (Discrimination) केवल विशिष्ट CS पर CR, बाकी पर नहीं केवल एक विशेष स्वर की घंटी पर लार
उच्च-क्रम अनुबंधन (Higher-order) एक CS के सहारे नया CS बनाना घंटी से पहले रोशनी → रोशनी पर भी लार

◆ अनुबंधन को प्रभावित करने वाले कारक

  • समय / समीपता: CS (घंटी) UCS (भोजन) से थोड़ा
    पहले
    (लगभग आधा सेकंड) दिया जाए — विलंबित अनुबंधन सबसे
    प्रभावी; पश्चगामी (भोजन पहले, घंटी बाद में) सबसे कम
    प्रभावी।

  • पुनरावृत्ति: CS और UCS का साथ बार-बार
    होना।

  • अभिप्रेरणा: कुत्ता भूखा होना चाहिए।

  • ध्यान और शांत वातावरण: बाहरी बाधा (अवरोध) अनुबंधन को
    कमज़ोर करती है।

  • उद्दीपक की शक्ति: स्पष्ट और प्रभावशाली
    उद्दीपक।

वाटसन का लिटिल अल्बर्ट प्रयोग (1920): 11 महीने के बालक
अल्बर्ट को सफ़ेद चूहे के साथ तेज़ आवाज़ सुनाकर चूहे
से भय सिखाया गया; बाद में वह हर सफ़ेद रोएँदार वस्तु से डरने लगा
(सामान्यीकरण)। इससे सिद्ध हुआ कि भय, पसंद-नापसंद जैसे
संवेग भी अनुबंधन से सीखे जाते हैं
।

◆ शैक्षिक महत्व (रचनात्मक पक्ष)

  • अच्छी आदतों का निर्माण — समय पर उठना, स्वच्छता,
    अनुशासन (घंटी पर प्रार्थना सभा)।

  • भय, घृणा और गलत आदतों का निवारण — विलोपन और
    प्रति-अनुबंधन (Counter-conditioning) द्वारा।

  • भाषा और वर्णमाला अधिगम — चित्र + शब्द (“अ” से
    अनार)।

  • अभिवृत्ति और संवेगों का विकास — विषय और शिक्षक के प्रति
    सकारात्मक भाव।

  • छोटे बच्चों के लिए अत्यंत उपयोगी — दृश्य-श्रव्य सामग्री के
    साथ शिक्षण।

  • विज्ञापन, अनुशासन और समय-पालन में व्यावहारिक
    उपयोग।

  • मानसिक उपचार — व्यवहार चिकित्सा, क्रमिक असंवेदीकरण
    (Systematic Desensitization)।

◆ आलोचनात्मक पक्ष (सीमाएँ)

  • यांत्रिक सिद्धांत — मनुष्य को मशीन के समान मानता
    है।

  • बुद्धि, चिंतन, तर्क की उपेक्षा।

  • केवल अनैच्छिक (Reflex) क्रियाओं की व्याख्या करता है;
    ऐच्छिक और जटिल अधिगम नहीं।

  • अस्थायी अधिगम — पुनर्बलन न मिलने पर विलोपन हो जाता
    है।

  • पशुओं पर आधारित प्रयोग; मनुष्य की उच्च मानसिक प्रक्रियाओं
    पर पूर्णतः लागू नहीं।

  • प्रयोगशाला की नियंत्रित स्थिति — वास्तविक कक्षा में ऐसा
    नियंत्रण कठिन।

4

कोहलर — अंतर्दृष्टि (सूझ) सिद्धांत

वुल्फगैंग कोहलर (जर्मनी) गेस्टाल्ट
मनोविज्ञान
के प्रमुख समर्थक थे। उनके अनुसार सीखना प्रयास-त्रुटि से नहीं,
बल्कि पूरी परिस्थिति के तत्वों के बीच संबंध को अचानक समझ लेने (सूझ)
से होता है।

◆ गेस्टाल्ट मनोविज्ञान — पृष्ठभूमि

  • गेस्टाल्ट (Gestalt) जर्मन शब्द है — अर्थ:
    पूर्णाकार, समग्र, आकृति, संरचना।

  • प्रवर्तक: मैक्स वर्दाइमर (1912); सहयोगी:
    कोहलर और कर्ट कोफ्का।

  • मूल वाक्य: “पूर्ण, अंशों के योग से अधिक होता है” (The
    whole is more than the sum of its parts)।

  • शिक्षण सूत्र: “पूर्ण से अंश की ओर”।

  • कर्ट लेविन का क्षेत्र सिद्धांत (Field
    Theory)
    भी इसी विचारधारा से जुड़ा है।

◆ सिद्धांत के विभिन्न नाम

नाम अंग्रेज़ी
अंतर्दृष्टि / सूझ का सिद्धांत Insight Theory
गेस्टाल्ट सिद्धांत Gestalt Theory
पूर्णाकारवाद / समग्रता का सिद्धांत Theory of Wholeness / Configuration
संज्ञानात्मक सिद्धांत Cognitive Theory
अंतर्दृष्टि द्वारा सीखना Learning by Insight
प्रयोग का स्थान व पुस्तक: कोहलर ने
1913–1917 के बीच टेनेरिफ़ द्वीप (कैनरी द्वीप
समूह)
पर चिम्पैंजियों पर प्रयोग किए। सबसे बुद्धिमान
चिम्पैंजी का नाम “सुल्तान” था। पुस्तक: The Mentality
of Apes
(अंग्रेज़ी 1925)।

◆ कोहलर के प्रमुख प्रयोग

प्रयोग परिस्थिति सुल्तान ने क्या किया
1. एक छड़ी का प्रयोग पिंजरे के बाहर पहुँच से दूर केला; अंदर एक छड़ी कुछ देर परिस्थिति देखी, फिर अचानक छड़ी से केला खींच लिया
2. दो छड़ियों का प्रयोग दोनों छड़ियाँ अलग-अलग छोटी; केला और दूर खेलते-खेलते अचानक दोनों छड़ियाँ जोड़ीं और केला खींच लिया
3. बक्सों का प्रयोग केला छत से ऊँचाई पर लटका; कमरे में बक्से बक्सों को एक के ऊपर एक रखकर चढ़ा और केला पा लिया

चित्र : सूझ में समय अचानक घटता है, जबकि प्रयास-त्रुटि में धीरे-धीरे

◆ सूझ द्वारा सीखने के चरण

परिस्थिति का निरीक्षण ➜ तत्वों में संबंध देखना ➜ अचानक सूझ (“आहा!”)
समाधान ➜ दूसरी परिस्थिति में स्थानांतरण

◆ सूझ की विशेषताएँ

विशेषता व्याख्या
अचानक (Sudden) समाधान एकाएक सूझता है — “आहा अनुभव”।
स्थायी एक बार सूझ आने पर समाधान लंबे समय तक याद रहता है।
स्थानांतरणीय समान परिस्थितियों में आसानी से लागू होती है।
संपूर्ण परिस्थिति का प्रत्यक्षीकरण अंशों को नहीं, पूरे क्षेत्र को देखा जाता है।
बुद्धि पर निर्भर अधिक बुद्धिमान प्राणी में सूझ जल्दी आती है।
उद्देश्यपूर्ण लक्ष्य की ओर निर्देशित समझदारी भरी क्रिया।

◆ सूझ को प्रभावित करने वाले कारक

  • बुद्धि — जितनी अधिक बुद्धि, उतनी शीघ्र सूझ।

  • पूर्व अनुभव — पहले का ज्ञान संबंध समझने में
    सहायक।

  • परिस्थिति की संरचना — सभी तत्व एक साथ दिखाई दें (छड़ी
    और केला एक ही दृष्टि-क्षेत्र में)।

  • परिपक्वता / आयु — छोटे बच्चों में सूझ कम।

  • प्रयत्न और ध्यान — परिस्थिति पर ध्यान केंद्रित
    करना।

  • समस्या की जटिलता — सरल समस्या में सूझ जल्दी।

◆ गेस्टाल्ट के प्रत्यक्षीकरण के नियम (अतिरिक्त)

चित्र : निकटता, समानता, पूर्ति, निरंतरता, आकृति-पृष्ठभूमि

नियम अर्थ
निकटता (Proximity) पास-पास की वस्तुएँ एक समूह के रूप में दिखती हैं।
समानता (Similarity) समान आकार / रंग की वस्तुएँ एक समूह लगती हैं।
पूर्ति / समापन (Closure) अधूरी आकृति को मन पूरा कर लेता है।
निरंतरता (Continuity) रेखाएँ सहज दिशा में चलती हुई दिखती हैं।
आकृति-पृष्ठभूमि (Figure-Ground) वस्तु (आकृति) पृष्ठभूमि से अलग दिखती है।
प्रैग्नान्ज़ / सरलता (Prägnanz) मन हर आकृति को सबसे सरल और व्यवस्थित रूप में देखता है।

◆ शैक्षिक महत्व (रचनात्मक पक्ष)

  • समस्या समाधान और रचनात्मक चिंतन का
    विकास।

  • गणित, विज्ञान, ज्यामिति जैसे तर्कप्रधान विषयों के लिए
    उपयुक्त।

  • शिक्षण “पूर्ण से अंश की ओर” — पहले पूरी कविता / पाठ,
    फिर उसके भाग।

  • रटने के बजाय समझ पर बल; ज्ञान अधिक स्थायी।

  • उद्देश्य और लक्ष्य स्पष्ट करके पढ़ाना।

  • बुद्धिमान व प्रतिभाशाली बालकों के लिए विशेष
    उपयोगी।

  • अधिगम स्थानांतरण को बढ़ावा।

  • खोज विधि, प्रोजेक्ट विधि, अन्वेषण जैसी विधियों को
    आधार।

◆ आलोचनात्मक पक्ष (सीमाएँ)

  • हर व्यक्ति में सूझ नहीं आती — मंदबुद्धि व छोटे बच्चों के लिए
    कम उपयोगी।

  • सूझ हमेशा अचानक नहीं आती; अनेक बार उसके पहले
    प्रयास-त्रुटि होती है।

  • सूझ का वस्तुनिष्ठ मापन कठिन — यह आंतरिक मानसिक
    प्रक्रिया है।

  • कौशल अधिगम (तैरना, टाइपिंग) में यह सिद्धांत कम लागू
    होता है।

  • थॉर्नडाइक के समर्थकों के अनुसार सुल्तान ने भी पहले अनेक
    प्रयास
    किए थे।

  • पूर्व अनुभव का महत्व — सूझ शून्य से नहीं आती, पुराने अनुभवों
    पर निर्भर है।

5

पियाजे — संज्ञानात्मक विकास सिद्धांत

जीन पियाजे (स्विट्ज़रलैंड) मूलतः जीव
विज्ञानी
थे। उनके अनुसार बच्चा ज्ञान का सक्रिय
निर्माता
है और उसका चिंतन चार निश्चित अवस्थाओं से
होकर विकसित होता है। यह संज्ञानात्मक रचनावाद का आधार है।

◆ पियाजे — महत्वपूर्ण तथ्य

  • पियाजे ने अपने अध्ययन को आनुवंशिक ज्ञानमीमांसा (Genetic
    Epistemology)
    कहा।

  • उन्होंने अपने तीन बच्चों के निरीक्षण और नैदानिक /
    साक्षात्कार विधि (Clinical Method)
    से निष्कर्ष निकाले।

  • पेरिस में बिने की प्रयोगशाला में बुद्धि-परीक्षणों पर काम
    करते हुए उन्होंने देखा कि बच्चे एक जैसी गलतियाँ करते हैं — यहीं से
    सिद्धांत का विचार आया।

  • प्रमुख पुस्तकें: The Language and Thought of the Child
    (1923)
    , The Origins of Intelligence in
    Children
    ।

  • पियाजे के अनुसार बुद्धि अनुकूलन (Adaptation) की प्रक्रिया
    है।

◆ पियाजे के प्रमुख संप्रत्यय

संप्रत्यय अर्थ उदाहरण
स्कीमा (Schema) ज्ञान की मूल इकाई; वस्तु या क्रिया की मानसिक संरचना “चार पैर वाला जानवर = कुत्ता”
आत्मसात्करण (Assimilation) नई जानकारी को पुराने स्कीमा में फिट करना बिल्ली को भी “कुत्ता” कहना
समायोजन (Accommodation) नई जानकारी के अनुसार स्कीमा बदलना या नया बनाना “बिल्ली अलग जानवर है” — नया स्कीमा
साम्यधारण / संतुलन (Equilibration) आत्मसात्करण और समायोजन में संतुलन बनाना भ्रम दूर होकर समझ स्थिर होना
अनुकूलन (Adaptation) आत्मसात्करण + समायोजन; वातावरण से तालमेल —
संगठन (Organization) स्कीमाओं को जोड़कर व्यवस्थित संरचना बनाना पशु → पालतू / जंगली
विकेंद्रण (Decentration) एक से अधिक पक्षों पर एक साथ ध्यान देना लम्बाई और चौड़ाई दोनों देखना
ट्रिक: आत्मसात्करण = “पुराने डिब्बे में डालना”;
समायोजन = “नया डिब्बा बनाना”; साम्यधारण
= “दोनों का संतुलन”।

◆ संज्ञानात्मक विकास की चार अवस्थाएँ

संवेदी-गामक (0–2 वर्ष) ➜ पूर्व-संक्रियात्मक (2–7 वर्ष)
मूर्त-संक्रियात्मक (7–11 वर्ष) ➜ औपचारिक-संक्रियात्मक (11 वर्ष +)
अवस्था आयु प्रमुख विशेषताएँ मुख्य शब्द
1. संवेदी-गामक (Sensory-Motor) जन्म – 2 वर्ष इन्द्रियों और शारीरिक क्रियाओं से सीखना; अनुकरण; लक्ष्य-निर्देशित व्यवहार; लगभग
8 माह से वस्तु स्थायित्व
वस्तु स्थायित्व (Object Permanence)
2. पूर्व-संक्रियात्मक (Pre-operational) 2 – 7 वर्ष भाषा व प्रतीकात्मक चिंतन; खेल में कल्पना; आत्मकेंद्रितता,
जीववाद, केंद्रीकरण,
अपरिवर्तनीयता; संरक्षण का अभाव
आत्मकेंद्रितता, जीववाद
3. मूर्त-संक्रियात्मक (Concrete Operational) 7 – 11 वर्ष मूर्त वस्तुओं पर तार्किक चिंतन; संरक्षण,
प्रतिवर्तनीयता, वर्गीकरण,
क्रमबद्धता; विकेंद्रण
संरक्षण (Conservation)
4. औपचारिक-संक्रियात्मक (Formal Operational) 11 वर्ष से आगे अमूर्त चिंतन; परिकल्पना बनाना;
परिकल्पनात्मक-निगमनात्मक तर्क; वैज्ञानिक चिंतन; भविष्य की
योजना
अमूर्त चिंतन

◆ पूर्व-संक्रियात्मक अवस्था की विशेषताएँ (परीक्षा में सर्वाधिक पूछी जाती
हैं)

विशेषता अर्थ उदाहरण
आत्मकेंद्रितता (Egocentrism) दूसरे के दृष्टिकोण को न समझ पाना तीन पर्वत प्रयोग (Three Mountain Task)
जीववाद (Animism) निर्जीव वस्तुओं को सजीव मानना “चाँद मेरे साथ चल रहा है”; “कुर्सी को चोट लगी”
केंद्रीकरण (Centration) वस्तु के केवल एक पक्ष पर ध्यान लम्बे गिलास में पानी “ज़्यादा”
अपरिवर्तनीयता (Irreversibility) क्रिया को उल्टा सोच न पाना 3+2=5 तो 5−2=3 न समझना
कृत्रिमवाद (Artificialism) प्राकृतिक वस्तुओं को मनुष्य द्वारा बनाया मानना “आसमान किसी ने रंगा है”
प्रतीकात्मक खेल (Symbolic Play) एक वस्तु को दूसरी मानकर खेलना डंडे को घोड़ा बनाना
संरक्षण का अभाव रूप बदलने पर मात्रा बदली मानना मिट्टी के गोले को चपटा करने पर “कम”
उप-अवस्थाएँ: पूर्व-संक्रियात्मक अवस्था को दो भागों में बाँटा
जाता है — पूर्व-प्रत्ययात्मक (2–4 वर्ष) और अंतःप्रज्ञ /
अंतर्दर्शी (4–7 वर्ष)
।

◆ संरक्षण (Conservation) का विकास क्रम

संरक्षण सामान्य आयु उदाहरण
संख्या 6–7 वर्ष सिक्कों को फैलाने पर भी संख्या वही
द्रव्यमान / पदार्थ 7–8 वर्ष मिट्टी का गोला चपटा करने पर भी उतनी ही मिट्टी
भार 9–10 वर्ष आकार बदलने पर भार वही
आयतन 11–12 वर्ष बर्तन बदलने पर भी पानी का आयतन वही
ट्रिक (क्रम): “संजू
द्रव्य भारी आया” = संख्या
→ द्रव्यमान → भार → आयतन

◆ संज्ञानात्मक विकास को प्रभावित करने वाले कारक

  • परिपक्वता (Maturation) — तंत्रिका तंत्र का
    विकास।

  • अनुभव — भौतिक अनुभव और तार्किक-गणितीय
    अनुभव
    ।

  • सामाजिक अंतःक्रिया / सामाजिक संचरण — माता-पिता,
    शिक्षक, साथियों से।

  • साम्यधारण (Equilibration) — असंतुलन से संतुलन की ओर
    स्व-नियमन।

◆ पियाजे का नैतिक विकास (अतिरिक्त)

अवस्था आयु (लगभग) विशेषता
पराधीन नैतिकता / नैतिक यथार्थवाद (Heteronomous) 4–10 वर्ष नियम अटल, बड़ों द्वारा बनाए; परिणाम के आधार पर गलती का निर्णय
स्वायत्त नैतिकता (Autonomous) 10 वर्ष से आगे नियम आपसी सहमति से बदले जा सकते हैं; इरादे के आधार पर निर्णय

◆ शैक्षिक महत्व (रचनात्मक पक्ष)

  • बाल-केंद्रित शिक्षा — बच्चे की अवस्था के अनुसार पाठ्यक्रम
    और विधि।

  • खोज एवं क्रिया द्वारा सीखना — बच्चा स्वयं अनुभव करके
    ज्ञान बनाए।

  • मूर्त से अमूर्त — प्राथमिक कक्षाओं में मूर्त सामग्री, मॉडल,
    खेल।

  • शिक्षक सुविधादाता — प्रश्न पूछकर संज्ञानात्मक असंतुलन पैदा
    करे, बच्चा स्वयं संतुलन खोजे।

  • बच्चों की गलतियाँ उनकी सोच की खिड़की हैं — उन्हें दंड न दें,
    समझें।

  • व्यक्तिगत भिन्नता का सम्मान; सहपाठी अंतःक्रिया और समूह
    कार्य।

  • NCF 2005 के रचनावादी दृष्टिकोण का प्रमुख
    आधार।

◆ आलोचनात्मक पक्ष (सीमाएँ)

  • आयु सीमाएँ कठोर — अनेक बच्चे बताई गई आयु से पहले ही
    क्षमताएँ दिखाते हैं।

  • बच्चों की क्षमताओं को कम आँका — सरल भाषा में प्रश्न पूछने
    पर छोटे बच्चे भी संरक्षण समझते हैं।

  • सामाजिक-सांस्कृतिक कारकों की उपेक्षा — वाइगोत्स्की ने
    भाषा और समाज की भूमिका पर बल दिया।

  • सीमित नमूना — मुख्यतः अपने बच्चों और स्विस बच्चों पर
    आधारित।

  • सभी व्यक्ति औपचारिक-संक्रियात्मक अवस्था तक नहीं
    पहुँचते।

  • भाषा की भूमिका को कम महत्व — पियाजे के अनुसार विचार
    पहले, भाषा बाद में।

  • विकास निरंतर भी होता है; केवल अवस्थाओं में बँटा हुआ
    नहीं।

◆ पियाजे बनाम वाइगोत्स्की

आधार पियाजे वाइगोत्स्की
रचनावाद संज्ञानात्मक / व्यक्तिगत रचनावाद सामाजिक रचनावाद
विकास का आधार व्यक्ति की अपनी खोज सामाजिक अंतःक्रिया व संस्कृति
भाषा विचार से भाषा भाषा से विचार
आत्मकेंद्रित भाषण अपरिपक्वता का लक्षण आंतरिक भाषण / स्व-निर्देशन का साधन
अवस्थाएँ चार निश्चित अवस्थाएँ कोई निश्चित अवस्था नहीं
विकास और अधिगम विकास पहले, अधिगम बाद में अधिगम विकास को आगे बढ़ाता है (ZPD)
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चारों सिद्धांतों की तुलना

आधार थॉर्नडाइक पावलॉव कोहलर पियाजे
सिद्धांत प्रयास एवं त्रुटि शास्त्रीय अनुबंधन सूझ / अंतर्दृष्टि संज्ञानात्मक विकास
देश अमेरिका रूस जर्मनी स्विट्ज़रलैंड
प्रयोग बिल्ली, पहेली बक्सा कुत्ता, घंटी, भोजन चिम्पैंजी सुल्तान, केला अपने बच्चे, नैदानिक विधि
वर्ग व्यवहारवादी (S-R) व्यवहारवादी (S-R) गेस्टाल्ट / संज्ञानात्मक संज्ञानात्मक / रचनावादी
सीखने का आधार अभ्यास व परिणाम उद्दीपकों का साहचर्य संबंधों की अचानक समझ स्कीमा का निर्माण व परिवर्तन
सीखने की गति धीरे-धीरे बार-बार साहचर्य से अचानक अवस्था-क्रम में
सीखने वाला सक्रिय प्रयासकर्ता निष्क्रिय सक्रिय चिंतक सक्रिय ज्ञान-निर्माता
उपयोगी कौशल, छोटे बच्चे आदत, भय निवारण समस्या समाधान बाल-केंद्रित शिक्षा
मुख्य आलोचना यांत्रिक, समय की बर्बादी केवल अनैच्छिक क्रियाएँ सूझ का मापन कठिन आयु-सीमा कठोर
ट्रिक — प्रयोग याद रखें: थॉर्नडाइक →
बिल्ली; पावलॉव → कुत्ता;
कोहलर → चिम्पैंजी (सुल्तान);
स्किनर → चूहा / कबूतर;
पियाजे → अपने बच्चे।
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परीक्षा उपयोगी तथ्य एवं अभ्यास प्रश्न

◆ (क) एक पंक्ति में महत्वपूर्ण तथ्य

प्रश्न उत्तर
प्रयास एवं त्रुटि सिद्धांत थॉर्नडाइक
थॉर्नडाइक ने प्रयोग किया भूखी बिल्ली (पहेली बक्सा)
शिक्षा मनोविज्ञान के जनक थॉर्नडाइक
शास्त्रीय अनुबंधन पावलॉव
पावलॉव को नोबेल पुरस्कार 1904, पाचन क्रिया पर
प्रतिस्थापन का सिद्धांत पावलॉव
CR का धीरे-धीरे समाप्त होना विलोपन
लिटिल अल्बर्ट प्रयोग जे. बी. वाटसन (1920)
सूझ / अंतर्दृष्टि सिद्धांत कोहलर
कोहलर के चिम्पैंजी का नाम सुल्तान
गेस्टाल्ट का अर्थ पूर्णाकार / समग्र
गेस्टाल्ट मनोविज्ञान के प्रवर्तक मैक्स वर्दाइमर (1912)
संज्ञानात्मक विकास सिद्धांत जीन पियाजे
पियाजे की अवस्थाओं की संख्या चार
वस्तु स्थायित्व संवेदी-गामक अवस्था
आत्मकेंद्रितता, जीववाद पूर्व-संक्रियात्मक अवस्था
संरक्षण, प्रतिवर्तनीयता मूर्त-संक्रियात्मक अवस्था
अमूर्त व परिकल्पनात्मक चिंतन औपचारिक-संक्रियात्मक अवस्था
तीन पर्वत प्रयोग पियाजे — आत्मकेंद्रितता
नई जानकारी को पुराने स्कीमा में फिट करना आत्मसात्करण

◆ (ख) भ्रम से बचें

  • थॉर्नडाइक का प्रयोग बिल्ली पर था, कुत्ते पर नहीं; कुत्ता
    = पावलॉव।

  • स्किनर (क्रिया-प्रसूत अनुबंधन) का प्रयोग चूहे व
    कबूतर
    पर था — पावलॉव से अलग।

  • आत्मसात्करण ≠ समायोजन — आत्मसात्करण में स्कीमा नहीं
    बदलता, समायोजन में बदलता है।

  • कोहलर ने सूझ को अचानक बताया, जबकि थॉर्नडाइक ने सीखने
    को क्रमिक (धीरे-धीरे) बताया।

  • पावलॉव मनोवैज्ञानिक नहीं, शरीर-क्रिया विज्ञानी
    (Physiologist)
    थे।

◆ (ग) अभ्यास प्रश्न (MCQ)

प्रश्न 1. थॉर्नडाइक ने अपना प्रयोग किस पर किया?

(A) कुत्ता (B) बिल्ली (C) चिम्पैंजी (D) चूहा

प्रश्न 2. शास्त्रीय अनुबंधन सिद्धांत में “घंटी” है —

(A) UCS (B) UCR (C) CS (D) CR

प्रश्न 3. पावलॉव के सिद्धांत को यह भी कहते हैं —

(A) सूझ सिद्धांत (B) प्रतिस्थापन सिद्धांत (C) प्रयास-त्रुटि सिद्धांत (D) क्षेत्र
सिद्धांत

प्रश्न 4. अनुबंधित अनुक्रिया का पुनर्बलन न मिलने से समाप्त होना
कहलाता है —

(A) सामान्यीकरण (B) विभेदीकरण (C) विलोपन (D) स्वतः पुनर्प्राप्ति

प्रश्न 5. कोहलर ने अपने प्रयोग किस द्वीप पर किए?

(A) अंडमान (B) टेनेरिफ़ (C) मॉरीशस (D) जावा

प्रश्न 6. “पूर्ण, अंशों के योग से अधिक है” — यह किस विचारधारा
का मत है?

(A) व्यवहारवाद (B) मनोविश्लेषण (C) गेस्टाल्टवाद (D) प्रकार्यवाद

प्रश्न 7. “चाँद मेरे साथ चल रहा है” — बच्चे का यह विचार
दर्शाता है —

(A) संरक्षण (B) जीववाद (C) प्रतिवर्तनीयता (D) वर्गीकरण

प्रश्न 8. पियाजे के अनुसार संरक्षण की समझ किस अवस्था में
विकसित होती है?

(A) संवेदी-गामक (B) पूर्व-संक्रियात्मक (C) मूर्त-संक्रियात्मक (D)
औपचारिक-संक्रियात्मक

प्रश्न 9. नई जानकारी के अनुसार पुराने स्कीमा में परिवर्तन करना
कहलाता है —

(A) आत्मसात्करण (B) समायोजन (C) साम्यधारण (D) संगठन

प्रश्न 10. कौशल अधिगम (जैसे टाइपिंग) के लिए सबसे उपयुक्त
सिद्धांत है —

(A) सूझ सिद्धांत (B) प्रयास एवं त्रुटि (C) गेस्टाल्ट (D) संज्ञानात्मक विकास

प्रश्न 11. पियाजे ने अपने अध्ययन को क्या नाम दिया?

(A) सामाजिक रचनावाद (B) आनुवंशिक ज्ञानमीमांसा (C) क्षेत्र सिद्धांत (D)
व्यवहारवाद

प्रश्न 12. “सूझ” द्वारा सीखने की प्रमुख विशेषता है —

(A) क्रमिक प्रगति (B) अचानक समाधान (C) अनैच्छिक अनुक्रिया (D) यांत्रिकता

उत्तर कुंजी: 1-B, 2-C, 3-B, 4-C, 5-B, 6-C, 7-B, 8-C,
9-B, 10-B, 11-B, 12-B

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